विश्व जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने में युवाओं की आवाज बन चुकी स्वीडिश किशोरी ग्रेटा थनबर्ग को 25 सितंबर को ‘राइट लाइवलीहुड अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार को ‘वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार’’ भी कहा जाता है। ‘राइट लाइवलीहुड फाउंडेशन’ द्वारा एक बयान में बताया गया कि थनबर्ग को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई की राजनीतिक मांग को तेज करने और पूरे विश्व के लोगों को प्रेरित करने के लिए सम्मानित किया गया।
जलवायु परिवर्तन से निपटने को लेकर थनबर्ग की मुहिम ‘‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर’’ अगस्त 2018 में उस समय आरंभ हुई थी, जब उन्होंने स्वीडन की संसद के सामने ‘‘जलवायु के लिए स्कूल हड़ताल’’ के बोर्ड के साथ अकेले बैठकर प्रदर्शन करना शुरू किया था। इसके लिए उन्होंने स्कूल जाना बंद कर दिया था। शुरू में वह अकेले ही प्रदर्शन करती थी इसके बाद धीरे-धीरे स्कूल के कई बच्चों ने उसका साथ देना शुरू कर दिया। उनके इस संदेश ने दुनियाभर के युवाओं को प्रेरित किया। उनसे प्रेरित होकर 150 से अधिक देशों के करीब 40 लाख से अधिक लोगों ने पिछले शुक्रवार ‘‘वैश्विक जलवायु हड़ताल’’ में भाग लिया और नेताओं से जलवायु आपदा से निपटने के लिए कार्रवाई की मांग की।
इस वर्ष यह अवॉर्ड तीन अन्य लोगों को भी दिया गया। इनमें पश्चिमी सहारा क्षेत्र में लोगों के अधिकार के लिए काम करने वाली मोरक्को की अमिनतोउ हैदर, चीन में महिलाओं के अधिकार के लिए काम करने वाली वकील गुओ जियानमेई और ब्राजील में अमेजन के जंगलों को बचाने के लिए उत्कृष्ट भूमिका निभाने वाली डवी कोपेनवारा को दिया गया। इस पुरस्कार की शुरुआत स्वीडिश जर्मन दार्शनिक जकोब वॉन उसेक्सुल ने 1980 में की थी। इसी साल मार्च में ग्रेटा को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामित किया जा चुका है। अगर दिसंबर में उन्हें यह अवॉर्ड मिलता है तो वे इसे पाने वाली सबसे युवा शख्सियत होंगी।

