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बेचा जा चुका है ताज

ताजमहल समय की गाल पर ठहरा हुआ आंसू की एक बूंद है।
-रवीन्द्रनाथ टैगोर
आगरे का ताजमहल सुंदरता का प्रतीक है। संुदरता हमारे परंपरा में चेतना से भी जुड़ी रही है। सुंदरता के प्रतीक का पतन के कगार की ओर रूख करना इस बात का सबूत है कि सुंदरता की सुरक्षा में सेंधमारी से पहले हमारी चेतना का लोप हो रहा है। दोस्तोवस्की ने कहा था-‘सुंदरता ही अंततः इस दुनिया को बचाएगी।’ देश में सुंदरता के प्रतीक पर बढ़ रहा खतरा इस ओर भी संकेत करता है कि खतरा हमारी उस दुनिया को है जिसमें हम जीते हंै।
सुप्रीम कोर्ट ने ताजमल के मुताल्लिक जो टिप्पणी की है वह इस देश के आम नागरिक के भीतर बैठे दुःख और क्रोध की अभिव्यक्ति है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि अगर वह ताजमहल का संरक्षण नहीं कर सकती तो वह इसे ध्वस्त कर दे। मुगलकाल की इस ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण को लेकर अब कोई उम्मीद नजर नहीं आती। अदालत ने इस बात को भी रेखांकित किया कि पेरिस के एफिल टाॅवर को देखने सलाना आठ करोड़ पर्यटक आता है, लेकिन ताजमहल को देखने के वास्ते महज 10 लाख लोग ही आते हंै जबकि यह उससे कहीं अधिक संुंदर है। इससे देश की विदेशी मुद्रा की भी क्षति हो रही है। बावजूद इसके केंद्र सरकार की बेपरवाही हैरतनाक है।
ताजमहल को लेकर कुछ दिलचस्प बातें भी हंै। मसलन ताजमहल के मकबरे में छत पर एक छेद है। ताजमहल के बनने के बाद शाहजहां ने जब सभी मजदूरों के हाथ काटने की घोषणा की तो, मजदूरों ने ताजमहल को पूरा करने के बावजूद इसमें एक ऐसी कमी छोड़ दी। जिससे शाहजहां का एक मुक्कमल इमारत बनाने का ख्वाब पूरा नहीं हो सके। शाहजहां ने जब पहली बार ताजमल को देखा तो कहा- ‘यह इमारत सिर्फ प्यार की कहानी बयां नहीं करेगी, बलिक उन सभी लोगों को दोषमुक्त करेगी जो मनुष्य का जन्म लेकर हिन्दुस्तान की पाक जमीन पर अपने कदम रखेंगे और इसकी गवाही चांद-सितारे देंगे।’ ताजमहल के बाद भी कई इमारतों को बनवाने में उन लोगों ने अपना योगदान दिया। जिन्होंने ताजमहल बनाया था। उस्ताद अहमद लाहौरी इस दल का हिस्सा थे, जिन्होंने ताजमहल बनाया और उन्हीें की देख-रेख में लाल किले का निर्माण भी हुआ। एक बार ताजमहल को बेचा भी जा चुका है। बिहार के चर्चित ठग नटवरलाल के बारे में यह कहानी प्रचलित है कि एक बार उन्होंने ताजमहल को बेच दिया था।
वही ताजमहल की सुंदरता खतरे में है। बढ़ता प्रदूषण उसके लिए खतरा बनता जा रहा है। अदालती आदेशों की उपेक्षा उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार भी कर रही है। कई आतंकवादी संगठनों ने इसे उड़ाने की धमकी भी दी है। 1983 में यूनेस्को के विश्व धरोहरों स्मारकों की सूची में शामिल ताज की हिफाजत इस देश और सरकार की सबसे अहम जिम्मेदारी है। इसमें बरती जाने वाली कोताही कहीं न कहीं हमारे संवेदनहीनता का सबूत हैे।

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