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Uttarakhand

बागेश्वर में मजदूर भूखमरी की कगार पर

कोरोना संक्रमण से जहाँ लोग मर रहे हैं। वही पहाड़ के जिला बागेश्वर में मजदूर दो वक़्त की रोटी के लिए तरस  रहे हैं लॉकडाउन के कारण प्रतिदिन काम करने वाले मजदूरों की हालत खराब है बागेश्वर जिले के रीमा गावँ में माइंस का हब है। यहां पर पूरा कारोबार बिहारी और नेपाली मजदूरों के बल पर चलता है लेकिन करोडो रूपए इन मजदूरों के बल पर कमाने वाली कंपनियां आज उन मजदूरों को दो वक्त की रोटी नहीं दे पा रही हैं। कोरोना संक्रमण की चलते इन मजदूरों की दैनिक मजदूरी नहीं मिलने के कारण स्थानीय छोटे कारोबारी आर्थिक कमी के कारण उधार भी नही दे पा रहे हैं।

ये मजदुर अब सरकार से आस लगाए बैठे हैं। लेकिन अभी तक कोई भी ठोस कार्यवाही सरकार और कंपनी द्धारा नही की गई है।समय रहते इन मजदूरों के राशन की व्यवस्था नही की गई तो ये मजदूर कोरोना संक्रमण से नहीं बल्कि भुखमरी से जरूर बीमार पड़ सकते हैं। NS कारपोरेशन बहुत बड़ी माइंस कंपनी है लेकिन इस समय मजदूरों के साथ ऐसा व्यहार उनकी बीमार मानसिकता को दर्शाता है।साथ ही सरकार को जल्दी से जल्दी इन मजदूरों मदद करनी चाहिये जिससे रीमा के जनता को भी आने वाले दिनों में कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े।स्थानीय आँगन बॉडी कार्यकर्ता कुंती राठौर ने बाल विकास कपकोट को 131 महिला पुरुष मजदूरों की लिस्ट भेजी है।कोई भी मदद अभी तक नही मिली है।3 दिन पूर्व कुछ मजदूर तहसील पहुँच गए थे।।पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जवाहर सिंह परिहार ने 2 लाख का राशन कपकोट के ढियाडी मजदूरों के लिये भेजी है।

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