Uttarakhand

शिक्षा की दुकानों का फर्जीवाड़ा

उत्तराखण्ड में उच्च शिक्षा के नाम पर जमकर खेल हो रहा है। कुछ निजी संस्थान छात्र-छात्राओं को बेहतर सपने दिखा जमकर लूट रहे हैं। शिक्षा की दुकानों की तर्ज पर संचालित किए जा रहे इनके महाविद्यालयों और व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में सुविधाओं का भारी अभाव है। हॉस्टलों में न पर्याप्त सुविधाएं हैं और न सुरक्षा के इंतजाम। अवैध निर्माण में भी शिक्षा की दुकानें चलाने वाले माहिर हैं। आश्चर्यजनक है कि तमाम खामियों के बावजूद राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख विश्वविद्यालयों और शिक्षा परिषदों को भी इन्हें मान्यता देने या फिर अपने साथ संबद्ध करने में जरा भी परहेज नहीं रहा। आरटीआई में जब उनसे इस बारे में सूचनाएं मांगी जाती हैं तो रवैया टालने वाला रहता है
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उत्तराखण्ड को शिक्षा का हब बनाने को लेकर राज्य में राजनेताओं और नौकरशाहों द्वारा समय-समय पर बड़ी-बड़ी बातें की जाती रही हैं। शिक्षा की आड़ में निजी शिक्षण संस्थाओं को कौड़ियों के भाव जमीनें और सुविधाएं भी मिल जाती हैं। खासकर ट्रस्ट या एनजीओ द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों को अपने कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों के लिए मान्यता और उच्च सुविधाएं हासिल करने में कोई दिक्कत नहीं होती। देहरादून से लेकर दिल्ली तक उनके काम कितनी आसानी से हो जाते हैं उसका कोई भी सहज अंदाजा लगा सकता है। कोई भी सोच सकता है कि जो निजी शिक्षण संस्थान मानकों के अनुरूप छात्र-छात्राओं के लिए न तो प्रवक्ताओं की व्यवस्था कर सकते हैं और न ही अन्य सुविधाएं दे सकते हैं, आखिर उन्हें मान्यता देने एवं खुद से संबद्ध करने में राज्य और राष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालयों या फिर उच्च शिक्षा संस्थानों को कोई परहेज क्यों नहीं रहा?
छात्र-छात्राएं अच्छी शिक्षा का सपना लिए निजी शिक्षा संस्थानों के मोहजाल में तो फंस जाते हैं, लेकिन जब वे यहां पहुंचते हैं तो असलियत जानकर ठगे रह जाते हैं। ‘दि संडे पोस्ट’ ने अपनी तहकीकात के तहत छात्र-छात्राओं के हित में कुछ ऐसे शिक्षण संस्थानों की हकीकत उजागर करने की कोशिश की है, जो उच्च शिक्षा के मानकों को पूरा नहीं करते हैं, जहां छात्र- छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है या फिर जो भ्रष्टाचार एवं जमीनों के अतिक्रमण के दोषी हैं।
अपनी तहकीकात के दौरान ‘दि संडे पोस्ट’ को ‘सूरजमल लक्ष्मी देवी सावर्थिया एजुकेशनल ट्रस्ट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन’ के तहत संचालित उच्च महाविद्यालय और तकनीकी संस्थानों के बारे में कुछ ऐसी अहम जानकारियां मिली जिन्हें जानकर कोई भी हैरान रह सकता है कि आखिर धार्मिक य आध्यात्मिक शख्सियतों द्वारा स्थापित ट्रस्ट भी किस तरह छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। ‘सूरजमल लक्ष्मी देवी सावर्थिया एजुकेशनल ट्रस्ट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन’ की वेबसाइट पर उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार इस ट्रस्ट के प्रवर्तक/संस्थापक ‘स्वामी सत्य प्रकाशानंद’ हैं। इनके द्वारा वर्ष 2008 में इस ट्रस्ट की शुरुआत की गई। स्व. सूरजमल बड़ी पचेरी, जिला-झुनझुनू, राजस्थान के निवासी थे। इनकी पत्नी का नाम लक्ष्मीदेवी था। इनकी आठ संतानों में से एक नवीन कुमार सावर्थिया इस ट्रस्ट के प्रमुख ट्रस्टी हैं। ट्रस्ट के अंतर्गत महाविद्यालयों के निर्माण में सावर्थिया परिवार का महत्वपूर्ण योगदान है।
वेबसाइट पर ही संस्थान के शिक्षकों/फैकल्टीज का विवरण भी प्राप्त हुआ जिसमें बीटेक विभाग की विभिन्न ब्रांच-कम्प्यूटर साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रिॉनिक, इलेक्ट्रिॉनिक एवं कम्युनिकेशन, मैकेनिकल, अप्लाइड साइंसेज आदि और प्रबंधन विभाग की ब्रांच-मानव संसाधन, मार्केटिंग एवं फाइनेंस के शिक्षकों का विवरण था। सच्चाई जानने के लिए पड़ताल की गई तो पता चला कि बीटेक एवं पॉलिटेक्निक के शिक्षण स्टॉफ का जो विवरण वेबसाइट में दिया गया है, स्थिति उससे एकदम उलट है। शिक्षक-शिक्षिकाओं का जो विवरण वेबसाइट में है उनमें से बहुत कम ही ट्रस्ट के शिक्षा संस्थानों में कार्यरत हैं। बाकी शिक्षक और शिक्षिकाएं वर्तमान में कार्यरत हैं ही नहीं।
बीटेक एवं एमबीए कोर्स का सत्र 16-17 एवं 2017-18 का विवरण जानने का प्रयास हमने किया। एक आरटीआई में हुए खुलासे से पता चला कि इस संस्थान के लिए 2016-17 में नियामक संस्था (एआईसीटीई) के अनुसार निदेशक के पद पर अंकुर सक्सेना नियुक्त हैं। जिनका अनुभवः-शिक्षण 4 वर्ष, शोध-4 वर्ष एवं इंडस्ट्री-9 वर्ष दिखाया गया है। निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित एवं मोहर लगे (एआईसीटीई द्वारा उपलब्ध) विवरण पत्र के अनुसार इस संस्थान में 2016-17 के सत्र में 128 लोगों की शिक्षण स्टॉफ कार्यरत था। यही विवरण जब हमने एआईसीटीई की वेबसाइट पर जाकर सत्र 2017-18 के लिए देखा तो उपलब्ध शिक्षण स्टाफ की संख्या 158 थी। इस पर हमें शक हुआ। आरटीआई में उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय में प्राप्त विवरण को हमने जांचा, वहां शिक्षण स्टाफ के विवरण के बावत लोगों से बातचीत की तो सारा सच सामने आ गया। लोगों ने बताया कि स्टाफ के काफी लोग तो बहुत समय पहले ही संस्थान छोड़कर जा चुके हैं। वे अब कार्यरत नहीं हैं। लेकिन छात्र- छात्राओं को आकर्षित करने के लिए भारी-भरकम स्टाफ होने की गलत सूचनाएं दी जाती हैं। यानी छात्र-छात्राओं की आंखों में धूल झोंककर धड़ल्ले से शिक्षा का कारोबार चल रहा है। इसी ट्रस्ट से संबंधित सूरजमल कॉलेज ऑफ पॉलिटेक्निक सिरौली कला, किच्छा (ऊधमसिंह नगर) की बाबत आरटीआई में प्राप्त विवरण (एआईसीटीई के अनुसार) के अनुसार कॉलेज प्रिंसिपल विनोद जोशी को दर्शाया गया है। जिनकी नियुक्ति संस्थान के प्रमुख के तौर पर 22 जनवरी 2016 को हुई। उनका अनुभवः- शिक्षण-10 वर्ष, शोध कार्य- शून्य एवं इंडस्ट्री-7 वर्ष दर्शाया गया है। संस्थान में शिक्षण स्टॉफ की संख्या शून्य थी। यह विवरण एआईसीटीई के अनुसार 18 मार्च 2017 को दर्शाया गया है। इस कॉलेज को उत्तराखण्ड प्राथमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त है। हमने पड़ताल की तो पता चला कि इस कॉलेज के संबंध में मान्यता एवं शिक्षण स्टॉफ के बारे में आरटीआई मांगी गई थी, लेकिन उत्तराखण्ड प्राविधिक शिक्षा परिषद (उप्रशिप) ने मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई। आरटीआई के अंतर्गत कॉलेज के बारे में सूचना प्राप्त न होने के कारण उप्राशिप के लोक सूचना अधिकारी के विरुद्ध प्रथम अपील की गई परंतु प्रथम अपील में भी सूचना से असंतुष्ट होकर मुख्य सूचना आयुक्त, उत्तराखण्ड के यहां अपील की गई थी। हमें आश्चर्य हुआ कि आखिर कॉलेज के बारे में सूचना अधिकार के अंतर्गत सूचनाएं उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई जा रही? इससे उप्राशिप एक के बड़े संदेह के दायरे में आता है। कहीं सूचना उपलब्ध कराने से कॉलेज या उप्राशिप को कोई खतरा तो नहीं, कहीं कोई बड़ी गड़बड़ या हेरा-फेरी सामने आने का डर तो नहीं?
इस क्रम में हमें ज्ञात हुआ कि ट्रस्ट ने आयुर्वेदिक कॉलेज की मान्यता के लिए आवेदन किया था। हमने वेबसाइट पर जाकर देखा तो 7 मार्च 2018 को उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय द्वारा जारी किया गया अनुमोदन पत्र मिला। इसमें सूरजमल लक्ष्मीदेवी सावर्थिया एजुकेशन ट्रस्ट, किच्छा की ओर से बताया गया कि कॉलेज ऑफ आयुर्वेदिक एवं हॉस्पिटल के नाम के दस्तावेज आग में नष्ट हो गए। कुछ सूत्रों से ज्ञात हुआ कि जिस दिन आग लगी उसी दिन भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद से एक जांच दल उक्त संस्थान के निरीक्षण के लिए आने वाला था। हालांकि इस सूचना के तथ्य स्पष्ट न होने के कारण जांच दल के आने की संभावना की पुष्टि ‘दि संडे पोस्ट’ नहीं करता है। लेकिन हर तरफ संदेह व्यक्त किया गया कि दाल में कुछ तो काला जरूर है। सब कुछ ठीक नहीं है। खैर हम इस ट्रस्ट के अन्य संस्थानों की जानकारी जुटाने चल दिए।
अब हम आए किशनपुर क्षेत्र की ओर जहां इस ट्रस्ट के अन्य कई कॉलेजों की जानकारियां प्राप्त हुई। किशनपुर क्षेत्र में चल रहे, सूरजमल अग्रवाल कन्या महाविद्यालय शिक्षण स्टाफ के संबंध में आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक कमेटी के सदस्यों का विवरण, जो कि आरटीआई में कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल द्वारा उपलब्ध कराया गया था, उसमें कुछ नामों पर हमें संदेह हुआ। इसी बीच एक आरटीआई में कुमाऊं विश्वविद्यालय से मांगी गई सूचना से पता चला कि उपर्युक्त महाविद्यालय के अंतर्गत संचालित सूरजमल मेडिकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एवं हॉस्पिटल, किच्छा (ऊधसिंह नगर) को सत्र 2017-18 के लिए 100 सीटों पर बीएएमएस कोर्स के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की गई। इसी पत्र में सत्र 2017-18 के लिए स्वीकृति कार्य प्रगति में उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, देहरादून के पास था। इसी दौरान हमारे सामने एक चौंका देने वाला सच सामने आया। एक आरटीआई में किच्छा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी निजी चिकित्सा संस्थानों का विवरण मांगा गया। उसमें हमें सूरजमल लक्ष्मीदेवी सावर्थिया एजुकेशन ट्रस्ट का नाम भी मिला। यहां तक तो सब ठीक लगा परंतु उस आरटीआई में इसी संस्थान से संबंधित मांगी गई अन्य सूचनायें नहीं दी गई। सूचनाओं के संबंध में लोक सूचना अधिकारी कार्यालय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, ऊधमसिंह नगर द्वारा उत्तर दिया गया कि सूचना धारित नहीं है।  इसी से जुड़ी एक दिलचस्प जानकारी हमें प्राप्त हुई। इस आरटीआई का उत्तर पत्र सूचना अधिकारी द्वारा 19 अप्रैल 2018 को निर्गत किया गया और इसके कुछ दिन बाद अचानक 26 अप्रैल को स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के अनुसार सूरजमल कॉलेज ऑफ आयुर्वेदिक एवं हॉस्पिटल के रिकॉर्ड रूम में आग लग गई। सूचना आवेदन में ट्रस्ट के सचिव श्रीनिवास को कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा दी गई अनुमति का विवरण (सत्र 2016-17 एवं 2017-18 के लिए) मांगा गया था। साथ ही शिक्षण स्टाफ का ब्यौरा एवं अन्य सूचनएं मांगी गई थी। विश्वविद्यालय ने शिक्षण स्टाफ संबंधी सूचना प्राप्त करने के लिए सूचना आवेदन पत्र को उपर्युक्त महाविद्यालय को अग्रसारित कर दिया। इसी ट्रस्ट के एक अन्य कॉलेज के शिक्षण स्टॉफ की सूचना के लिए भी सूचना आवेदन में मांगी गई थी। इस कॉलेज के शिक्षण स्टॉफ की सूचना के लिए भी सूचना आवेदन उपर्युक्त महाविद्यालय को अग्रसारित कर दिया गया। उपर्युक्त जानकारी में दो बातें स्पष्ट हुई। दोनों कॉलेजों के शिक्षण स्टाफ के विवरण के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय ने सूचना आवेदन कॉलेजों को हस्तांतरित कर दिया। लेकिन उपर्युक्त कॉलेजों की मान्यता, अनुमति का विवरण उपलब्ध कराने के लिए याचिकाकर्ता से प्रयोजन पूछा गया। इस प्रकार प्रयोजन पूछ कर सूचना अधिकार अधिनियम का उल्लंघन करते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय ने सूचना देने से बचना चाहा। याचिकाकर्ता ने बताया उपर्युक्त दोनों कॉलेजों ने मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई जिसके संबंध में मुख्य सूचना आयुक्त, उत्तराखण्ड को शिकायत की जा चुकी है। आश्चर्य है कि आखिर कॉलेज एवं विश्वविद्यालय सूचना उपलब्ध कराने से क्यों बचना चाह रहे हैं?
शिक्षा से खिलावाड़ करने वाले कॉलेज और उन्हें मान्यता देने वाले विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय स्तर की संस्थाएं
  • सूरजमल लक्ष्मीदेवी सावर्थिया एजुकेशन ट्रस्ट गु्रप ऑफ इंस्टीट्यूशन, सिरौली कलां, किच्छा (ऊधमसिंह नगर)- अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय।
  • सूरजमल अग्रवाल कॉलेज ऑफ पॉलीटेक्निक, किच्छा (ऊधमसिंह नगर)-उत्तराखण्ड प्राथमिक शिक्षा परिषद। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद।
  • सूरजमल अग्रवाल डिग्री कॉलेज, दोपहरिया, किच्छा (ऊधमसिंह नगर)-उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद।
  • सूरजमल अग्रवाल प्राइवेट कन्या महाविद्यालय किच्छा (ऊधमसिंह नगर)-कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल।
  • सूरजमल अग्रवाल गर्ल्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट, किच्छा (ऊधमसिंह नगर)-उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय देहरादून, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, नई दिल्ली।
  • सूरजमल अग्रवाल प्राइवेट कन्या महाविद्यालय कॉलेज ऑफ नर्सिंग, किच्छा (ऊधमसिंह नगर)- हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विवि, उत्तराखण्ड नर्सिंग काउंसिल, भारतीय नर्सिंग परिषद।
  • सूरजमल अग्रवाल कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज किच्छा (ऊधमसिंह नगर)-हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय, उत्तराखण्ड चिकित्सा विभाग।
  • सूरजमल अग्रवाल प्राइवेट कन्या महाविद्यालय बीएड कॉलेज किच्छा (ऊधमसिंह नगर)-कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल।
  • बात अपनी-अपनी
हम केवल 20 छात्रों की परीक्षाएं कराएंगे। हमें तो आपके माध्यम से पता चल रहा है कि वे क्षमता से ज्यादा छात्रों को पढ़ा रहे हैं। यह गलत है। हम इस पर जांच कराएंगे।
प्रो. एचएस धामी, कुलपति एचएन बहुगुणा चिकित्सा विश्वविद्यालय
 इन पर लगभग 1 करोड़ से ज्यादा का बकाया है। रिजल्ट पर रोक लगा दी है। ऐसा ही रहा तो डी ऐफीलियेशन हो जाएगा। यूनिवर्सिटी सारे प्रकरणों के लिए जांच समिति का गठन करेगी जिसके बाद एक्ट किया जाएगा
प्रो. डीके नौडियाल, कुलपति कुमाऊं विश्वविद्यालय

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