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Uttarakhand

किच्छा से चुनाव लड़ने की इच्छा

तराई के दिग्गज कांग्रेसी नेता तिलकराज बेहड़ अगला विधानसभा चुनाव किच्छा से लड़ना चाहते हैं। लेकिन स्थानीय कांग्रेस नेता उनका अभी से विरोध करने लगे हैं

अभी तो हमने सांस लेना भी शुरू नहीं किया
लोगों ने फिजा में जहर घोलना शुरू कर दिया।

यह कटाक्ष भरा संदेश उत्तराखण्ड के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता तिलक राज बेहड़ ने सोशल मीडिया पर पिछले माह 14 फरवरी को लिखा है। इस दिन बेहड़ रुद्रपुर से किच्छा पहुंचे थे। जहां वह किच्छा के सीओ सुजीत कुमार से मिले। इस दौरान तिलक राज बेहड़ ने किच्छा में श्रीराम मंदिर निर्माण समर्पण निधि अभियान की फ्लेक्स को अपमानजनक तरीके से उतारकर फेंकने के मामले में पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही बेहड़ ने कहा कि फ्लेक्स फाड़ने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द से जल्द होनी चाहिए।

इसी दौरान रुद्रपुर के पूर्व विधायक तिलकराज बेहड़ ने एक प्रेस काॅन्फ्रेंस की। जिसमें उन्होंने किच्छा विधायक राजेश शुक्ला की तरफ इशारा करते हुए कहा कि विधायक जी अभी से डरने की जरूरत नहीं है। अभी तो मुझे टिकट भी नहीं मिला है। गौरतलब है कि 3 दिन पहले यानी 14 मार्च को किच्छा के भाजपा विधायक राजेश शुक्ला ने बिना किसी का नाम लिए फ्लेक्स फाड़ने के पीछे रुद्रपुर के कांग्रेस नेता का हाथ होना बताया था। जिसके बाद बेहड़ किच्छा पहुंचे थे। इससे पहले बेहड़ ने 1 फरवरी को अपना 64वां जन्मदिन भी किच्छा में भव्य तरीके से मनाया। यह पहली बार है, जब तिलकराज बेहड़ अपना जन्मदिन मनाने रुद्रपुर से किच्छा के गुंजन पैलेस पहुंचे थे। जहां किच्छा के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उत्साह से केक काटा और मिठाई बांटी। 9 फरवरी को बेहड़ ने किच्छा नगर पालिका के चेयरमैन दर्शन कोली की माता लीलावती की पुण्यतिथि में पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए थे। यही नहीं 7 फरवरी को वह किच्छा विधानसभा के गांव जवाहर नगर की डिमरी काॅलोनी में पहुंचे और लोगों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।

25 जनवरी के दिन वह प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राजकुमार बंसल के कार्यालय भी पहुंचे थे। जहां प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के समस्त पदाधिकारियों का बेहड़ ने स्वागत किया। 26 जनवरी को किच्छा विधानसभा के अंतर्गत आने वाले टोल प्लाजा से लालपुर के किसानों की ट्रैक्टर रैली को हरी झंडी दिखाकर बेहड़ ने रवाना किया। किच्छा विधानसभा में बेहड की यह सक्रियता अचानक नहीं बढ़ी है, बल्कि ‘तराई का शेर’ कहे जाने वाले बेहड़ ने इसके लिए अपने राजनीतिक जीवन का गुणा-भाग किया। जिसमें उन्होंने रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर किच्छा से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। हालांकि उनका यह प्लान अभी जब तक पूरी तरह सफल नहीं कहा जाएगा जब तक कि उन्हें किच्छा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट नहीं मिल जाता।

कांग्रेस का टिकट पाने के लिए किच्छा पर पहले ही कई पार्टी नेताओं की नजर है। जिनमें पूर्व दायित्वधारी हरीश पनेरु मुख्य हैं। हरीश पनेरु ने बेहड़ के प्लान का विरोध किया है। उन्होंने अपने साथ कई कांग्रेसी नेताओं को लेकर प्रेस काॅन्फ्रेंस की और कहा कि किच्छा विधानसभा क्षेत्र से किच्छा के नेता को ही टिकट मिलना चाहिए। यानी कि स्थानीयता का मुद्दा किच्छा में बेहड के पैर पसारने से पहले ही उठ खड़ा हुआ है। इस दौरान नया साल शुरू होने के बाद किच्छा विधानसभा क्षेत्र में जगह जगह बेहड के पोस्टर और होर्डिंग दिखाई दे रहे हैं। इन पोस्टर और होर्डिंग पर लिखा है कि किच्छा पुकारे दिल से, बेहड़ जी फिर से।

दरअसल, रुद्रपुर से बेहड़ के पलायन करने का प्लान यूं ही नहीं बना है, बल्कि इसके पीछे रुद्रपुर की राजनीति में हिंदुत्व का मुद्दा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस हिंदुत्व के मुद्दे पर ही राजकुमार ठुकराल भाजपा से दो बार यहां के विधायक बन चुके हैं। ठुकराल से दो बार लगातार हारने पर अब बेहड़ तीसरी बार जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। वह यह भी बखूबी जान चुके हैं कि रुद्रपुर के लोगों में राजकुमार ठुकराल की छवि एक हिंदूवादी चेहरे के रूप में अंकित हो चुकी है। जिसके बलबूते वह एक बार फिर 2022 के विधानसभा चुनाव में रुद्रपुर से वापसी कर सकते हैं। मतलब यह है कि रुद्रपुर में हिंदू मतों पर राजकुमार ठुकराल की अच्छी पकड़ ने बेहड़ को किच्छा जाने पर मजबूर कर दिया है।

रुद्रपुर से किच्छा जाने का दूसरा मकसद बेहड़ का यह भी है कि यहां से लगातार दो बार विधायक रहे राजेश शुक्ला का इस बार अंदर खाने विरोध चल रहा है। चर्चा है कि राजेश शुक्ला जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे हैं। जिसके चलते किच्छा में इस बार उनकी राह आसान नहीं है । राजेश शुक्ला को हराकर बेहड़ यह भी दिखा देना चाहते हैं कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की हार का बदला चुका दिया है। बताया जा रहा है कि इस बार किच्छा में भाजपा के ही कुछ नेता अंदर खाने अपनी पार्टी के विधायक राजेश शुक्ला की नैया डुबोने के तैयारी में हैं।

इन सब राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए बेहड़ किच्छा में इन दिनों बेहद सक्रिय हैं। हालांकि वह किच्छा के स्थानीय पार्टी नेताओं को अपने पक्ष में कितना कर पाएंगे यह देखना होगा। वैसे देखा जाए तो तिलक राज बेहड़ का इस नाते भी किच्छा से टिकट पाने का मजबूत आधार बनता है कि वह पूर्व में यहां से दो बार कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं। याद रहे कि अपने राजनीतिक जीवन काल में तिलक राज बेहड़ चार बार विधायक रह चुके हैं। जिसमें वह दो बार किच्छा तो दो बार रुद्रपुर के विधायक रहे हैं। उत्तराखण्ड राज्य बनने से पहले बेहड़ ने भाजपा से पहला चुनाव 1997 में जीता था। इसके बाद वह 2002 में कांग्रेस के एनडी तिवारी से मुकाबला कर बैठे थे। तब राम मंदिर लहर में एनडी तिवारी के सामने वह चुनाव लड़े थे। लेकिन राम लहर पर तब एनडी तिवारी भारी पड़े थे। जिसमें बेहड़ चुनाव हार गए थे। तब किच्छा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत रुद्रपुर और हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र भी आते थे।

उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद तिलक राज बेहड़ कांग्रेस से चुनाव लड़े। 2002 और 2007 का विधानसभा चुनाव वह कांग्रेस से लड़े और दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल की। इसके बाद वर्ष 2012 में जब उत्तराखण्ड में विधानसभा सीटों का परिसीमन नए सिरे से हुआ तो किच्छा और रुद्रपुर विधानसभा सीटें अलग अलग कर दी गई। इसमें बेहड़ ने रुद्रपुर से पार्टी के टिकट पर अपनी दावेदारी की।

2012 और 2017 के चुनाव में वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ कर भाजपा के राजकुमार ठुकराल से पराजित हुए। एनडी तिवारी सरकार में तिलकराज बेहड़ का बड़ा रुतबा था। तब उन्हें स्वास्थ्य मंत्री का पद मिला था। तब तराई में तिलक राज बिहड़ की तूती बोलती थी। लेकिन 2012 और 2017 का चुनाव हारने के बाद बेहड़ कांग्रेस के कमजोर नेता के रूप में सामने आए। यहां यह भी बताना जरूरी है कि किच्छा से भाजपा विधायक राजेश शुक्ला के सामने वर्ष 2017 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत चुनाव लड़े थे और वह ढाई हजार वोटों से शुक्ला से हार गए थे। जबकि इससे पहले भाजपा नेता राजेश शुक्ला ने कांग्रेस के सरवर यार को चुनाव हराया था। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सरवर यार को राजेश शुक्ला ने करीब 45000 वोटों से हराया था।

राजेश शुक्ला को उत्तर प्रदेश राज्य से उत्तराखण्ड बनने से पहले एक समाजवादी नेता के रूप में जाना जाता था। 2002 में जब उत्तराखण्ड का पहली बार विधानसभा चुनाव हुआ तो वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर किच्छा से चुनाव लड़े थे। तब समाजवादी पार्टी ने पहली बार उत्तराखण्ड की सभी 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था। जिनमें 69 विधानसभा सीटों पर पार्टी के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। पूरे प्रदेश में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों में अकेले राजेश शुक्ला ही ऐसे रहे जो अपनी जमानत बचा पाए। यही नहीं बल्कि वह उस समय किच्छा विधानसभा क्षेत्र में दूसरे स्थान पर रहे जब समाजवादी पार्टी का उत्तराखण्ड में पुरजोर विरोध हो रहा था।

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