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Uttarakhand

क्यों है गुंजी की गूंज

21 अक्टूबर 2022 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के अंतिम गांव माणा पहुंचें तो सीमांत में बसे गांवों की तस्वीर बदलने लगी। माणा गांव को देश का प्रथम गांव कहा गया। सीमांत पर बसे गांवों के विकास के लिए ‘वाइब्रेट विलेज’ योजना के तहत गढ़वाल में माणा के साथ ही कुमाऊं में गुंजी गांव के भी दिन बहुरते दिख रहे हैं। गांव में पुलिस थाना खुल गया है। प्रधानमंत्री मोदी के इस गांव में आगमन की खबरों से ग्रामीणों में खुशी की लहर है

सीमांत (वर्तमान में प्रथम गांव) वेदव्यास की स्थली के नाम से प्रसिद्ध उच्च हिमालयी गांव गुंजी का नाम इन दिनों देश में गूंज रहा है। जिसकी एक वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुंजी का दौरा करेंगे तो दूसरी वजह इस गांव का चयन केंद्र सरकार के ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत हुआ है। तीसरा कारण है कि चीन एवं नेपाल सीमा पर स्थित इस प्रथम गांव में पुलिस थाना खुल चुका है। चौथा व महत्वपूर्ण कारण यह कि गुंजी ग्राम पंचायत तथा वन पंचायत क्षेत्र में सेना के ठेकेदारों द्वारा पेड़ों के कटान में मनमानी के मामले पर गुंजी के ग्रामीण आंदोलित हैं। वे तहसीलदार एवं उपजिलाधिकारी को इस मामले में ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सेना के ठेकेदारों द्वारा गुंजी ग्राम पंचायत एवं वन पंचायत की भूमि में स्थिति पौराणिक संपत्ति, चारागाह, शवदाह को मनमाने तरीके से खोदकर उसे नष्ट किया जा रहा है। हजारों पौधों की सुरक्षा के लिए बनी दीवार को तोड़कर वहां पर डंपिंग स्थल बनाया जा रहा है।

यह देश का पहला ऐसा गांव है जहां 10 हजार फीट की ऊंचाई पर पुलिस थाना संचालित होता है। यह थाना मध्य मई से 31 अक्टूबर तक संचालित होता है। गुंजी गांव अपने में कई खासियत समेटे हुए है। यह कैलाश मानसरोवर यात्रा का सबसे अहम पड़ाव भी है। यहां पर भारत-चीन सीमांत स्थलीय व्यापार की भारतीय मंडी भी है। यहां पर सेना, आईटीबीपी, एसएसबी के कैंप कार्यालय हैं। यहां पर भारत-चीन व्यापार का ट्रेड कार्यालय है तो बीआरओ, स्टेट बैंक की शाखा, कुमाऊं मंडल विकास निगम का पर्यटक आवास गृह भी स्थित है। यहां अस्पताल है तो हेलीपैड भी। रहने के लिए होटल एवं होम स्टे हैं। जल जीवन मिशन के तहत हर घर में जल पहुंच चुका है। काजा से समदो तक डबल लेन सड़क बन रही है। किसानों को अपने उत्पादों को मार्केट तक पहुंचाने में आसानी हो रही है। इसके पास से काली नदी बहती है। जिसके उस पार नेपाल स्थित है। यहां से तिब्बत की दूरी मात्र 25 किमी है। महर्षि वेद व्यास की व्यास घाटी में स्थित यह गांव सोलर लाइट से जगमगाता है। यहां पर सेब का उत्पादन होता है। यह प्रमुख पर्यटन स्थल बन चुका है। यहां पर दर्जनों होमस्टे, ढाबे, रेस्टोरेंट एवं होटल हैं। यहां पर अनुसूचित जनजाति के 250 से अधिक परिवार रहते हैं। इस गांव में आईएएस, पीसीएस अधिकारी तबके के लोगों की एक बड़ी जमात है।

यह ऐसा स्थल है जहां आधे साल बर्फ रहती है। चीन एवं नेपाल की सीमा के लिए यहां सेना और अर्द्धसैनिक बलों के जवान तैनात हैं। पहले धारचूला से यहां की दूरी करीब 84 किमी. थी। अब लिपुलेख सड़क बनने के बाद मात्र पांच घंटे में यहां पहुंचा जा सकता है। ‘वाइब्रेंट योजना’ के तहत चयनित इस गांव के विकास के लिए करोड़ों रुपए के प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजे जा चुके हैं जिनमें पर्यटन विकास के लिए ट्रेकिंग रूट, पर्यटक विश्राम गृह का निर्माण, सेना का इंडोर स्टेडियम, ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने के लिए फार्म मशीनरी बैंक, हाईटेक शौचालयों का निर्माण के साथ ही सोलर वाटर हीटर एवं सोलर लाइटें लगाई जानी हैं। परंपरागत हस्तशिल्प के तहत थुलमा, चुटका को बढ़ावा दिया जाना है। प्रस्ताव में क्षेत्र की जड़ी-बूटी को भी शामिल किया गया है। इसमें कालाजीरा, गंदरायन, जंबू और सीवक थार्न ये सब संजीवनी का उत्पादन के साथ ही अखरोट के कलस्टर के साथ ही मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी किया जाना है। कुल मिलाकर गुंजी के वाशिंदों के पास खुशी मनाने का मौका है बशर्ते बाइब्रेंट योजना भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़े।

उत्तराखण्ड के राज्यपाल गुरुमीत सिंह भी इस गांव को लेकर बयान दे चुके हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार इस गांव के विकास के लिए प्रयत्नशील है। बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट के तहत इस गांव का विकास होगा। ग्रामीणों ने उन्हें एक मांग पत्र भी दिया है जिसमें उन्होंने कृषि कार्य के लिए टै्रक्टर व लोडर मशीन, हर परिवार को मकान मरम्मत के लिए अनुदान राशि, हर घर में एक शौचालय, घर-घर एक सोलर लाइट, पेयजल हेतु 20 सोलर ट्यूबवेल पंप, एक एंबुलेंस आदि की मांग की है।

 

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