उत्तरकाशी जिले में लिंगानुपात के जो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं उससे शासन-प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर सच का पता लगा रही हैं। ‘दि संडे पोस्ट’ ने भी अपने स्तर पर गांवों का जायजा लिया, तो पता चला कि लिंगानुपात के हाल में जारी आंकड़ों पर स्थानीय लोग भी हैरान हैं। लोग संदेह जता रहे हैं कि कहीं लिंग परीक्षण की बीमारी गांवों तक तो नहीं फैल गई

 

18 जुलाई 2019 : उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान आशा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक लेते हैं। उसके बाद प्रेस में रहस्योद्घाटन करते हैं कि जिले भर में बालिका जन्म दर को लेकर चिंताजनक रिपोर्ट आई है। जिले के 133 गांवों में पिछले तीन महीनों में जहां 216 बेटों का जन्म हुआ, वहीं बिटिया एक भी पैदा नहीं हुई।

19 जुलाई 2019 : 133 गांवों में सिर्फ बेटियां पैदा होने की खबर से हड़कंप मच गया। इसी दिन प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा जिलाधिकारी उत्तरकाशी को जांच के आदेश दिए जाते हैं।

20 जुलाई 2019 : उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। अपर चीफ मेडिकल आफिसर डॉ. सीएस रावत ने बैठक में रिपोर्ट दी कि अप्रैल 2018 से जनवरी 2019 तक पूरे जिले के 668 गांवों में जो प्रसव हुए थे उसके आधार पर जिन गांवों में बेटियों के जन्म की दर 25 प्रतिशत कम थी, उन सभी 70 गांवों को रेड जोन के रूप में चिन्हित किया गया है। बाद में जनवरी 2019 से जून 2019 के बीच जो प्रसव हुए उसके आधार पर 16 गांव रेड जोन में शामिल करने की बात कही गई। इस दिन जो सरकारी प्रेस नोट जारी हुआ उसमें जो रेड जोन में चिन्हित 16 गांव थे उनमें पिछले छह महीनों के भीतर बेटियों का जन्म शून्य बताया गया।

21 जुलाई 2019 : जिले के स्वास्थ्य विभाग ने आशा कर्मियों की रिपोर्ट को अविश्वसनीय करार दिया। साथ ही जिलाधिकारी ने एक जांच टीम गठित कर दी। 82 गांवों को रेड जोन में शामिल करके जांच के आदेश दे दिए। जांच के लिए 26 अधिकारियों की तैनाती की गई। हर अधिकारी के हिस्से में 4 गांव जांच के लिए दे दिए गए। इसी दिन प्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ- रविन्द्र थपलियाल ने तीन दिन के भीतर ही स्वास्थ्य विभाग से पूरे जिले के सभी गांवों की बालिका प्रसव रिपोर्ट तलब करने को कहा, लेकिन ऐसा हो न सका।

26 जुलाई 2019 : स्वास्थ्य निदेशक गढ़वाल डॉ. तृप्ति बहुगुणा ने रिपोर्ट न मिलने पर नाराजगी जताई। इसके साथ ही वे स्वास्थ्य महानिदेशक के आदेशों पर उत्तरकाशी पहुंचती हैं। जहां खुद स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग करती हैं। वे 26 जुलाई से 28 जुलाई 2019 तक उत्तरकाशी में ही डेरा डाले रहीं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को जिले के सभी 668 गांवों में प्रसव के सर्वे कराने के आदेश दिए। स्वास्थ्य विभाग की टीम बालिका प्रसव कम होने की जांच भी करेगी।

आशा कर्मियों की वह रिपोर्ट जिसमें लिंगानुपात का हुआ खुलासा

घिल्डियाल की अच्छी पहल

उत्तरकाशी में लिंगानुपात को लेकर जो चौंकाने वाले आंकड़े आए हैं, उन्हें देख रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने एक अच्छी पहल की है। उन्होंने अपने जिले की सभी आशा कार्यकर्ताओं को आदेश दिए हैं कि वे उन परिवारों पर विशेष ध्यान दें जिनके यहां दो या तीन पुत्रियां हैं। जिस घर में दो या तीन बेटी होंगी वहां आशा कर्मियों को हर महीने गर्भवती महिला की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी सूरत में लापरवाही न बरती जाय। गर्भवती महिला की तीन महीने के बाद हर महीने की बाकायदा प्रोग्रेस रिपोर्ट बनाई जाएगी। अगर कहीं बालिका के भू्रण हत्या की कोई कोशिश की जाती है, तो वह सफल न हो।

इस तरह उत्तरकाशी जनपद में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग टीमें जांच के लिए गांवों में पहुंच रही हैं। इसमें प्रशासन के वे 26 अधिकारी भी शामिल हैं, जो प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के आदेश पर जिलाधिकारी ने नियुक्त किए थे। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने प्रसव जांच के लिए जो टीम नियुक्त की है, उसको 5 जांच बिन्दुओं पर कार्य करने के लिए गांव-गांव भेजा है। इनमें जांच बिन्दु संख्या एक के अनुसार आरसीएच (प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य) पोर्टल में गर्भवती के पंजीकरण की स्थिति का विवरण स्पष्ट करना है। बिन्दु संख्या दो में प्रथम प्रसव के परिणाम की जानकारी एवं एएनसी जांच की स्थिति तथा दूसरे गर्भकाल के प्रसव जांच की तिथियां एवं किस त्रैमास में पंजीकरण किया है, का विवरण होगा। बिन्दु संख्या-तीन में परिवार का प्रोफाइल 0 से एक वर्ष तक के बालक एवं बालिका का विवरण उम्र सहित देना है, जबकि बिन्दु संख्या 4 में 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों का लिंगानुपात बताना होगा। बिन्दु संख्या-5 में एएनएम के पास उपलब्ध गर्भवतियों की संख्या के साथ वास्तविक गर्भवतियों की संख्या का मिलान करना होगा। इन पांच बिन्दुओं पर जांच कराने के पीछे उत्तरकाशी के जिला अधिकारी डॉ. आशीष चौहान का मकसद यह सच सामने लाना है कि क्या वह रिपोर्ट सही है जिसे आशा कर्मियों ने स्वास्थ्य विभाग को सौंपा था? कहीं यह रिपोर्ट उन्होंने घर बैठकर ही तो नहीं बना ली थी?

‘दि संडे पोस्ट’ ने उत्तरकाशी के लिंगानुपात मामले में जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए जिले के कुछ गांवों का दौरा किया। सिरोर गांव की आशा कर्मी अनिता भट्ट से मिलने टीम उत्तरकाशी से करीब 10 किलोमीटर दूर गंगा नदी पार करके गांव पहुंची। टीम के पहुंचने पर भट्ट कुछ घबरा सी गईं। हमारे सवाल करने पर वे बोलीं कि मैं कल पूरे दिन अधिकारियों के साथ गांव में घर-घर घूमती रही। अधिकारी बार-बार कह रहे थे कि रिपोर्ट तुमने घर पर ही तो नहीं बनाई थी। इस पर मैंने उनसे कहा कि जिन-जिन घरों में बच्चे पैदा हुए हैं, वहां आप खुद चलकर जान लीजिए कि सच क्या है। अब डर उनके चेहरे से गायब था और वे बड़े ही आत्मविश्वास के साथ बोलीं कि जो रिपोर्ट मैंने दी थी, वह सच है। अनिता भट्ट के अनुसार पिछले छह माह में सिरोर गांव में जनवरी 2019 से लेकर जून 2019 तक कुल चार प्रसव हुए। जिनमें तीन लड़के और एक लड़की पैदा हुई थी। वह कहती हैं पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। पहले हम जो रिपोर्ट दे देते थे। उसे स्वास्थ्य विभाग लेकर रख लेता था। लेकिन इस बार यह रिपोर्ट ‘डीएम’ सर के हाथ लग गई। उन्होंने जब लड़कों की जन्म दर ज्यादा देखी तो उन्हें बड़ा झटका लगा। पहले जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर ही प्रसव की दर अंकित होती थी। जिले में 14 स्वास्थ्य केंद्र हैं। जहां से डाटा स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंच जाता था। लेकिन इस बार जिलाधिकारी ने यह रिपोर्ट आशा कर्मियों से मंगवाई। जिसके सामने आने के बाद यह हलचल मची है।

संदेह में देहरादून के अल्ट्रासाउंड केंद्र

उत्तरकाशी में लिंगानुपात का जो भारी अंतर सामने आया है उससे अल्ट्रासाउंड केंद्र संदेह के घेरे में हैं। हालांकि उत्तरकाशी में सिर्फ तीन अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं। जिनमें दो सरकारी और एक प्राइवेट है। इन सेंटरों में लिंग परीक्षण नहीं हो सकता। लिहाजा शक के घेरे में देहरादून का एक निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर है। यह अल्ट्रासाउंड सेंटर धर्मपुर में है। इस पर मोटी रकम लेकर लिंग जांच करने के आरोप हैं। बताया जाता है कि पहले भी यह अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाने वाला व्यक्ति करीब 10 बार जेल की हवा खा चुका है। हर बार वह लिंग जांच के आरोप में पकड़ा जाता है, लेकिन जेल से आने के बाद फिर से मनमानी करने लगता है। बताते हैं कि इस काम के लिए वह 20 से 25 हजार रुपया लेता है। इसी के साथ देहरादून के ही हरबर्टपुर और विकासनगर में भी निजी अल्ट्रासाउंड लिंग जांच धड़ल्ले से कर रहे हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि बालिका भ्रूण हत्या कराने के लिए लोग उत्तरकाशी से हिमाचल प्रदेश और पंजाब तक पहुंच रहे हैं। उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक से निकलकर शिमला और देहरादून के पौंटा साहिब होते हुए चंडीगढ़ में जाकर अल्ट्रासउंड कराते हैं और वहीं गर्भपात भी कराते हैं।

गंगोत्री मार्ग पर स्थित है नेताना गांव यह गांव उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर है। गांव के लोगों से बातचीत करते हुए टीम ग्राम प्रधान जगदम्बा प्रसाद सेमवाल के घर पहुंची जहां पता चला कि प्रधान ब्लॉक में गए हैं। वहां मनरेगा की ऑडिट टीम आई है। कुछ देर इंतजार करने के बाद प्रधान सेमवाल घर पहुंचे हैं। जब उन्हें पता चला कि मीडिया वाले हैं, तो वे कहते हैं कि सभी मीडिया वाले आजकल इसी खबर पर लगे हैं। पिछले तीन महीने में तीन लड़कियां पैदा हुई हैं, जबकि 6 महीने में 7 लड़कियां पैदा हुई। दूसरी तरफ आशा कर्मी चंद्रकला के अनुसार तीन महीने में तीन लड़के और एक लड़की पैदा हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पोर्टल पर नेताना गांव में तीन महीने में तीन लड़के पैदा होना दर्शाया गया है। गांव के प्रधान ने बताया कि उनकी तीन नीतिनी (पौत्रियां) पैदा हुई। पास खड़ी उनकी पत्नी ने भी बताया कि जब उनकी बहू को एक के बाद एक लगातार तीन लड़कियां पैदा हुई तो वह खूब रोई। घर में खुशी मनाने की बजाय गम का माहौल पैदा हो गया। तत्पश्चात प्रधान और उनका पुत्र दोनों बदरीनाथ और केदारनाथ की यात्रा पर गए। जहां उन्होंने पौत्र प्राप्ति की कामना की। फलस्वरूप घर में चौथी संतान पुत्र पैदा हुआ।

डेढ़ दशक पूर्व चर्चा के केंद्र में रहे वरुणावत पर्वत के ठीक सामने लोदाडा गांव स्थित है। यहां के लोगों से बात करने के बाद ‘दि संडे पोस्ट’ टीम प्रधान के घर पहुंची। 80 वर्षीय प्रधान सुजान सिंह चौहान पूर्व में स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे चुके हैं। वे कहते हैं कि पहाड़ों में कभी भी पुत्र और पुत्री में भेद नहीं किया जाता। यहां दोनों को एक समान देखते हैं, लेकिन प्रशासन की लिंगानुपात की रिपोर्ट पर वे भी अचंभित दिखे। चौहान कहते हैं कि हो सकता है कि यह महंगाई का असर हो। लोग दो संतानों की परवरिश बाकमुश्किल कर पाते हैं। आज हर किसी के मन में कामना होती है कि वह अपना वंश आगे बढ़ाने के लिए पुत्र पैदा करे। वे खुद अपने गांव की प्रसव दर को देखकर भी हैरान हैं। कहते हैं कि इसे कुदरत का करिश्मा कहें या इंसानी फितरत कि उनके गांव में भी पिछले तीन महीने में 6 लड़के पैदा हुए हैं।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग जिले के हर गांव में होने वाले संस्थागत एवं घरेलू प्रसवों का ब्यौरा तैयार करता है। बीते एक अप्रैल से 30 जून 2019 तक उत्तरकाशी जिले के विभिन्न गांवों में हुए प्रसव की रिपोर्ट सामने आई तो जिम्मेदार अधिकारी ही हैरत में पड़ गए। रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 133 गांवों में तीन माह के भीतर कुल 216 प्रसव हुए, लेकिन हैरत की बात यह है कि इसमें एक भी बिटिया ने जन्म नहीं लिया। सरकारी रिपोर्ट में बिगड़ते लिंगानुपात के सामने आने से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। यहां तक कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी के जिलाधिकारी को आदेश दिए कि वह मामले की जांच कराएं। याद रहे कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तरकाशी जिले में महिला एवं पुरुष लिंगानुपात में ज्यादा अंतर नहीं था। पुरुषों की संख्या एक लाख 68 हजार 597 थी, जबकि महिलाओं की संख्या एक लाख 61 हजार 489 थी। इसके बाद सरकार द्वारा ‘कन्या भू्रण हत्या निषेध’ को लेकर चलाए गए जागरूकता अभियान और बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के बावजूद जिले में लिंगानुपात के जो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने ऐसे तमाम अभियानों पर सवालिया निशान लगा दिया है।

 

बात अपनी-अपनी

फिलहाल 26 अफसरों को हमने इसकी जांच का जिम्मा सौंपा है। जांच आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी उत्तरकाशी

हमने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जिले के सभी 668 गांवों में विस्तृत पड़ताल करने को कहा है। जिसमें पिछले तीन माह में हुए प्रसवों की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी। सभी अधिकारी गांव-गांव पहुंचकर सटीक आंकड़े जुटा रहे हैं। जिसमें एक माह का समय लगेगा।
डॉ. तृप्ति बहुगुणा, स्वास्थ्य निदेशक गढ़वाल

आशा कर्मियों और हमारे विभाग के पोर्टल पर मौजूद आंकड़ों के मिलान पर लिंगानुपात में कुछ अंतर सामने आया है। फिलहाल हम जांच करा रहे हैं। इसके बाद ही असलियत सामने आ पाएगी।
डॉ. सीएस रावत, एसीएमओ उत्तरकाशी

ऐसा नहीं है कि सभी लड़के पैदा हुए हैं। लड़कियां भी पैदा हुई हैं। आंकड़ेबाजी में कुछ गड़बड़ हो सकती है। जिसकी जांच कराई जा रही है।
गोपाल रावत, विधायक उत्तरकाशी

प्रशासन की रिपोर्ट अगर ठीक है, तो यह बात चौंकाने वाली है। पहाड़ों में पहले कभी ऐसा होता नहीं था। इसके कारणों की जांच कराई जानी जरूरी है। अल्ट्रासाउंड सेंटरों की भी जांच करानी चाहिए।
विजयपाल सजवाण, पूर्व विधायक उत्तरकाशी

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग जांच चल रही है। हालांकि लिंगानुपात का जो अंतर सामने आया है वह आंकड़े खुद प्रशासन ने ही जारी किए हैं। अब प्रशासन अपने बचाव में उतर आया है और आशा कर्मियों द्वारा जारी रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े कर रहा है। इस मामले में देहरादून के अल्ट्रासाउंड सेंटरों की भूमिका संदिग्ध है। एक अल्ट्रासाउंड सेंटर का मालिक भ्रूण जांच कराते हुए कई बार पकड़ा जा चुका है।
सूरत सिंह रावत, वरिष्ठ पत्रकार उत्तरकाशी

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