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सदन में सरकार के लिए सुरक्षा दीवार बने रहे स्वर्गीय प्रकाश पंत की कमी इस बार सत्र में साफ दिखाई दी। विधायकों के सवालों पर मंत्रियों की जमकर फजीहत हुई। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ढाल बनकर भी विधायकों के तीखे तीरों को रोक न सके

 

स्वर्गीय प्रकाश पंत की कमी उत्तराखण्ड सरकार को इतनी जल्दी खलेगी इसका अंदाजा शायद किसी को भी नहीं रहा होगा। महज तीन दिन के विधानसभा सत्र में एक बात साफ तौर पर देखने को मिली है कि सरकार के बचाव में पंत नाम की जो मजबूत दीवार थी उसकी भरपाई करना किसी अन्य के वश में नहीं है। मंत्रियों का होमवर्क पूरा न होने की स्थिति में सदन में सरकार की ढाल बनने का जो कालजयी कार्य स्वर्गीय पंत करते थे वह मदन कौशिक नहीं कर पाये। खुद भाजपा विधायकों के ही सवालो में सरकार और उसके मंत्री घिरते रहे। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने स्थिति को संभालने का प्रयास तो किया, लेकिन उनमें पंत जैसी क्षमता देखने को नहीं मिली। यह स्थिति सरकार के लिए वाकई सोचनीय है।

24 जून को प्रदेश में विधानसभा सत्र आरम्भ हुआ। सत्र की अवधि महज दो दिन ही रखी गई जिसमें एक दिन स्वर्गीय प्रकाश पंत के लिये श्रद्धांजलि तो दूसरा दिन सदन के कामकाज के लिये निर्धारित रखा गया। कांग्रेस द्वारा बेहद अल्प अवधि के सत्र का भारी विरोध किया गया जिसके चलते सरकार को मजबूरन सत्र की अवधि एक दिन और बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा।

सत्र के पहले दिन पूरे सदन ने स्वर्गीय प्रकाश पंत को श्रद्धा सुमन अर्पित किये और मौन रखा। सत्र के दूसरे दिन सामान्य कामकाज आरम्भ हुआ। दूसरे दिन से यह साफ हो गया कि सरकार क्यों सदन मे ंबचना चाहती है। दूसरे दिन सरकार को अपने ही यानी भाजपा विधायकों के सवालों पर असहज होना पड़ा। इससे लगा कि कहीं न कहीं सरकार सदन में सवालां और जवाबों से बचाना चाहती थी। जिससे सत्र बहुत छोटा तय किया गया।

एक बात इस सत्र में यह भी साफ हो गई कि प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई भाजपा की त्रिवेंद्र रावत सरकार अपने ढाई साल के कार्यकाल के बावजूद सदन में अपने होमवर्क के प्रति गंभीर नहीं रही है। ढाई साल के कार्यकाल में हर विधानसभा सत्र के दौरान सरकार के मंत्रियों का कमजोर होमवर्क रहा है। इस बार के सत्र में भी यही देखने को मिला है। इसके अलावा यह भी एक बार फिर से देखने को मिला है कि कांग्रेस ज्यादा सत्ता पक्ष के विधायकों द्वारा सरकार को घेरने का काम किया गया। सरकार को विपक्ष से ज्यादा अपनां के तीरां से घायल होने को मजबूर होना पड़ा है।

सदन में सरकार को एक बार फिर अपनी पार्टी के विधायकां द्वारा फजीहत का सामना करना पड़ा। सदन के दूसरे दिन जिस तरह से भाजपा विधायकों ने सरकार के मंत्रियों को अपने सवालों की बौछार से निशाने पर लिया वह सरकार के लिये खासा मुसीबत बना गया। भाजपा विधायक सुरेन्द्र सिंह जीना और विनोद चमोली ने सरकार को अपने सवालों से खूब घेरा। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक न तो इन सवालों का जबाब दे पाये और न ही मंत्रियों के कमजोर होमवर्क पर उनका बचाव कर पाए।

मंत्रियों के होमवर्क के हालात यहां तक रहे कि समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य भाजपा के ही विधायकों के सवालों से बुरी तरह घिर गए। समाज कल्याण विभाग शासनादेश को बदले जाने पर कांग्रेस विधायक ममता राकेश ने मंत्री से सवाल किया कि क्या विभाग शासनादेश को बदल सकता है, तो मंत्री जी जबाब नहीं दे पाए। मदन कौशिक भी असहज ही दिखाई दिए।

सदन में प्रदेश को पर्यटन प्रदेश बनाए जाने के दावां की भी हकीकत सामने आ गई। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भले ही सदन से बाहर राज्य को पर्यटन प्रदेश बनाये जाने के बड़े-बड़े दावे करत रहे हों, लेकिन सदन में उनका होमवर्क दावों के अनुरूप नहीं दिखाई दिया। राज्य के तीर्थ स्थानों में अवस्थापना सुविधाओं को लेकर सतपाल महाराज द्वारा बड़े बड़े दावे किय जाते रहे हैं। यहां तक कि वे राज्य में तीर्थाटन और पर्यटन को अलग-अलग देखे जाने की भी बात करते रहे हैं।

विधायक प्रीतम पंवार ने राज्य के तीर्थ स्थलों में अवस्थापना विकास का सवाल उठाया तो मंत्री सतपाल महाराज का जबाब हेरत भरा था। मंत्री जी ने जबाब दिया कि उनके पास इस तरह का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। इससे साफ हो गया है कि पर्यटन मंत्री सदन के बाहर जितने भी दावे करते रहे हो, लेकिन हकीकत यही है कि उन पर अमल हो रहा है या नहीं यह देखने की फुर्सत न तो मंत्री जी को है ओैर न ही सरकार इसके लिए गंभीर है।

प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ समझी जाने वाली चारधाम यात्रा की बदहाली आज तक पहले कभी नहीं देखने को मिली है। यहां तक कि राज्य के पर्यटक स्थल जो कि चुनिंदा ही हैं, वहां भी पर्यटकों को किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। घंटों जाम में फंसने के बाद पर्यटकां के सपनां का धराशयी होना शायद राज्य के इतिहास में पहली बार देखने को मिला है। जबकि दावां की बात करें तो सरकार और पर्यटन मंत्री राज्य में पर्यटकां को बुलाये जाने के लिये अपील करते हैं, तो वहीं दूसरी ओर उन पर्यटकां को असुविधाओं के भवंर में छोड़ दिया जा रहा है।

सतपाल महाराज द्वारा केदारनाथ आपदा में मारे गये श्रद्धालुओं के परिजनों के लिए डार्क पर्यटन का नया शिगूफा राज्य को दिया गया। इसमें आपदा में मारे गये श्रद्धालुओं के परिजनां को अपने परिजनों की याद में केदानाथ में स्मृति वन आदि लगाए जाने को प्रेरित किया जाना है। लेकिन जिस तरह से नैनीताल और अन्य पर्यटन स्थलो में कई कई किमी जाम में फंसने से पर्यटकों को सड़कों पर रात गुजारने को मजबूर होना पड़ा, इस पर मंत्री जी ने कोई बात तक नहीं की। सोशल मीडिया में इस नये पर्यटन
कॉन्सेप्ट ‘डार्क पर्यटन’ को लेकर खूब चटखारे जरूर लिये गए हैं।

कांग्रेस ने राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरने का काम किया। सदन में राज्य में बिड़ती कानून व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई और चर्चा के दौरान कांग्रेस द्वारा देहरादून में पांच माह के अंतराल में लगातार लूटपाट की बड़ी-बड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुये सरकार पर आरोप लगाया कि जब राजधानी देहरादून ही सुरक्षित नहीं है, तो प्रदेश के अन्य स्थानों के क्या हाल होंगे। सरकार की तरफ से संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि पिछले दो वषों में अपराधों में गिरावट आई है। यह भी गौर करने वाली बात है कि कानून व्यवस्था को लेकर जब सदन में चर्चा चल रही थी तब हरिद्वार में पुलिस के एक सिपाही के साथ शराब के करोबारियां द्वारा मारपीट करके उसकी वर्दी तक फाड़ दिये जाने का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया में वायरल हो रहा था।

भले ही सरकार आंकड़ों को लेकर विपक्ष को अपने तर्कों से शांत करने का प्रयास कर रही हो, यह भी एक तथ्य है कि हाल ही में राज्य में कई ऐसे अपराध सामने आ चुके हैं जिसमें स्वंय पुलिस पर ही गम्भीर आरोप लगे हैं। आचार संहिता के दौरान करोड़ों की लूट के आरोप पुलिस अधिकारी और सिपाहियों पर लग चुके हैं। साथ ही पुलिस पर हमला होने के मामले सामने आ चुके हैं। दो बड़े मामले तो देहरादून में ही सामने आ चुके हैं। जिसमें एक मामले में चीता पुलिस के एक सिपाही पर हमला करके उसकी टांग तोड़ने और एक मामले में पुलिस के दारोगा के साथ हाथापाई करके उसकी वर्दी तक फाड़े जाने का मामला सामने आ चुका है।

इसके अलावा सामाजिक अपराध भी राज्य में तेजी से बढ़े हैं। कुछ ही माह पूर्व टिहरी जिले के बसाण गांव में दलित युवक की जातिगत वैमनस्य के चलते हत्या की गई। टिहरी जिले के नैनबाग क्षेत्र में एक नाबालिग दलित बालिका के साथ ब्लात्कार का मामला सुर्खियों में रहा है। इसके चलते राज्य में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होते रहे हैं, जबकि सदन में सरकार आंकड़ां को सामने रख कर अपराधो में कमी आने की बात कह रही है। सरकार के जबाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस ने सदन से वाकआउट तक किया।

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