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Uttarakhand

तब्लीकी जमातियों से दहला उत्तराखण्ड

मौत से ज्यादा भयावह होता है मौत का डर कुछ इसी तरह से उत्तराखण्ड मेें भी देखने को मिल रहा है। निजामुदीन के तबलीकी जमात में उत्तराखण्ड के नगारिको के शामिल होने की खबर से पूरे उत्तराखण्ड में कोरोना को लेकर डर का माहौल बना हुआ है। हांलाकी पुलिस प्रशासन के द्वारा तत्काल ही इस पर कार्यवाही कर के 173 लोगो को क्वांन कर दिया है लेकिन सबसे बड़ा डर इस बात को लेकर बना हुआ है कि जमात मे शमिल लोंगो के द्वारा कहीं कोरोना संक्रमण किसी दूसरे तक न पहुंच गया हो।

जानकारी के अनुसार तब्लीकी जमात मे शमिल हुये लेोगे में से 1 जनवरी के लेकर अबतक 713 जमाती उत्तराखण्ड लौटे है। फरवरी महिनें में लोैटे इन 28 दिनो की अवधि के दौरान 173 जमातियों को पुलिस प्रशासन के द्वारा होम क्वारंटीन कर दिया गया है। लेकिन अभी भी आंशका बनी हुई है कि कई ऐसे जमाती भी हो सकते है जो अपनी पहचान और जमात में जाने की जानकारी छुपा कर प्रदेश मे छुपे हो सकते हैं। यह सबसे बड़ी चुनौती और डर की बात है जिसको देखते हुये पुलिस प्रशासन के द्वारा आदेश जारी किया गया है कि सभी जमाती जो कि तबलीकी जमात मे शामिल हुये थे वे स्वंय अपनी सूचना पुलिस का दे। जिससे उनके स्वास्थ्य की जांच हो सके।

पुलिस की त्वरित कार्यवही के कारण ही इसी तरह से अभी तक जमात से कई लोगो को क्वारंटीन कर दिया गया है। जबकि बताया जा रहा हेै कि जमात मे शामिल होने के लिये 34 लोग थे जो जिनमें अभी 26 लोग प्रदेश में नही लौटे है। जों 8 लेाग प्रदेश में लोटे थे उन को क्वारंटीन किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट तौर पर यह साफ कर दिया है कि जमात से लौटे हर व्यक्ति को 14 दिनो के क्वारंटीन में रहना ही होगा।

सबसे ज्यादा भय को माहौल उत्तराखण्ड के पर्वतीय जिलों में देखने को मिल रहा है। पिथौरागढ़, उत्तरकाशी जिलों से जमात मे शामिल होने के लिये जाने की चर्चाओं से पहाड़ी क्षेत्र में भय इस कदर फैल रहा हेै कि बद्ररीभाथ के विधायक महेन्द्र प्रसाद भट्ट तक ने अपनी फेसबुक वाल पर जनता से सावधानी बरतने और नजीबाबाद से आने वाली सब्जियों को न खरीदने का आग्रह किया है। इसका प्रमुख्य कारण यह है कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय जिलों में उत्तर प्रदेश के मेैदानी जिलो बिजनौर , नजीबाबाद आदी से ही प्रतिदिन सबिजयों की आपूर्ती ट्रकों के द्वारा की जाती है ओर इनमें अधिकांश सब्जी के करोबारी मुस्लिम ही होते है।

हालकी विधायक महेन्द्र प्रसाद भट्ट की फेसबुक पोस्ट पर उनकी निंदा करने वालो की कमी नही है लेकिन अधिकतर लेाग इस से सहमत भी है। एक विधायक के द्वारा इस तरह से अपने क्षेत्र की जनता को बाहरी राज्य की सब्जियों का न खरीदने की अपील से हिंदु मुस्लिम किये जाने का अरोप भी लगने लगा है, लेकिन इतना तो स्पष्ट हो गया है कि निजामुदीन के तब्लिक जमातियों के मामले सामने आने पर ही इस तरह का माहौल बन रहा है। जबकि सब्जियों का करोबार वर्षो से उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रो में उत्तर प्रदेश के करोबारियों के द्वारा खास तौर पर पर्वतीय क्षेत्रो में होता आ रहा है।

दरअसल लाकडाउन के दौरान नजीबाबाद के एक सब्जी के करोबारी के ट्रक में बैठ कर े श्रीनगर तक पांच जमाती आये थे। लेकिन उन्होने अपनी पहचान छुपाने का काम किया। अब पुलिस ने सभी पांचो जमातियों की पहचान कर के उनको क्वांरटीन कर दिया गया है और उनको ट्रक में लाने का काम करने वाले ट्रक ड्राईवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है साथ ही सभी पंाचो जमातियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हो चुका है।

इसमें सबसे ज्यादा गम्भीर बात यह है कि श्रीनगर के मस्जिद मोहल्ले में किराये पर रहने वाने सुहैल अहमद 29 मार्च को अपने चार सथियों के साथ विजनैरे से जमात कर के श्रीनगर लौटा था। जबकि इस दौरन पूरे प्रदेश में लाकडाउन का सख्ती से पालन चल रहा है। बावजूद सुहैल अहमद अपने चार साथियों के साथ बिजनोैर से ही सब्जी के ट्रक तें श्रीनगर लौटा। लेकिन उसने इसकी कोई सूचना न तो अपने मकान मालिक को दी और न ही पुलिस प्रशासन को दी। दिल्ली के तब्लिक जमात का मामला सामने आने पर हडंकम्प मचा और माकान मालिक के द्वार इसकी शिकायत की गई। तब जाकर मामला खुला और पुलिस ने कड़ी कार्यकाही करते हुये सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और सभी को होम क्वारंटीन में रहने का निर्देश दिया। इसी तरह से कुमायु मे भी 67 ऐसे लेाग जांच के दायरे में आ चुके है जो तबलीकी जमात मे शामिल हुये थे। इनमें कई लेाग व्यापारी भी हैं। इन सब को पुलिस द्वारा चिन्हित किया जा चुका है और इन की जांच की जा रही है और होम क्वांरटीन किया जा रहा है।

अब प्रदेश सरकार ओर शासन प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन पूरी तरह से राज्य भर में जमातियों की खोज में जुट गया है गौर सरकारी सूत्रो की जानकारीह को माने तो प्रदेश भ्रार से 200 से पांच सौ लगो के जमात मे ंशमिल होने की चर्चाये हो रही है। अभी कई ऐसे लेाग है जो वापिस नही लौटे है साथ ही कई ऐसे लेागो की भी खोज की जा रही हे जो अन्य राज्यों से जमात के काम के लिये उत्तराखण्ड में आये है ओर उनके कहीं न कही छुपे होने की आंशका बनी हुई है। इसके ही कारण प्रदेश में भय बना हुआ है।

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