Uttarakhand

उत्तराखंड: बहुचर्चित नारी निकेतन यौन शोषण मामले में दोषियों को सुनाई सजा

आख़िरकार चार साल बाद  उत्तराखंड के देहरादून के बहुचर्चित नारी निकेतन यौन शोषण मामले में कोर्ट ने आज दोषियों को सजा सुनाई। मुख्य आरोपी गुरदास को 7 साल की सजा और 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।साल 2015 में नारी निकेतन में मूक बधिर संवासिनी से दुष्कर्म, गर्भपात कराने और भ्रूण को ठिकाने लगाने के आरोप में अदालत ने 30 अगस्त को सभी नौ आरोपियों को दोषी करार दिया था। अपर जिला जज षष्ठम धर्म सिंह की अदालत ने आज सजा का एलान किया । दोषी करार हुए आरोपियों में तत्कालीन अधीक्षिका समेत छह महिलाएं शामिल हैं।

आरोपी हासिम व ललित बिष्ट को पांच -पांच साल की सजा  और दस -दस  हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। शमा निगार, चंद्रकला, किरण व अनिता मैंदोला कोचार – चार  साल की कैद दस -दस  हजार रुपये जुर्माना, मीनाक्षी पोखरियाल व कृष्णकांत को दो -दो  साल की सजा और 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं मीनाक्षी और कांछा को जमानत मिल गई है।

कौन किस धारा में हुआ दोषी करार: 

गुरदास – आईपीसी 376 सी (किसी संस्था या संस्थान के संरक्षण में रह रही महिला या युवती से दुष्कर्म करना)
ललित बिष्ट व हाशिम -आईपीसी 376सी/511(किसी संस्था या संस्थान के संरक्षण में रह रही महिला या युवती से दुष्कर्म का प्रयास करना)
मीनाक्षी पोखरियाल और कृष्णकांत शाह – आईपीसी 201 (अपराध के बाद साक्ष्य मिटाना। इन्होंने भ्रूण को ठिकाने लगाया।)
समा निगार, किरण नौटियाल, अनिता मंदोला और चंद्रकला क्षेत्री- आईपीसी 313 (स्त्री की मर्जी के बगैर गर्भपात कराना), 201(अपराध के बाद साक्ष्य मिटाना) और आईपीसी 120बी (आपराधिक षड्यंत्र रचना)।

वर्ष  2015 में अक्टूबर माह  में  संवासिनी के साथ अनहोनी की घटना का खुलासा हुआ था। जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और नेहरू कॉलोनी थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इसके बाद 24 नवंबर 2015 को मुख्यमंत्री के आदेश पर तत्कालीन एसपी सिटी अजय सिंह के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया गया था ।

एसआईटी की जांच में एक-एक कर सभी परतें खुलती चली गईं और संवासिनी पर जुल्म ढाने वाले दरिंदे सलाखों के पीछे जाते रहे। इस मामले में पुलिस ने नारी निकेतन की तत्कालीन अधीक्षिका मीनाक्षी पोखरियाल, कर्मचारी अनिता मंदोला, क्राफ्ट टीचर शमा निगार, किरण नौटियाल, टीचर चंद्रकला क्षेत्री, संविदाकर्मी कृष्णकांत शाह उर्फ कांछा, होमगार्ड ललित बिष्ट, केयर टेकर हाशिम और मुख्य आरोपी सफाई कर्मचारी गुरदास को गिरफ्तार किया था।

गुरदास पर आरोप था कि उसने संवासिनी से दुष्कर्म किया, जिसके बाद वह गर्भवती हो गई थी। जबकि, होमगार्ड ललित बिष्ट और केयर टेकर हाशिम ने भी संवासिनी से दुष्कर्म का प्रयास किया था। इस बात का कहीं पता न चले इसके लिए बाकी सभी ने आपराधिक षडयंत्र रचते हुए संवासिनी का गर्भपात कराया और भ्रूण को जंगल में दबा दिया। एसआईटी ने दुधली के जंगल से भ्रूण भी बरामद कर लिया था।

इसका डीएनए मिलान गुरदास के साथ हुआ, जिससे केस को और मजबूती मिल गई। शासकीय अधिवक्ता संजीव सिसौदिया का कहना है कि अभियोजन की ओर से इस मुकदमे में कुल 23 गवाह पेश किए गए। जबकि, न्यायालय ने डीएनए रिपोर्ट को महत्वपूर्ण तथ्य माना और सभी पहलुओं पर गौर करते हुए सभी नौ आरोपियों को दोषी करार दे दिया। सभी दोषियों को न्यायालय परिसर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

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