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उत्तराखण्ड की राजनीति में एक बार फिर स्टिंग ऑपरेशन की गूंज है। स्टिंग ऑपरेशन के लिए चर्चित एक न्यूज चैनल के पत्रकार ने अपने सीईओ उमेश कुमार शर्मा के खिलाफ शिकायत की है कि मुख्यमंत्री के स्टिंग में नाकाम रहने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चैनल के सीईओ को गिरफ्तार तो कर लिया। लेकिन इसी के साथ प्रदेश के सिस्टम में भ्रष्टाचार को लेकर सवाल भी खड़े होने लगे हैं। खुद उमेश और उसकी पत्नी ने गिरफ्तारी को षड्यंत्र बताते हुए यहां तक दावा किया है कि वे बड़ा खुलासा करने वाले थे
प्रदेश में एक बार फिर से स्टिंग ऑपरेशन  की गूंज सुनाई दे रही है। इस बार अंतर इतना भर है कि सरकार और शासन स्टिंग ऑपरेशन करने वाले से एक कदम आगे रहे। नतीजा यह हुआ कि स्टिंग ऑपरेशन अपने अखिरी अंजाम तक पहुंचता उससे पहले ही ‘समाचार प्लस’ चैनल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उमेश जे कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई से सरकार ने अपने दामन को दागदार होने से बचा लिया। इस पूरे प्रकरण में एक बात फिर से साफ हो गई है कि उत्तराखण्ड का पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार की जद में आ चुका है जिसके चलते इस तरह के स्टिंग ऑपरेशन समाने आते रहे हैं। हालांकि यह भी एक तरह का व्यवस्था सुधारने का पक्ष माना जाता है। लेकिन अधिकतर स्टिंग ऑपरेशन महज ब्लैकमेलिंग के बड़े हथियार के तौर पर समाने आए हैं। इस हथियार से सरकार और सरकार के मुखिया तक नहीं बच पाए हैं।
समाचार प्लस चैनल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उमेश जे कुमार की गिरफ्तारी के बाद कई मामलों का खुलासा होना तय माना जा रहा है। जिस तरह से सरकार द्वारा इस प्रकरण में अति गोपनीयता से काम लिया गया उससे यह भी संभावना जताई जा रही है कि सरकार के कुछ उच्च पदस्थ लोगों के इसकी जद में आने की आशंका है। जिसके चलते सरकार द्वारा त्वरित कार्यवाही की गई।
इस प्रकरण में हुई कार्रवाई भी अजीब तरह के रंग में दिखाई दे रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते अगस्त माह में समाचार प्लस चैनल के इंवेस्टिगेशन एडिटर आयुष गौड़ द्वारा उमेश जे कुमार के खिलाफ राजपुर थाने में जान से मारने और स्टिंग ऑपरेशन  का दबाब बनाए जाने पर मुकदमा दर्ज करवाया गया। आरोप लगाया गया कि उमेश जे कुमार द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन करवाने के लिए उस पर बड़ा दबाब बनाया गया और नाकाम रहने पर जान से मारने की धमकी दी गई।
इस प्रकरण में मुख्यमंत्री का नाम आने के बाद राज्य सरकार पूरी तरह से सजग हो गई। इसके लिए बकायदा एक बड़ी और अति गोपनीय रणनीति बनाई गई। इसे अंजाम देने में कामयाबी हासिल की। इस तरह मामले के सामने आने से पूर्व ही सरकार द्वारा त्वरित कार्रवाई करने के पीछे कई ऐसे अंदेशे जताए जा रहे हैं जिनके खुलासे शायद ही कभी हो पाएं। लेकिन जितना खुलासा हुआ है उससे यह पता चलता है कि मुख्यमंत्री के सबसे चहेते और खास नौकरशाह ओम प्रकाश का स्टिंग ऑपरेशन हो चुका था जिसके लिए उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा था। इसके बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के भी स्टिंग ऑपरेशन की पूरी तैयारी कर ली गई थी। लेकिन देव योग कहें या त्रिवेंद्र रावत की सजगता कि स्टिंग ऑपरेशन की मंशा पूरी नहीं हो पाई औेर मामला पहले ही खुल गया या जानबूझ कर खोला गया। यह भी शायद कभी सामने आ पाए।
ऐसा नहीं है कि इस तरह के स्टिंग ऑपरेशन के मामले पहली बार इस प्रदेश की राजनीति में देखने को मिले हैं। राज्य बनने के बाद कई तरह के स्टिंग ऑपरेशन होने की चर्चाएं होती रही हैं। जिनमें कुछ तो चैनलों में प्रसारित भी हुए, लेकिन अधिकतर स्टिंग ऑपरेशन हमश्ेा के लिए गुम ही रहे। माना जाता है कि इस तरह से किए गए स्टिंग ऑपरेशन का असल उद्देश्य केवल ब्लैकमेलिंग करके सरकार और अधिकारियों से फायदा लेना ही था। बावजूद इसके जो स्टिंग ऑपरेशन सामने आए हैं और उनका प्रसारण किया गया उनसे प्रदेश की राजनीति पूरी तरह से प्रभावित हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल में भी इस तरह के कई स्टिंग ऑपरेशन सामने आए थे। सबसे बड़ा स्टिंग ऑपरेशन तो हरीश रावत की सरकार को ही ले डूबा और राज्य में पहली बार राष्ट्रपति शासन तक लगाया गया। हरीश रावत के समय उनके सचिव मोहम्मद शाहिद का शराब के कारोबार को लेकर किए गए लेन- देन का स्टिंग ऑपरेशन बेहद चर्चाओं में रहा। इस प्रकरण में केंद्र सरकार द्वारा भी हस्तक्षेप किया गया ओैर शाहिद को राज्य से गुजरात भेज दिया गया। अपनी सरकार को बचाए जाने के लिए हरीश रावत द्वारा बागी कांग्रेसी विधायकां को अपने पक्ष में करने का स्टिंग ऑपरेशन सामने आया। इसके अलावा कांग्रेस के कई विधायकों को अपने पक्ष में करने को लेकर विधायकों को लाखां का लालच देने का स्टिंग ऑपरेशन जिसमें तत्कालीन कांग्रेसी विधायक मदन विष्ट एवं बागी कांग्रेसी नेता और मंत्री रहे हरक सिंह रावत के साथ हुई बातचीत सामने आई थी। जिसमें मदन बिष्ट द्वारा बताया गया कि किस तरह से कांग्रेस के कई विधायकों को 15 से 25 लाख रुपए दिए गए जिससे वे भाजपा के साथ न जाएं।
इसी तरह से पूर्व मुख्यमंत्री निशंक के कार्यकाल में भी कई स्टिंग ऑपरेशन सामने आए लेकिन उनका असर प्रदेश की राजनीति में इतना नहीं पड़ा कि राजनीति की पूरी दिशा ही बदल जाए। भ्रष्टाचार और सरकार की नीतियों के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन जरूर समाने आए जिसमें पावर प्रोजेक्ट और स्टर्डिया भूमि घोटाले तथा नौकरशाहों के स्टिंग ऑपरेशन थे। जिनकी चर्चाएं खूब हुई।
विजय बहुगुणा सरकार के समय राज्य में नौकरशाहों के स्टिंग ऑपरेशन की खूब चर्चाएं रही है। अपर गृह सचिव जेपी जोशी का सेक्स स्कैंडल को लेकर आया स्टिंग ऑपरेशन भी बहुत चर्चाओं में रहा जिस पर ब्लैकमेलिंग करने के आरोप में कुछ पत्रकार जेल भी भेजे गए।
अब हालिया प्रकरण को देखें तो इसमें कई ऐसे सवाल हैं जिनका खुलासा होना बहुत जरूरी है। पूरे प्रकरण में छनकर आ रही जानकारी को सही मानें तो इसके पीछे अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश का एक वीडियो बनाए जाने की जानकारी सामने आ रही हैं। उमेश जे कुमार के खिलाफ शिकायत करने वाले उनके ही सहकर्मी आयुष गौड़ के अनुसार उसके द्वारा अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश का एक स्टिंग ऑपरेशन दिल्ली में किया गया था। लेकिन इसमें किसी प्रकार के लेन-देने की बात नहीं थी। सबसे चर्चित उत्तरांचल आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार मृत्युंजय मिश्रा की भूमिका सामने आई है। बताया गया है कि मृत्युजंय मिश्रा द्वारा आयुष गौड़ से ठेका दिलवाने के लिए बार-बार दस लाख की मांग की गई थी। आयुष गौड़ का यह भी कहना था कि उमेश शर्मा द्वारा बार-बार अपर प्रमुख सचिव ओम प्रकाश ओैर मुख्यमंत्री को किसी तरह रुपए पकड़ाए जाने का स्टिंग ऑपरेशन करने का दबाब बनाया गया जिसमें वह नाकाम रहा। यह कहानी स्वयं आयुष गौड़ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मीडिया के सामने रखी।
मीडिया के एक वर्ग में चर्चाएं तो यह भी हो रही हैं कि इस प्रकरण के पीछे केंद्र सरकार की अति महत्वपूर्ण और करोड़ां के बजट वाली परियोजना से जुड़े मामले हैं। यह योजना उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश से सीधे जुड़ी है। कहा जा रहा है कि इस परियोजना को लेकर एक बड़ा स्टिंग ऑपरेशन किया जा चुका है। इसी स्टिंग ऑपरेशन को लेकर ही सारी कवायद की गई है। इसके अलावा चर्चा यह भी है कि मुख्यमंत्री के कई करीबियों और भाई-भतीजे का भी स्टिंग किया जा चुका है जिसकाकबूलनामा तो स्वयं आयुष गौड़ भी कर चुका है। इसीलिए सरकार की इस बड़ी कार्रवाई के पीछे के निहितार्थ मीडिया औेेर राजनीतिक जगत में निकाले जा रहे हैं।
इस पूरे प्रकरण में प्रदेश सरकार ने पहली बार इस तरह के मामलों में कड़ी कार्रवाई करने का काम किया है। किसी बड़ी जांच एजेंसी की ही तरह पूरी रणनीति बनाकर उमेश जे कुमार शर्मा पर कानूनी कार्यवाही का जो जामा पहनाया है वह वास्तव में एक सराहनीय कदम मना जाना चाहिए। खास तौर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत जिनके त्वरित निर्णय से इस तरह के स्टिंग ऑपरेशन ओैर उससे राज्य में संभावित राजनीतिक अस्थिरता को टाला गया। यह सरकार और मुख्यमंत्री की मजबूत इच्छाशक्ति को ही दिखाता है।
अब उमेश जे कुमार अपने विरुद्ध हुई कार्रवाई को एक षड्यंत्र बता रहे हैं और जल्द ही बड़ा ख्ुलासा करने की बात कह रहे हैं। उनकी पत्नी सोनिया शर्मा भी सरकार की इस कार्यवाही को षड्यंत्र बताकर मामले में बड़े खुलासे करने की बात कर ही हैं। इससे आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति और भी गरमाने के आसार बन रहे हैं क्योंकि चर्चाएं तो यहां तक हो रही हैं कि उमेश जे कुमार के गाजियाबाद आवास से पुलिस को जो भी स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े तथ्य या सामग्री प्राप्त हुई है उसमें वह स्टिंग ऑपरेशन ही नहीं है जिसके लिए यह पूरी रणनीति बनाकर कार्यवाही की गई। हालांकि इस बात के कोई प्रमाण सामने नहीं आए हैं, परंतु जिस तरह से उमेश शर्मा द्वारा जल्द ही बड़े खुलासे करने की बात कही गई है उससे सरकार भी सकते में है और अपने कदम फूंक-फूंककर रख रही है।

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