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Uttarakhand

निजी अस्पतालों में त्रस्त जनता

  •     अली खान
  • जनपद हरिद्वार के ग्रामीण अंचलों में शायद ही कोई ऐसा गांव हो, जहां डिग्रीधारक डॉक्टर अस्पताल खोले बैठे हों। लेकिन अब ग्रामीण अंचलों में चिकित्सक अपने अस्पताल पर बडे़-बड़े गंभीर रोगों के इलाज का दावा करते हैं। मरीजों को अपने अस्पताल में आकर्षित करने के लिए बड़े-बड़े प्रचार करते हैं। यहां असाध्य बीमारियों का इलाज भी किया जाता है। जबकि इस प्रकार के गंभीर रोगों का इलाज करने का न तो इनके पास कोई अनुभव है और न ही कोई स्पेशल डिग्री इनके पास होती हैं। ये शहरी चिकित्सकों की तर्ज पर यह मोटा पैसा कमाने के लिए अस्पताल चला रहे हैं। ऐसे चिकित्सक मरीजों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं जिसके परिणाम स्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे चिकित्सकों द्वारा इलाज करने के दौरान कई मौतें हो चुकी हैं।
  • 5 दिसंबर को ऐसा ही एक मामला कलियर- सोहलपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल का सामने आया है। जहां उपचार के दौरान गर्भवती महिला की मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। हंगामा होता देख अस्पताल स्टाफ मौके से फरार हो गया। वहीं मामले की सूचना पाकर पुलिस बल भी पहुंचा। मृतक महिला के बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटनाक्रम के अनुसार नाजिया (34 वर्ष) पत्नी अब्दुल मलिक निवासी बेडपुर पिरान कलियर को देर रात बेडपुर चौक स्थित अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
  • परिजनों के अनुसार अस्पताल में कोई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं आया और अस्पताल के स्टाफ ने ही महिला की प्रेग्नेंसी के लिए दर्द के इंजेक्शन लगाए। आरोप है कि महिला दर्द से तड़पती रही और अस्पताल स्टाफ इंजेक्शन लगाता रहा। महिला ने बाद में दम तोड़ दिया। महिला की मौत के बाद परिजन और रिश्तेदार मौके पर एकत्र हो गए। उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। उनके द्वारा पुलिस को भी सूचना दी गई और सीएमओ को भी फोन किया गया।
  • हंगामा होता देख अस्पताल स्टाफ मौके से भाग गया। मामले की सूचना पाकर पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया। उन्होंने परिजनों को शांत करने का प्रयास किया। महिला के पति का कहना है कि उनके सात बच्चे हैं और अब बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा। उन्होंने कहा कि महिला की मौत में अस्पताल स्टाफ की बड़ी लापरवाही है। उनकी ओर से स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को सूचना दी है।
  • बता दें कि कलियर, भगवानपुर, झबरेड़ा, मंगलौर, लंढौरा, बहादराबाद एवं लक्सर के ग्रामीण अंचलों में इस तरह के झोलाछाप या अयोग्य चिकित्सकों ने छोटे- छोटे अस्तपाल बना रखे हैं। इस तरह की घटनाएं पहले भी घट चुकी हैं। जनहित में ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होना बेहद आवश्यक है। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते मरीजों की मौत पर सख्त कार्रवाई नहीं हेती है। इस बाबत जब हरिद्वार के सीएमओ कुमार खगेंद्र से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस मामले की वह जांच कराएंगे। ग्रामीण इलाके में ऐसे निजी अस्पतालों पर नियंत्रण लगाने की बाबत पूछने पर उन्होंने कहा कि हमारी टीम समय- समय पर निजी अस्पतालों का निरीक्षण करती रहती है। अगर जरूरत पड़ी तो उनकी जांच कराई जाएगी।

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