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Uttarakhand

साजिशों के भंवर में त्रिवेंद्र

उत्तराखण्ड की त्रिवेंद्र सरकार साजिशों के भंवर में फंस चुकी है। उमेश कुमार स्टिंग प्रकरण के बाद अब कांग्रेस मूल के भाजपा विधायक मुख्यमंत्री के लिए परेशानी की वजह हैं। ‘दि संडे पोस्ट’ को मिली जानकारी के अनुसार हरीश रावत सरकार से बगावत कर भाजपा में शामिल होने वाले विट्टायक अब वर्तमान सरकार से भी नाराज हो चले हैं। ये नेता अब कांग्रेस में वापसी की राह तलाश रहे हैं। खबर है कि एक ऐसे बड़े पूंजीपति के जरिए कांग्रेस आलाकमान से संपर्क साधा गया है जिसने हालिया संपन्न पांच विधानसभा चुनावों में पार्टी की बड़ी मदद की है। दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा संगठन में भी सीएम की कार्यशैली के चलते आक्रोश पनप रहा है

 

उत्तराखण्ड में सियासी तापमान पिछले कुछ अर्से से खासा गर्म हो चला है। भारी बहुमत के साथ सत्ता में काबिज हुई भाजपा सरकार इस तापमान के ताप से झुलस रही है। खास बात यह कि सरकार के संकट का कारण विपक्षी दल नहीं, बल्कि सरकार में शामिल मंत्री और पार्टी के असंतुष्ट विधायक हैं। ‘दि संडे पोस्ट’ को पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2016 में कांग्रेस से बगावत कर भाजपा का दामन थामने वाले विधायक एक बार फिर से कुछ ऐसा करने की जुगत लगा रहे हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में मंत्री हरक सिंह रावत और पूर्व सीएम विजय बहुगुणा पर ऐसी किसी बगावत को अंजाम देने का शक पिछले दिनों राज्य विधानसभा में हरक सिंह के बयान के बाद से गहरा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी को सदन में श्रद्धांजलि देते समय हरक सिंह ने 2003 में तिवारी सरकार को गिराने के षड्यंत्र की बात कह डाली। बकौल हरक सिंह 28 कांग्रेसी विधायकों को एकजुट कर वे भाजपा के सहारे तिवारी सरकार को गिराने की रणनीति बना चुके थे लेकिन विजय बहुगुणा के कहने पर वे पीछे हट गए। हरक सिंह का बयान ऐसे समय में आया है जब स्वयं त्रिवेंद्र रावत अपनी सरकार को अस्थिर करने के प्रयासों की बात कह चुके हैं। एक टीवी चैनल मालिक की गिरफ्तारी इसी आशंका के चलते पिछले दिनों की गई। ‘समाचार प्लस’ नामक इस चैनल के मालिक के संबंध हरक सिंह रावत और विजय बहुगुणा संग बेहद मधुर रहे हैं। हरीश रावत के खिलाफ हरक सिंह समेत नौ विधायकों की बगावत के दौरान इस चैनल के स्टिंग ऑपरेशन खासी चर्चा में रहे थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत पर सीबीआई ने इसी चैनल के स्टिंग को आधार बना जांच भी शुरू की थी। यह माना जाता है कि तब इस चैनल के जरिए रावत सरकार को गिराने के पीछे हरक सिंह ही मास्टर माइंड थे। अब एक बार फिर इन्हीं हरक सिंह रावत के तेवर बगावती हो चले हैं। विधानसभा में उनका यह कहना कि एनडी तिवारी ने उनकी नाराजगी को समझा और उसे दूर किया, स्पष्ट रूप से वर्तमान मुख्यमंत्री की कायैशैली को लेकर उनकी नाराजगी दर्शाता है। हरक सिंह इससे पहले भी कई बार सीएम संग अपनी नाखुशी को सार्वजनिक तौर पर प्रकट कर चुके हैं।

‘दि संडे पोस्ट’ के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार भाजपा के भीतर खुद को असहज महसूस कर रहे कांग्रेसी विधायक एक बार फिर से राजनीतिक उठापटक की गणित बिठा रहे हैं। प्रदेश की राजधानी देहरादून से निकल कर अब सरकार को अस्थिर करने का खेल दिल्ली पहुंचने की खबर है। इस अखबार को मिली जानकारी के अनुसार त्रिवेंद्र सिंह से नाराज पूर्व कांग्रेसियों का एक धड़ा कांग्रेस आलाकमान से संपर्क बनाने का प्रयास कर रहा है। कांग्रेस के एक बड़े नेता को एक बड़े पूंजीपति द्वारा इस बाबत विश्वास में लिया गया है। यह भी खबर है कि कभी भाजपा से मधुर संबंध रखने वाले इस पूंजीपति ने पिछले दिनों संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावां में कांग्रेस की आर्थिक मदद भी की है।

पिछले दिनों सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के करीबी नौकरशाहों और परिजनों के कथित स्टिंग ऑपरेशन के तार इसी उठापटक की गणित से जुड़े हैं। टीवी चैनल मालिक उमेश कुमार से रिमांड के दौरान उत्तराखण्ड पुलिस कुछ खास जानकारी जुटा नहीं सकी है। उमेश कुमार इन दिनों जमानत पर हैं। झारखंड की पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए कुमार आने वाले समय में कथित स्टिंग का इस्तेमाल त्रिवेंद्र सिंह के खिलाफ कर सकते हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा के कुछ बड़े नेताओं के हस्तक्षेप के चलते और उत्तराखण्ड हाईकोर्ट की इस प्रकरण में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर लगी रोक के बाद त्रिवेंद्र सरकार बैकफुट पर आ गई है। बहुत संभावना है कि कथित स्टिंग का सच सामने कभी न आए। लेकिन त्रिवेंद्र रावत सरकार का संकट इससे समाप्त होते नजर नहीं आ रहा। मुख्यमंत्री की कार्यशैली से केवल बागी कांग्रेसी नेता ही नहीं, बल्कि भाजपा के खांटी नेता भी नाराज चल रहे हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट उमेश कुमार प्रकरण में बेवजह अपना नाम उछाले जाने से आक्रोशित हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री कार्यालय से जानबूझकर वह पत्र लीक किया गया जो भट्ट ने बहुगुणा सरकार के दौरान उमेश कुमार पर दर्ज मुकदमों के खिलाफ लिखा था। प्रदेश अध्यक्ष की नाराजगी के चलते सीएम के ओएसडी उर्वादत्त भट्ट का पार्टी कार्यालय में बैठने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अजय भट्ट को आशंका है कि सीएम कार्यालय उनके खिलाफ चल रहे षड्यंत्र का हिस्सा है। पार्टी में सरकार गठन के पौने दो वर्ष बीतने के बाद भी दो मंत्री पदों का न भरा जाना और सरकारी निगमों में दायित्व न दिए जाने को लेकर भी भारी रोष है।

जानकारों की मानें तो पार्टी अध्यक्ष की जोरदार पैरवी के बावजूद सीएम त्रिवेंद्र सिंह दायित्व देने के अनिच्छुक हैं। सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री के खिलाफ राज्य की नौकरशाही में भी बड़ी नाराजगी है। भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड किए गए दो आईएएस अधिकारियों को नाराज नौकरशाहों ने पूरा समर्थन दे डाला है। सस्पेंड किए गए एक अधिकारी के खिलाफ पुख्ता सबूत न मिलने के चलते बहाली किए जाने के बाद त्रिवेंद्र रावत की बड़ी किरकिरी हुई है। नौकरशाही में इस बात पर भी बड़ा आक्रोश है कि सीएम चुनिंदा अफसरों की सलाह पर सारे निर्णय लेते हैं। इन अधिकारियों को इन दिनों ‘बिहारी लॉबी’ कह पुकारा जा रहा है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ओमप्रकाश, सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा और उनके आईएएस पति नीतेश झा इस लॉबी का हिस्सा हैं।

कुल मिलाकर राज्य की राजनीति में इन दिनों भारी जनादेश से सत्ता में आई सरकार को अस्थिर करने के षड्यंत्रों से जूझता देखा जा सकता है। हरक सिंह रावत का ताजातरीन बयान और राज्य के शक्तिशाली नौकरशाह और सीएम के करीबियों का कथित स्टिंग आने वाले समय में कुछ गुल अवश्य खिलाएगा। अब देखना यह है कि बागी कांगेसी नेताओं को लेकर कांग्रेस आलाकमान क्या निर्णय लेता है। हरक सिंह और विजय बहुगुणा का गेम प्लान अब इसी निर्णय पर टिका है। यदि कांग्रेस में वापसी के रास्ते इन बागियों के लिए खुलते हैं तो निश्चित ही त्रिवेंद्र सरकार को अस्थिर करने का बड़ा प्रयास होगा। शायद तब कथित स्टिंग का सच भी सामने आ जाए।

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