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Uttarakhand

गले की फांस बना त्रिवेंद्र का शराब मोह

आबकारी राजस्व के लिए राज्य की त्रिवेंद्र सरकार ने तीर्थस्थलों में भी शराब के ठेके खोल डाले। अब यही शराब के ठेके राज्य के नए मुख्यमंत्री तीरथ रावत के लिए बड़ी समस्या बन चुके हैं। जनता नए मुख्यमंत्री से इन्हें हटाने की उम्मीद कर रही है

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ने शराब के राजस्व को लेकर जो मोह दिखाया, अब वह नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के गले की फांस बनता दिखाई दे रहा है। इससे बाहर निकलने के लिए उनकी छटपटाहट देखते ही बनती है। अधिसूचित कुंभ मेला क्षेत्र में त्रिवेंद्र रावत सरकार के कार्यकाल में शराब के जो ठेके खोले गए थे उन्हें अब मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बंद करवाए जाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इससे यह बात साफ हो गई है कि त्रिवेंद्र रावत सरकार पर शराब का जादू इस कदर सिर चढ़कर बोल रहा था कि शराब के राजस्व को पाने के लिए तमाम तरह की सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं को ताक पर रख दिया गया था। राज्य में कई ऐसे स्थान हैं जहां शराब के करोबार और ठेकांे को लेकर जनता में बड़ा भारी रोष है। और इसका बड़ा असर आने वाले समय में सरकार पर पड़ना निश्चित माना जा रहा है। प्रदेश में शराब का करोबार एक ऐसा ज्वलंत मुद्दा रहा है जिसकी आंच में हर सरकार को झुलसना पड़ा है। पहली निर्वाचित तिवारी सरकार के समय से आरंभ हुआ शराब का यह मोह भाजपा की खण्डूड़ी और निशंक सरकार के दामन में भी अपने दाग के निशान दे चुका है।

कांग्रेस की विजय बहुगुणा और हरीश रावत सरकार के दामन में भी शराब करोबारियों के लिए सरकार पर आबकारी नीति बदलने वाले का आरोप लग चुका है। यही नहीं हरीश रावत सरकार की आबकारी नीति के चलते हाईकोर्ट ने राज्य की मंडी समिति पर लाखों का जुर्माना तक किया है। एक गैर सरकारी संगठन द्वारा अपने आप को देश का सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री घोषित करवाने वाले त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में तो एक तरह से उत्तराखण्ड प्रदेश, शराब प्रदेश तक कहा जाने लगा था, जबकि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री बनने के बाद घोषणा की थी कि उनकी सरकार प्रदेश को कुछ सालों में शराब से मुक्त कर देगी। लेकिन हकीकत में इसके उलट ही किया जाता रहा और त्रिवेंद्र सरकार के द्वारा नए-नए शराब के ठेके खुलवाए जाते रहे यहां तक कि जिन पहाड़ी क्षेत्रों में केवल अंग्रेजी शराब की ही बिक्री होती रही थी उन पहाड़ी जिलों में भी देशी शराब के कारोबार को बढ़ावा देने के लिए अंग्रेजी शराब के ठेकों में देशी शराब की बिक्री की अनुमति तक सरकार के द्वारा दी गई।

शराब से मिलने वाले राजस्व का मोह त्रिवेंद्र रावत सरकार पर इस कदर हावी रहा कि तीर्थ और धार्मिक क्षेत्रों तक में शराब के नए-नए ठेकांे और मदिरा बार के भी लाइसेंस जारी किए गए। यहां तक कि देवप्रयाग के नजदीक शराब के कारखाने के अलावा राज्य में चार नए शराब के कारखानों के लिए भी सरकार ने अनुमति देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शराब के करोबार को बढ़ावा देने के लिए बार के नियमों को बदला गया और बार में 18 वर्ष के युवाओं को भी शराब परोसने की अनुमति तक दी गई। एक तरह से कहा जाए कि त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के समय प्रदेश को शराब के करोबार में डुबोने को ही काम किया तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। त्रिवेंद्र सरकार शराब के राजस्व के लालच में इस कदर रही कि कोरोना महामारी के दौर में भी प्रदेश में लाकडाउन में छूट के दौरान शराब को अति आवश्यक वस्तु की श्रेणी में रख दिया गया और जिस तरह से सभी आवश्यक वस्तुओं की विक्री की अनुमति सरकार के द्वारा दी गई उसी तरह से शराब के कराोबार की अनुमति प्रदान की जाती रही। यह हास्यास्पद ही कहा जा सकता हेै कि जनता के लिए दूध, अनाज, सब्जी, पेट्रोल तथा दवाएं अति जरूरी वस्तु मानी गई तो शराब को भी अति आवश्यक वस्तुओं में रख दिया गया जिससे सरकार को राजस्व मिलता रहे।

त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के कार्यकाल में शराब के कारोबार को बढ़ावा देने के अनेक मामले उजागर होे रहे हैं। शराब के कारोबार के लिए तत्कालीन सरकार ने तमाम धर्मिक, तीर्थ और सामाजिक मान्यताओं तक को तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। तीर्थ स्थानों में शराब के करोबार के लिए बार की अनुमति और शराब के नए-नए ठेके दिए जाते रहे। हैरानी की बात यह है कि कुंभ मेला क्षेत्र ऋषिकेश को भी नहीं बख्शा गया। विख्यात तीर्थ नगरी ऋषिकेश जो कि सरकार के द्वारा कुंभ मेला क्षेत्र में अधिसूचित है, साथ ही मुनि की रेती और स्वार्गाश्रम लक्षमण झूला से लेकर गरूड़ चट्टी तक कुम्भ मेला क्षेत्र माना गया है। इन स्थानों में बार के लाईसेंस और शराब के ठेके खोले गए। ऋषिकेश के पौराणिक और धार्मिक मान्यता वाले बीरभद्र महादेव मंदिर के कुछ ही सौ मीटर पूर्व में गंगा नदी के समीप एक होटल को बार का लाइसेंस सरकार के द्वारा दिया गया, जबकि वीरभद्र महादेव का यह क्षेत्र स्कंद पुराण में कनखल क्षेत्र माना जाता है। यह दक्ष प्रजापति के यज्ञ के विध्वंस के लिए भगवान शंकर के वीरभद्र अवतार के लिए विख्यात क्षेत्र माना जाता है। इसी तरह से कुंभ मेला क्षेत्र के श्यामपुर गुमानी वाला क्षेत्र में एक होटल को बार का लाइसंेस त्रिवेंद्र रावत सरकार के द्वारा दिया गया। गौर करने वाली बात यह है कि ऋषिकेश में कई वर्षों से अंडा, मांस और शराब के करोबार पर प्रतिबंध लगा हुआ हेै।

बावजूद इसके त्रिवेंद्र सरकार द्वारा जमकर नियमों और मानकों को तोड़ते हुए धार्मिक मान्यताओं को भी ठेस पहुंचाई जाती रही। त्रिवेंद्र रावत सरकार के कार्यकाल मंे सबसे ज्यादा चैंकाने वाला निर्णय मुनि की रेती में और गरूड़ चट्टी में शराब के नए ठेके खुलावने का रहा है। स्कंद पुराण में मुनि की रेती तीर्थ स्थान है और गरूड़ चट्टी भगवान विष्णु के वाहन गरूड़ की तपस्या स्थली के तौर पर माना जाता है। गरूड़ चट्टी को बदरी-केदार की पैदल यात्रा का दूसरा पड़ाव माना जाता है। पैराणिक काल से ही ऋशिकेश से पैदल यात्रा के समय लक्ष्मण झूला के बाद गरूड़ चट्टी पड़ाव है। पैदल यात्रा के लिए बनाई गई चटियों के गरूड़ चट्टी का पौराणिक महत्व है। इस स्थान पर सरकार ने शराब के करोबार को बढ़ावा देने के लिए शराब का ठेका खुलवाया। ऐसा नहीं है कि जनता में सरकार के निर्णय के खिलाफ विरोध नहीं हुआ है। जनता में बड़ा भारी विरोध और रोष भी फैला जिसको लेकर धरने प्रदर्शन तक किए गए लेकिन सरकार ने मुकदमे दर्ज करवा कर विरोध को दबाने का प्रयास किया। मुनि की रेती शराब के ठेके का विरोध करने वाले अनेक लोगों पर मुकदमे दर्ज करवाए गए जिनमें आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल बहुखण्डी, कांग्रेसी नेता हिमांशु विजल्वाण और पूर्व सभासद अनुराग पयाल पर गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज करावाये गए। लेकिन जनता का विरोध आज भी बना हुआ है जिसका असर यह हुआ कि नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के द्वारा कुंभ मेला क्षेत्र में शराब के कारोबार पर रोक लगाने का आदेश जारी करना पड़ा। हालांकि इस अदेश में यह साफ नहीं है कि कुंभ मेले के बाद यह शराब के ठेके बंद ही रहेंगे, निरस्त हांेगे या फिर मेले के समाप्त होने के बाद फिर से आरंभ होंगे।

राज्य में शराब के करोबार की क्या स्थिति है इसका ताजा प्रमाण भी खासा दिलचस्प है। टिहरी जिले के चंबा नगर पालिका क्षेत्र में शराब की दुकान अचानक ही सोशल मीडिया में तेजी से सुर्खियों में आ गई। जिस दुकान में अंग्रेजी शराब का ठेका खोला गया है उस दुकान के ठीक ऊपर दुकान के मूल स्वामी का अपना शिखर वाला मंदिर स्थापित है। मंदिर के नीचे शराब की दुकान स्थापित की गई है। सोशल मीडिया में इसको लेकर जमकर सरकार पर सवाल खडे़ किए गए तो कुछ ही घंटों के बाद दुकान से शराब को बोर्ड हटवा दिया गया। चर्चा है कि चंबा पुलिस के द्वारा शराब का बोर्ड हटवाया गया। लेकिन सरकार की फजीहत फिर भी नहीं रुकी तो शाम होते होते मंदिर के शिखर को ही ढक दिया गया जिससे यह पता न चल पाए कि शराब की दुकान के ऊपर मंदिर बना हुआ है। हालांकि यह मंदिर भवन स्वामी का निजी मंदिर बताया जा रहा है, लेकिन सवाल टिहरी जिला प्रशासन और जिला आबारी विभाग पर ही उठ रहे हंै जिनके द्वारा शराब की दुकान के आवंटन के समय मानकों की अनदेखी की गई है। यह अनदेखी यह बताती है कि किस तरह से सरकार शराब के राजस्व के मोह में फंसी रही है और इसको पाने के लिए सभी नियमों मानकों और धार्मिक मान्यताओं तक को ताक पर रखा गया है।

  • पौराणिक महत्व वाले वीरभद्र महादेव मंदिर ऋषिकेश के निकट बार एवं ठेका
    श्यामपुर गुमानीवाला क्षेत्र, कुंभ अधिसूचना इलाके में बार
    भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ की तपोभूमि गरुड़ चट्टी में ठेका
    तीर्थस्थल मुनि की रेती में ठेका
    टिहरी में ऊपर मंदिर नीचे शराब की दुकान
    अधिसूचित कुंभ मेला क्षेत्र में शरब के ठेके

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