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Uttarakhand

प्रधानमंत्री का अपमानजनक भाषा में निंदा करने वाले को त्रिवेंद्र सरकार का तोहफा

अगर कोई विपक्ष का नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई बयान देता है, तो भाजपा की पूरी टीम और आईटी सेल उसके खिलाफ मोर्चा खोल देते हैं। भले ही बयान सार्वजनिक दिया गया हो या सोशल मीडिया में, इससे भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ता। पूरी आईटी सेल उस व्यक्ति के कपड़े उतारने में लग जाती है, परंतु आश्चर्य की बात यह है कि उत्तराखण्ड में प्रधानमंत्री को अपशब्द और अपमानजनक भाषा में निंदा करने वाले व्यक्ति को प्रदेश सरकार न सिर्फ प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि उसे सरकारी नौकरी से नवाजा जा रहा है। मजे की बात यह है कि स्वयं मुख्यमंत्री के अधीन विभाग में ऐसे व्यक्ति को एडजेस्ट करने के लिए सरकारी सेवा के नियमों तक को ताक पर रखा गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के विभाग सूचना एवं लोक संपर्क विभाग में 2 जुलाई 2020 को प्रमोद रावत नाम के व्यक्ति को संपादक पद पर नियुक्ति दी गई, जबकि सूचना विभाग में संपादक का पद लोक सेवा आयोग के तहत आता है इस पर किसी तरह की नियुक्ति नहीं हो सकती। बावजूद इसके प्रमोद रावत को न सिर्फ नियुक्ति दी गई बकायदा उसका सूचना विभाग में बड़े जोर-शोर से स्वागत-सत्कार भी किया गया।

लेकिन अगले ही दिन सोशल मीडिया में इस बात को लेकर खूब चर्चा होने लगी और तमाम तरह की पोस्ट और प्रमाण सामने आ गए कि जिस प्रमोद रावत को सूचना विभाग में संपादक के पद पर तैनात किया गया है, यह व्यक्ति पूर्व में भाजपा और खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का न सिर्फ प्रबल विरोधी रहा है ओैर जमकर साशल मीडिया में प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्दों औेर अपमानजनक टिप्पणियां करता रहा है।

कौन है यह व्यक्ति मैं तो इसे नहीं जानता। अगर ऐसा हुआ है तो यह नहीं होना चाहिए। मैं इस मामले की जानकारी लूंगा। अगर ऐसा किया गया है तो यह बहुत गलत है। आप मुझे पूरी जानकारी भेज दें, मैं बात करता हूं।
बंशीधर भगत, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा उत्तराखण्ड

प्रमोद ने पूर्व में ट्वीटर पर जमकर केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ पोस्ट की हैं और कई पोस्टों को साझा भी किया गया। यही नहीं प्रधानमंत्री के खिलाफ कई अपमानजनक पोस्टों को रिट्वीट किया है। यहां तक कि राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अपनी पोस्ट में प्रमोद रावत ने लिखा है कि जिस मुल्क का प्रथम नागरिक ही जाति के आधार पर चुना जाए उस मुल्क से जातिवाद को खत्म करने की ही बात बेमानी है। प्रदेश सरकार औेर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के खिलाफ भी सोशल मीडिया में जमकर भड़ास निकाली है। पोस्ट में मुख्यमंत्री के लिए लिखा है कि त्रिवेंद्र से मोहभंग।

हैरानी की बात यह है कि प्रमोद रावत को न सिर्फ प्रदेश सरकार ने सूचना जैसे महत्वपूर्ण विभाग में संपादक के पद पर नियुक्ति दी है, जबकि यह पद कमीशन के तहत आता है। भाजपा के समर्पित नेताओं को दरकिनार करते हुए कांग्रेस और विपक्ष की बोली बोलने वाले व्यक्ति को सरकार ने सरकारी नौकरी का तोहफा देकर उसका सम्मान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं है, तो मैं इस पर कुछ भी बयान नहीं दे सकता। मैं इसकी जानकारी ले लूं तब आपको कोई बयान दे पाऊंगा।
देवेंद्र भसीन, प्रदेश प्रवक्ता भाजपा

गौर करने वाली बात यह है कि जिस तरह से प्रदेश सरकार की नीतियों और सरकारी सिस्टम पर सवाल उठाने वाले पत्रकारां के खिलाफ सरकार द्वारा मुकदमे दर्ज करवाए जा रहे हैं। विगत कुछ महीनों से प्रदेश में देखा जा रहा हे कि सोशल मीडिया में सरकारी सिस्टम पर सवाल उठाने पर पुलिसिया कार्रवाई की गई हैं लेकिन भाजपा सरकार खास तोर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपमानजनक शब्दों में पोस्ट औेर टिप्पणी लिखने वाले व्यक्ति को प्रदेश सरकार आसानी से सूचना विभाग में संपादक जैसी पोस्ट पर तैनाती देती है। यह बात और खास बात हो जाती है कि इस पोस्ट के लिए भाजपा के समर्पित व्यक्तियों को दरकिनार किया गया है जिसका अब दबी जुवान में विरोध भी होने लगे हैं।

यह तो सूचना विभाग का मामला है। सूचना विभाग में नियुक्ति हुई है और सूचना विभाग ने ही नियुक्ति दी है। इस पर मैं क्या कह सकता हूं। आप सूचना विभाग से ही पूछें।
रमेश भट्ट, मीडिया सलाहकार मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड

हालांकि इस पूरे मामले में अब भाजपा नेता जानकारी न होने की बात कह रहे हैं और बयान देने से बच रहे हैं। स्वयं सूचना विभाग के अधिकारी भी इसे राजनीतिक नियुक्ति मानकर इस पर कोई बात नहीं करना चाहते हैं। प्रमोद रावत से भी उनका पक्ष जानना चाहता तो उन्होंने फोन ही काट दिया। इससे यह तो स्पष्ट हो रहा है कि इस तैनाती के पीछे सूचना विभाग और मुख्यमंत्री के खास चहेते अधिकारियों का ही हाथ होने की बात सामने आ रही है। सूत्रों की मानें तो प्रमोद रावत की संपादक के पद पर तैनाती के मामले में मुख्यमंत्री को भी अंधेरे में रखा गया है। हो सकता है कि यह बात सही भी हो, लेकिन इस मामले के सामने आने से इतना तो साफ हो गया है कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री का अपमानजनक शब्दों में विरोध करने वालों का स्वागत हो रहा है और इनाम के तोर पर सरकारी नौकरी दिया जा रहा है।

नोट : इस पूरे मामले में सूचना महानिदेशक और अपर निदेशक से बात करने का कई बार प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो पाई है।

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