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Uttarakhand

अब गैरसैंण पर घिरे त्रिवेंद्र

गैरसैंण में भूमि खरीद पर लगी रोक हटाकर राज्य की भाजपा सरकार ने आफत मोल ले ली है। संदेह उठ रहे हैं कि क्या ऐसा फैसला भूमाफिया को फायदा पहुंचाने और गैरसैंण का मुद्दा हमेशा के लिए खत्म कर देने के लिए हुआ? जब वहां जमीन ही नहीं बचेगी तो भला राजधानी कहां बनेगी? आरोप लग रहे हैं कि सूर्यधार में जिस तरह मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के एक करीबी मित्र ने जमीनें खरीदी, उसी तरह गैरसैंण में भी भूमाफिया सक्रिय हो जाएगा। इन मित्र की पत्नी और मुख्यमंत्री की पत्नी की पार्टनरशिप में सहस्त्रधारा में करोड़ों के भूखंड खरीदे जा चुके हैं। आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं कि यह मित्रता कहीं गैरसैंण को भारी न पड़ जाए

 

उत्तराखण्ड की राजनीति में सरकार के प्रचंड बहुमत का साइड इफेक्ट सत्ताधारी पार्टी की अंदरूनी सियासत के तौर पर देखा गया है, लेकिन अब इसका बड़ा प्रभाव प्रदेश के हितों खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्र पर भी पड़ता दिखने लगा है। बहुमत के आसरे सरकार कई ऐसे निर्णय ले रही है जिसके चलते आने वाले समय में प्रदेश में कई विवाद और समस्याएं पैदा होंगी। इसका ताजा उदाहरण गैरसैंण में भूमि की खरीद पर लगी रोक को हटाए जाने के तौर पर सामने आया है। इसको लेकर सरकार का तर्क है कि स्थानीय निवासी अपनी भूमि को आवश्यकता पड़ने पर बेच नहीं पा रहे हैं।

हास्यास्पद है कि एक तरफ सरकार मानती है कि स्थानीय लोग भूमि को बेच नहीं पा रहे थे, लेकिन दूसरी तरफ यह भी मानती है कि गैरसैंण में स्टाम्प पेपर पर भूमि खरीदी-बेची जा रही है, इससे कानूनी विवाद पैदा हो रहे थे। लिहाजा भूमि खरीद पर रोक हटा दी गई। सरकार पावर ऑफ अटर्नी के नाम का सहारा लेकर जो तर्क दे रही है, वही तर्क उस पर सवाल खड़े कर रहा है। वर्ष 2003 में राज्य की पहली निर्वाचित कांग्रेस की तिवारी सरकार के समय राज्य में भू अधिनियम लागू किया गया था। इसके तहत राज्य में पावर ऑफ अटर्नी के नाम पर भूमि की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई जा चुकी है। यह रोक आज भी लागू है। नियम के अनुसार पावर ऑफ अटर्नी केवल रक्त संबंधों में ही लागू है। इसके अतिरिक्त किसी अन्य को पावर ऑफ अटर्नी के नाम पर भूमि बेचने और खरीदने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। इस नियम के तहत प्रदेश में समस्त कøषि भूमि को रखा गया है। लेकिन आवासीय ओैर वाणिज्य भूमि तथा नगर निकायों में स्थित भूमि को इस नियम में छूट दी गई है।

अब सरकार के तर्क से यह तो साफ हो गया है कि शासन- प्रशासन की नाक के नीचे गैरसैंण में जमकर भूमि की खरीद- फरोख्त हो रही है, जबकि गैरसैंण महज दो सौ मीटर का ही क्षेत्र है जो एक कस्बे के तोर पर विकसित है। इसी गैरसैंण में अधिकतर भूमि कøषि भूमि है जिसको पावर ऑफ अटर्नी के जरिए खरीद- बेचा नहीं जा सकता है तो सरकार न जाने किस आधार पर यह मान रही है कि गैरसैंण में पावर ऑफ अटर्नी के जरिए भूमि का अवैध कारोबार हो रहा है। मतलब साफ है कि सरकार की नाक के नीचे प्रदेश के भू-कानून का बड़ा भारी उल्लंघन हो रहा है और सरकार ऐसे कारोबरियों को जो गैरसैंण में पावर ऑफ अटर्नी के जरिए बड़े पैमाने पर जमीन खरीद चुके हैं, को फायदा पहुंचाने के लिए ही जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक हटा रही है।

उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस की बहुगुणा सरकार द्वारा वर्ष 2012 में गैरसैंण में राजधानी बनाए जाने के लिए पहली पर निर्माण कार्य आरंभ किए गए थे। इसके लिए सबसे पहले गैरसैंण और इसके आस-पास के क्षेत्र को नोटिफिकेशन करके जमीन की खरीद-फरोख्त पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। यह प्रतिबंध सरकार के हालिया कैबिनेट निर्णय से पहले लागू था।

मौजूदा सरकार का तर्क है कि गैरसैंण में भूमि की खरीद पर रोक के चलते पूर्व सैनिकों को परेशानी हो रही है जिसके चलते यह निर्णय बदला गया है। हालांकि सरकार के अपने तर्क हैं, लेकिन सरकार ने गैरसैंण में अनियंत्रित जमीन की खरीद पर कोई रोक नहीं लगाई है। इसके चलते सरकार की मंशा पर सवाल खडे हो रहे हैं। क्या सरकार ने जानबूझकर यह निर्णय लिया है जिससे जमीनों की खरीद पर लगी रोक तो हटाई गई, लेकिन अनियंत्रित खरीद पर कोई रोक नहीं लगाई गई। अब सरकार की इस ढिलाई से गैरसैंण में बड़े पैमाने पर बाहरी लोगों द्वारा जमीन की खरीद- फरोख्त की आशंका है।

पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खण्डूड़ी सरकार के दौरान राज्य में नया भूअधिनियम लागू हुआ था। जिसके तहत बगैर अनुमति और मानकां के अगर कोई व्यक्ति राज्य में जमीनें खरीदता है तो उक्त जमीन शासन में निहित करने का प्रावधान है। पूर्व में प्रदेश के कुछ मामलों में शासन द्वारा ऐसी कार्यवाही भी की गई थी, उन्हें कई ऐसी जमीनें जो भू अधिनियम के विपरीत खरीदी गई थी को शासन में निहित कर दिया गया था, जबकि मौजूदा सरकार यह तो मान रही है कि गैरसैंण में पावर ऑफ अटर्नी के नाम पर जमीनों का करोबार किया जा रहा है। लेकिन भू अधिनियम के तहत कार्यवाही करनी चाहिए वह नहीं हो पा रही है। ऐसे में संदेह उठ रहे हैं कि सरकार भूमि करोबारियों के लिए गैरसैंण में जमीनों के करोबार का माहौल बना रही है।

सरकार के इस हालिया निर्णय का चौतरफा विरोध शुरू हो चुका है। कांग्रेस के अलावा राज्य आंदोलनकारी सरकार पर पहाड़ी क्षेत्रों में भू-माफियों को बढ़ावा देने के आरोप लगा रहे हैं। अब सरकार अपने ही फैसले से बुरी तरह घिरती दिख रही है। साथ ही सरकार पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि सरकार किसी न किसी बहाने से गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने की राह में रोड़े अटकाने का काम कर रही है।

सरकार पर ऐसे आरोप कोई सामान्य बात नहीं है। पूर्व में भी देहरादून जिले के सूर्यधार गांव के मामले में विपक्ष के उपनेता करण महरा द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए थे। उन आरोपों के प्रमाण के तौर पर मुख्यमंत्री के सबसे खास पारिवारिक मित्र संजय गुप्ता का एक स्टिंग ऑपरेशन मीडिया में दिखाया गया था। इस स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो में यह कहा जा रहा है कि सूर्यधार में उम्मीद नहीं थी कि मुख्यमंत्री डैम की घोषणा कर देंगे।

दरअसल, देहरादून के सूर्यधार गांव में सौंग नदी पर सरकार द्वारा एक चेकडैम की योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत देहरादून और आस-पास के क्षेत्रों को पेयजल मुहैया करवाए जाने की योजना है। आरोपों के अनुसार योजना के एक वर्ष के भीतर ही मुख्यमंत्री के मित्र संजय गुप्ता द्वारा सूर्यधार गांव में डैम के आस-पास की सभी जमीनें बड़े पैमाने पर खरीद ली गई ओैर एक वर्ष बाद मुख्यमंत्री ने इस योजना की घोषणा कर दी। वर्तमान में योजना का कार्य तेजी से चल रहा है। सरकार की मानें तो इस वर्ष के अंत तक सूर्यधार चेकडेम योजना आरंभ हो जाएगी।

गैरसैंण के मामलो को अब सूर्यधार से जोड़कर देखा जा रहा है। आशंकाएं जताई जा रही हैं कि मुख्यमंत्री के खास पारिवारिक मित्र जिनकी पत्नी के साथ पार्टनरशिप में मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा सहस्त्रधारा में करोड़ों के भूखंड खरीदे गए हैं, ने सूर्यधार में जिस तरह जमीनें खरीदीं कहीं गैरसैंण में भी वही न दोहराया जाए। कहीं भूमि के करोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ऐसा निर्णय तो नहीं ले रही है?

कांग्रेस सरकार के इस निर्णय के खिलाफ जल्द ही सड़कों पर बड़ा आंदोलन करने वाली है। 15 जुलाई को गांधी पार्क देहरादून में कांग्रेस ने बड़ा प्रदर्शन भी किया। इसमें कांग्रेस के सभी दिग्गज नेताओं ने शिरकत की और गैरसैंण में आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्यवाही किए जाने तथा जमीन की खरीद पर लगी रोक को हटाए जाने के खिलाफ धरना दिया। इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदेश, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के अलावा सभी विधायक, पूर्व विधायक शामिल रहे।

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जानबूझकर सोची-समझी साजिश के तहत गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने की राह में रोड़ा अटकाने का काम कर रही है। जमीन की खरीद पर लगी रोक हटाए जाने के बाद गैरसैंण में राजधानी के अवस्थापना और सरकारी विभागों के लिए भूमि ही नहीं बचेगी तो फिर वहां किस तरह से निर्माण कार्य हांगे। अब सरकार के इस निर्णय के खिलाफ राज्य आंदोलनकारियों के अलावा कई सामाजिक संगठन भी खड़े हो रहे हैं। आंदोलनकारी सरकार के खिलाफ प्रदेशभर में मोर्चा खोलने की बात कर रहे हैं। हाल ही में गैरसैंण में आंदोलनकारियों पर पुलिस कार्यवाही के चलते कई आंदोलनकारियों को जेल में डाला गया है। हालांकि अब उनको रिहा कर दिया गया है। इससे गैरसैंण के आंदोलन में और तेजी आने लगी है। जल्द ही राज्यभर में सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर आंदेलन दिखाई देने लगे तो कोई हैरत की बात नहीं होगी। वैसे भी प्रदेश में शराब के कारखाने खोले जाने के खिलाफ संत समाज और राज्य आंदोलनकारी पहले ही नाराज चल रहे हैं। अब स्वयं सरकार ने अपने हालिया निर्णय के जरिए उनके विरोध को हवा दे दी है।

बात अपनी-अपनी

सरकार पूरी तरह से भू मफियाओं के हित में काम कर रही है। पहले भी वह शराब कारोबारियों के लिए प्रदेश की संस्कøति को ताक पर रखकर पहाड़ में शराब के कारखाने खुलवा चुकी है। मुझे जानकारी मिली है कि सरकार तीन-चार और शराब के नए कारखाने पहाड़ों में खोलने की इजाजत देने वाली है। अब गैरसैंण में जमीनों की खरीद पर रोक हटाने से साफ है कि सरकार भू-माफियाओं के हाथों में खेल रही है।
किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रेदश अध्यक्ष कांग्रेस

सरकार दो तरह से प्रदेश के हितों पर चोट कर रही है। वह गैरसैंण में जमीनों की खरीद पर रोक इसलिए हटा रही है ताकि वहां जमीनें ही नहीं बचें। जब जमीन ही नहीं रहेगी तो राजधानी का मसला भी समाप्त कर देगी। न तो राजधानी के अवस्थापना व सरकारी विभागों के कार्यालयों और आवासीय कॉलोनियों के लिए जमीन रहेगी और न ही राजधानी का निर्माण हो पाएगा। सूर्यधार में मुख्यमंत्री के परिवारिक मित्र जिस तरह बड़े पैमाने पर जमीनें खरीद रहे हैं उसी तरह से सरकार गैरसैंण में भी ऐसे लोगों के लिए रास्ता बना रही है। मुझे पूरी आशंका है कि जिस तरह से सूर्यधार में जमीन के करोबारी को फायदा पहुंचाने के लिए चेकडैम योजना बनाई गई है ठीक उसी तरह से गैरसैंण में भी किया जा रहा है। सरकार का यह निर्णय साफ तौर पर भूमि कारोबारियों को ही फायदा पहुंचाने लिए लिया गया है। कांग्रेस इस निर्णय के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी।
करण महरा, उपनेता सदन कांग्रेस

पहले यह सरकार इनवेस्ट समिट के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कøषि भूमि खरीदने का अध्यादेश लेकर आई फिर इसे विधानसभा में भी पास करवा दिया। अब सरकार सुनियोजित तरीके से पहाड़ी जिलों में जमीनों के करोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रही है। गैरसैंण में जमीनों की खरीद पर रोक भी इसी के चलते हटाई गई है। केंद्र सरकार भी इस काम को कर रही है, लेकिन संसद में सरकार सफल नहीं हो पाई तो राज्य सरकारों द्वारा ऐसा करवाया जा रहा है। सरकार को यह निर्णय वापस लेना पड़ेगा, नहीं तो एक बार फिर से बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
पी.सी. तिवारी, अध्यक्ष उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी

उत्तराखण्ड में 2003 से ही पावर ऑफ अटर्नी के जरिए कøषि भूमि की खरीद पर रोक लगी हुई है। केवल रक्त संबंधां को ही पावर ऑफ अटर्नी के जरिए नियम में छूट दी गई है। गैरसैंण में तो केवल कøषि भूमि ही है। उसे पावर ऑफ अटर्नी के जरिए बाहरी लोगों को बेचा नहीं जा सकता। नगर निकायों के मानकों में भी आवासीय और कमर्शियल लैंड को ही पावर ऑफ अटर्नी के जरिए बेचने की अनुमति है।
जय सिंह रावत, वरिष्ठ अधिवक्ता

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