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Uttarakhand

तीर्थनगरी में त्रिकोणीय मुकाबला

हरिद्वार में राष्ट्रवाद, स्थानीय और बाहरी जैसे मुद्दों के बीच मूल जन समस्याएं हाशिए पर चली गई हैं। राजनीतिक दलों में तोड़-फोड़ की जंग चल रही है। दूसरे दलों के नेताओं को अपने-अपने खेमों में जोड़ा जा रहा है। हालांकि अभी तक मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और बसपा के बीच त्रिकोणीय माना जा रहा है। लेकिन चुनाव में जो कूटनीतियां अपनाई जा रही हैं उनके चलते चैंकाने वाले नतीजे सामने आ सकते हैं। पहले भी यहां के मतदाताओं ने लोगों को चैंकाया है

हरिद्वार लोकसभा सीट पर मुकाबला रोचक होने की संभावनाएं नजर आ रही हैं। जहां एक ओर स्थानीय और बाहरी प्रत्याशी के मुद्दे को हवा देकर चुनावी मैदान में उतरी कांग्रेस को अंदरूनी कलह के चलते अपने नेताओं के दल-बदल करने का सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है, तो वहीं संगठन स्तर पर मजबूत नजर आ रही भाजपा मोदी के नाम पर मतदाताओं को अपने पक्ष में एकजुट करने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है। नेताओं के पाला बदलकर भाजपा वह बसपा में जाने का सबसे अधिक नुकसान किसी राजनीतिक दल को हुआ है तो वह कांग्रेस है। कांग्रेस के स्थानीय स्तर पर संगठन सहित प्रदेश नेतृत्व द्वारा मुस्लिम कांग्रेसी नेताओं की उपेक्षा का ही परिणाम है कि कांग्रेस का परंपरागत वोट माने जाने वाले मुस्लिम समाज के कांग्रेसी कद्दावर नेता तथा वर्तमान में प्रदेश प्रवक्ता रहे फुरकान अली कांग्रेस को अलविदा कह कर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के चुनाव चिन्ह पर मैदान में हैं। वे कांग्रेस प्रत्याशी अंबरीश कुमार को टक्कर देने की बात कर रहे हैं।

26 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं एवं 22 प्रतिशत एससी वोटर को मिलाकर कुल 1835527 मतदाताओं की यह सीट 1977 से अस्तित्व में आई। हरिद्वार लोकसभा सीट 2009 से पूर्व सुरक्षित सीट थी, परंतु 2009 में कांग्रेस के कद्दावर नेता हरीश रावत ने हरिद्वार का रुख किया तो हरिद्वार के मतदाताओं ने उनको हाथों हाथ लिया और हरीश रावत भाजपा प्रत्याशी स्वामी यतींद्र आनंद को एक लाख से भी अधिक मतों से पराजित कर लोकसभा पहुंचे। 2014 के चुनाव में मोदी लहर के चलते इस सीट पर भाजपा नेता पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने 592320 मत प्राप्त कर तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत को डेढ़ लाख से भी अधिक मतों से पराजित किया। अब 2019 में भी भाजपा ने डाॅ निशंक पर भरोसा जताते हुए उनको मैदान में उतारा तो कांग्रेस ने अप्रत्याशित रूप से पूर्व विधायक अंबरीश कुमार पर भरोसा जताया। बसपा से डाॅक्टर अंतरिक्ष सैनी मैदान में हैं। हरिद्वार हमेशा से ही अप्रत्याशित परिणाम देने के लिए चर्चा में रहा है। हरिद्वार लोकसभा सीट से दलित नेता और बसपा प्रमुख मायावती सहित रामविलास पासवान किस्मत आजमा चुके हैं जिसमें हरिद्वार की जनता ने दोनों को चुनाव में पराजित कर अपेक्षाकøत अनजान चेहरों को संसद पहुंचाने में भूमिका निभाई। कहने को तो अभी तक हरिद्वार लोकसभा सीट पर मुकाबला त्रिकोणय माना जा रहा है, परंतु जिस प्रकार कांग्रेस पार्टी से नेताओं का पलायन बसपा की ओर जारी है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ सकता है।

लोकसभा चुनाव की घोषणा होने से पूर्व पंचायत राजनीति के धुरंधर माने जाने वाले चैधरी राजेंद्र सिंह कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हुए थे तो चुनाव के दौरान रुड़की के पूर्व विधायक सुरेश चंद जैन कांग्रेस छोड़कर भाजपा में घर वापसी कर चुके हैं जिसके चलते रुड़की में कांग्रेस को बढ़त बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। यही नहीं फुरकान अली के अतिरिक्त हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र से कांग्रेस का एक बड़ा नाम माने जाने वाले पूर्व दर्जाधारी इरशाद अली जिनको हरीश रावत का खासम खास माना जाता है, उन्होंने भी कांग्रेस को अलविदा कह बसपा का दामन थाम लिया है। जिस तेजी से कांग्रेसी नेताओं का पलायन बसपा की ओर हुआ है, कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि मतदान तिथि नजदीक आते-आते मुकाबला भाजपा प्रत्याशी डाॅ निशंक एवं बसपा प्रत्याशी डाॅ अंतरिक्ष सैनी के बीच देखने को मिल सकता है। बताते चलें कि चुनावी मैदान में खड़े सभी राजनीतिक दल एक-दूसरे के नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर पटखनी देने में लगे हैं। जिसमें सबसे ज्यादा फायदा बसपा को तो सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस को होता नजर आ रहा है। कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल होने वाले कांग्रेस नेताओं की लंबी फेहरिस्त अम्बरीश कुमार की जीत की राह में रोड़ा बनना तय माना जा रहा है। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस ने किसी दूसरे दल में सेंधमारी न की हो, कांग्रेस ने भी बसपा के दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नत्थू सिंह एवं सतीश कुमार को पार्टी में शामिल कर बसपा को जवाब देने का प्रयास किया, परंतु कांग्रेस को दोनों नेताओं के आने से कोई बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद नहीं मानी जा रही है।


बताते चलें कि लोकसभा सीट पर भाजपा ऐसी पार्टी बनी हुई है जिसका कोई बड़ा नेता अभी तक पार्टी छोड़कर दूसरे दल में नहीं गया है। अब चूंकि मुकाबला नजदीक आता जा रहा है तो प्रत्याशियों ने पार्टी के स्टार प्रचारक के साथ-साथ अपने परिजनों को भी मैदान में उतार दिया है भाजपा प्रचार में भी दोनों दलों से आगे निकलती नजर आ रही है। भाजपा की ओर से गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित समाज कल्याण मंत्री थावर चंद गहलोत और प्रदेश के मुख्यमंत्री हरिद्वार लोकसभा सीट में जनसभाएं कर मोदी के नाम पर निशंक को वोट देने की अपील कर चुके हैं। दूसरी ओर निशंक ने अपनी पुत्री को भी चुनाव प्रचार में उतार दिया है। कांग्रेस और बसपा इस मामले में भाजपा के मुकाबले पिछड़ते नजर आ रहे हैं। न तो कांग्रेस और न ही बसपा की ओर से अभी किसी स्टार प्रचारक ने हरिद्वार लोकसभा सीट में कोई जनसभा की है। जिस प्रकार भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने स्थानीय समस्याओं को दरकिनार कर मोदी के नाम पर वोट मांगने का अभियान चलाया है उससे हरिद्वार के स्थानीय मुद्दे हवा हवाई होते नजर आ रहे हैं जिनमें मुख्य रूप से गन्ना किसानों का बकाया है। चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के बकाया करोड़ों रुपए के भुगतान को लेकर राज्य सरकार एवं वर्तमान सांसद डाॅ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ विफल साबित हुए हैं, तो रोजगार कार्यालय में पंजीकøत बेरोजगार युवाओं की बड़ी संख्या भाजपा नेताओं के विकास और रोजगार के मुद्दे को ठेंगा दिखाती नजर आ रही है। जनपद हरिद्वार के रोजगार कार्यालय में पंजीकøत बेरोजगारी की बात की जाए तो पंजीकृत बेरोजगार युवाओं की संख्या 90272 बताई जाती है, परंतु वर्तमान में इस सीट पर चल रहा चुनावी प्रचार विकास, बेरोजगार ना होकर मोदी बनाम राहुल होता दिख रहा है ।पिछले तीन लोकसभा चुनाव परिणामों की बात करें तो अलग राज्य अस्तित्व में आने के पश्चात 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी राजेंद्र बाड़ी ने 32 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त कर भाजपा के हरपाल साथी को भारी मतों से हराया था। उस चुनाव में भाजपा को 24 प्रतिशत मत तो कांग्रेस 15 प्रतिशत मतों के साथ तीसरे स्थान पर रही थी। 2009 में हरीश रावत के आने से हाॅट सीट बनी हरिद्वार से कांग्रेस ने वापसी करते हुए 42 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त कर भाजपा प्रत्याशी को एक लाख से भी अधिक मतों के अंतर से हराया।

 

भाजपा प्रत्याशी स्वामी यतीश्वरानंद को 26 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे, परंतु 2014 में मोदी लहर की सुनामी में भाजपा प्रत्याशी डाॅ निशंक ने 50 प्रतिशत मतों के साथ 592320 मत प्राप्त कर कांग्रेस प्रत्याशी रेणुका रावत को भारी अंतर से शिकस्त दी। अब एक बार फिर भाजपा कांग्रेस के साथ- साथ सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी डाॅक्टर अंतरिक्ष सैनी दोनों दलों के धुरंधरों को किस प्रकार मात दे पाते हैं, यह देखने वाली बात होगी। जहां एक ओर निशंक के राजनीतिक पारी का लंबा चैड़ा इतिहास है, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी अम्बरीश कुमार की भी हरिद्वार में मतदाताओं पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। बाहरी और स्थानीय मुद्दे को हवा दे रहे अम्बरीश के लिए देहाती इलाकों में बसपा समस्या बनी हुई है, परंतु स्थानीय और बाहरी प्रत्याशी के मुद्दे को अम्बरीश कैसे भुना पाते हैं यह भी देखने वाली बात होगी। अम्बरीश को हरिद्वार लोकसभा सीट की देहरादून जनपद के अंतर्गत आने वाली तीन विधानसभा सीटों ऋषिकेश, डोईवाला, धर्मपुर के मतदाताओं का कितना समर्थन मिल पाता है, यह एक बड़ा सवाल है? परंतु अंदरूनी कलह से पार पाना भी कांग्रेस प्रत्याशी अंबरीश के लिए बड़ी चुनौती होगी। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हरीश रावत से जुड़े कांग्रेसियों का एक बहुत बड़ा तबका हरिद्वार में अम्बरीश के लिए काम करने के बजाय नैनीताल लोकसभा सीट पर जाकर हरीश रावत के लिए काम कर रहा है। हरीश रावत से जुड़े कांग्रेसियों को अपने साथ लामबंद करने के लिए भी अंबरीश को ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ेगा, परंतु मतदान में समय कम है। इसको देखते हुए यह संभव नजर नहीं आ रहा है और कांग्रेस छोड़कर दूसरे दलों का रुख कर रहे कांग्रेसी नेताओं की नाराजगी क्या गुल खिलाएगी यह तो परिणाम के बाद ही सामने आएगा, राजनीतिक जानकारों के अनुसार तीनों राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के बीच में त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। यह मुकाबला मतदान तिथि तक कड़ी टक्कर में तब्दील हो सकता है। अगर दलित मुस्लिम मतदाताओं का गठजोड़ हुआ तो अप्रत्याशित परिणाम से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

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