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Uttarakhand

कोरोना के डर से चारधाम यात्रा का विरोध कर रहे तीर्थ पुरोहित

उत्तराखण्ड सरकार पयर्टन उद्योग को पटरी पर लाने के लिए चारधाम यात्रा श्रद्धालुओं के लिए खोलने का निर्णय लिया है। इसके तहत कुछ शर्तों का पालन करना जरूरी है जिसमें कोविड 19 की निगेटिव जांच सर्टिफिकेट होना जरूरी होगा, साथ ही कोरोना गाइड लाइन का पालन करना भी जरूरी होगा। हालांकि इसके लिए सरकार ने सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को चारधाम यात्रा की अनुमति प्रदान की है जिसके लिए देवस्थानाम बोर्ड की वेबसाइट पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही यात्रा की अनुमति प्रदान की जाएगी।

सरकार की इस घोषणा को समर्थन तो मिल रहा हे, लेकिन इसका भारी विरोध भी होना आरंभ हो चुका है। कांग्रेस और तीर्थ पुरोहित समाज ने सरकार के इस निर्णय का विरोध करना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि जिस तरह से प्रदेश में कोरोना संक्रमण का आंकड़ा 6 हजार से भी ज्यादा तक जा पहुंचा है इससे चारधाम यात्रा में देश के नागरिकों को छूट देने से हालात और भी बदतर हो सकते हैं।

प्रदेश में कोरोना का संकट बहुत तेजी से बढ़ रहा है। खास तौर पर प्रदेश के चार मैदानी जिलों देहरादून, हरिद्वार नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित पाए जा रहे हैं, जबकि पर्वतीय जिलों में स्थिति बहुत ही बेहतर बनी हुई है। इसी के चलते अन्य प्रदेशों के श्रद्धालुओं को चारधाम यात्रा की अनुमति देने पर नाराजगी जताई जा रही है। तीर्थ पुरोहितों के साथ-साथ कांग्रेस भी सरकार के इस निर्णय को लेकर खासी मुखर हो चली है।

हालांकि विरोध के स्वरों से सरकार कोई खास चिंतित हो, ऐसा नहीं दिख रहा है। स्वयं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत चारधाम यात्रा के विरोध को तवज्जो नहीं दे रहे हें। यहां तक कि तीर्थ पुरोहितों को मुख्यमंत्री कांग्रेस के पदाधिकारी बताकर इसे हल्के में लेने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि जो लेग विरोध कर रहे हैं उनको बीस वर्ष से जानते हैं। वे कांग्रेस से जुड़े लोग हैं और इन्हीं के इशारे पर यात्रा का विरोध कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के इस बयान से तीर्थ पुरोहितों में नाराजगी और बढ़ गई है। वे इसे तीर्थ पुरोहित समाज का अपमान बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस का कहना हे कि तीर्थ स्थलों की व्यवस्था तीर्थ पुरोहितों द्वारा ही होती है और सरकार को तीर्थ पुरोहितों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

राजनीतिक तौर पर सरकार तीर्थ पुरोहितों पर अपना नैतिक दबाव बनाने का मॉक करती दिखाई दे रही है। देवस्थानाम बोर्ड के मामले में पहले ही सरकार को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल चुकी है। देवस्थानाम बोर्ड के गठन के खिलाफ भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दाखिल याचिका को हाईकोर्ट खारिज कर चुका है जिससे सरकार को न सिर्फ बड़ी राहत मिली है, साथ ही अब चारधाम यात्रा की पूरी व्यवस्था अपने हाथों में ले चुकी है। इसी का असर है कि तमाम विरोधों के बावजूद सरकार चारधाम यात्रा को अन्य प्रदेशों के श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया है।

वैसे तीर्थ पुरोहितों के विरोध के कारणों को भी नकारा नहीं जा सकता। कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ने के चलते पर्वतीय जिलां में इसके फैलने का डर सभी को सताने लगा है। अभी तक तो पहाड़ी जिलों में हालात नियंत्रण में ही रहे हैं। यहां तक कि पहाड़ी जिलों में कुछ ही एक्टिव केस के तौर पर है लेकिन मैदानी क्षेत्रों में यह बहुत तेजी से बढ़ने लगा है।

इस बात को स्वयं मुख्यमंत्री भी मान चुके हैं कि प्रदेश में बाहरी राज्यों के कई लोग चोरी-छुपे और जानकारी छुपाकर प्रवेश कर रहे हैं जिसके लिए प्रशासन को कड़ी कार्यवाही करने का आदेश भी मुख्यमंत्री दे चुके हैं। इसके अलावा जिस तरह से कोविड 19 की फर्जी जांच रिपोर्ट के मामले मीडिया में आ चुके हैं उससे यह डर सबको सताने लगा हे कि कहीं चारधाम यात्रा के मामले में भी ऐसे ही देखने को न मिले जिससे पहाड़ी जिलों में कोरोना संक्रमण भी तेजी से न बढ़ने लग जाए।

 

देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। उत्तराखण्ड के पहाड़ी जिले इससे दूर हो रहे हैं। लेकिन सरकार के एक फैसले से पहाड़ी जिलों में भी कोरोना के मामले बढ़ने की आंशका बन रही है। पुरोहितों को कैसे पता लगेगा कि कौन कोरोना का संक्रमित नहीं है। इससे न सिर्फ पुरोहितों को खतरा है, बल्कि पहाड़ी जिलों के नागरिकों को भी खतरा है। हैरानी इस बात की है कि आज मुख्यमंत्री हमें कांग्रेस के पदाधिकारी कह रहे हैं जबकि चारधाम के अधिकतर तीर्थ पुरोहित और 51 मंदिरों के संचालक भाजपा और संघ से जुड़े लोग हैं। मैं स्वयं 8 सरस्वती शिशु मंदिरां का व्यवस्थापक रहा हूं और दो बार भाजपा का टिहरी जिला महामंत्री के पद पर और दो बार जिला उपाध्यक्ष भी रहा हूं तो कैसे मैं कांग्रेसी पदाधिकारी हो गया। मुख्यमंत्री तानाशाही रवैया अपना रहे हैं जिसका बड़ा दुष्परिणाम देखने को भी मिल सकता है।
कृष्णकांत कोठियाल, अध्यक्ष चारधाम तीर्थ पुरोहित हक-हकूकधारी महा पंचायत

तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारी महा पंचायत के अध्यक्ष कृष्ण कांत कोठियाल का कहना है कि शांत पहाड़ों में कोरोना के मामले बहुत कम हुए हैं। यहां के निवासियों के लिए पहले ही स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से नहीं है जिस तरह से मैदानी क्षेत्रों में हैं। यहां के निवासी पहले ही भगवान भरोसे हैं। अगर कोरोना के मामले पहाड़ों में बढ़ने लगे तो हालात बहुत खराब हो जाएगे। सरकार जानबूझ कर पहाड़ों को बर्बाद करने में तुली हुई है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि प्रदेश सरकार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए चारधाम यात्रा को खोले जाने के मामले में क्या सामने आता है। सरकार तीर्थ पुरोहितों के विरोध को किस तरह से देखती है, जबकि स्वयं सरकार हाईकोर्ट से देवस्थानाम बोर्ड के मामले में तीर्थ पुरोहितों पर पहले से ही नैतिक जीत हासिल करके आत्म विश्वास से भरी हुई है। साथ ही उत्तराखण्ड के नगारिकों के लिए चारधाम यात्रा खोले जाने पर भी तीर्थ पुरोहितां के भारी विरोध के बावजूद सरकार प्रदेश चारधाम यात्रा का सफल संचालन करवा चुकी है। इससे सरकार का आत्म विश्वास पहले से ज्यादा बढ़ा हुआ है।

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