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Uttarakhand

इस बार ठुकराल की कठिन है डगर

‘रुद्रपुर में अगर में नजूल भूमि के मुद्दे का समाधान नहीं करा पाया तो 2022 का विधानसभा चुनाव नहीं लडूंगा।’
‘रुद्रपुर में अगर में नजूल भूमि के मुद्दे का समाधान नहीं करा पाया तो 2022 का विधानसभा चुनाव नहीं लडूंगा।’

वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ते समय यही कहा था भाजपा के तत्कालीन उम्मीदवार राजकुमार ठुकराल ने। फिलहाल राजकुमार ठुकराल रुद्रपुर के दूसरी बार विधायक बने हैं। वह रुद्रपुर की करीब 70 फीसदी आबादी की प्रमुख समस्या नजूल की भूमि को होल्ड फ्री कराने का वादा न केवल अपने 2017 के विधानसभा चुनाव में कर चुके हैं, बल्कि 2018 के मेयर चुनाव में भी वह इस वादे को दोहरा चुके हैं। यही नहीं 2019 में जब लोकसभा चुनाव हुए तो एक बार फिर उन्होंने इस बात की हुंकार भरी। भारतीय जनता पार्टी के सांसद के चुनाव लड़ रहे अजय भट्ट के मंच से राजकुमार ठुकराल ने लोगों के सामने तीसरी बार फिर से नजूल भूमि का वादा याद किया।

इससे जनता के दिमाग में यह पूरी तरह बैठ चुका है कि स्थानीय विधायक राजकुमार ठुकराल नजूल भूमि के मुद्दे को हर हालत में सॉल्व कर पाएंगे। हकीकत इससे कोसों दूर है। उनकी दूसरी बार के विधानसभा के कार्यकाल की अवधि समाप्ति की ओर है लेकिन अभी उनका नजूल भूमि का मुद्दा जस का तस है। हालांकि पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री बनने के साथ ही इस मुद्दे को हल करने की दिशा में कदम उठाए हैं। गत् सप्ताह कैबिनेट की बैठक में नजूल की जमीनों को फ्री होल्ड कराए जाने का फैसला ले लिया गया है। जनता में लेकिन अभी तक संदेह बरकरार है कि सरकार इस फैसले को अमल कराएगी या चुनावों के चलते लिया गया यह फैसला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। ऐसे में रुद्रपुर में चर्चाएं आम है कि भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल तीसरी बार विधानसभा का चुनाव शायद ही लड़े। हालांकि ठुकराल की सक्रियता को देखते हुए लगता नहीं है कि वह अपनी दावेदारी को छोड़ देंगे। यानी कि वह रुद्रपुर से हैट्रिक लगाने के लिए मैदान में तैयारी से जुटे हुए हैं।

वहीं दूसरी तरफ उनकी पार्टी के जिला अध्यक्ष शिव अरोड़ा भी अपनी दावेदारी को लेकर पीछे नहीं हैं। देखा जाए तो शिव अरोड़ा भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल से ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं। कोई भी मुद्दा वह हाथ से जाने नहीं दे रहे हैं। यहां तक की स्थानीय विधायक राजकुमार ठुकराल के खिलाफ जब भी कोई मामला उछलता है तो वह अप्रत्यक्ष तौर पर अपनी ही पार्टी के जिला अध्यक्ष शिव अरोड़ा की तरफ इशारा करते नहीं चूकते हैं। पिछले दिनों जब भाजपा के एक पार्षद ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया तो वह एक बार फिर यही कहते नजर आए कि उनकी पार्टी के एक पदाधिकारी चुनाव लड़ने की मंशा पाले हुए हैं। वह उन्हें विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने देने के लिए ऐसे षड्यंत्र करते रहते हैं। मतलब साफ है कि रुद्रपुर में भाजपा दो गुटों में में बंटी हुई है। हालांकि चर्चा तो यह भी है कि रुद्रपुर में भाजपा का एक तीसरा गुट भी है जो भारत भूषण चुघ का कहा जाता है।

राजकुमार ठुकराल की राजनीति छात्र नेता से शुरू हुई। जहां से वह नगर पालिका के चुनाव तक पहुंचे। नगरपालिका का चेयरमैन बनने के बाद राजकुमार ठुकराल 2012 में भाजपा के टिकट पर रुद्रपुर से चुनाव लड़े और विधायक बने। लेकिन इससे पहले ही राजकुमार ठुकराल की छवि एक कट्टर हिंदू नेता की बन चुकी थी। मामला 2 अक्टूबर 2011 का है। इस दिन रुद्रपुर में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। जिनमें करीब 4 लोगों की मौत हो गई थी। इन दंगों में आग में घी डालने का काम कई नेताओं ने किया। जिनमें राजकुमार ठुकराल का नाम प्रमुखता से आया था। राजकुमार ठुकराल पर तब आरोप लगे थे कि 2011 के दंगों में उन्होंने हिंदू उपद्रवियों का साथ दिया था। हालांकि बाद में वह इस मामले में बच गए। किंतु दंगे के चश्मदीद गवाह अभी भी राजकुमार ठुकराल को उपद्रवी भीड़ का नेतृत्व करने का दोषी करार देते हैं। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव हुए थे। जिसमें वह अपनी कट्टर हिंदू छवि के कारण चुनाव जीत गए। तब उन्होंने कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे तिलकराज बेहड़ को 3900 वोटों से हराया था। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव हुए जिसमें एक बार फिर राजकुमार ठुकराल ने तिलक राज बेहड को शिकस्त दे डाली। इस बार ठुकराल की जीत का अंतराल 25000 के करीब था।

रुद्रपुर में राजकुमार ठुकराल के लिए फिलहाल 2022 का विधानसभा चुनाव आसान नहीं है। पहले तो उनके लिए टिकट मिलने में ही अड़चनें पैदा की जा रही है। अवरोधक खुद उनकी पार्टी के ही नेता बने गए हैं, जो नहीं चाहते हैं कि ठुकराल को एक बार फिर पार्टी टिकट दे। इसके चलते ही राजकुमार ठुकराल और उनका विरोधी गुट आपस में एक- दूसरे के खिलाफ बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते हैं। वैसे भी राजकुमार ठुकराल को उनकी बदजुबानी चलते गालीबाज विधायक तक कहा जाता है। वह अक्सर अपने विवादास्पद बयानों के जरिए भी चर्चा में रहते हैं। फिलहाल चर्चा यह भी है कि भाजपा उनके इन्हीं विवादास्पद बयानों के चलते 2022 में अपनी पार्टी का प्रत्याशी ना बनाएं। ऐसे में अभी से राजनीतिक पंडित कयास लगाने लगे हैं कि तब राजकुमार ठुकराल कांग्रेस में जाकर टिकट ले आएंगे।

विधायक राजकुमार ठुकराल पर आरोप लगते रहे हैं कि वह क्षेत्र में विकास कार्यों को प्राथमिकता न देकर आपसी राजनीति को ही ज्यादा बढ़ावा देने पर लगे रहते हैं। शायद यही वजह है कि वह अपने विधानसभा क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक प्रतिष्ठान सिडकुल होने के बावजूद भी वे बेरोजगारों को रोजगार दिलाने में नाकाम रहे हैं। सिडकुल में 70 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को मिलने का कानून बनने के बाद भी बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिलना ठुकराल के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। रुद्रपुर के बीचों-बीच लग रहे गंदगी के पहाड़ इस शहर की खूबसूरती पर बदनुमा दाग बनकर खड़े हैं। इस गंदगी के ढेर को टंचिंग ग्राउंड तक पहुंचाने और नया टंचिंग ग्राउंड बनाने का वादा विधायक ठुकराल अभी तक नहीं पूरा नहीं कर पाए। इसके अलावा रुद्रपुर शहर में पार्किंग एक समस्या है। यहां पार्किंग न होने से गाड़ियां सड़कों पर ही खड़ी रहती हैं जिससे जाम की भयंकर स्थिति पैदा हो जाती है। स्थानीय विधायक राजकुमार ठुकराल पर जनता यह भी आरोप लगाती है कि वह शहर के एकमात्र सबसे बड़े गांधी पार्क का सौंदर्यीकरण भी नहीं करा पाए हैं। इस पार्क में लोग बहुतायत में आते हैं लेकिन वह सौंदर्यीकरण की कमी चलते ज्यादा देर नहीं टिक पाते हैं।

यहां राजकुमार ठुकराल के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द नजूल की जमीन है। जिस पर शहर की 60 से 70 प्रतिशत आबादी बसी हुई है। अधिकतर वोटर बंगाली समुदाय के लोग हैं। यह लोग वर्षों से नजूल भूमि को होल्ड फ्री करने की मांग करते रहे हैं। राजकुमार ठुकराल उनसे वादा करते रहे हैं लेकिन अपने वादे को पूरा करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। इसके चलते बंगाली समुदाय विधायक राजकुमार ठुकराल से नाखुश नजर आ रहा है। आने वाले विधानसभा चुनाव में बंगाली समुदाय की यह नाराजगी भाजपा को महंगी पड़ सकती है। गौरतलब है कि वर्ष 1965 में नगर पंचायत घोषित रुद्रपुर के अधीन 1989 एकड़ नजूल भूमि थी। आबादी बढ़ने के साथ ही नजूल भूमि पर परिवार बसते चले गए। सरकार ने लोगों को पट्टों का भी आवंटन किया था लेकिन नजूल भूमि पर मालिकाना हक का मसला अभी भी हल नहीं हो सका है। करीब 14 हजार परिवार मालिकाना हक से वंचित हैं। जून 2018 में हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए वर्ष 2009 की नजूल नीति केेे खारिज कर दिया था। जिस समय आदेश आया था, उस समय फ्री होल्ड कराने के लिए 1308 आवेदन तय शुल्क सहित जिला प्रशासन के पास लंबित थे, जो आज तक उसी स्थिति में हैं।

रुद्रपुर से अगर राजकुमार ठुकराल का टिकट कटता है तो ऐसे में सबसे मजबूत दावेदारी पार्टी के ऊधमसिंह नगर जिला अध्यक्ष शिव अरोड़ा की होगी। शिव अरोड़ा एक चार्टड अकाउंटेंट थे जो आरएसएस के स्वयं सेवक भी रहे हैं। वह 2014 में राजनीति में आए। इसके बाद उन्हें 2015 में भाजपा के सीए प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। 2016 में वह पहली बार उधम सिंह नगर के जिला अध्यक्ष बने। इसके बाद उनके कार्य को देखते हुए एक बार फिर पार्टी के जिला अध्यक्ष का कार्यभार उन्हें दे दिया गया है। फिलहाल वे रुद्रपुर से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। लेकिन खुलकर अपनी दावेदारी नहीं जता रहे हैं। शिव अरोड़ा भारत विकास परिषद के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने नागपुर से संघ शिक्षा वर्क भी किया हुआ है। इसके बाद भाजपा में सुरेश परिहार टिकट के मुख्य दावेदार हैं। सुरेश परिहार फिलहाल उत्तराखण्ड वन विकास निगम के चेयरमैन हैं। वह किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री भी रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनका जिला अध्यक्ष का कार्यकाल 2009 से 2012 तक रहा। इससे पहले वह ब्लॉक प्रमुख रहे। पार्टी के प्रदेश मंत्री भी वे रह चुके हैं।

भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष रहे उत्तम दत्ता भी पार्टी के टिकट पर अपनी दावेदारी जता रहे हैं। वह रुद्रपुर विधानसभा में बंगाली वोटों के दम पर अपनी दावेदारी आगे कर रहे हैं। उत्तम दत्ता पूर्व में भाजपा के जिला अध्यक्ष रहे हैं। वह पार्टी के प्रदेश मंत्री भी रहे हैं। फिलहाल प्रदेश कमेटी में वह सदस्य भी हैं। खंडूरी सरकार में उत्तम दत्ता को वर्ग 4 जमीन संबंधित 5 सदस्यीय कमेटी का सदस्य बनाया गया था। कांग्रेस में तिलक राज बेहड़ के रुद्रपुर से किच्छा जाने के बाद पार्टी की सबसे मजबूत दावेदार मीना शर्मा बताई जा रही हैं। मीना शर्मा तिलकराज बेहड़ की खास भी बताई जाती हैं। तिलकराज बेहड़ भी चाहते हैं कि रुद्रपुर में मीना शर्मा को ही टिकट मिले। मीना शर्मा पूर्व में रुद्रपुर नगर पालिका की चेयरमैन रह चुकी हैं। वर्ष 2008 से 2013 तक वह नगर पालिका रुद्रपुर की अध्यक्ष रहीं। वह कांग्रेस में महिला मोर्चा में महामंत्री रही हैं। फिलहाल वह महिला कांग्रेस की प्रदेश की वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर हैं। इसी के साथ ही संदीप चीमा भी टिकट की दौड़ में बहुत मजबूती से अड़े हुए हैं। वह वर्ष 2000 में छात्र राजनीति से आए। वह छात्र संघ सचिव रह चुके हैं। 2003 में रुद्रपुर में छात्रसंघ अध्यक्ष रहे तथा इसी दौरान कुमाऊं यूनिवर्सिटी के महासंघ के महामंत्री रहे।

छात्र नेता रहते संदीप चीमा के बारे में कहा जाता था कि वह जिस प्रत्याशी को कॉलेज के चुनाव में उतार देते थे वह जीत जाता था। तब चीमा द्वारा चुनाव लड़वाने वाले को चीमा गुट का माना जाता था। संदीप चीमा पूर्व में एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं तथा युवक कांग्रेस के जिला महामंत्री भी रह चुके हैं। 2009 में वह क्षेत्र पंचायत सदस्य बने हैं। इसके बाद वह जिला पंचायत सदस्य बने। तब जिला पंचायत उधम सिंह नगर के उपाध्यक्ष भी रहे। 2019 में संदीप चीमा की पत्नी कुलदीप कौर जिला पंचायत सदस्य बनीं। गत् दिनों हुई कांग्रेस की ‘परिवर्तन रैली’ में संदीप चीमा का दमखम दिखा था। युवाओं में लोकप्रिय रहे संदीप को कांग्रेस की टिकट मिलने की पूरी उम्मीद है। मीना शर्मा और संदीप चीमा के अलावा कांग्रेस में एक तीसरे दावेदार भी हैं जिनका नाम है सीपी शर्मा। सीपी शर्मा पूर्व में श्रम प्रकोष्ठ के कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। वह सिडकुल एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे तथा कांग्रेस के प्रदेश सचिव भी रहे हैं। वर्तमान में वह असंगठित कामगार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। सीपी शर्मा की पहचान एक श्रमिक नेता के रूप में है।

आम आदमी पार्टी ने इस बार रुद्रपुर में अपना प्रत्याशी लगभग तय कर दिया है। इस बार नंदलाल पर दांव लगाने की तैयारी कर रही है। नंदलाल पूर्व में कांग्रेस के टिकट पर मेयर का चुनाव लड़ चुके हैं। तब 2018 के मेयर चुनाव में नंदलाल को 34800 वोट मिले थे। इस चुनाव में भाजपा के रामपाल चुनाव जीते थे। जिन्हें 39843 वोट मिले थे। जीत का अंतराल महज पांच हजार के करीब था। मेयर का चुनाव लड़ने के बाद कांग्रेस ने नंदलाल को प्रदेश का सचिव बनाया। इसके बाद उन्हें पार्टी द्वारा बाजपुर का विधानसभा प्रभारी भी बनाया गया। अब उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली। फिलहाल आम आदमी पार्टी में उनका टिकट पक्का माना जा रहा है। वैसे भी आम आदमी पार्टी के पास रुद्रपुर में नंदलाल के अलावा कोई मजबूत कैंडिडेट नहीं है।

 

मैंने कांग्रेस को इसलिए छोड़ा क्योंकि कांग्रेस ने रुद्रपुर का नगर अध्यक्ष नहीं बदला और न ही अपनी नीति बदली। बल्कि यूं कहें कि कांग्रेस ने अपनी राजनीति ही नहीं बदली। मैं यहां से कांग्रेस की छठी हार के लिए तैयार नहीं था। कांग्रेस ने दो मेयर चुनाव, दो विधानसभा चुनाव और एक सांसद का चुनाव हारा। 5 चुनाव हारने के बाद मैं छठी बार पार्टी की हार देखना स्वीकार नहीं करना चाह रहा था। पार्टी भीतर मीना शर्मा की ही चलती है। वह कांग्रेस के नहीं बल्कि अपने कार्यक्रम करती हैं। मैं आम आदमी पार्टी में इसलिए आया, क्योंकि यह पार्टी जनता की सुख सुविधाओं के लिए नई नई योजनाएं बनाती है। पार्टी जनता के द्वार जाकर उनकी समस्याएं खत्म करती है। पहले बिजली अब रोजगार देने की गारंटी दे रही है। इसी के साथ ही प्रदेश में दिल्ली मॉडल की तरह शिक्षा और स्वास्थ का सुधार किया जाएगा। अगर आम आदमी पार्टी प्रदेश में आती है तो उत्तराखण्ड की तस्वीर ही बदल जाएगी।
नंदलाल, नेता आम आदमी पार्टी

 

पिछले कई वर्षों से हम कांग्रेस में रहकर पार्टी की सेवा कर रहे हैं। हमने भी रुद्रपुर से पार्टी से टिकट पर अपनी दावेदारी की है, क्योंकि तिलकराज बेहड़ जी किच्छा से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने मुझे रुद्रपुर से चुनाव लड़ने का आशीर्वाद दिया है। जनता की भी यही मंशा है कि इस बार हम रुद्रपुर से चुनाव लड़े। 2008 से 2013 तक नगर पालिका की अट्टयक्ष रहते हमने रुद्रपुर के विकास में काफी अहम कार्य किए हैं। फिलहाल हम पिछले 9 साल से पब्लिक के बीच में है।
मीना शर्मा, पूर्व पालिकाध्यक्ष रुद्रपुर

 

पार्टी मैं फिलहाल पार्टी का दो बार से जिला अध्यक्ष हूं और पार्टी के लिए पूर्ण समर्पित हूं। हम फॉर्मल दावेदारी नहीं कर सकते। टिकट के मामले में पार्टी अपने हिसाब से ही निर्णय लेगी। जो भी निर्णय लेगी वह हमें स्वीकार होगा। हालांकि हम अगर चुनाव लड़ना चाहते हैं तो यह कोई अपराध नहीं है। हम हर काम जिम्मेदारी से कर रहे हैं। आगे भी करते रहेंगे।
शिव अरोड़ा, जिला अध्यक्ष भाजपा ऊधमसिंह नगर

 

हमारे यहां टिकट दावेदारी का कोई अर्थ नहीं होता। पार्टी अपने स्तर से तय करती है। पार्टी के ही अपने दिशा निर्देश होते हैं। जब मुझे पार्टी ने उत्तराखण्ड वन विकास निगम का चेयरमैन बनाया तब भी मैंने किसी से सिफारिश नहीं कराई थी। पार्टी का एक सिद्धांत है कि जैसा काम करोगे वह वैसा फल देगी। अगर मैं टिकट के लिए उपयुक्त लग रहा हूं तो वह टिकट भी दे देगी।
सुरेश परिहार, चेयरमैन उत्तराखण्ड वन विकास निगम

 

मैंने अपना पूरा जीवन पार्टी में लगा दिया। रुद्रपुर शहर में जब बेहड के डर से कोई पार्टी का झंडा उठाने को तैयार नहीं था तब से मैं झंडे और डंडे के साथ पार्टी को मजबूती से आगे बढ़ा रहा हूं। इस विधानसभा सीट पर हमारे  बंगाली समाज की सबसे ज्यादा ज्यादा वोट है। बंगाली समाज की 45000 वोट होने के चलते पार्टी को मेरी दावेदारी पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उत्तम दत्ता, पूर्व जिला अध्यक्ष भाजपा ऊधमसिंह नगर

 

कांग्रेस में रुद्रपुर में पार्टी को नया चेहरा चाहिए। पिछले 20 सालों से मैं पार्टी के लिए काम कर रहा हूं। लोग कह रहे हैं कि मेरा कांग्रेस से टिकट होना चाहिए। क्षेत्र की जनता मेरी तरफ देख रही है। मेरा काम करने का तरीका  गरीबों के लिए है। जबकि लोग प्रोफेशनल राजनीति कर रहे हैं। मैं चाहता हूं कि रुद्रपुर की राजनीति में बदलाव हो। मैं अलग हटकर यहां का विकास कराना चाहता हूं।
एसपी शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष असंगठित कामगार कांग्रेस

 

 

हम पहले तिलक राज बेहड़ जी को ही रुद्रपुर से अपनी पार्टी का प्रत्याशी समझ रहे थे। वह पार्टी के लिए समर्पित भाव से काम भी कर रहे थे। लेकिन 1 साल पहले ही वह रुद्रपुर को छोड़कर किच्छा में जा चुके हैं। वह किच्छा से ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में हमने रुद्रपुर में अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है। यहां हम पिछले डेढ़ दशक से गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को उनके हक दिलाने की राजनीति करते आए हैं। छात्र राजनीति में भी हम अभी भी पार्टी का वजूद बनाए हुए। हम चाहते हैं कि रुद्रपुर में एक बार फिर कांग्रेस का नेता विधायक बने। इसके लिए पार्टी को चाहिए कि वह किसी के खास को टिकट न देकर मुझ जैसे आम आदमी को टिकट दे। जिससे पार्टी की जीत सुनिश्चित हो सके।
संदीप चीमा, कांग्रेस नेता

 

कुछ लोग नजूल भूमि मामले को मुद्दा बनाकर मेरे खिलाफ राजनीति कर रहे थे लेकिन मुख्यमंत्री जी के द्वारा इस मुद्दे पर कैबिनेट में प्रस्ताव पास कराकर उन लोगों की हवा निकाल दी है। मेरे चुनाव लड़ने में यह बाधा थी। जिसे अब सीएम साहब के प्रयासों से दूर कर दिया गया है। हालांकि अभी भी कुछ अपने लोग हैं जो इस फिराक में हैं कि भाजपा से मेरा टिकट कट जाएगा। लेकिन उनकी यह मंशा पूरी नहीं हो सकती है। पार्टी का टिकट मुझे ही मिलेगा। वह लोग समय-समय पर मुझे कांग्रेस में जाने की भी अफवाह उड़ाते रहते हैं। लेकिन मैं बता दूं कि मैं कांग्रेस में नहीं जा रहा हूं। भाजपा में ही रहकर रुद्रपुर से चुनाव लडूंगा और तीसरी बार भी विधायक बनूंगा। क्षेत्र की जनता का आशीर्वाद मेरे साथ है।
राजकुमार ठुकराल, विधायक रुद्रपुर

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