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Uttarakhand

पैरा मेडिकल कोर्स के नाम पर ठग

  •   भारतीय पाण्डेय

 

अल्मोड़ा स्थित जय श्री कॉलेज के प्रबंधकों पर आरोप है कि उन्होंने बगैर मान्यता पैरा मेडिकल कोर्स की पढ़ाई अपने संस्थान में शुरू करवा डाली। नतीजा यह रहा कि लाखों रुपया फीस में देने के बावजूद न तो छात्रों को डिग्री मिली है, न ही संस्थान उनकी फीस वापस लौटा रहा है। मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने संस्थान के चेयरमैन भानु प्रकाश जोशी के खिलाफ मुकदजा दर्ज कर लिया है

‘जब हमने जय श्री कॉलेज में पैरा मेडिकल कोर्स करने के लिए 2017 में एडमिशन लिया था। हमने तब इस उम्मीद से कोर्स शुरू किया था कि हमें किसी संस्थान में नौकरी मिलेगी। दो साल बाद ही हमें कॉलेज के कोर्स को लेकर शक हुआ। इसके बाद आरटीआई डाली गई। जिसमें खुलासा हुआ कि कॉलेज में हम जिस कोर्स पैरा मेडिकल को कर रहे हैं उस पर मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। हमें अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ होता नजर आया। हमने 2019 से ही कहना शुरू कर दिया था कि हमें डिग्री चाहिए। 2019 से 2022 आ गया लेकिन आज तक न तो हमें हमारी डिग्री मिली और न ही पैरा मेडिकल काउंसिल में हमारा रजिस्ट्रेशन हो सका है।’

यह कहना है अल्मोड़ा स्थित जय श्री कॉलेज की छात्रा सोनी जोशी का। सोनी जोशी ने अपनी डिग्री की बाबत उस यूनिवर्सिटी से भी बात की है जिससे संबद्ध जय श्री कॉलेज बताया जा रहा है। इस यूनिवर्सिटी का नाम हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय है। जिसे वर्तमान में महराजा अग्रसेन हिमालयन विश्वविद्यालय कहा जाता है। लेकिन इस यूनिवर्सिटी की तरफ से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया है। इसके बाद अपने भविष्य को लेकर चिंतित सोनी जोशी, मनोज नेगी आदि के साथ ही कई छात्रों ने इस मामले में अल्मोड़ा कोतवाली में 16 अप्रैल को रिपोर्ट दर्ज करा दी है। कोतवाली पुलिस ने जय श्री कॉलेज के चेयरमैन भानु प्रकाश जोशी के विरुद्ध धारा-420, 406 आदि में मुकदमा दर्ज कर लिया है। भानु प्रकाश जोशी उत्तराखण्ड क्रांति दल के सक्रिय नेता बताए जाते हैं। गत दिनों हुए विधानसभा चुनाव में जोशी यूकेडी के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं।

पुलिस को सौंपी गई तहरीर में कहा गया है कि कॉलेज द्वारा उन्हें पैरा मेडिकल कोर्स बैचलर ऑफ मेडिकल लेबोरेट्री टेक्नोलॉजी (बीएमएलटी), डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेट्री टेक्नोलॉजी (डीएमएलटी), बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी  (बीपीटी) आदि कोर्स करने के दौरान एवं कोर्स के बाद किसी हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी, पोखरा के नाम पर डिग्री एवं मार्कसीट सौंपी गई जबकि डिग्री एवं मार्कसीट में जय श्री कॉलेज का नाम नहीं दर्शाया गया। संदेह होने पर उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से आरटीआई के माध्यम से सूचना मांगी। यूजीसी के नियमों के मुताबिक यूनिवर्सिटी राज्य में अपने ऑफ कैंपस या स्टडी सेंटर नहीं खोल सकती लेकिन जय श्री कॉलेज द्वारा नियमों का उल्लंघन कर अपने संस्थान में हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी से संबंधित कोर्स कराए जा रहे हैं।

इस संबंध में छात्रों ने हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी की मान्यता एवं विश्वविद्यालय द्वारा कराए जा रहे पैरा मेडिकल कोर्स के संबंध में जब उत्तराखण्ड पैरा मेडिकल काउंसिल से सूचना मांगी तो उसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी को उत्तराखण्ड पैरा मेडिकल काउंसिल से मान्यता नहीं मिली है। यही नहीं यूनिवर्सिटी द्वारा मान्यता के लिए उत्तराखण्ड पैरा मेडिकल काउंसिल में आवेदन तक नहीं किया गया है। कहा जा रहा है कि हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी की डिग्री उत्तराखण्ड पैरा मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण के लिए वैध ही नहीं है। जिस कारण उनकी किसी भी निजी एवं सरकारी संस्थान में नियुक्ति नहीं हो पा रही है। उत्तराखण्ड पैरा मेडिकल काउंसिल 2009 की धारा 36 के अंतर्गत कोई भी क्लिनिक, अस्पताल, नर्सिंग होम या स्वास्थ्य देखरेख के संबंध में अन्य संस्थाएं किसी भी व्यक्ति को पैरा मेडिकल व्यवसाय के रूप में तभी नियुक्त कर सकता है जब उसका नाम काउंसिल में रजिस्टर्ड होगा।

छात्रों का कहना है कि हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी द्वारा कॉलेज को जो लेटर दिया गया है उसमें लिखा गया है कि जय श्री कॉलेज एकेडमिक एवं प्लेसमेंट पार्टनर है। जय श्री कॉलेज जो भी फीस लेगा वह हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी के नाम पर डीडी से लेगा। लेकिन जय श्री कॉलेज द्वारा बीएमपीटी कोर्स करने वाले छात्रों से 1 लाख 50 हजार तथा बीपीटी कोर्स के लिए 1 लाख 55 हजार रुपये की फीस अपने नाम पर ली गई। छात्रों का यह भी आरोप है कि जय श्री कॉलेज द्वारा एक ही कोर्स एवं सेमेस्टर के छात्रों से अलग-अलग फीस ली गई। इसके बाद भी अधिकांश छात्रों को न तो डिग्री मिली है और न ही डिग्री का रजिस्ट्रेशन उत्तराखण्ड पेरा काउंसिल में हुआ है।

डिग्री में जय श्री कॉलेज का नाम क्यों नहीं?


अल्मोड़ा कोतवाली में जय श्री कॉलेज के चेयरमैन भानु प्रकाश जोशी के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज होते ही कॉलेज प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। बीते 24 अप्रैल को स्थानीय एसडीएम गोपाल सिंह चौहान की उपस्थिति में कुछ बच्चों को डिग्रियां बांटी गई। उसके बाद मीडिया में यह दर्शाया गया कि सब कुछ नियमों के तहत हो रहा है। एक अधिकारी के सामने छात्रों की डिग्रियां बांटी जा रही है जबकि एक ऐसा कॉलेज जिसके खिलाफ फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज किया गया है वहां एक उपजिलाधिकारी की उपस्थिति में इस तरह दर्शाना कानूनन गलत है। इस बाबत सब ‘दि संडे पोस्ट’ ने अल्मोड़ा उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान से बात की तो उन्होंने कहा कि मैं तो जिलाधिकारी के आदेश पर कॉलेज के मामले को जानने गया था। लेकिन वहां जब मैं पहुंचा तो मुझसे डिग्रियां बांटने की बात कही गई। जिस पर मैंने स्पष्ट इंकार करते हुए कह दिया कि आपकी यह डिग्रियां कितनी सही है या कितनी गलत है इसे जाने बिना ही मैं इनको अपने हाथों से नहीं बंटवा सकता हूं।
कॉलेज के छात्रों को जब डिग्रियां मिली तो उन्होंने इनकी प्रमाणिकता पर ही सवाल उठा दिए हैं। डिग्रियां अभी भी सवालों के घेरे में है।

पहला यह कि डिग्री पर जय श्री कॉलेज का नाम तक नहीं है। जबकि जिस कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की जाती है डिग्री पर उसका साफ-साफ अक्षरों में नाम लिखा होता है। हालांकि डिग्री यूनिवर्सिटी के द्वारा ही दी जाती है लेकिन इस डिग्री में हिमालयन यूनिवर्सिटी का ही नाम अंकित है। दूसरा यह कि डिग्री जिन छात्रों को दी गई है वह उनसे संतुष्ट नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि उन्होंने कोर्स तो किया था बीएमएलटी का और उन्हें डिग्री बैचलर ऑफ साइंस की दी गई। जबकि नीचे ब्रैकेट में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी लिखा हुआ है। डिग्री में सिर्फ बीएमएलटी का ही वर्णन किया जाना चाहिए था।

 

बात अपनी-अपनी

मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही इस मामले में परिणाम सामने आ जाएंगे।
-वंदना सिंह, जिलाधिकारी अल्मोड़ा

बिना मान्यता की डिग्री का मामला प्रकाश में आया है। छात्र-छात्राएं शिकायत लेकर कोतवाली पहुंचे थे जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
-अरुण कुमार, कोतवाल अल्मोड़ा

पैरा मेडिकल कोर्स 2020 से जय श्री कॉलेज में बंद कर दिए गए हैं। 2017 से 2020 के बीच जिन छात्रों ने कोर्स किया था वह 24 अप्रैल के बाद पैरा मेडिकल काउंसिल में अपना पंजीकरण करा सकते हैं। कॉलेज पर डिग्री न देने के झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। हम डिग्री बांट रहे हैं। आरोप लगाने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
-भानु प्रकाश जोशी, चेयरमेन जय श्री कॉलेज अल्मोड़ा

मैं किसान परिवार से हूं। इस कॉलेज में बीएमएलटी किया। डेढ़ लाख रुपये फीस के रूप में दिए। लेकिन हमें लास्ट टाइम तक नहीं बताया गया कि कॉलेज को मान्यता ही नहीं है और न ही एनओसी प्राप्त है। जिस कारण मेरा रजिस्ट्रेशन तक नहीं हुआ। अब कॉलेज के चेयरमैन जोशी जी 24 अप्रैल तक रजिस्ट्रेशन कराने की बात कह रहे हैं जो कि बिल्कुल निराधार और मिथ्यापूर्ण है। हमने उत्तराखण्ड पैरा मेडिकल काउंसिल में इस बाबत बात की है। उन्होंने कहा है कि हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी को ही इस कोर्स की मान्यता नहीं है तो ऐसे में उससे संबंधित कॉलेज के रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकते हैं।
-मनोज नेगी, बीएमएलटी स्टूडेंट जय श्री कॉलेज

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