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Uttarakhand

फिर नई सुबह का अहसास कराएगी गोरैया

पलायन का असर पर्वतीय क्षेत्रों में पशु-पक्षियों पर भी पड़ा है। कभी एक राज्य के हर घर में गाय-बैल हुआ करते थे। लोग अपने मकानों में पक्षियों के लिए आसरे बनाते थे। पुराने मकानों पर इन्हें बखूबी देखा जा सकता है। तब घर-आंगन में पक्षियों की कलरव नई सुबह का अहसास कराती थी, लेकिन बदलते परिवेश में संरक्षण की मुहिम धीमी पड़ी तो गौरेया भी दूर होती गई। इस सबको देखते हुए अब पौड़ी में प्रशासन ने गौरेया पक्षी के संरक्षण की दिशा में पहल करते बर्ड बाॅक्स बनाने की कवायद की है। पहाड़ी क्षेत्रों में कभी सुबह और सायं को गौरया, घुघती जैसी पक्षियां अपने कलरव से सुखद अहसास कराती थी। मानव व पक्षियों के बीच का मधुर संबंध ऐसा कि मकानों की छत पर पक्षियों के लिए दाना, पानी भी रखा जाता था। तब घर गांवों में पक्षियों का कलरव गांव के आबाद होने का संदेश भी देती थी, लेकिन वक्त बदला। नए-नए मकानों से घोसले गायब से हो गए तो कुछ गांव पलायन का दंश झेलने लगे। अब केवल पुराने मकानों में ही यह देखना को मिलता है।

हश्र यह हुआ कि संरक्षण की दिशा में कोई खास पहल न होने से घर की देहरी में कलरव करने वाली गौरया समेत अन्य पक्षियों भी दूर होने लगी। ऐसे वक्त में पौड़ी में प्रशासन ने गौरया पक्षी के संरक्षण की कवायद कर बर्ड बाॅक्स बनाने की योजना बनाई है। पक्षियों के लिए बर्ड बाक्स बनाने का कार्य विभिन्न क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं बनाएंगी। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। आम जन खुद भी इसे बना सकता है। महिलाओं द्वारा बनाए गए बाॅक्स को वे खुद भी बेच सकेंगी और प्रशासन भी खरीदेगा। बर्ड वाचिंग में नजर आई थी पक्षियों की कई प्रजातियां जिला प्रशासन के निर्देश पर कुछ माह पूर्व ही पर्यटन स्थल खिर्सू में सात दिवसीय बर्ड वाचिग का प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया। जिसमें कई स्थानीयों के अलावा विद्यालय के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। तब पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों द्वारा खिर्सू क्षेत्र में पचास से अधिक प्रजाति के पक्षियों का होना बताया गया।

गौरेया समेत अन्य पक्षियों को संरक्षित करने के लिए जनपद में बर्ड बाॅक्स बनाने की योजना बनाई गई है। पर्यावरण दिवस पर जिलाधिकारी डाॅ विजय कुमार जोगदंडे द्वारा इस अभियान का शुभारंभ भी किया गया। बर्ड बाॅक्स को घरों में रखकर इस दिशा में बेहतर कार्य किया जा सकता है। सभी को इस मुहिम का हिस्सा बनना चाहिए।
आशीष भटगाईं, मुख्य विकास अधिकारी पौड़ी गढ़वाल

 

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