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विकास की इससे बदरंग तस्वीर भला और क्या हो सकती है कि हाइवे का अधूरा निर्माण कार्य हादसों की वजह बन रहा है। पिछले दो साल के दौरान कई लोग इन हादसों में जाने गंवा चुके हैं। आश्चर्यजनक है कि यह सब देखने के बावजूद कार्यदायी कंपनी को जनता से टोल टैक्स वसूली की इजाजत दे दी गई। इससे स्थानीय लोगों में भारी रोष है और वे विधायक राजकुमार ठुकराल के नेतृत्व में निरंतर धरना-प्रदर्शन करते आ रहे हैं

 

6 मई 2018

रुद्रपुर के विधायक राजकुमार ठुकराल ने सेकड़ां लोगों के साथ चुटकी स्थित एन एच 74 टोल प्लाजा पर धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने सड़क का काम पूरा हुए बिना ही टोल वसूली को गलत बताया। इसके बाद टोल पर सड़क निर्माण कर रही कंपनी गल्फार की ओर से प्रशासनिक अधिकारी राहुल शर्मा, पी के चौधरी, देवेंद्र सिंह आदि के हस्ताक्षरयुक्त एक सहमति पत्र दिया गया। जिसमें सभी अधूरे काम 30 जून 2018 तक पूरे करने का लिखित आश्वासन था।

14 जून 2019

विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में सांसद अजय भट्ट के सामने सारा प्रकरण रखा गया। जिलाधिकारी की मौजूदगी में अधूरे एनएच 74 के बिंदुओं को लेकर व्यापक चर्चा हुई। कहा गया कि अधूरे एनएच 74 पर जब तक कार्य शुरू नहीं होगा तब तक टोल वसूली नहीं होने देंगे।

22 जून 2019

रुद्रपुर के विधायक राजकुमार ठुकराल ने एक बार फिर इस टोल प्लाजा पर नाकेबंदी की। नाकेबंदी का कारण वही अधूरा काम। जिसको पूरा करने का वादा एनएच 74 का निर्माण करने वाली कम्पनी गल्फार ने किया था। विधायक ने अपने सैकड़ां साथियों के साथ बैरियर के नट बोल्ट खोलकर सड़क को आने जाने वालों के लिए टोल फ्री कर दिया। इस बार फिर लिखित में समझौता हुआ और कहा गया कि जब तक काम शुरू नहीं होगा तब तक आवागमन करने वालां से टोल नहीं वसूला जायेगा।

22 जून 2019

एनएचएआई के परियोजना निरीक्षक, अधिशासी अभियंता लोकनिर्माण विभाग, एसडीएम किच्छा तथा विधायक रुद्रपुर के बीच यह सहमति बनी कि ग्राम झगड़पुरी से पुलभट्टा क्षेत्र तक मौजूदा सड़क की मरम्मत व रिसेसिंग का कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने लोक निर्माण विभाग रुद्रपुर को सौंप दिया है तथा 12 जून को 4.99 करोड़ रुपये भी दे दिए हैं। लोकनिर्माण विभाग ने टेंडर भी कर दिए हैं जो इस माह के अंत में खुलेंगे।

23 जून 2019

विधायक राजकुमार ठुकराल पर सरकारी काम में बाधा डालने और टोल प्लाजा पर अपने साथियां के साथ तोड़फोड़ करने का मामला दर्ज करा दिया गया। ऊधमसिंह नगर में गल्फार कंपनी ने सड़क चौड़़ीकरण करने का काम पूरा भले न किया हो, लेकिन टोल वसूली का काम बखूबी कर रही है। 80 फीसदी काम होने के बाद सरकार ने टोल वसूलने की अनुमति क्या दी, उसने बचा हुआ काम करना ही छोड़ दिया। दरअसल, 77 किलोमीटर लंबी सड़क बाजपुर- सितारगंज के चौड़ीकरण का काम 65 किलोमीटर तक ही हुआ है। कंपनी ने 80 फीसदी काम पूरा किया तो 2017 के अगस्त माह में उसे टोल वसूलने की अनुमति दे दी गई। नियम के मुताबिक कंपनी काम पूरा होने के बाद ही टोल वसूल सकती है, लेकिन कंपनी को नियमों से क्या लेना देना, न सरकार का डर न काम की चिंता, वह तो बिना काम पूरा किए ही टोल वसूलने में लगी रही, जबकि विधायक राजकुमार ठुकराल इस मुद्दे पर आंदोलन करने को विवश हुए।

बहरहाल, एनएच 74 के अधूरे काम को पूरा करने में एनएच एकाई और कार्यदायी संस्था कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। निर्माण पूरा नहीं होने से एनएच पर अब तक कई लोग हादसों में जान गंवा चुके हैं। सड़क हादसे के मामले में गल्फार कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अधूरे निर्माण को पूरा करने के लिए कंपनी ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई है। मुआवजा घोटाले को लेकर देशभर में सुर्खियों में रहे एनएच 74 का निर्माण कार्यदायी संस्था अभी तक पूरा नहीं कर पाई है। जिस तरह से इस सड़क पर हादसे हो रहे हैं उससे इस सड़क को अब खूनी सड़क कहा जाने लगा है। एनएच 74 के निर्माण का जिम्मा कार्यदायी संस्था गल्फार को सौंपा गया हैं। पूर्व में इस सड़क को बनाने के लिए 2017 तक का समय तय किया गया था। लेकिन बाद में इसे बढ़ा दिया गया है। अब 2019 का आधा वर्ष बीतने को है, लेकिन अभी तक कार्यदायी संस्था निर्माण पूरा नहीं कर सकी है।

निर्माण पूरा कराए बिना कंपनी ने इस मार्ग पर नियमों के विपरीत टोल टैक्स वसूलना भी पिछले दो साल से शुरू कर दिया है। सड़क बनाए बिना टोल टैक्स वसूली के खिलाफ आंदोलन भी हुए। जिसके बाद कंपनी ने निर्माण जल्द पूरा करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन धरातल पर सड़क निर्माण की गति कछुआ चाल से ही नजर आ रही है। किच्छा में एनएच की सबसे बुरी स्थिति पुलभट्टा में है यहां पर एनएच का अधूरा निर्माण लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। यहां पर अभी तक दर्जनों हादसे हो चुके हैं। जिनमें कई लोग जान गंवा चुके हैं। इसके अलावा किच्छा से लेकर गदरपुर तक कई जगह निर्माण आधा अधूरा छोड़ने और सर्विस लाईन नहीं बनने से समस्या गंभीर होती जा रही है। एनएच 74 पर दोराहे से सितारगंज तक अभी भी 25 प्रतिशत से अधिक काम अधूरा है, जिसमें पुलभट्टा रेलवे ब्रिज, किच्छा श्मशान घाट मार्ग, रुद्रपुर इंदिरा चौक, गाबा चौक, एलायंस गेट के अलावा गदरपुर बाइपास के साथ-साथ मार्ग के तमाम क्षेत्रों में सर्विस लेन का निर्माण बाकी है। कार्यदायी कंपनी को कई जगह इस निर्माण के लिए भूमि भी अधिग्रहित करा दी गयी है, बावजूद इसके यह मार्ग अधूरा है।

अधूरे मार्ग से राहगीरों के साथ ही क्षेत्रवासियों को काफी परेशानी हो रही है। अधूरे निर्माण को लेकर कई बार किच्छा, रूद्रपुर और गदरपुर क्षेत्र के लोग एनएच स्काई और गल्फार के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। यही नहीं क्षेत्रवासियों ने मामला हाईकोर्ट में उठाया तो कोर्ट ने कंपनी को पंद्रह दिन में जवाब देने को कहा और काम तेजी लाने की हिदायत दी। लेकिन इसके बावजूद गल्फार कंपनी के जिम्मेवार लोगों के कानों में जूं नहीं रेंगी है। करीब आठ माह पूर्व जब गदरपुर बाजार में अतिक्रमण हटाया गया तो गल्फार कंपनी ने जल्द बाईपास निर्माण पूरा करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन अभी तक काम ठप पड़ा हुआ है। जिसके चलते गदरपुर के लोग फिर से आंदोलन की राह पर हैं। बाईपास मार्ग निर्माण के लिए आमरण अनशन भी शुरू हो चुका है।

एनएच के अधूरे निर्माण की वजह से आए दिन हो रहे हादसों के बावजूद कंपनी निर्माण में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रही। पिछले 11 माह में इस मार्ग पर हादसों में मरने वालों की संख्या 17 हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग इस मार्ग पर हादसों की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं। गल्फार की लापरवाही से हुए सड़क हादसे की चपेट में आकर दो पल्लेदारों की मौत के मामले में कंपनी के हेड कर्नल आरपी सिंह और जीएम मेंटिनेंस डी के शर्मा के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। जिन स्थानों पर गल्फार ने सड़क का काम बंद कर रखा है वहां पर अक्सर जाम की समस्या से लोगों को जूझना पड़ रहा है । साथ ही धूल के गुबार से आस-पास के लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। गल्फार की लापरवाही कहीं हादसे के रूप में सामने आ रही है तो कई स्थानों पर सर्विस लेन नहीं होने की वजह से यातायात अव्यवस्था के साथ ही आस पास के दुकानदारों का कारोबार भी चौपट हो गया है। जिसके चलते एनएच निर्माण कंपनी के खिलाफ लोगां का जनआक्रोश फूट गया।

दो बार दाखिल हो चुकी है याचिका

इस मामले में हाईकोर्ट नैनीताल में दो बार जनहित याचिका दायर हो चुकी है। एक याचिका में रुद्रपुर व्यापर मण्डल के सचिव मनीष फुटेला ने कहा है कि एनएच-74 में गदपुर ऊधसिंह नगर में बाईपास का निर्माण कार्य प्रस्तावित था, परंतु अभी तक एनएच द्वारा यह कार्य पूरा नहीं किया गया। मामले को सुनने के बाद खण्डपीठ ने एनएच व नगर पालिका से दो सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। इस तरह किच्छा निवासी अजय कुमार तिवारी ने भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 2017 में तब टोल शुरू हुआ तभी से इस मामले पर तिवारी मुखर हो गए थे। तब उनकी याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने एक तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। जिसमें सड़क निर्माण का सच सामने आया। रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने दो सप्ताह में कंपनी से जवाब तलब किया था।

 

आमने-सामने भाजपा विधायक

दिलचस्प है कि जहां एक ओर एक भाजपा विधायक गल्फार कंपनी के खिलाफ जनता का नेतृत्व कर रहे हैं, वहीं एक अन्य विधायक कंपनी के पक्ष में बताए जाते हैं। बताया जाता है कि विधायक ने गल्फार कंपनी के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर की देहरादून में मुख्यमंत्री से भी मुलाकात भी कराई और मुख्यमंत्री के सामने कंपनी को हो रहे नुकसान का दुखड़ा सुनाकर टोल प्लाजा शुरू कराने की गुहार लगाई। पता चला है कि देहरादून में मुख्यमंत्री से उक्त विधायक की मध्यस्थता में करीब 10-15 मिनट तक बातचीत हुई। टोल प्लाजा पर फिर से वसूली कराने की भाजपा विधायक की कोशिश सियासी गलियारों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

बात अपनी-अपनी

आधे-अधूरे निर्माण कार्य के कारण सड़क पर आवागमन में समस्याएं आ रही हैं। दर्जनों लोग सडक हादसो में मर चुके हैं। इस बाबत हमने एक साल पहले भी आंदोलन किया था। तब हमें एक माह के अंदर काम पूरा करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन एक साल बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो मजबूरन हमे दुबारा टोल पर धरना प्रदर्शन करना पड़ा। हमने वहां कोई तोड़- फोड़ नहीं की सिर्फ बैरियर को हटाने के लिए उसके नट बोल्ट खोले थे। हम पर दबाब बनाने के लिए फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। लेकिन हम किसी के दबाब में नही आयेंगे। जनता के हित में जो भी होगा वही किया जाएगा।
राजकुमार ठुकराल, विधायक रुद्रपुर

देवरिया स्थित हमारे टोल प्लाजा पर विधायक ने अपने लोगों के साथ तोडफोड़ की। उन्हांने हमारे टोल प्लाजा पर नुकसान पहुंचाया है उसकी पूरी सूची देते हुए मामला दर्ज करा दिया है। निर्माण कार्य शुरू करने के मामले में हमने लिखित में दे दिया है।
देवेंद्र शर्मा, वरिष्ठ प्रबंधक काशीपुर सितारगंज हाइवेज कंपनी

दो साल पूर्व जब यह टोल शुरू हुआ था तो तब मैंने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। जिसमें कोर्ट के आदेश पर एक जांच टीम बनी थी। जांच टीम ने टोल की नेगेटिव रिपोर्ट दी थी। कोर्ट ने दो सप्ताह में जवाब तलब भी किया। लेकिन कुछ नहीं हुआ। उल्टे मुझ पर ही टोल कंपनी के लोगों ने मानहानि की रिपोर्ट दर्ज करा दी।
अजय कुमार तिवारी, याचिकाकर्ता

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