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Uttarakhand

ग्राम प्रधान ने खुद के साथ प्रवासियों को भी मनरेगा मजदूर दर्शा दिया

उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार की जड़ें ऊपर से लेकर निचले स्तर तक गहरे पैठी हुई हैं। स्थिति यह है कि ग्राम सभा स्तर पर भी अनियमितताओं की शिकायतें आती रही हैं। ऐसी ही एक शिकायत पौड़ी जिले के अंतर्गत खिर्सू ब्लॉक की है। यहां विकासखंड खिर्सू की एक ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान स्वयं ही मनरेगा में मजदूर बन गए। प्रधान जी ने मजदूरी का भुगतान भी प्राप्त किया। इतना ही नहीं प्रधान जी ने एक ही दिन तीन से अधिक कार्यों में मजदूरी की। इस बात का खुलासा सूचना अधिकार के तहत हुआ है। मामले की शिकायत मुख्य विकास अधिकारी से की गई। जिस पर प्रकरण की जांच कराई गई। जिला पंचायत राज अधिकारी का कहना है कि जांच पूरी हो चुकी है। जल्द ही इस संबंध में कार्यवाही की जाएगी।

जानकारी के मुताबिक विकासखंड खिर्सू के कटुलस्यूं पट्टी के पोखरी ग्राम पंचायत में पूर्व प्रधान नरेंद्र प्रसाद मंमगाई ने अपने कार्यकाल के दौरान वर्ष 2014 से 2019 तक मनरेगा कार्यों में मजदूरी की है। जबकि पंचायती राज अधिनियम के तहत ग्राम प्रधान मनरेगा कार्यों में स्वयं मजदूरी नहीं कर सकते हैं। लेकिन मंमगाई ने इस नियम को धत्ता बताते हुए मनरेगा कार्यों में जमकर मजदूरी की है। इस दौरान मंमगाई ने एक ही तिथि में एक से अधिक कार्यों में मजदूर के तौर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर मजदूरी का भुगतान प्राप्त किया है। आरटीआई कार्यकर्ता दिग्विजय सिंह एवं सुभाष चौहान ने बताया कि पूर्व प्रधान मंमगाई ने अपने कार्यकाल के दौरान दिव्यांग, बुजुर्ग और गांव से बाहर रह रहे प्रवासियों को भी मनरेगा के तहत कुशल श्रमिक के रूप में दर्शाया है। उनके खातों में भुगतान किया है। आरटीआई कार्यकर्ताओं ने पूर्व प्रधान मंमगाई पर अपने कार्यकाल के दौरान मृत व्यक्ति की हाजिरी मनरेगा मजदूर के तौर पर लगाने का आरोप भी लगाया है। गणतंत्र दिवस एवं होली त्यौहार के दिनों में भी मनरेगा के कार्य दिखाए गए हैं। मामले की शिकायत के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी एमएम खान और स्वजल परियोजना प्रबंधक दीपक रावत की दो सदस्यीय टीम में प्रकरण की जांच की। डीपीआरओ खान ने बताया कि जांच पूरी हो चुकी है। जल्द कार्यवाही की जाएगी।

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