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Uttarakhand

रामदेव के दावों की पोल-खोल

योग गुरु रामदेव और उनके बिजनेस पार्टनर आचार्य बालकृष्ण का विवादों को लेकर चोली दामन का साथ रहा है। पतंजलि में निर्मित ओैषधियों में वन्य जीवों के अंगों को मिलाने का मामला हो या फिर दिव्य योग फार्मेसी से निकाले गए कर्मचारियों को वापस नौकरी पर रखे जाने के संबंध में न्यायालयों के आदेशों को दरकिनार करते हुए हठधर्मी दिखाने का मामला रहा हो या फिर आचार्य बालकृष्ण की डिग्रियों के फर्जी होने को लेकर तमाम तरह के आरोप सामने आते रहे हों। बाबा रामदेव हर समय बालकृष्ण के संकटमोचक बन खड़े रहे। इतना ही नहीं बालकृष्ण सीबीआई द्वारा फर्जी पासपोर्ट में गिरफ्तार किए जाने के बाद भी रामदेव ने अपने बिजनेस पार्टनर का साथ नहीं छोड़ा। अब एक बार फिर बाबा रामदेव और उनके सहयोगियों पर बेस अस्तपाल में सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर झूठे दावे करने का मामला सामने आया है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बेस अस्पताल भूपतवाला का उद्घाटन किए जाने के अवसर पर बाबा रामदेव द्वारा अस्तपाल में मृत्यु दर शून्य किए जाने का दावा धड़ाम होता नजर आ रहा है। उत्तराखण्ड स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण देहरादून द्वारा 17 मई को जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार पतंजलि द्वारा संचालित किए जा रहे बेस अस्पताल भूपतवाला में एक दिन के भीतर ही 16 संक्रमितों की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़े बाबा रामदेव के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण पर रोक एवं बचाव के उपायों को लेकर धर्मनगरी की जनता के निशाने पर आए बाबा रामदेव के पतंजलि ट्रस्ट ने जिलाधिकारी की पहल पर पतंजलि आयुर्वेद विश्वविद्यालय के सहयोग से कुंभ 2021 हेतु स्थापित किए गए 150 बेड के बेस अस्पताल को कोविड केयर हेल्थ सेंटर में तब्दील कर वेंटिलेटर सहित सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर तमाम दावे किए गए थे। इस बेस अस्पताल के उद्घाटन में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत सहित उनकी कैबिनेट के कई मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया था।

इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत व बाबा रामदेव ने संयुक्त रूप से इस बेस अस्पताल का उद्घाटन करते हुए जोर शोर से दावा किया था कि इस बेस अस्पताल में आॅक्सीजन सपोर्टेड सुविधाओं के साथ 150 रोगियों का एक साथ उपचार सुचारू रूप से हो सकेगा। यहीं नहीं बाबा रामदेव ने दावा करते हुए कहा था कि पतांजलि इस अस्पताल का संचालन करने के साथ साथ यहां आईसीयू सहित कई जरूरी व्यवस्थाओं को जुटाने का काम करेगी और कोविड से हो रही मौतों को लेकर इस बेस अस्पताल में शुन्य पर लाये जाने का भी दावा किया था। एक सप्ताह के भीतर ही बाबा रामदेव सहित बेस अस्पताल में कोविड रोगियों को लेकर तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे धराशाई होते नजर आ रहे है। अव्यवस्थाओं का केन्द्र बने पतांजलि के सहयोग से संचालित होने वाले इस बेस अस्पताल में 140 बैड तथा 10 इमरजेंसी बैड, 4 बाइपैप मशीन, 10 वेंटीलेटर के साथ, निःशुल्क दवाइयां, 80 आॅक्सीजन कंसंट्रेटर, पीएएस सिस्टम की व्यवस्था, 15 मल्टी पैरामाॅनीटर, आॅक्सीजन स्पोर्ट की व्यवस्था का दावा महज बयान बाजी तक सिमट कर रह गया है। उद्घाटन के महज 24 घंटे के भीतर ही अस्पताल में भर्ती कनखल निवासी 66 वर्षीय कोविड पीड़ित महिला की कोरोना से हुई मौत ने बाबा रामदेव द्वारा बेस अस्पताल में मृतक का आंकड़ा शून्य किए जाने के दावों की पोल खोलकर रख दी। महिला की मौत पर उसके बेटे अनुज ने अस्पताल के चिकित्सा कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया था। आरोप के अनुसार कुछ दिन पहले ही अस्पताल के उद्घाटन के तुरंत बाद उन्हें वेंटिलेटर उपलब्ध न होने की बात कहकर मरीज को कहीं और ले जाने के लिए कह दिया गया था। अनुज ने बताया पहले मेरी मां को अस्पताल में एडमिट कर ये कह दिया गया था कि उन्हे वेंटिलेटर बेड पर शिफ्ट कर दिया जाएगा आप घर जाइए यहां अधिकारी निरक्षण के लिए आने वाले हैं। उसके बाद अनुज के मुताबिक लाख मिन्नतें करने पर भी मरीज को वेंटीलेटर पर शिफ्ट नहीं किया गया उसके हाथ में रेफरल लेटर थमा दिया गया। इतना ही नहीं उन्हें उसकी मां की मौत के बारे में उसे कुछ नहीं बताया गया। अनुज शर्मा ने बेस अस्पताल पहुंचे बाबा रामदेव से भी मदद की गुहार लगाई थी। बाबा रामदेव ने उनकी मां का नाम भी पूछा था और ये कहते हुए कि ‘‘देखता हूं’’ अपनी गाड़ी में बैठ कर चल दिए थे।

 

सीएम तीरथ सिंह रावत से लेकर बाबा रामदेव व जिलाधिकारी से लेकर तमाम स्वास्थ अधिकारियों ने ये दावा किया था की यहां वेंटिलेटर बैड भी उपस्थित है। सोशल मीडिया पर ये मैसेज खूब वायरल होने के बाद लोग इस अस्पताल में बैड की तलाश में पहुंचे तो सरकार और बाबा रामदेव के सभी दावे खोखले साबित होते दिखाई दिए। जनपद हरिद्वार के वरिष्ठ पत्राकार शशि शर्मा ने अपनी समधन को 150 बेड के बेस अस्पताल में भर्ती कराया था लेकिन शशि शर्मा की समधन बृजबाला खंडूजा की भी पहले दिन ही यहां मौत हो गई। उन्होंने बताया की अस्पताल की लापरवाही के कारण उनकी समधन की मौत हो गई उनको किसी ने अस्पताल में एक चम्मच पानी तक नहीं पिलाया। जब आप परिवार का मरीज के निकट जाना बंद करते हैं तो मरीज की देख रेख आपका दायित्व बन जाती है लेकिन सवाल ये उठाता है की इतनी दावों के बाद भी इसका निर्वहन क्यों नही किया गया। उद्घाटन के चार दिन बीत जाने के बाद भी अस्पताल ने वेंटिलेटर सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई थी। ऐसे में सरकार ओर बाबा रामदेव के बड़े-बड़े दावों की पोल, खुलती नजर आ रही है। दावे तो आईसीयू बेड, उपचार, दवाइयां और भोजन तक मुफ्त कराने के किए गए हैं लेकिन मरीजों को एक चम्मच पानी तक के लिए नहीं पूछा जा रहा है। परेशान व्यक्ति जब घूम फिर कर इस बेस अस्पताल में पहुंचता है तो उसको हायर सेंटर रेफर का लेटर थमा दिया जाता है। ऐसे हालातों के बाद योग गुरु बाबा रामदेव के दावे पर भी सवाल उठ खड़ा होता है कि बाबा ने बड़े पैमाने पर जिले से बाहर तक के लोगों के उपचार बेस अस्पताल में होने का दावा आखिर किस आधार पर किया था? इस अस्पताल के हालात इतने खराब हैं कि उद्घाटन के एक सप्ताह के भीतर ही बेस अस्पताल में पहंुचने वाले कोविड रोगियों को जहां एक और भर्ती होने के लिए घंटों अस्पताल के बाहर फर्श पर पड़े रहकर इंतजार करना पड़ रहा है तो वहीं, कुछ रोगी इसी इंतजार में अस्पताल के बाहर ही दम तोड़ने को मजबूर है। योग गुरु रामदेव के इस बेस अस्पताल को लेकर हरिद्वार में सोशल मीडिया पर भी सोशल मीडिया यूर्जर बाबा रामदेव को खरी खोटी सुना रहे हैं। बड़े जोर-शोर के साथ बेस अस्पताल का उद्घाटन करते हुए किए गए दावों के विपरीत स्थिति इस कदर भयावह बनी हुई है कि वेंटीलेटर तो दूर बेस अस्पताल में कोविड रोगियों के लिए बैड तक प्रबंध होना टेडी खीर साबित हो रही है।

 

बेस अस्पताल में वेंटिलेटर सुविधा उपलब्ध नहीं है। हम ज्यादा क्रिटिकल कंडीशन वाले मरीजों को एडमिट नहीं कर रहे हैं। बाकी जो पेशेंट हैं उन सबको एडमिट किया जा रहा है। मैं स्वीकार करता हूं कि अस्पताल में मृत्यु हुई है, लेकिन कई मरीज ठीक होकर भी अपने घर वापस लौटे हैं।
डाॅ. शंभू झा, सीएमओ बेस अस्पताल हरिद्वार

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