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Uttarakhand

विधि-विधान से खुले चारधाम के कपाट

संजय कुंवर/जोशीमठ

कहा जाता है कि उत्तराखण्ड के चारधाम यात्रा सभी धामों में सर्वश्रेष्ठ है। यह चारों धाम विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री शामिल हंै। चारों धाम के कपाट अपने तय तिथि और शुभ मुहूर्त में खोले जा रहे हैं। इस बार यह शुभ मुहूर्त चार दिन लगातार है। सबसे पहले यमुनोत्री धाम के कपाट 14 मई 2021 यानी अक्षय तृतीया के दिन शुभ मुहूर्त में दोपहर 12ः15 में खुल चुके हैं। यही नहीं इसके अगले ही दिन गंगोत्री धाम के कपाट भी सुबह 7ः30 बजे शुभ मुहूर्त में खोल दिए गए हैं। अब केदारनाथ धाम के कपाट 17 मई की सुबह लगभग 5ः00 बजे विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे। इसके बाद बारी आती है चैथे धाम यानी बदरीनाथ धाम की। बदरीनाथ धाम के कपाट 18 मई को सुबह 4ः15 बजे खुलने जा रहे हैं। इसकी पूरी तैयारियां देवस्थानम् बोर्ड ने कर ली है। जिसके लिए 16 मई को श्री नृसिंह मंदिर से आदि गुरू शंकराचार्यजी की गद्दी, रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी के साथ योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर पहुंच गई है।

बदरीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 18 मई को शुभ मुहूर्त प्रातः चार बजकर 15 मिनट पर है। श्री बदरीनाथ धाम में देवस्थानम् बोर्ड ने कपाट खुलने से पूर्व की सभी तैयारियां दूरस्थ कर ली हैं। कपाट खुलने की प्रक्रिया 16 मई से शुरू हो गई है। आज नृसिंह मंदिर जोशीमठ में रेंकवाल पंचायत, कमदि थोक की उपस्थिति में गणेश पूजा-अर्चना यज्ञ-हवन के पश्चात बद्रीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी की अगुवाई में शंकराचार्य की पवित्र गद्दी और गाडू घड़ा (तेल कलश) कोविड नियमों के साथ योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर के लिए रवाना हुआ। पवित्र गद्दी के साथ कपाट खुलने की प्रक्रिया में देवस्थानम् बोर्ड के कर्मचारी, हक-हकूकधारियों ने पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान किया और दोपहर में डोली पांडुकेश्वर पहुंच गई है।

इस दौरान वैश्विक कोविड महामारी के नियमों को ध्यान में रखते हुए मास्क पहनने के साथ ही शारीरिक दूरी का भी पूरा ध्यान रखा गया। सभी लोग मय डोली योग-ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर पहुंच गए हैं, सभी देव डोलियां योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर में प्रवास करेंगी। 17 मई को भगवान उद्धव, कुबेर, रावल जी एवं आदि गुरू शंकराचार्य जी की गद्दी, गाडू घड़ा तेल कलश बदरीनाथ धाम पहुंचेंगे। इसके बाद अगले दिन 18 तारीख को ब्रहम् मुहूर्त में श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुल जाएंगे। हालांकि इस बार कोविड के चलते यात्रा में आम जनमानस नहीं शामिल होंगे। इसे वहीं इससे पूर्व 17 मई को 11वें ज्योर्तिलिंगों में अग्रणी भगवान केदारनाथ के कपाट खोलने की भी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। भगवान केदारनाथ के भव्य एवं दिव्य मंदिर को 11 कुंतल पुष्पों से सजाया गया है। केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग एवं जिलाधिकारी मनुज गोयल भी केदारनाथ धाम पहुंच गए हैं। प्रातः 5ः00 बजे भगवान केदारनाथ के कपाट पौराणिक परम्पराओं के साथ विधि-विधान से वैदिक मंत्रोंच्चारण के साथ जय भोले-जय केदार के उद्घोषों के साथ ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के कारण शासन द्वारा चारों धामों की यात्रा स्थगित किए जाने से इस बार भी भगवान केदारनाथ के कपाट सादगी से खुलेंगे, जबकि कुछ ही तीर्थ पुरोहितों को केदारनाथ धाम जाने की अनुमति मिलने के कारण इस बार भी केदार पुरी में सन्नाटा पसरा हुआ है। जानकारी साझा करते हुए देव स्थानम् बोर्ड के उप मुख्य कार्यधिकारी वी डी सिंह ने बताया कि कपाट खुलने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है तथा ऋषिकेश निवासी सौरभ कालरा के सहयोग से भगवान केदारनाथ के मंदिर को 11 कुंतल पुष्पों से सजाया गया है। उन्होंने बताया कि केदारनाथ के रावल भीमाशंकर शंकर लिंग, जिलाधिकारी मनुज गोयल, नायब तहसीलदार जयबीर राम बधाणी भी भगवान केदारनाथ के कपाट खोलने के लिए केदारनाथ धाम पहुंच चुकें हैं। देव स्थानम् बोर्ड के अधिकारी एवं डोली प्रभारी यदुवीर पुष्वाण ने बताया कि भगवान केदारनाथ सहित सभी सहायक मन्दिरों को रंग रोगन से सजाया गया है तथा बिजली, पानी की आपूर्ति सुचारू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रधान पुजारी सहित देव स्थानम् बोर्ड के अधिकारियों, कर्मचारियों के आवासों को भी सुवस्थित किया गया है।

तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली अंतिम रात्रि प्रवास के लिए मिनी स्वीजरलैण्ड के नाम से विश्व विख्यात चोपता पहुंच गई है। कल भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली चोपता से प्रस्थान कर विभिन्न सुरम्य मखमली बुग्यालों में नृत्य कर तुंगनाथ धाम पहुंचेगी तथा डोली के धाम पहुंचने पर भगवान तुंगनाथ के कपाट सादगी से खोले जाएंगे। शासन से मिनी लाॅकडाउन की गाइडलाइन जारी होने के चलते समिति श्रद्धालु डोली की अगुवाई कर रहे हैं तथा कपाट खुलने के बाद तुंगनाथ धाम में देव स्थानम् बोर्ड के अधिकारी, कर्मचारी एवं तीर्थ पुरोहित सीमित संख्या में रहेंगे। 16 मई को भूतनाथ मन्दिर में विद्वान आचार्यों ने बह्म बेला पर पंचाग पूजन के तहत कई पूजा सम्पन्न कर भगवान तुंगनाथ की भोग उत्सव मूर्तियों का रूद्राभिषेक कर आरती उतारी तथा भोग मूर्तियों को डोली में विराजमान कर डोली का विशेष श्रृंगार कर पुनः आरती उतारी। ठीक दस बजे भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली ने धाम के लिए प्रस्थान किया तथा डोली के पावजगपुडा गांव पहुंचने पर भक्तों ने अघ्र्य लगाकर अपने घरों से हाथ जोड़कर डोली को कैलाश के लिए विदा किया। भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली, चिलियाखोड, पंगेर बनियाकुण्ड होते हुए देर सायं अंतिम रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंच गई है। 17 मई को भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली चोपता से प्रस्थान कर पैदल मार्ग के सुरम्य मखमली बुग्यालों में नृत्य करते हुए धाम पहुंचेगी तथा डोली के धाम पहुंचने पर भगवान तुंगनाथ के कपाट विधि -विधान से ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे। इस मौके पर प्रधान विजयपाल नेगी, क्षेपस जयवीर सिंह नेगी, मठापति राम प्रसाद मैठाणी, प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, प्रकाश चन्द्र मैठाणी, सुरेंद्र प्रसाद मैठाणी, विजय भारत मैठाणी, विनोद मैठाणी, अजय मैठाणी, अतुल मैठाणी, बलवीर सिंह नेगी, नरेन्द्र सिंह भंडारी, जीतपाल भंडारी, उमेद सिंह नेगी, चन्द्रमोहन बजवाल मौजूद रहे।

इस प्रसिद्ध चारधाम के कपाट खुलने पर उत्तराखण्ड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने देश-दुनिया के तीर्थयात्रियों एवं श्रद्धालुओं को बधाई दी।

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