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पुरोला (उत्तरकाशी)। प्रदेश एवं केंद्र सरकार द्वारा बेशक किसानों की आय दोगुनी करने के सपने दिखाए जा रहे हैं, लेकिन फसल बीमा के नाम पर कपनियां उन्हें गुमराह कर रही हैं। तीन सौ से अधिक किसानों एवं उद्यानपतियों को दो वर्ष पूर्व सेब, नगदी फसल टमाटर का बीमा कराने के बाद आज तक बीमा की राशि नहीं मिली, जबकि किसान एवं उद्यानपति पहले ही हजारों रुपए बीमा कपनियों को प्रीमियम के नाम पर दे चुके हैं।

मामला दो वर्ष पूर्व का है जब एग्रीकल्चर बीमा कंपनी ने उत्तराकाशी जिले के सुदूरवर्ती मोरी प्रखंड के आराकोट, नैटवाड समेत पुरोला क्षेत्र के डेढ़ सौ किसानों का नगदी फसल टमाटर और 200 उद्यानपतियों का सेब फसल का बीमा कराया। शुरुआत में सेब और टमाटर की फसल भी ठीक थी किंतु बैमोसमी बारिश, सूखा एवं ओलावृष्टि के चलते बीते चार वर्ष से सेब, टमाटर और मटर आदि फसल खराब हो रही है। 2016-17 में भी सेब और टमाटर की फसल सूखा, बेमौसमी बारिश के चलते खराब हो गई। किंतु एग्रीकल्चर कंपनी ने प्रीमियम लेने के बाद भी आज तक बीमा राशि का भुगतान नहीं किया।

उद्यानपति जारज मोहन सिंह, किशोर सिंह, मोहन सिंह, विरेंद्र सिंह आदि का कहना है कि दो वर्ष पूर्व बीमा कपनी द्वारा आराकोट, नैटवाड एवं पुरोला क्षेत्र में पांच सौ से अधिक किसानों और उद्यानपतियांं का सेब, टमाटर फसल का बीमा कराया गया। किसानों से जहां टमाटर फसल का 75 रुपए प्रति नाली के हिसाब से प्रीमियम लिया गया तो बीमा के रूप में 1500 रुपए प्रति नाली मुआवजा देने का भरोसा दिया गया। सेब फसल का भी 50 से 65 रुपए प्रति पेड़ प्रीमियम लिया गया। साथ ही पेड़ की उम्र की हिसाब से 500 सौ से 1000 तक प्रति पेड़ बीमा देने की बात की गई किंतु बरसात, सूखा, ओलावृष्टि से फसल खराब होने के बाद भी बीमा कपनियों ने आपदा मानक का हवाला देकर बीमा देने से हाथ खड़े कर दिए। किसानों और उद्यानपतियों का आरोप है कि सरकार, उद्यान विभाग, बीमा कपनियां, किसानों और उद्यानपतियों को बरगला रही है। ओलावृष्टि आपदा को मानक में रखा ही नहीं है। मानकों के जटिलता के कारण किसानों और उद्यानपतियों का भला हो ही नहीं सकता। सरकार किसानों का भला होते हुए देखना ही नहीं चाहती। इसीलिए बीमा के मानक इतने जटिल बनाए गए हैं कि कोई भी किसान उसके अंर्तगत नहीं आता, न ही उस बीमा मिल सकता।

सेब पेड़ों का उम्र एवं फसल उत्पादन के हिसाब से मौसम आधारित बीमा एग्रीकल्चर बीमा कंपनी द्वारा कराया जाता है। 5 वर्ष तक के पेड़ का 50 रुपए एवं उससे बड़े पेड़ के लिए 75 रुपए प्रीमियम राशि उद्यानपति से ली जाती है। बीमा कंपनी के मानक के अनुरूप फसल का नुकसान होने पर छोटे पेड़ का 500 एवं बडे़ पेड़ का 1000 रुपए बीमा राशि उद्यानपति को दी जाती है। बीमा राशि भुगतान का निर्धारण बीमा कंपनी, उद्यान एवं कृषि विभाग की विशेषज्ञ संयुक्त टीम के नुकसान का जायजा लेने के बाद अंतिम रिर्पेट के बाद किया जाता है।
हरीश रावत, उद्यान प्रभारी पुरोला

 

मोरी-पुरोला क्षेत्र में 2016-17 में कराया गया बीमा
टमाटर – प्रीमियम राशि – 75 रुपए प्रतिनाली
बीमा राशि – 15 सौ रुपए प्रति नाली।
कुल बिमित किसान – 42 कुल – 336 नाली।

 

सेब उद्यान- कुल बीमा
पुरेला-32, आराकोट 43 व नैटवाड 16 उद्यानपति।
प्रीमियम राशि प्रति पेड़-65 से 75 रुपए।
प्रति उद्यानपति को मिलने वाली बीमा राशि-1000 से 1500 सौ रुपए उम्र के हिसाब से प्रति पेड़।
प्रति किसान द्वारा कराए गए पेड़ों का बीमा-235 से 265 तक।

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