[gtranslate]
Uttarakhand

सुभाष की रहस्यमय गुमशुदगी

 

कहानी दिव्यांग बच्चों के एनजीओ की

 

 

दास्तान-ए-दिव्यांग/भाग-2

 

‘बचपन बचाओ आंदोलन बनाम भारत सरकार’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि किसी भी बच्चे की गुमशुदगी होने के बाद तत्काल प्रभाव से न केवल एफआईआर दर्ज की जाएगी, बल्कि इस गुमशुदगी को मानव तस्करी अथवा अपहरण की धाराओं अंतर्गत दर्ज करना होगा। केंद्र सरकार के महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश बाद सभी राज्यों को निर्देश जारी किए लेकिन शायद उत्तराखण्ड की ‘मित्र पुलिस’ सुप्रीम कोर्ट और महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के निर्देशों से इत्तेफाक नहीं रखती है। इसका उदाहरण है रामनगर के बसई स्थित यूएसआर इंदु समिति स्कूल से दो साल पहले रहस्यमयी परिस्थितियों में एक अनाथ बच्चा सुभाष की गुमशुदगी। पहले तो स्कूल ने ही एक महीने तक बच्चे की गुमशुदगी को छिपाए रखा। इसके बाद एक पीड़ित महिला और रोशनी सोसायटी ने हाईकोर्ट में याचिका डालकर सुभाष की लापता होने की रिपोर्ट तो दर्ज करा दी लेकिन आज तक पुलिस उसका पता नहीं लगा पाई है। दो साल में पुलिस की प्रगति रिपोर्ट सिर्फ इतनी है कि पीरुमदारा चौकी और रामनगर कोतवाली से मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के हवाले कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। फिलहाल सुभाष की रहस्यमयी गुमशुदगी को लेकर तरह-तरह की चर्चा है। कहा तो यह भी जा रहा है कि उस अनाथ के साथ कोई बड़ी अनहोनी घट चुकी है। यह कोई नहीं जानता कि सुभाष आज जिंदा है या उसकी मौत हो चुकी है? उसे जमीन खा गई या आसमान निगल गया?

 

गुमशुदा सुभाष

‘बारह जुलाई 2022 का दिन था जब मेरे बेटे हर्षित परगाई के साथ रामनगर के बसई स्थित यूएसआर इंदु समिति स्कूल में मारपीट की गई। मैंने स्कूल के वार्डन विरेंद्र रावत को फोन किया। विरेंद्र रावत ने मुझे बताया कि कुछ दिन पहले ही इस स्कूल से एक अनाथ बच्चा सुभाष (काल्पनिक नाम) स्कूल से भाग गया है। मैं भी उसके पीछे भागा तो मैं गिर गया मुझे चोट लग गई इन्होंने मेरा भी इलाज नहीं किया, आपके बच्चे का क्या करेंगे? 16 जुलाई 2022 को मैं, शिवानी पाल और गोविंद मेहरा, तीनों जिला प्रोबेशन अधिकारी और सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष से मिलने गए। जहां हमने अपने बच्चे की स्कूल में पिटाई के साथ ही सुभाष के लापता होने की बात बताई। तत्कालीन जिला प्रोबेशन अट्टिाकारी व्योमा जैन ने बताया कि यूएसआर इंदु समिति स्कूल से कोई बच्चा नहीं भागा है, सभी बच्चे वहीं पर हैं। 19 जुलाई 2022 को मैंने थाना रामनगर में अपने बच्चे के साथ मारपीट की रिपोर्ट लिखवाई तब एक स्थानीय यूट्यूबर ‘रवि के बिंदास बोल’ में भी सुभाष की गुमशुदगी की न्यूज प्रसारित की गई। इस न्यूज के वीडियो फुटेज मेरे द्वारा व्योमा जैन और सीडब्ल्यूसी अट्टयक्ष आरपी पंत को भेजे गए लेकिन उन्होंने तब भी कोई कार्रवाई नहीं की। यही नहीं बल्कि एक चैनल ‘पहाड़ टीवी’ द्वारा भी अपनी न्यूज में बताया गया कि यूएसआर इंदु समिति स्कूल से एक अनाथ बच्चा गायब है लेकिन उसका भी कोई असर नहीं हुआ। इसी बीच नैनीताल के जिलाट्टिाकारी द्वारा मेरे बच्चे हर्षित परगाई की मारपीट के मामले में एक जांच कमेटी का गठन किया गया जिसमें व्योमा जैन सहित कई अट्टिाकारी शामिल थे उन्होंने वहां जांच की लेकिन उनको भी इस बात का पता नहीं चल सका कि एक बच्चा गायब है। इसके बाद हल्द्वानी स्थिति रोशनी सोसाइटी ने सुभाष की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन रामनगर से लेकर नैनीताल तक किसी ने भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसके बाद रोशनी सोसाइटी इस मामले को हाईकोर्ट में लेकर गई।’’

यह कहना है हल्द्वानी निवासी हेमा परगाई का। हेमा परगाई अगर अपने दिव्यांग बच्चे हर्षित परगाई की यूएसआर इंदु समिति स्कूल में हुए दुर्व्यवहार और अमानवीय व्यवहार के खिलाफ सक्रिय नहीं होती तो शायद ही सुभाष की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाती।

मामला पहुंचा हाईकोर्ट
पुलिस द्वारा गुमशुदा बालक की रिपोर्ट दर्ज न करने को लेकर दिव्यांगों के लिए काम करने वाली एक संस्था ‘रोशनी सोसायटी फॉर रिहेबलिटेशन ऑफ सोशल एंड न्यूरोलॉजिकल इम्पेयर्ड ने उच्च न्यायालय नैनीताल में जनहित याचिका दायर की। याचिकाकर्ता सोसायटी के वकील दुष्यंत मैनाली ने न्यायालय को अवगत कराया कि इस प्रकरण पर रामनगर पुलिस द्वारा कोताही बरती गई है और उच्चतम न्यायालय द्वारा गुमशुदा बच्चों से जुड़े मामलों की जांच के लिए जारी दिशा-निर्देश का पालन नहीं किया गया है। गौरतलब है कि 2012 में एक जनहित याचिका ‘बचपन बचाओ आंदोलन बनाम केंद्र सरकार’ पर सुनवाई बाद उच्चतम न्यायालय ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन दिशा-निर्देशों के बाद केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने बकायदा एक ‘स्टैंडिंग ऑपरेटिंग प्रोसिजर’ सभी राज्यों को जारी किया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना

रामनगर पुलिस ने इन दिशा-निर्देशों का पालन सुभाष की गुमशुदगी प्रकरण में नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने गुमशुदा बच्चों के मामलों में निर्देश दिया था कि  ‘Upon receipt of a complaint regarding a missing child, an FIR should be registered forewith as a case of
trafficking or abduction’  (किसी लापता बच्चे के सम्बंध में शिकायत प्राप्त होने पर, तस्करी अथवा अपहरण के मामले के रूप में तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।) सुभाष (काल्पनिक नाम) 12 अगस्त 2022 को संस्था से लापता हुआ था। संस्था के कर्ताधर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने एक माह तक पुलिस में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। 9 सितम्बर 2022 को हो-हल्ला के बाद जब पुलिस को सूचित किया गया तो सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार तत्काल एफआईआर दर्ज करने की कोई जहमत मित्र पुलिस ने नहीं उठाई।

हाईकोर्ट के डर से दर्ज हुई एफआईआर

22 सितम्बर को जनहित याचिका में सुनवाई के दौरान मामले की गम्भीरता समझते हुए जैसे ही तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने अगले ही दिन, 23 सितम्बर को नैनीताल के तत्कालीन एसएसपी पंकज भट्ट और रामनगर के कोतवाल अरुण सैनी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया तब आनन-फानन में एफआईआर दर्ज की गई।

इस पूरे प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘बचपन बचाओ आंदोलन बनाम भारत सरकार’ मुकदमे में दिए गए आदेशों की पूरी तरह अवहेलना की गई है। यूएसआर इंदु समिति और जिला प्रोबेशन अट्टिाकारी तथा जिले की सीडब्ल्यूसी कमेटी के द्वारा इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। हेमा परगाई के द्वारा बार-बार सुभाष की गुमशुदगी मामले को स्कूल के साथ ही अधिकारियों के समक्ष उठाने के बावजूद भी एफआईआर दर्ज कराने की ढील दी जाती रही। न तो स्कूल प्रबंधकों ने ही और न ही बाल अट्टिाकारों के संरक्षण अट्टिाकारियों ने महीनों तक इस तरफ ट्टयान ही नहीं दिया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि बच्चे के लापता होने वाले स्थान के आस-पास सीसीटीवी कैमरांे आदि का सघन ब्यौरा लेकर उसकी लोकेशन ली जाए। जिससे बच्चे की बरामदगी होने में आसानी रहेगी। लेकिन रामनगर पुलिस सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सुभाष की लोकेशन का पता लगाने में नाकामयाब रही। यहां यह भी बताना उचित होगा कि यह वही रामनगर पुलिस है जिसने एक बच्चे के स्कूल से लापता हो जाने के बाद महज दो दिन में ही उसे सीसीटीवी के जरिए बरामद कर दिखाया था। लेकिन सुभाष के मामले में पुलिस के हाथ खाली रहे। वह तब है जब पीरूमदारा क्षेत्र में जहां यूएसआर इंदु समिति स्कूल है वहां चप्पे-चप्पे पर हर तीसरी चौथी दुकान पर और चौराहांे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।
‘बचपन बचाओ आंदोलन बनाम भारत सरकार’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत एक मुख्य बिंदु यह भी है कि मानव तस्करी ईकाई के द्वारा हर तीसरे महीने में लापता बच्चे के संबंध में रिपोर्ट दी जानी आवश्यक है। लेकिन इस प्रकरण में ऐसी कोई रिपोर्ट जारी नहीं की गई। स्थानीय पुलिस ने भी औपचारिकता निभाते हुए इतना किया कि चार महीने बाद यह मामला एंटी ह्यूमन टेªफिकिंग यूनिट के हवाले कर दिया। चार महीनों में पीरूमदारा पुलिस चौकी और रामनगर कोतवाली की पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। लोगों की मानें तो इस दौरान ऐसा लगा कि स्थानीय पुलिस चार माह पूरे होने का जैसे इंतजार कर रही थी।

सुभाष की रहस्यमय गुमशुदगी के मामले पर यूएसआर इंदु समिति स्कूल द्वारा एफआईआर दर्ज कराने में की गई देरी और लापरवाही दर्शाती है कि मामले को दबाए जाने की कोशिश की जा रही थी। अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूल संचालक और संबंधित अट्टिाकारी किस तरह जान-बूझकर भी अंजान बने रहे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्कूल का बच्चा गायब हो गया तो उसकी एफआईआर स्कूल के द्वारा महीनों तक क्यों नहीं कराई गई? क्यों रोशनी सेासाइटी को सुभाष की रहस्यमय गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए न्यायालय की शरण लेनी पड़ी? पुलिस अभी तक भी सुभाष की गुमशुदगी से पर्दा क्योें नहीं उठा पाई है? सुभाष प्रकरण में ऐसे कई यक्ष प्रश्न हैं।

दिव्यांग के हाथों में दिव्यांगों की सुरक्षा?

क्या आप सोच सकते हैं कि दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा एक दिव्यांग के भरोसे पर हो, लेकिन ऐसा ही कारनामा करने के लिए चर्चित रहा यूएसआर इंदु समिति का स्कूल। यहां वीरेंद्र रावत नामक एक व्यक्ति वार्डन के रूप में तैनात रहे जो खुद शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं। इस पर स्वयं हाईकोर्ट द्वारा भी चिंता जाहिर की गई कि जब अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने न्यायालय के समक्ष इसका खुलासा किया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने यूएसआर इंदु समिति स्कूल में प्रशिक्षित स्टाफ रखने की हिदायत दी थी।

सुभाष संग अनहोनी का अंदेशा

‘दि संडे पोस्ट’ के पास सुभाष प्रकरण में एक ऑडियो है जिसमें संस्था की एक कर्मचारी बच्चे के साथ किसी अनहोनी की बात कह रही है और इसके लिए संस्था के सदस्यों को जिम्मेदार बता रही है। हालांकि ‘दि संडे पोस्ट’ इस ऑडियो की पुष्टि नहीं करता है लेकिन जिस तरह से ऑडियो में सुभाष संग कुछ गलत होने का खुलासा किया गया है, उससे इस पहलू से भी जांच की जा सकती है कि कहीं सुभाष के साथ कुछ गलत तो नहीं हुआ था। रिकॉर्डिंग में यह बात कहने वाली एक लड़की है जो पूर्व में इसी स्कूल में कार्य कर चुकी है। यह भी बताया जा रहा है कि एक बार पहले भी सुभाष स्कूल से गायब हो गया था। जिसे बाद में सकुशल बरामद कर लिया गया था।

बात अपनी-अपनी
यूएसआर इंदु समिति में मुझे कार्य छोड़े ढ़ाई साल हो चुका है। इन सालों में मुझे विद्यालय के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है।
कविता बिष्ट, पूर्व एम्बेसडर, उत्तराखण्ड

इस मामले की मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। मैं इसका पता लगाता हूं। इस मामले में किसकी लापरवाही रही है इसकी भी जांच कराई जाएगी।
प्रहलाद मीणा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नैनीताल

सुभाष वाले मामले में हमने काफी जांच-पड़ताल की लेकिन उसका पता नहीं चल सका। हमने डीडी न्यूज में भी जेडो निकलवाया, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों सभी जगह पोस्टर भी लगवाए। देर से रिपोर्ट दर्ज होने में संस्था की तरफ से लापरवाही रही। उन्होंने इस मामले को डिले किया था। ज्यादा कुछ एसएसपी साहब बता पाएंगे।
अरुण कुमार सैनी, कोतवाली इंचार्ज, रामनगर

सुभाष बिना बताए ही स्कूल से निकल गया था। हमने उसे काफी ढूंढ़ा, सभी सीसीटीवी कैमरे खंगाले लेकिन उसका पता नहीं चल सका। हमने केस डायरी भी बनाई उसमें स्कूल के बच्चों के बयान भी दर्ज किए, वह डायरी अब सीओ ऑफिस में है। चार महीने बाद यह केस एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को ट्रांसफर किया जा चुका है।
राजेश जोशी, प्रभारी पीरूमदारा चौकी, रामनगर

सुभाष एक अनाथा बच्चा था। 10 दिन पहले ही वह सीडब्ल्यूसी को मिला था। उन्होंने हमारी संस्था को वह दिया था लेकिन वह भाग गया। पुलिस को हमने रिपोर्ट भी दी लेकिन उसने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। उस मामले में एसओजी टीम भी लगी थी। अगर वह मार दिया गया तो उसकी डेड बॉडी तो मिली होगी। अगर किसी के पास इस मामले से सम्बंधित एविडेंस है तो वह कोर्ट को दे।
संदीप रावत, प्रबंधक यूएसआर इंदु समिति स्कूल रामनगर

अगस्त 2022 माह में तीन अभिभावकों द्वारा जिनमें से एक हमारी संस्था की सदस्य भी हैं हमारे संज्ञान में लाया गया कि रामनगर स्थित संस्था यूएसआर इंदु समिति के हॉस्टल में उनके मानसिक दिव्यांग बच्चों के साथ मारपीट की घटना हुई है एवं वहां से एक सुभाष नाम का मानसिक दिव्यांग बच्चा जिसको जिला बाल कल्याण समिति नैनीताल द्वारा अनाथ होने के कारण वहां पुनर्वास के लिए रखा गया था, अचानक कहीं गायब हो गया है। हमें बताया गया कि उक्त संस्था में अन्य मानसिक दिव्यांग बच्चों के साथ भी दुर्व्यवहार होता रहता है तथा यह भी बताया गया कि रामनगर पुलिस ने अभिवावकों द्वारा मारपीट की शिकायत करने पर भी एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई।

हमारे द्वारा उक्त घटनाओं के सम्बंध में जिला बाल कल्याण समिति नैनीताल एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी नैनीताल के कार्यालय जाकर मौखिक रूप से सूचित किया और संस्था पर कार्रवाई करने के लिए आग्रह किया गया, लेकिन उनके द्वारा लगभग एक माह तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। तत्पश्चात 21 सितम्बर 2022 को रोशनी सोसायटी द्वारा इस सम्बंध में माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल में एक जनहित याचिका दायर की गई जिसकी सुनवाई के दौरान माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रामनगर पुलिस को निर्देश दिए कि मारपीट एवं गुमशुदा बच्चों के मामले पर तुरंत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करें। मजबूरन रामनगर पुलिस को दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। उक्त जनहित याचिका अभी भी माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल में विचाराधीन है।

रोशनी सोसायटी को संदेह है कि गुमशुदा सुभाष के सम्बंध में संस्था एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी कुछ तथ्य छुपा रहे हैं। क्योंकि संस्था द्वारा जिला प्रोबेशन अधिकारी को प्रतिदिन बच्चों की उपस्थिति की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भेजनी होती है फिर या तो संस्था ने गुमशुदा सुभाष की जानकारी जिला प्रोबेशन अधिकारी को नहीं दी या जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा उक्त सूचना के बाद भी कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई? रामनगर पुलिस द्वारा मारपीट एवं गुमशुदा सुभाष मामले की एफआईआर दर्ज न करना तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही मुकदमा दर्ज करना रामनगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हैं।
गोविन्द सिंह मेहरा, सचिव, रोशनी सोसायटी, हल्द्वानी

अनसुलझे सवाल
1. आरोप है कि गुमशुदा बच्चे सुभाष के साथ गुमशुदगी से एक रात पूर्व संस्था के कर्मचारी हिमांशु रावत के द्वारा शराब पीकर मार-पीट की गई थी। आज भी रावत संस्था में कार्यरत हैं क्यों?

2. रामनगर और पीरूमदारा के हर चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, संस्था और उसके आस-पास दुकानों चौराहों पर कैमरे लगे हैं। ऐसे में बच्चे का नहीं मिलना बड़ा सवाल है?

3. जब अरहान नामक बच्चे, जिसके सिर पर चोट लगी, उसे संस्था से जाते हुए तुरंत पकड़ लिया गया तो अनाथ बालक सुभाष कैसे नहीं मिल सका?

4. प्रत्येक संस्था से बच्चों की उपस्थिति की डेली रिपोर्ट जाती है, जिला बाल कल्याण समिति और जिला
प्रोबेशन कार्यालय को। तो ऐसे में सुभाष लापता है, कैसे पता नहीं चला? जिला बाल कल्याण समिति और जिला प्रोबेशन कार्यालय ने सुभाष की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं करवाई?

5. यूएसआर इंदु समिति द्वारा लापता बालक की सूचना एक महीने बाद पुलिस को दी गई? पुलिस ने भी सूचना मिलने के एक माह तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की?

You may also like

MERA DDDD DDD DD