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नैनीताल में लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। टिकट के दावेदारों की महत्वाकांक्षाएं एक-दूसरे को निपटाने की हद तक हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के चुनाव न लड़ने की घोषणा से भाजपा में दावेदारों की बाढ़ आ गई है। पार्टी अध्यक्ष अजय भट्ट से लेकर युवा नेता तक लाइन में हैं। कांग्रेस में भी दावेदारों की भीड़ है। लेकिन असली लड़ाई पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के बीच है
आ गामी लोकसभा चुनाव का वक्त नजदीक करीब आ रहा है, तो राजनीतिक दलों में सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। टिकट के दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है। भारतीय जनता पार्टी से वर्तमान सांसद भगत सिंह कोश्यारी की 2019 का लोकसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा से पार्टी के अंदर अन्य दावेदारों की महत्वाकांक्षाओं के पंख उड़ान भरने लगे हैं। लेकिन उम्र के इस पड़ाव में युवा नेताओं से भी ज्यादा सक्रिय कोश्यारी अंतिम समय में पुनः भाजपा उम्मीदवार हो जाएं तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। महत्वाकांक्षाओं के ज्वार भारतीय जनता पार्टी में उठने लगे हैं। लेकिन इतना जरूर है कि टिकट पाने की महत्वाकांक्षा कांग्रेस की तरह सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे को निपटा देने वाली नहीं दिखाई देती। भाजपा में यह महत्वाकांक्षा अभी इस हद तक नहीं पहुंची है। वैसे भी अमित शाह-मोदी की भाजपा में इस हद तक जाने की हिम्मत किसी भाजपा नेता में शायद है भी नहीं।
आजादी के बाद से नैनीताल लोकसभा सीट पर ज्यादातर कांग्रेस का ही कब्जा रहा है। 1977 में पहली बार जनता पार्टी से भारतभूषण इस सीट पर चुने गए थे, तब कांग्रेस के केसी पंत को हार का सामना करना पड़ा था। पहली बार इस संसदीय क्षेत्र से कोई गैर कांग्रेसी सांसद चुना गया था। भारतीय जनता पार्टी को ये सीट पहली बार बलराज पासी ने 1991 में दिलाई थी। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी को पराजित किया था। इसमें नारायण दत्त तिवारी अपने राजनीतिक जीवन की एक ऐसी लड़ाई हार गए, जिसे वे जीत जाते तो भारत के प्रधानमंत्री हो सकते थे। 1998 में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार इला पंत ने उन्हें पराजित किया था जो कट्टर कांग्रेसी परिवार पंडित गोविंद बल्लभ पंत की पुत्रवधू एवं केसी पंत की पत्नी थीं। शायद उनकी नाराजगी कांग्रेस से कम नारायण दत्त तिवारी से ज्यादा थी। कांग्रेस के अंदर नारायण दत्त तिवारी एवं केसी पंत की प्रतिद्वंदिता किसी से भी छिपी नहीं रही। 2014 में इस सीट पर भाजपा के कद्दावर नेता भगत सिंह कोश्यारी ने जीत हासिल की। जीत में मोदी लहर का प्रभाव तो था ही, परंतु कोश्यारी की पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच सर्वस्वीकार्यता का योगदान भी कम नहीं था। उत्तराखण्ड का ड्राफ्ट देने वाले भगत सिंह कोश्यारी का दुर्भाग्य रहा कि भाजपा ने उन्हें अंतरिम मुख्यमंत्री के अलावा फिर कभी मुख्यमंत्री के योग्य नहीं समझा, जबकि विधायक दल में 2007 में उनके समर्थकों की तादाद ज्यादा थी। अब जबकि भगत सिंह कोश्यारी ने 2019 का चुनाव न लड़ने के संकेत दिए हैं, भाजपा के अंदर नैनीताल लोकसभा सीट के लिए दावेदारों ने अपनी दावेदारी जतानी शुरू कर दी है। अब ये भविष्य बताएगा कि इस दावेदारी में गंभीरता कितनी है।
वर्ष 1991 में कांग्रेस के कद्दावर नेता नारायण दत्त तिवारी को हरा कर पहली बार लोकसभा में इस सीट से भाजपा को प्रतिनिधित्व दिलाने वाले बलराज पासी हमेशा की तरह इस बार भी भाजपा टिकट के गंभीर दावेदार हैं। उनकी सक्रियता बता रही है कि वे इस बार टिकट पाने की कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। गदरपुर के विधायक एवं सूबे के शिक्षामंत्री अरविंद पांडे के कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति उनके लिए जनसंपर्क का कार्य कर रही है। बलराज पासी को गुरु मानने वाले अरविंद पांडे उनके लिए जनसंपर्क का अच्छा माध्यम भी साबित हो रहे हैं। इसी वर्ष हल्द्वानी में होली मिलन के बहाने बलराज पासी ने अपने इरादे व्यक्त कर दिए थे।
इस बीच पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान विधायक बंशीधर भगत ने नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्र से दावेदारी प्रस्तुत कर भाजपा के अंदर की सियासत को गरमा दिया। लंबे समय से विधायक रहे बंशीधर भगत मंत्री पद न मिलने से नाराज बताए जाते हैं। उनका कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं का उन पर लोकसभा चुनाव लड़ने का भारी दबाव है और वे अपनी दावेदारी जरूर करेंगे।
प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट भी इस लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक बताए जाते हैं। हालांकि उन्होंने अपनी दावेदारी पर खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन जिस प्रकार उनकी इस लोकसभा सीट में सक्रियता बढ़ी है उससे कयास लगाए जा रहे हैं कि भविष्य में वे भी दावेदारी प्रस्तुत कर दें तो कोई आश्चर्य नहीं है। अपनी सक्रियता के चलते उन्होंने अपने समर्थकों की अच्छी फौज खड़ी कर ली है। अजय भट्ट की फिलहाल की स्थिति को देखें तो वह भाजपा में दिनोंदिन मजबूत हो रहे हैं। संगठन के साथ ही सत्ता में भी उनका हस्तक्षेप बढ़ गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पार्टी के मुखिया अजय भट्ट की सलाह पर सत्ता की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं। भट्ट की सक्रियता के चलते ही भाजपा प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। प्रदेश के साथ ही केंद्रीय नेतृत्व भी इस मामले में भट्ट की तारीफ कर चुका है। इस बीच एक नया नाम जो उभरा है, वो है खटीमा से विधायक पुष्कर सिंह धामी का। धामी वर्तमान सांसद भगत सिंह कोश्यारी के निकटस्थ माने जाते हैं। साफ-सुथरी छवि के धामी की केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से काफी अच्छे संबंध बताए जाते हैं। स्वयं के चुनाव न लड़ने की स्थिति में भगत सिंह कोश्यारी का हाथ निश्चित ही पुष्कर सिंह धामी के ऊपर ही होगा। 2019 के लोकसभा चुनाव की दावेदारी में पुष्कर सिंह धामी छुपे रुस्तम साबित हो सकते हैं।
कुल मिलाकर प्रदेश भाजपा में सिर फुटव्वल जैसी स्थिति भले ही नहीं है, लेकिन टिकट चाहने वालों की मजबूत दावेदारियां अपनी जगह हैं। नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा क्षेत्र में लालकुआं, हल्द्वानी, कालाढूंगी, नैनीताल, भीमताल, काशीपुर, गदरपुर, बाजपुर, रुद्रपुर, नानकमत्ता, जसपुर, खटीमा, किच्छा सितारगंज विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिनमें हल्द्वानी को छोड़कर सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा है। भाजपा के लिए ये सीट प्रतिष्ठा की है। ये देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा किस पर अपना विश्वास जताती है।
भाजपा के साथ ही कांग्रेस में भी नैनीताल लोकसभा सीट को लेकर खींचतान है। फिलहाल इस सीट को लेकर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और वर्तमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश में जंग जारी है। दोनों ही इस सीट पर अपनी-अपनी दावेदारी जता रहे हैं। इस जंग के बीच हरीश रावत कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव बनने पर और ताकतवर दिखाई दे रहे हैं। स्थिति यह है कि जो लोग कल तक रावत से दूरी बनाकर अपनी अलग गुटबाजी कर रहे थे वे भी रावत के साथ मंचासीन होते हुए और उन्हें माला डालते हुए दिख रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश भी चुनाव मैदान में उतरने के खुले संकेत दे चुकी हैं। इसी के साथ प्रकाश जोशी का नाम भी लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तेजी से चल रहा है। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव रहे प्रकाश जोशी को राहुल गांधी टीम का माना जाता है। हालांकि वह पिछले दो विधानसभा चुनाव कालाढूंगी से लड़े, जहां वह चुनाव हार गए थे। सुनने में आ रहा है कि प्रकाश जोशी फिलहाल इंदिरा हृदयेश कैंप से जुड़े हुए हैं। अंतिम समय में अगर इंदिरा हृदयेश के टिकट पर आम सहमति नहीं बनती है तो ऐसे में वह प्रकाश जोशी के पक्ष में खड़ी हो सकती हैं। नैनीताल के पूर्व सांसद रहे महेंद्र सिंह पाल का नाम भी दावेदारों में आ रहा है। हालांकि पाल फिलहाल चुनाव को लेकर सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं। रुद्रपुर के पूर्व विधायक और राज्य में कैबिनेट मंत्री रह चुके तिलकराज बेहड़ भी लोकसभा प्रत्याशियों की लिस्ट में हैं। कांग्रेस में सबसे ज्यादा असमंजस नैनीताल के पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा को लेकर है। हालांकि बाबा अभी कांग्रेस की सक्रिय राजनीति से दूर हैं। लेकिन पिछले दिनों उनके काशीपुर में भाजपा कार्य समिति की बैठक में पहुंचने से पार्टी में खलबली मच गई थी। यहां तक कयास लगाए जाने लगे थे कि बाबा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जा सकते हैं। दो बार पावर लिफ्टिंग में राष्ट्रीय चैंपियन रहे केसी सिंह बाबा राजनीति के भी मंजे हुए खिलाड़ी हैं। वह बखूबी जानते हैं कि दांव कब खेलना है। फिलहाल वह लोकसभा चुनाव में अपनी दावेदारी पेश करने के मूड़ में बताए जाते हैं।

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