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Uttarakhand

केदारघाटी का साउंडप्रूफ स्कूल

केदारनाथ के लिए शुरू की गई हवाई सेवाओं से पर्यावरण, वन्य जीवों और स्थानीय लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। हेलीकॉप्टरों की तेज आवाज से खासकर स्कूली बच्चों को बहुत दिक्कतें होती हैं। शोरगुल के चलते वे कक्षाओं में अपने शिक्षकों को सुन नहीं पाते। स्कूली बच्चों की शिकायत पर अब उनके क्लास रूम साउंडप्रूफ किए जा रहे हैं
के दारनाथ से करीब पचास किलोमीटर पहले नारायणकोटि कस्बा है। कस्बे से थोड़ी दूरी पर ही भेत सेम गांव है। गांव के सरकारी स्कूल में दर्जनों बच्चे पढ़ते हैं। कुछ समय पहले तक कक्षा चार में पढ़ने वाली साक्षी समेत सभी बच्चों की नजर ब्लैक बोर्ड से बार-बार आसमान की ओर चली जाती थी। नजर आसमान पर और बच्चों के दोनों हाथ कान पर। ऐसा इसलिए कि कुछ मिनट के अंतराल पर स्कूल के करीब से हैलीकॉप्टर गुजरता है। जिससे इन्हें शिक्षकों की आवाज सुनाई नहीं देती थी। लेकिन अब यह गुजरे जमाने की बात हो गई है। साक्षी की कक्षा साउंडप्रूफ जो हो गई है।
चारधाम यात्रा का यह सीजन अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस सीजन में अब तक लाखों श्रद्धालु केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं। आपदा के बाद केदारनाथ आने वाले श्रद्धालु हैलीकॉप्टर सेवा का बढ़-चढ़कर इस्तेमाल कर रहे हैं। जिस कारण केदारघाटी में हेली सेवा देने वाली कंपनियों और चॉपर की उड़ानों में भी जबर्दस्त इजाफा हुआ है। इसका खमियाजा यहां के पर्यावरण, वन्य जीवों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ता है। स्थानीय निवासियों में भी सबसे ज्यादा परेशानी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को हो रही है। चॉपर की तर्र, तर्राहट की आवाज स्कूली छात्रों की एकाग्रता ही नहीं भंग करती बल्कि उन्हें शिक्षकों की आवाज नहीं सुनाई पड़ती है। कमरे के अंदर हेलीकॉप्टर की आवाज इतनी गूंजती है कि शिक्षक तक को कान पर हाथ रखना पड़ता है।
दरअसल, भेत सेम गांव केदारनाथ धाम जाने वाले हेलीकॉप्टर के रूट पर पड़ता है। गांव के बहुत करीब से हेलीकॉप्टर गुजरता है। शोर के कारण गांव के लोगों को बहुत परेशानी होती है। ग्रामीणों की तो नहीं मगर यहां के स्कूली छात्रों की समस्या दूर हो गई है। अब साक्षी को अपनी कक्षा में हेलीकॉप्टरों का शोर सुनाई नहीं पड़ेगा। प्रदेश के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित 9 सरकारी स्कूलों के क्लास रूम को साउंडप्रूफ बनाया जा रहा है। ये सभी स्कूल छह महीने तक चलने वाली चारधाम यात्रा के उस रूट पर पड़ते हैं जिस पर हेलीकॉप्टर यात्रियों को लेकर केदारनाथ जाते हैं। हेलीकॉप्टर का संचालन करने वाली कंपनी की तरफ से ही स्कूलों को साउंडप्रूफ बनाया जा रहा है।
केदारघाटी में स्थित फाटा, गुप्तकाशी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग और नारायणकोटि जैसी जगहों के सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स ने हेलीकॉप्टर से जुड़ी शिकायत की थी। बच्चों का कहना था कि इन हेलीकॉप्टरों की वजह से काफी शोर होता है, जिस कारण स्कूलों में पढ़ाई नहीं हो पाती है। रोजाना 60 से ज्यादा ट्रिप लगाने वाले हेलीकॉप्टरों के शोर में उनके शिक्षकों की आवाज दबकर रह जाती है। बच्चों का कहना था कि इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। इन बच्चों की शिकायत को रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया। प्रशासन ने हेलीकॉप्टर कंपनियों से संपर्क साधा। प्रशासन के मुताबिक कंपनी के साथ कई दौर की बातचीत हुई। बातचीत के बाद कंपनियों ने सबसे ज्यादा प्रभावित 9 स्कूलों में 18 क्लास रूम को साउंडप्रूफ बनाने की सहमति दी।
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल बताते हैं, ‘हेलीपैड के समीप स्थित स्कूलों के बच्चों को खास समस्या थी। शोर इतना ज्यादा होता था कि बच्चे क्लास रूम में बैठ नहीं सकते थे। हमने हेलीकॉप्टर ऑपरेटर्स को उनके सीएसआर फंड का यहां इस्तेमाल करने के लिए कहा। जिस पर ऑपरेटर्स साउंड प्रूफ क्लास रूम बनाने को तैयार हो गए। उनके मुताबिक फिलहाल इन 9 स्कूलों में से हरेक स्कूल के दो क्लास रूम को साउंडप्रूफ बनाया जा रहा है। एक रूम को साउंडप्रूफ बनाने में करीब डेढ़ लाख रुपए का खर्च आ रहा है।
हेलीकॉप्टर ऑपरेटर्स के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे इस बात को सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि स्टूडेंट्स को आगे शिकायत करने का मौका न मिले। इस प्रोजेक्ट में शामिल एक कंपनी आर्यन एविएशन के अधिकारी कर्नल वीआर शर्मा ने बताया कि भेत सेम के प्राइमरी स्कूल के क्लास रूम में पुरानी खिड़कियों को नई आधुनिक खिड़कियों से बदला गया है। क्लास रूम की छत भी नए सिरे से तैयार की गई है। छत पर कंक्रीट की दो लेयर डाली गई हैं। इस वजह से अब बाहर का काफी कम शोर क्लास रूम में जाएगा। इस प्रयास से शिक्षकों को भी राहत मिली है। अब बच्चे भी अपने नए क्लासरूम में पढ़ने को लेकर उत्सुक हैं।
साक्षी अब साउंडप्रूफ क्लास रूम से खुश है। वह कहती है, ‘अब बार-बार आसमान की ओर नहीं देखती हूं। अब तो हेलीकॉप्टर गुजर जाता है पर पता भी नहीं चलता। स्कूल के सभी छात्र खुश हैं। चौथी कक्षा में ही पढ़ने वाली खुशबू बताती है कि हम सभी इससे खुश हैं। मगर अभी दो क्लास रूम ही साउंडप्रूफ बने हैं। इन दो रूम में ही सभी कक्षाओं के बच्चों को बैठना पड़ता है।
हेली सेवाओं में हर साल बढ़ोतरी हो रही है। आपदा के बाद बहुत से श्रद्धालु पैदल यात्रा के बजाए हेलीकॉप्टर से केदारनाथ जाना चाहते हैं। वर्ष 2016 में कुल 1,75,943 श्रद्धालुओं ने हेली सेवा से केदारनाथ की यात्रा की थी। उस साल तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालु केदारनाथ यात्रा पर आए थे। इस तरह आंकड़ों पर गौर करें तो आधे से ज्यादा यात्रियों ने यात्रा के लिए हेली सेवा का सहारा लिया था।
पिछले साल मंदिर के कपाट खुलने के कुछ दिनों बाद 10-14 मई यानी चार दिन में चार हजार से ज्यादा यात्रियों ने  हेली सेवा का इस्तेमाल किया था। इसके बाद संख्या और बढ़ती गई। पिछले साल केदारनाथ के लिए 11 कंपनियां हेली सेवाओं का संचालन कर रही थी। कंपनियों के हेलीकॉप्टर फाटा, नारायणकोटि और सोनप्रयाग से उड़ान भरते हैं। पिछले साल सुमित एविएशन के वरिष्ठ प्रबंधक आएस राणा ने एक मौके पर बताया था कि औसतन हर रोज 350 से 370 उड़ानें होती हैं। हालांकि उड़ानें मौसम पर निर्भर करती हैं।
इस साल कुल नौ हेली कंपनियां केदारनाथ के लिए हेली सेवाएं दे रही हैं। मानसून सीजन शुरू होते ही जून अंत तक हेलीकॉप्टर सेवा बंद हो गई थी। मानसून सीजन खत्म होने के बाद पिछले महीने तीन कंपनियों ने फिर से केदारनाथ के लिए सेवाएं शुरू की थी। जो अब लगभग सभी दे रहे हैं। इस साल शुरुआती 23 दिन के आंकड़े प्राप्त हुए हैं। शुरू के महज 23 दिन में 30 हजार यात्री हेलीकॉप्टर से केदारनाथ पहुंच चुके थे। केदारनाथ आपदा से एक साल पहले 2012 में हेलीकॉप्टर से 23 हजार श्रद्धालु केदारनाथ गए थे। उस साल कुल 4 लाख 70 हजार श्रद्धालु केदारनाथ आए थे।
सिर्फ हेलीकॉप्टर से ही नहीं बल्कि हर साल केदारनाथ और चारधाम आने वाले तीर्थ यात्रियों के आंकड़े पिछले रिकार्ड को तोड़ रहे हैं। इससे पिछले साल पूरे यात्रा सीजन में 4 .71 लाख यात्री केदारनाथ बाबा के दर्शनों को आए थे। साल 2014 में केदारनाथ में 40 हजार के करीब श्रद्धालु आए थे। साल 2015 में 1 .54 लाख श्रद्धालु ही बाबा केदार के दर पर पहुंचे थे। साल 2016 में 3 .09 लाख श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचे। इस साल ये आंकड़ा 7 लाख को छूने वाला है। जबकि अभी केदारनाथ यात्रा के लिए 1 महीने का वक्त और बचा हुआ है। इससे पहले वर्ष 2011 में केदारनाथ धाम में सबसे ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे थे, जिनकी संख्या 5 .70 लाख थी। इस बार अब तक 6 .85 लाख के करीब श्रद्धालु केदारनाथ दर्शन कर चुके हैं।
चारधाम आने तीर्थ यात्रियों के आंकड़ें को देखें तो आपदा वाले के साल (2013) में चारों धामों में दर्शनार्थियों का आंकड़ा 22 लाख को पार कर चुका था। हालांकि इसके बाद श्रद्धालुओं की गिनती चार से पांच लाख के बीच सिमटी रही। वर्ष 2017 में यह बढ़कर 23 .22 लाख हुई। हालांकि 2018 में अभी तक चारों धामों में कुल 24 .41 लाख श्रद्धालु पहुंच चुके हैं जो 2013 के बाद अभी तक का रिकॉर्ड था।

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