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Uttarakhand

बड़े पाटों में पिसते छोटे अधिकारी

कुंभ तैयारियों की हकीकत/भाग-सात

नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कुंभ के सफल संचालन के लिए गढ़वाल मंडल कमिश्नर सहित आठ पीसीएस अधिकारियों की तैनाती अवश्य कर दी है, लेकिन मेले की तैयारियों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। संतों के कैंपों में लगी आग और हवा के हल्के झोंके में उड़े टीन-टैंट तैयारियों की पोल खोलने के लिए काफी हैं। बड़े अधिकारियों में सामंजस्य का अभाव ही कहा जाएगा कि अन्य अधिकारियों को काम निपटाने में अड़चनें आ रही हैं। वे तय ही नहीं कर पा रहे हैं कि कमिश्नर या मेला अधिकारी में से किसके निर्देशों को प्राथमिकता दें। अव्यवस्था का आलम यह है कि जमीन आवंटन में देरी से नाराज बैरागी संतों ने अपर मेलाधिकारी हरवीर सिंह को पीट तक दिया है

राज्य की त्रिवेंद्र रावत सरकार कुंभ मेले की तैयारियों के नाम पर अधिसूचना तक जारी नहीं कर पाई। नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने मेले को अपनी प्राथमिकता बताते हुए गढ़वाल मंडल कमिश्नर सहित आठ पीसीएस अधिकारियों की तैनाती मेले को सकुशल संपन्न कराने के उद्देश्य से की, इसके बावजूद कुंभ मेले की तैयारियां आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। अधिकारियों में सामंजस्य का अभाव ही कहा जाएगा कि तैयारियों को लेकर हो रही बैठकों का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पा रहा है। अव्यवस्था का आलम यह है कि जमीन आवंटन में देरी से नाराज बैरागी संतों ने अपर मेलाधिकारी हरवीर सिंह को पीट तक दिया है।

बताया जाता है कि मेले से जुड़े अधिकारियों के समने ऐसी दिक्कतें आ रही हैं जिन्हें सरकार को समझना होगा। मेला प्रशासन के साथ जुड़े अधिकारियों एवं अन्य विभागों में आपसी समन्वय को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। मेला प्रशासन में तैनात कुछ पीसीएस अफसरों ने दबी जुबान में स्वीकार करते हुए बताया कि उनके सामने नई स्थितियों में यह समस्या पैदा हो गई है कि वह गढ़वाल कमिश्नर और मेला अधिकारी द्वारा जारी किए जाने वाले आदेशों में से किस अधिकारी के आदेश को प्राथमिकता से पूरा करें। मेले को दिव्य और भव्य बनाने का दावा करने वाले नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह को लेकर भी सवाल, उठ रहे हैं। नए सीएम ने श्रद्धालुओं को बेरोकटोक कुंभ स्नान में आने का निमंत्रण दिया, परंतु नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा सख्ती दिखाते हुए श्रद्धालुओं के लिए कोविड-19 नेगेटिव रिपोर्ट लाना अनिवार्य कर दिया गया। बताया जाता है कि मेले से जुड़े अधिकारियों की समस्या यह है कि गढ़वाल कमिश्नर अलग बैठक बुलाकर दिशा- निर्देश जारी करते हैं, तो वहीं दूसरी ओर मेलाधिकारी दीपक रावत अधिकारियों की अलग से बैठक बुलाकर निर्देशित करते हैं। दोनों अधिकारियों के आदेशों-निर्देशों के बीच फंसे कुंभ मेला प्रशासन के अधिकारी अजीब पशोपेश में नजर आ रहे हैं। मेला प्रशासन द्वारा अभी तक की गई तैयारियों में लापरवाही का यह आलम है कि हाल में कुंभ नगरी में चली हल्की हवाओं ने मेला पुलिस व स्वास्थ्य विभाग के लिए लगे टीन-टैंट ही उड़ा डाले।

इससे वहां अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया। दूसरी ओर खड़खड़ी में बनाया गया टेम्परेरी पुल भी प्रयोग करने से पहले ही क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके साथ ही मेला क्षेत्र में एक और बड़ी घटना सामने आई। मेला क्षेत्र के बैरागी कैंप जहां बहुत विशाल क्षेत्र में कैंप लगाए जाने की तैयारी चल रही थी उसी बैरागी कैंप में दर्जनों झोपड़ियों में लगी आग ने अग्निशमन विभाग की तैयारियों की भी पोल खोल कर रख दी। बैरागी कैंप में लगी आग को बुझाने में अग्निशमन विभाग को घंटों मशक्कत करनी पड़ी तब जाकर आग पर काबू पाया जा सका। अगर यही आग लगने की घटना बैरागी संतों के टैंट तंबू लगाए जाने के पश्चात होती तो घटना की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे पूर्व बैरियर नं. 5 के निकट स्थित मेला पुलिस के टैंटों के ठीक सामने फाईवर शौचालयों में आग लगने की बड़ी घटना सामने आई थी।

बावजूद इसके मेला अग्निशमन विभाग अपनी तैयारियों को लेकर फिसड्डी नजर आया। मेला प्रशासन द्वारा की जा रही 28 दिन की तैयारियों का हाल यह है कि बार-बार मेलाधिकारी और संबंधित अपर मेलाधिकारी की ओर से दिए जाने वाले निर्देशों पर मेला प्रशासन से जुड़े विभाग कोई गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। कुंभ नगरी में कैंप कर रहे गढ़वाल कमिश्नर भी बार-बार बैठक लेकर कार्यों को पूरा किए जाने के संबंध में चेता रहे हैं। इसके बावजूद कार्य होता नजर नहीं आ रहा है। इसी प्रकार की समस्याओं को लेकर को मेलाधिकारी दीपक रावत ने कुंभ कार्यों को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। मेलाधिकारी ने विभिन्न क्षेत्रों में पड़े मलबे को हटाने, साफ सफाई कराकर कूड़ा उठाने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने घाटों पर रेलिंग, सुरक्षा चेन लगवाना हर हाल में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए तथा लाइन डिपार्टमेंट के कार्यों में मैनपावर बढ़ाने को कहा।

दीपक रावत ने वाच टावरों की संख्या बढ़ाने के लिए संबंधित सेक्टर मजिस्ट्रेट से लिखित प्रस्ताव देने के लिए कहा। मेलाधिकारी ने जगह-जगह स्थापित शौचालयों के प्रयोग के लिए साइनेज लगवाने और जहां शौचालय की संख्या कम हो, वहां मोबाइल शौचालय लगवाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। मेलाधिकारी ने कहा कि जो भी निर्देश दिए जा रहे हैं उन कार्याे का भौतिक सत्यापन वह स्वयं करने निकलेंगे। उन्होंने महिला रैन-बसेरे में तुरंत बिजली कनेक्शन देने और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती करने की बात कही। स्नान के दिनों में भीड़ नियंत्रण के लिए समुचित प्रबंध करने के निर्देश दिए। गौरीशंकर सेक्टर के मजिस्ट्रेट मनीष कुमार सिंह ने नीलधरा क्षेत्र में घाटों पर स्नान के लिए गंगा में समुचित जलस्तर बढ़ाने का सुझाव दिया, जिस पर मेलाधिकारी ने कहा कि वह इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बात कर इसे सुनिश्चित कराएंगे। मेलाधिकारी ने गौरीशंकर और बैरागी सेक्टर में आंतरिक सड़कों पर भी प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश विद्युत विभाग के अधिकारियों को दिए।

उप मेलाधिकारी अंशुल सिंह ने विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे लोगों के कोविड टेस्टिंग कराने का सुझाव दिया। बैठक में मेलाधिकारी ने बैरागी क्षेत्र में स्वच्छकों की संख्या की जानकारी ली, जिस पर सफाई निरीक्षक ने बताया कि 46 स्वच्छक तैनात कर दिए गए हैं, जिन्हें आवश्यकता के अनुसार बढ़ाया जायेगा। उन्होंने नगर आयुक्त को क्षेत्र में पर्याप्त डस्टबिन लगवाने और नियमित साफ सफाई कराने के निर्देश दिए। सेक्टर मजिस्ट्रेट दक्षद्वीप अजयवीर सिंह ने सुझाव दिया कि रिफ्लेक्टरयुक्त साइनेज लगाने पर रात में भी देखने में आसानी होगी। इस पर मेलाधिकारी ने ऐसा ही करने के निर्देश दिए। उन्होंने दक्ष क्षेत्र में अस्थायी अस्पताल होने की जरूरत बताई, जिस पर मेलाधिकारी ने इसके लिए जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कनखल क्षेत्र में वाटर एटीएम लगवाने की बात रखी, जिस पर मेलाधिकारी ने संबंधित विभाग से वाटर एटीएम लगवाने को कहा। सेक्टर मजिस्ट्रेट ने कनखल क्षेत्र में सफाईकर्मियों की कमी बताई इस पर नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि संख्या बढ़ा दी जाएगी।

बार-बार निर्देश जारी किए जाने के बावजूद मेलाधिकारी के निर्देशों का पालन न होता देख मेलाधिकारी ने सफाईकर्मियों और अन्य कर्मियों की उपस्थिति के सत्यापन को लेकर मेला प्रशासन में अतिरिक्त अधिकारी के तौर पर भेजे गए पीसीएस अधिकारी अरविंद कुमार पाण्डेय को नोडल अधिकारी नामित करने का आदेश जारी करने की बात कही। जिस प्रकार एक ही कार्य को लेकर कमिश्नर सहित मेलाधिकारी और मेले में तैनात अपर मेलाधिकारियों द्वारा बैठक लेकर बार-बार अधिकारियों को चेताए जाने के बावजूद कार्य पूर्ण नहीं हो पा रहे हैं। इस कारण 28 दिन के कुंभ को बेहतद ढंग से सम्पन्न कराए जाने के दावों पर सवालिया निशान खड़ा हो रहा है?

बात अपनी-अपनी

कुंभ मेले को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण मेले के आयोजन को लेकर संशय बना हुआ है। मेला प्रशासन समय से अपनी तैयारियों को पूरा करने में नाकाम साबित हुआ है। इसलिए रोज नए-नए आदेश जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में भव्य और दिव्य कुंभ की कल्पना व्यर्थ है। कुंभ मेले के सफल आयोजन के लिए संतों के साथ शासन-प्रशासन और कोर्ट के प्रतिनिधि मंडल का गठन किया जाना चाहिए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि

कुंभ मेले को लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से बार-बार गाइडलाइन बदली जा रही है। इससे कुंभ मेले पर बुरा असर पड़ रहा है। अभी तक कुंभ के कार्य अधूरे पड़े हैं। इस बीच कोरोना की दस्तक से कुंभ को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। भव्य और दिव्य कुंभ का आयोजन सपने जैसा दिखाई दे रहा है। ऐसा हो सकता है, केवल स्नान अखाड़े के संत ही करेंगे। जनता के लिए कोई उम्मीद नहीं है।
सोमेश्वरानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा

मेला प्रशासन श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करना बंद करे। मेले में टैंट आदि की कोई सुविधाएं नहीं दी गई है। आश्रम में धर्मशाला, होटलों में आने वाले यात्रियों को ठहराया जा रहा है। जिनके लिए पर्याप्त संख्या में शौचालय की व्यवस्था नहीं की गई है। खुले में महिलाओं को शौच करना पड़ रहा है। बंगाल के चुनाव में कोरोना नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लेकिन कुंभ में शासन की ओर से रोक लगाई जा रही है जिसे उचित नहीं ठहराया जा सकता।
स्वामी उमाकांतानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा

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