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पॉल्ट्री फार्म की गंदगी के चलते ग्रामीण पिछले छह साल से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। शासन-प्रशासन को निरंतर अपनी समस्या से अवगत करा रहे हैं। लेकिन पॉल्ट्री फार्म मालिक की ऊंची राजनीतिक पहुंच होने के कारण कोई उनकी पीड़ा सुनने को राजी नहीं है

हरिद्वार। श्यामपुर थाना क्षेत्र में वन सीमा से लगा हुआ एक गांव है नौरंगाबाद जो गैंडीखाता ग्राम पंचायत का एक गांव है। यहां के ग्रामीण पिछले ६ वर्षों से नरकीय जीवन जीने को विवश हैं। इसका कारण है। यहां एक-एक कर बनाए गए चार विशाल पॉल्ट्री फार्म। यह पॉल्ट्री फार्म दिन-रात कई तरह से आस-पास के पूरे वातावरण को इतना दूषित कर रहे हैं कि कई बार तो सांस तक ले पाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि हवा में भयंकर दुर्गंध भी घुली होती है। हालांकि ग्रामीण इन पॉल्ट्री फार्म को हटवाने के लिए कई बार विरोध-प्रदर्शन कर चुके हैं, पर ऊंची राजनीतिक पहुंच रखने वाले इन पॉल्ट्री फार्म के मालिक के सामने ग्रामीणों का विरोध हमेशा बौना साबित हुआ है। यहां तक कि अधिकारियों ने भी ग्रामीणों की पीड़ा को अनसुना कर दिया।

ग्रामीण बताते हैं कि इन पॉल्ट्री फार्म का मालिक ऊंचे राजनीतिक संबंध रखता है। वह मुख्यमंत्री का बेहद करीबी है, क्योंकि वह उस विधानसभा क्षेत्र का प्रभावशाली व्यक्ति है जहां से खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत विधायक हैं। जिस कारण प्रशासन भी उसके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय हाथ पीछे खींच रहा है। उसके प्रभाव को देखते हुए लोग खुलकर इन पॉल्ट्री फार्म का विरोध नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें खतरा महसूस होता है कि कहीं उनके साथ कोई अनहोनी ना हो जाए। नाम न छापने की शर्त पर पास में ही निवास करने वाले एक ग्रामीण परिवार ने बताया कि जब से यह पॉल्ट्री फार्म यहां लगे हैं तब से हमारे रिश्तेदारों ने भी हमारे घर आना बंद कर दिया है क्योंकि यहां इतनी दुर्गंध फैली रहती है कि उनसे खाना भी नहीं खाया जाता। अब हमें तो इस दुर्गंध की आदत सी हो गई है, लेकिन जब इस ओर की हवा चलती है तो उल्टियां तक आ जाती हैं। गंदगी में पनपे मक्खी मच्छरों ने तो जैसे पूरे क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। इनकी संख्या यहां इतनी ज्यादा हो गई है कि हर रोज हमारे खाने में ५-७ मक्खियां गिरना तय है। हर वक्त मक्खियां-मच्छर भिनभिनाते रहते हैं जिससे हर दिन तिल-तिलकर जीना पड़ रहा है। पास ही निवास करने वाले ग्रामीण विनोद सैनी ने बताया कि यह लोग पॉल्ट्री फॉर्म से निकली गंदगी को सीधे जंगली नाले में छोड़ देते हैं। यह नाला गांव से गुजरता हुआ जंगलों में जाता है। इस नाले के पानी को पीने से हमारे कई पशुओं की मौत हो चुकी है। इसी नाले का पानी जंगली जानवर पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं तो जाहिर सी बात है उन्हें भी कई तरह की बीमारियां हो रही होंगी। मेरे खुद के दो पशु इस नाले के पानी को पीने से मर चुके हैं। कई बीमार हो चुके हैं। सीएमओ को हम कई बार लिखित में शिकायत कर चुके हैं, पर आज तक हमारी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि इस पॉल्ट्री फॉर्म का मालिक सरकार का बड़ा करीबी माना जाता है जिसके चलते डीएम से लेकर सीएम तक सब चुपचाप बैठे हैं। नाम ना छापने की शर्त पर एक सरकारी शिक्षक ने बताया कि हम लोगों को इसलिए दोहरी मार झेलनी पड़ रही है कि हम इन पॉल्ट्री फार्म का खुलकर विरोध भी नहीं कर सकते क्योंकि इसका मालिक हमारा अहित भी कर सकता है। एक अन्य ग्रामीण कुदन सिंह ने बताया कि इस पॉल्ट्री फार्म के भीतर बीमारी के कारण मरने वाले मुर्गों को पास के जंगल क्षेत्र में डाल दिया जाता है जिन्हें वहां मौजूद जंगली जानवर खा लेते हैं। जब ‘दि संडे पोस्ट’ की टीम वहां पहुंची तो वहां नजारा देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ। जंगल के भीतर मुर्गों के दर्जनों शव फैले हुए थे। कुछ शव आधे-अधूरे भी थे जिन्हें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि इन्हें जंगली जानवरों ने खाया है। जब इन मुर्गों की मौत बीमारी के कारण हुई हो तो जंगली जानवरों में भी इन्हें खाकर बीमारी फैलना लाजिमी है, पर इस ओर अब तक वन विभाग के अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। यही नहीं, मुर्गों का प्रतिदिन निकलने वाला सैकड़ों किलो मल भी सीधा वन क्षेत्र में डाल दिया जाता है।

बात अपनी-अपनी

अब आप से ये सब जानकारी मिली है तो शीघ्र ही उस क्षेत्र का निरीक्षण संबधित विभाग के अधिकारियों से कराया जाएगा और दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मनीष, एसडीएम हरिद्वार

हमारे विभाग द्वारा पॉल्ट्री फॉर्म के लिए कोई अनुमति जारी नहीं की जाती है। पॉल्ट्री फॉर्म तो कोई कहीं भी खोल सकता है। प्रदूषण यदि फैलता है तो एसडीएम देखें।
बी. कर्नाटक, जिला पशु चिकित्सा अधिकारी

हम अपने स्तर से केवल पानी की जांच कर सकते हैं और देख सकते हैं कि उससे कोई रोग तो नहीं पनप रहा। बाकी सारी जिम्मेदारी प्रदूषण विभाग की है।
अशोक गैरोला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिद्वार

जंगली क्षेत्र में मुर्गों के शव डाले जाने का मामला गंभीर है, यदि ये मुर्गे एच वन एन वन फ्लू से ग्रस्त है तो समस्या काफी गंभीर हो सकती हैं। इस मामले की शीघ्र ही जांच कराई जाएगी।
आकाश वर्मा, डीएफओ हरिद्वार

इन पॉल्ट्री फॉर्म से चारों तरफ गंदगी और बदबू फैली रहती है जिससे हम ग्रामीणों का जीवन नरक जैसा हो गया है। फॉर्म से निकलने वाला दूषित जल सीधा नाले में छोड़ दिया जाता है जिसका पानी पीने से हमारे पशु बीमार हो जाते हैं। अब तक दर्जनों पशुओं की मौत भी हो चुकी है।
विक्रम सैनी, ग्रामीण नौरंगाबाद

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