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Uttarakhand

अतिक्रमण हटाओ मुहिम पर घमासान

हल्द्वानी में अतिक्रमण और अतिक्रमण विरोधी अभियान कोई नया नहीं है। अगर नजर दौड़ाएं तो हल्द्वानी, लालकुआं और कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्रों का जो हिस्सा हल्द्वानी के आस-पास जुड़ा है वहां अतिक्रमण की शिकायतों का अंबार है। विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद अतिक्रमण हटाने के अभियान को नगर निगम ने जिस तेजी के साथ चलाया है उसने कुछ सवाल जरूर खड़े किए हैं। अब तक नगर निगम का डंडा उन लोगों पर ज्यादा चला है जिनकी आजीविका का साधन छोटी-छोटी दुकानें या फड़ थे। अभी तक नगर निगम बड़े एवं प्रभावशाली अतिक्रमणकारियों पर हाथ डालने से बचा है या फिर उनकी सुविधानुसार अतिक्रमण को हटाने की मोहलत दे रहा है। मंगल पड़ाव में अतिक्रमण हटाने के समय वहां पर विरोध करने जा रहे हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश को जिस प्रकार घर में नजरबंद किया गया उसकी गूंज देहरादून तक सुनाई दी तो चकराता विधायक प्रीतम सिंह अपना विरोध व्यक्त करते मुख्य सचिव के पास पहुंच गए

उत्तराखण्ड की आर्थिक राजधानी और कुमाऊं का प्रवेश द्वार हल्द्वानी अतिक्रमण विरोधी अभियान के चलते चर्चाओं में है। नगर निगम हल्द्वानी द्वारा नगर निगम क्षेत्र के अन्तर्गत अतिक्रमण विरोधी अभियान जहां कुछ लोगों की प्रशंसा बटोर रहा है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस अभियान पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सवाल उठाने वालों को नगर निगम की नीयत पर खोट नजर आ रहा है। खासकर कांग्रेस से जुड़े लोगों का कहना है कि मेयर डॉ. ़ जोगेन्द्र पाल सिंह रौतेला अतिक्रमण के नाम पर विधानसभा चुनावों में अपनी हार की खीझ उतार रहे हैं क्योंकि अतिक्रमण के नाम पर उनका डंडा उस गरीब वर्ग पर चल रहा है जिन्होंने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के पक्ष में वोट किया था और जिनकी पहुंच ऊपर तक नहीं है। वहीं मेयर रौतेला इन आरोपों को नकारते हुए कहते हैं कि कांग्रेस के समय हुए अतिक्रमण ने शहर की सूरत बिगाड़ कर रखी है। हम शहर के हित में अतिक्रमण हटा रहे हैं और कांग्रेस खासकर विधायक इस पर राजनीति न कर हल्द्वानी शहर की व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने में योगदान दें।

हल्द्वानी में अतिक्रमण और अतिक्रमण विरोधी अभियान कोई नया नहीं है। अगर नजर दौड़ाएं तो हल्द्वानी, लालकुआं और कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्रों का जो हिस्सा हल्द्वानी के आस-पास जुड़ा है वहां अतिक्रमण की शिकायतों का अंबार है। लालकुआं विधानसभा क्षेत्र का बिंदुखत्ता और हल्द्वानी विधानसभा का दमुआढूंगा क्षेत्र और वनभूलपुरा का एक बड़ा इलाका सरकार और रेलवे के अनुसार अतिक्रमण करके बसाए गए हैं। विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद अतिक्रमण हटाने के अभियान को नगर निगम ने जिस तेजी के साथ चलाया है उसने कुछ सवाल जरूर खड़े किए हैं। अब तक नगर निगम का डंडा उन लोगों पर ज्यादा चला है जिनकी आजीविका का साधन छोटी-छोटी दुकानें या फड़ थे। अभी तक नगर निगम बड़े एवं प्रभावशाली अतिक्रमणकारियों पर हाथ डालने से बचा है या फिर उनकी सुविधानुसार अतिक्रमण हटाने की मोहलत दे रहा है। हालांकि हल्द्वानी में अतिक्रमण सिर्फ नगर निगम की भूमि पर ही नहीं है सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग भी अतिक्रमण का शिकार है। नैनीताल रोड में हो रहे बड़े निर्माणों की ओर जिला विकास प्राधिकरण आंखें मूंदे हुए हैं जहां मानकों को धता बताकर निर्माण किए गए हैं। कई शॉपिंग मॉल और व्यवसायिक भवन बिना पार्किंग सुविधा के बन गए हैं। छोटे दुकानदारों की शिकायत है कि गरीब व्यक्तियों के ऊपर नगर निगम अपना कहर बरपा रहा है लेकिन पहुंच वाले लोगों को वो नजरअंदाज करता है। अगर निगम की बात करें तो नगर निगम ने स्वयं अतिक्रमण को शह दी है। नगर निगम द्वारा बनाए गए शॅपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकानों के आगे बरामदों को जो ग्राहकों के चलने के लिए बनाए गये थे, बंद करके दुकानों में तब्दील कर दिया गया है। बताया जाता है कि उक्त बरामदों में निर्माण की मंजूरी दे उचित फीस जमा करवा कर इन अतिक्रमणों को वैध कर दिया गया।

शहर के मुख्य बाजार पटेल चौक, मीरा मार्ग, कारखाना बाजार सहित सभी बाजार अतिक्रमण के शिकार हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि दुकानदार अपनी दुकानों के आगे की सड़क पर फड़ लगावा कर फड़ वालों से अच्छा खासा किराया वसूलते हैं। बाजार क्षेत्र में व्यवसायियों ने सड़क के ऊपर 5 से 8 फिट तक कब्जा किया है दोनों तरफ से कब्जों, फड़ और ठेले व्यवसाइयों के चलते सड़के संकरी हो चली है। सवाल है कि क्या नगर निगम इन मुख्य बाजारों के दुकानदारों से नाराजगी का जोखिम मोल लेगा? अगर नगर निगम इमानदारी से नजर घुमाए तो उसे कई प्रभावशाली लोगों और क्षेत्रों में अतिक्रमण साफ नजर आएंगे। हीरानगर क्षेत्र में उत्थान मंच और वन विभाग के मध्य आईटीआई रोड को जोड़ने वाली सड़क पर स्थानीय निवासियों ने छह फुट तक अतिक्रमण किया है लेकिन ऊंची पहुंच के चलते विभागों की नजर उस अतिक्रमण पर नहीं जाती। हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने का विवाद राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि मेयर चुनावी हार की खींझ के चलते अतिक्रमण हटाने के नाम पर लोगों को परेशान कर रहे हैं, वहीं मेयर डॉ. जोगेन्द्र पाल सिंह रौतेला इन आरोपों को नकारते हुए कह रहे हैं कि यह सब शहर की भलाई के लिए किया जा रहा है। मंगल पड़ाव में अतिक्रमण हटाने के समय वहां पर विरोध करने जा रहे हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश को जिस प्रकार घर में नजरबंद किया गया उसकी गूंज देहरादून तक सुनाई दी तो चकराता से विधायक प्रीतम सिंह अपना विरोध व्यक्त करने मुख्य सचिव के पास पहुंच गए।
हल्द्वानी में अतिक्रमण विरोधी अभियान सिर्फ एक बानगी है अगर एक वृहद नजर डालें तो राजधानी देहरादून सहित प्रदेश का हर क्षेत्र किसी न किसी प्रकार के अतिक्रमण का शिकार है।

नेताओं और अधिकारियों के गठजोड़ के चलते अतिक्रमणकारियों पर सरकारें कार्रवाई करने से बचती रही है। 1992 में नैनीताल के तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. ़ सूर्य प्रताप सिंह ने सारे राजनीतिक दबावों को दरकिनार करते हुए जिस प्रकार अवैध अतिक्रमणों और निर्माणों पर अभियान चलाया था उसी का नतीजा है कि नैनीताल रोड और कालाढूंगी रोड आज चौड़ी सड़कों के रूप में देखी जा सकती है। उसके बाद गाहे-बगाहे अतिक्रमण विरोधी अभियान महज रस्म अदायगी भर रहे। आज जब प्रशासन अतिक्रमण हटाने के नाम पर सक्रियता दिखा रहा है तो सवाल ये भी उठते हैं कि अतिक्रमण होते समय अधिकारी नजर क्यों फेरते रहे? प्रशासन की दृष्टि स्वतः इन अतिक्रमणों पर क्यों नहीं जाती? जब कोई इन मामलों को अदालतों में ले जाता है तब अदालतों के आदेश के बाद ही अधिकारियों की नीद टूटती है। उदाहरण के लिए वनभूलपुरा के क्षेत्र को ही लें। ये इलाका पिछले आठ-दस वर्षों में तो बसा नहीं होगा। जब रेलवे की भूमि पर कब्जा शुरुआत में हो रहा होगा तब रेलवे अधिकारी आंखे मूंद अपनी भूमि पर रेलवे ने कब्जा होने दिया।

लेकिन जब यह मामला अदालत में पहुंचा तो तब रेलवे को अपने मालिकाना हक की बात याद आई। घोर प्रशासनिक लापरवाही उदाहरण है। यह राजनेताओं और अफसरशाही का गठजोड़ अतिक्रमण का सबसे बड़ा कारण है। राजनीतिक लाभ के लिए नेताओं द्वारा अतिक्रमण को शह देना और अधिकारियों द्वारा इस अतिक्रमण को नजरअंदाज करना दर्शाता है कि अतिक्रमण की बढ़ती समस्या के लिए यह गठजोड़ एक हद तक जिम्मेदार है। शहरों में बढ़ता शनैः शनैः अतिक्रमण आने वाले समय में एक बड़ी बीमारी के रूप में दिखाई देगा। नगर निगमों की बिगड़ती हालत को सुधारने के लिए आय के स्रोत बढ़ाने के लिए नगर निगमों द्वारा इन फड़व्यवसायियों और दुकानदारों से वसूली जाने वाली फीस इन अतिक्रमणों को वैधानिक रूप तो देती है लेकिन कोर्ट के दबाव में इन पर कार्रवाई ने कई लोगों की आजीविका पर संकट पैदा कर दिया है। जिन गरीब परिवारों की आजीविका का साधन छिन गया है उनके लिए वेंडर जोन बनाने की स्पष्ट नीति भी नगर निगमों के पास नहीं है।

कुल मिलाकर हल्द्वानी नगर निगम के अतिक्रमण विरोधी अभियान पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। एक बड़े तबके का मानना है कि अतिक्रमण विरोधी अभियान तो ठीक है लेकिन जिन अधिकारियों की नाक के नीचे यह अतिक्रमण होता गया उनकी जवाबदेही तय कर उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। नगर निगम का सिर्फ शहरी क्षेत्र ही अतिक्रमण की चपेट में नहीं है विस्तारित नगर निगम के नये जुड़े वार्ड भी अतिक्रमण की चपेट में है। सवाल यही है कि मेयर और नगर निगम की निगाहें इन क्षेत्रों में भी जाती हैं या फिर यह अतिक्रमण विरोधी अभियान सिर्फ राजनीतिक दुराग्रहों तक ही सीमित रह जाता है।

बात अपनी-अपनी
अतिक्रमण हटना चाहिए लेकिन ये कार्रवाई नेताओं और बड़े लोगों से शुरू की जानी चाहिए। मेयर का दूसरा कार्यकाल चल रहा है लेकिन उन्हें अतिक्रमण हटाने की याद विधानसभा चुनाव हारने के बाद ही नजर आई। मेयर गरीबों के मुंह का निवाला छीन रहे हैं। अपनी हार की खीझ गरीब पर उतार कर वो कोई अच्छा संदेश नहीं दे रहे हैं।
सुमित हृदयेश, विधायक हल्द्वानी

हम अपने दायित्वों का पालन कर रहे हैं। विधायक अतिक्रमण का पक्ष न लेकर शहर के विकास में साथ दे। शहर में अतिक्रमण के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है इसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधायक शहर के सुनियोजित विकास के लिए आगे आए और अच्छे सुझावों के साथ आएं।
डॉ.. जोगेन्द्र पाल सिंह रौतेला, मेयर नगर निगम हल्द्वानी

सरकार ने नियम कायदे बनाए हैं अतिक्रमण पर उसी प्रकार की नीति बननी चाहिए। सरकार को चाहिए जिन पर अतिक्रमण के नाम पर कार्रवाई कर रही है पहले उनके पुनर्वास की व्यवस्था करें।दीपक बल्यूटिया, प्रदेश प्रवक्ता उत्तराखण्ड कांग्रेस्र
प्रशासन अतिक्रमण हटाने में समान कार्रवाई करें दोहरी नीति न अपनाए। जिस तरह अतिक्रमण हटाने के नाम पर लोगों की रोजी-रोटी छीनी जा रही है, वो समझ से परे है।
हुकुम सिंह कुंवर, संस्थापक अध्यक्ष उत्तराखण्ड देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल

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