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जनार्दन कुमार सिंह

 

एक तो देश-दुनिया पहले से ही कोरोना महामारी से जूझ रहा, इसी बीच उत्तराखण्ड के दो जिलों में लगातार दूसरे दिन प्रकृति भी अपना भयावह रूप दिखा रहा है। 11 मई को टिहरी जिले के देवप्रयाग में बादल फटने की घटना हुई जिससे भारी तबाही हुई है। अब इसके 24 घंटे के भीतर यानी 12 मई को नैनीताल के भवाली में बादल फटा। बादल फटने से भारी बारिश के पानी के साथ मलबा अल्मोड़ा-हल्द्वानी को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे पर आ गया है। जिससे इसकी चपेट में हाई-वे पर स्थित बाबा नीम करोली का प्रसिद्ध कैंची धाम भी आ गया। तेज बारिश के पानी के साथ ही मलबा भी मंदिर में घुस गया है।

शुक्र है भगवान की दया से यहां कफ्र्यूू के कारण वहां लोगों की भीड़ नहीं थी। घटना में किसी तरह के अनहोनी की खबर नहीं है। हालांकि एक सप्ताह पहले भी अल्मोड़ा जिले के चैखुटिया में बादल फटने से भारी तबाही हुई थी। लोगों के घर और खेत तबाह हो गए हैं।

बादल फटने के बाद कई स्थानों पर सड़के बंद हो गई हैं। तेज बारिश से रामगढ़ हली कैची में मलबा जमा हो गया है। कैंची धाम मंदिर के साथ ही साईं मंदिर में भी मलबा घुस गया है। अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाईवे छह जगहों पर बंद हो गया है। जिला प्रशासन जेसीबी की सहायता से सड़क से मलबा हटाने का काम कर रहा है। वहीं हली रामगढ़ में फलों के ट्रक फंस गए हैं। कैंची हली हरतप्पा रामगढ़ में तेज बारिश से जनजीवन भी प्रभावित हुआ है।

उत्तराखण्ड के देवप्रयाग में 11 मई की शाम दशरथ पर्वत पर बादल फटने से शांता गदेरा उफान पर आ गया। गदेरे के साथ आए पत्थर और मलबे ने यहां के बीच बाजार में भारी तबाही मचा दी। यह गदेरा बस अड्डे बाजार के बीच से बहते हुए भागीरथी नदी में मिलता है। पलभर में आईटीआई के भवन सहित लगभग 10 दुकानें जमींदोज हो गए। नगर से बस अड्डे की ओर आने वाला रास्ता एवं पुलिया भी बह गई है।

गदेरे के उफान पर आते ही लोगों ने भागकर जान बचाई। गनीमत यह रही कि कोविड कफ्र्यू के चलते आईटीआई सहित सभी दुकानें बंद थी, जिससे यहां लोगों की आवाजाही न के बराबर थी। यदि सामान्य दिनों की तरहा यहां लोगों का आना-जाना होता तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। आपदा की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक विनोद कंडारी भी मौके पर पहुंचे।

यहां पिलरों पर खड़ी आईटीआई की तीन मंजिला बिल्डिंग जमींदोज हो गई। यहां मौजूद सुरक्षाकर्मी दीवान सिंह ने कूद कर अपनी जान बचाई। आईटीआई भवन में मौजूद कंप्यूटर सेंटर, निजी बैंक, बिजली एवं फोटोग्राफी आदि की कई सारी दुकानें भी ध्वस्त हो गई। वहीं शांता गदेरे पर बनी पुलिया और रास्ता, इससे सटी ज्वैलर्स, कपड़े, मिठाई आदि की दुकानें भी मलबे की भेंट चढ़ गई। शांति बाजार में भी आपदा से करोड़ों के नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

थाना प्रभारी महिपाल रावत ने बताया कि फिलहाल जनहानि की कोई सूचना नहीं है। कुछ लोगों ने भागकर जान बचाई। पुलिस और एसडीआरएफ राहत कार्य में लगी हुई है। घटना के बाद से लोगों में दहशत बनी हुई है।

बता दें कि इससे पहले भी तीन मई को चमोली जिले के घाट ब्लाॅक में बिनसर पहाड़ी की तलहटी में अलग-अलग जगहों पर बादल फटने की घटना से घाट बाजार में तबाही मच गई थी। इसके बाद सात मई को नई टिहरी में जाखणीधार ब्लाॅक के पिपोला (ढुंगमंदार) में भी बादल फटने के कारण भारी नुकसान हुआ था। इसके साथ ही अल्मोड़ा जिले में भी बादल फटने से मूसलधार बारिश के साथ ही चैखुटिया से द्वाराहाट तक कई स्थानों पर मलबा आ जाने से घंटों यातायात बंद रहा। इससे तमाम बरसाती गधेरे उफान पर है। यही नहीं द्वाराहाट- बदरीनाथ हाइवे जलमग्न के साथ ही जगह- जगह भूस्खलन से जीवन की रफ्तार थम गई। दरअसल, चितैलीगाढ़ गांव के ऊपरी भूभाग में अतिवृष्टि से मुख्य नाला उफान पर आ गया। जिससे निचले क्षेत्रों में काफी जलभराव हो गया। इससे उपजाऊ खेत जबर्दस्त भूकटाव की जद में आ गए। इस बीच भयंकर ओलावृष्टि से मौसमी सब्जियां एवं अन्य फसलें भी बर्बाद हो गए।

चैखुटिया के चितैलीगाढ़ क्षेत्र में 5 मई की शाम तीन बजे आसमान से मानो आफत बरस गई। गांव के ऊपरी भूभाग में अतिवृष्टि से मुख्य नाला उफान पर आ गया। इससे निचले क्षेत्रों में भी भारी जलभराव हो गया। उपजाऊ खेत जबर्दस्त भूकटाव की जद में आ गए। इस बीच भयंकर ओलावृष्टि से मौसमी सब्जियां एवं अन्य फसलें नष्ट हो गईं। खेत एवं मुख्य सड़क जलमग्न हो गई। यही नहीं महाकालेश्वर क्षेत्र में कुथलाड़ नाले ने कहर बरपाया।

कृषि भूमि तबाह हो गई। गधेरे के रुख बदल देने से व्यापक क्षति पहुंची है। तड़ियाल बाखली गधेरे ने भी रौद्र रूप ले लिया। वहीं ढौन भटकोट गधेरा भी उफनाने से क्षेत्र में हालात बिगड़ गए। यहां बाॅलीबाल का मैदान जलमग्न हो गया। सुरक्षा दीवार को भी क्षति पहुंची है। मूसलधार बारिश में चैखुटिया से द्वाराहाट तक कई स्थानों पर मलबा आ जाने से घंटों यातायात बाधित रहा। कुछ स्थानों पर भूस्खलन भी हुआ है।

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