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Uttarakhand

ज्वालापुर में भाजपा के खिलाफ जन ज्वाला

हरिद्वार संसदीय क्षेत्र की ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों भाजपा विधायक सुरेश राठौर को लेकर असंतोष की ज्वाला भड़क रही है। मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र की इस सीट पर पिछले साढ़े चार बरस के दौरान विकास कार्यों का शून्य होना जनता के आक्रोश की मुख्य वजह है। विधायक सुरेश राठौर को यहां के मुस्लिम समाज की नाराजगी भी आगामी विधानसभा चुनाव में भारी पड़ सकती है। 35 हजार मुस्लिम मतदाता यह भूला नहीं है कि राठौर ने चुनाव जीतने के बाद एक विवादित बयान देते हुए कहा था कि ज्वालापुर विधानसभा का 52 प्रतिशत क्षेत्र पाकिस्तान है

हरिद्वार जनपद के बेहद पिछड़े इलाके घाड़ क्षेत्र से जुड़ी ज्वालापुर सुरक्षित विधानसभा सीट राज्य बनने के बाद 2017 के विधानसभा चुनाव से पूर्व अस्तित्व में आई। इसे विशुद्ध रूप से ग्रामीण परिवेश वाली विधानसभा सीट माना जाता है। 5 जिला पंचायत सीटों वाली इस विधानसभा क्षेत्र में 84 गांव शामिल हैं। परिसीमन के बाद अलग विधानसभा सीट के रूप में अस्तित्व में आई यह सीट विकास से कोसों दूर है। यहां स्वास्थ्य, सड़क, परिवहन, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए नागरिक हलकान हैं। इस सीट से परिसीमन के पश्चात् पहली बार विधायक बनने का मौका भारतीय जनता पार्टी के सुरेश राठौर को मिला। 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान सुरेश राठौर को बहुत मजबूत प्रत्याशी नहीं माना जा रहा था। परंतु कांग्रेस भीतर टिकट बंटवारे को लेकर हुई अंतर्कलह के चलते कांग्रेस प्रत्याशी एसपी सिंह इंजीनियर के अलावा कांग्रेस से जुड़ी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बृजरानी के निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतरने से सुरेश राठौर की राह आसान हो गई। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के मुकाबले मात्र चार हजार वोटों से जीत दर्ज करने वाले सुरेश राठौर की राह इस बार आसान नजर नहीं आ रही है। पिछले दिनों भाजपा से जुड़ी एक महिला नेता द्वारा सुरेश राठौर के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराए जाने से भी सुरेश राठौर की काफी किरकिरी हुई है। बाद में भले ही मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला ने सुरेश राठौर पर लगाए गए इल्जाम वापस ले लिए हों लेकिन राठौर के इस मामले में नाम उछलने को लेकर पार्टी नेतृत्व काफी गंभीर नजर आ रहा है। यहां के अति पिछड़ा क्षेत्र माने जाने वाले इलाके घाड़ में विकास कार्यों को लेकर भी सुरेश राठौर से वोटर इस बार खुश नहीं हैं। कभी रविदास आचार्य नाम से कुंभ मेले की पेश्वाई में भागीदारी करने वाले सुरेश राठौर द्वारा विधायक के रूप में अपनी विधानसभा अंतर्गत विकास कार्यों की अनदेखी इस बार भारी पड़ती नजर आ रही है। कुल मिलाकर एक लाख पच्चीस हजार वोटों वाली इस ज्वालापुर विधानसभा सीट पर जातिगत वोटरों की बात की जाए तो यहां 36 हजार दलित वोट तो, 9 हजार सैनी वोट, 14 हजार चौहान वोट 9 हजार बंजारा वोट, 7 हजार पाल समाज वोट तो 35 हजार मुस्लिम वोट प्रत्याशी का भविष्य तय करते हैं।

2017 के विधानसभा चुनाव में सुरेश राठौर को मिली जीत जहां एक ओर कांग्रेस की अंर्तकलह का परिणाम थी तो वहीं दूसरी ओर राठौर को मुस्लिम वोटरों का भी भारी समर्थन होना एक बड़ा कारण था। इस बार अपने एक विवादित बयान को लेकर सुरेश राठौर से मुस्लिम दूरी बना चुके हैं। अपनी जीत के कुछ समय पश्चात् ही सुरेश राठौर ने अपनी विधानसभा सीट के वोटरों को लेकर विवादित बयान दिया था। जिसमें राठौर ने कहा था कि मेरी विधानसभा में 52 प्रतिशत क्षेत्र पाकिस्तान है। उसी समय राठौर के इस बयान को लेकर काफी विवाद हुआ था। दावों के विपरीत सुरेश राठौर घाड़ क्षेत्र में विकास कार्य कराने में विफल साबित हुए हैं। यहां की जनता को आज भी डिग्री कॉलेज खुलने का इंतजार है जिसका वादा सुरेश राठौर चुनाव प्रचार के दौरान जोर- शोर से करते रहे। विकास के नाम पर बहादराबाद में सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की टाइप-6 कोठी को आवंटन कराकर कब्जा जमाये बैठे सुरेश भले ही अपनी विधानसभा क्षेत्र का विकास न कर पाए हो लेकिन इस दौरान सुरेश राठौर का पूरा विकास हुआ है जो उनके काफिले में शामिल गाड़ियों के कतार को देखकर साफ नजर आता है। चुनाव प्रचार के दौरान वोट के लिए लोक लुभावन वादे करने वाले विधायक राठौर जीत के बाद जनता से दूरी बनाने वाले विधायक के तौर पर इलाके में पहचाने जा रहे हैं। उन्होंने विधानसभा ज्वालापुर के अंर्तगत ग्राम संघीपुरा रणसुरा क्षेत्र में चुनाव जीतने के बाद 50 बेड के अस्पताल को स्थापित कराने का वादा किया था जो कि लंबा कार्यकाल होने के बावजूद आज भी वादा ही बनकर रह गया है। उपचार की आवश्यकता पड़ने पर ग्रामीणों को कई किलोमीटर की दूरी तय कर रुड़की या हरिद्वार स्थित अस्पतालों में उपचार के लिए जाना पड़ता है। क्षेत्र की सड़कों का भी यही आलम है। मुख्य मार्गों के क्षतिग्रस्त होने के चलते आए दिन ग्रामीण गढ्डों में गिरकर चोटिल हो जाते हैं। गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए अस्पताल तक आने-जाने के लिए टूटे पडे़ मार्गों का ही प्रयोग करना ग्रामीणों की जैसे नियति ही बन चुकी है। ज्वालापुर विधानसभा अंतर्गत आने वाले गढ़मीरपुर का भी बुरा हाल है। गढ़मीरपुर को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़क आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैै। स्थानीय निवासी और युवा कांग्रेस की प्रदेश अनुशासन समिति के सदस्य महबूब आलम कहते हैं कि गढ़मीरपुर में मार्ग के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल हे, सप्ताह में एक-दो दिन ही गढ़मीरपुर स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर आते हैं। इसके अतिरिक्त पूरा सामुदायिक केंद्र एएनएम के भरोसे चलता है।

विधायक को कई बार अवगत कराए जाने के बावजूद आज तक भी स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाए जाने की दृष्टि गत कोई कार्य नहीं हुआ है। उत्तराखण्ड बनने तथा अलग विधानसभा सीट अस्तित्व में आने के बावजूद आज भी यह क्षेत्र अच्छी सड़कों एवं अस्पतालों के लिए तरस रहा है। गौरतलब है कि ज्वालापुर विधानसभा का ज्यादातर हिस्सा घाड़ क्षेत्र में आता है जो कृषि प्रधान क्षेत्र है परंतु सिंचाई की कोई व्यवस्था न होने के चलते किसान मौसमी बारिश पर निर्भर रहते हैं। विधायक राठौर ने अपने चुनाव में किसानों से वादा किया था कि अगर विधायक बनता हूं और भाजपा की सरकार आती है तो धनोरी से घाड़ क्षेत्र के गांव जैसे बंदरजूड, बुग्गावाला, तेलपुरा से होते हुए इकबालपुर तक गंगनहर से सिंचाई नहर बनवाई जाएगी। यह वादा भी उनके अन्य जुमलों तक ही सिमट कर रह गया है। जिसके चलते आज भी शहर से दूर घाड़ क्षेत्र का यह इलाका सिंचाई को लेकर बेहाल है। घाड़ क्षेत्र से शहर को जोड़ने वाले मार्ग भी खस्ता हाल हैं। अभी भी दर्जनों गांव ऐसे हैं जिनके रास्ते कच्चे हैं या टूटे हुए हैं। यह हाल तब है जब विधायक सुरेश राठौर को अपनी विधानसभा सीट पर पार्टी को लेकर किसी भी प्रकार की अंर्तकलह से जूझना नहीं पड़ रहा है। इस बार सुरेश राठौर के सामने राज्यपाल के जनसंपर्क अधिकारी देवेन्द्र प्रधान की दावेदारी ने जरूर मुश्किलें बढ़ा डाली हैं। राठौर के मुकाबले देवेन्द्र प्रधान को अच्छी छवि का नेता माना जाता है। राज्यपाल के जनसम्पर्क अधिकारी के तौर पर देवेन्द्र ने क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाई है जो विवादित छवि के सुरेश राठौर के लिए शुभ संकेत नहीं है। रोजगार की बात करें तो क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने को लेकर विधायक द्वारा युवाओं से किए गये बड़े-बड़े वादे भी अन्य वादों की तरह खोखले साबित हुए हैं। युवाओं को आज भी उन औद्योगिक इकाइयों का इंतजार है जिनका वादा सुरेश राठौर चुनाव जीतने से पूर्व क्षेत्र के युवाओं से करते थे।

 

डिग्री कॉलेज का वादा भी वादा ही रह गया है। क्षेत्र में शिक्षा की समुचित व्यवस्था न होने के चलते यहां के गरीब युवा रुड़की या देहरादून में शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाते हैं जिसके चलते अकेले शिक्षा पर ही सालाना इनकम से ज्यादा खर्चा आ जाता है और गरीब माता-पिता कर्ज लेकर अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने को मजबूर हैं। विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कुछ गांव ऐसे हैं जिनको राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिला है। चुनावी वादों में विधायक ने ‘रसूलपुर’, ‘टोंगिया’, ‘हरिपुर टोंगिया’, हजार टोंगिया, गांव को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की बात बड़े जोर-शोर से कही थी लेकिन अन्य वादों की तरह आज तक यह भी पूरा नहीं हो पाया है। ज्यादातर विधानसभा के गांवों से शहरों को जोड़ने वाले मार्गों की हालत ज्यादा खस्ता है। ‘दौड़बसी’, ‘शाहमनसेर’, ‘हलजोरा’, ‘इनायतपुर’ आदि गांव को ‘बुग्गावाला’ से जोड़ने वाले रास्ते पर पुल न होने से ग्रामीणों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ‘बाददिवाला हजार ग्रंट’ को बुग्गावाला से जोड़ने वाले मार्ग पर पुल न होने से बहुत दिक्कत उठानी पड़ती है। ‘खेड़ी शिकोहपुर’ को हाइवे से जोड़ने वाला 7 किमी मार्ग लगभग पिछले 15 सालों से टूटा पड़ा है जिसकी हालत बहुत ज्यादा खराब है। अटल आदर्श ग्राम खेड़ी शिकोहपुर की बात करें तो आदर्श ग्राम होने के बावजूद इस गांव में कोई भी स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। यह गांव लगभग 16 हजार की आबादी का गांव है। 2017 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे एसपी सिंह इंजीनियर के अनुसार प्रतिवर्ष वर्षा ऋतु में धार क्षेत्र में बहने वाली बरसाती नदी अपना कहर बरसाती हैं। बांधों का निर्माण न होने के चलते सैकड़ों बीघा भूमि बाढ़ में बह जाती है यही नहीं मन्नू बास जैसे बड़े ग्राम में स्थित इंटर कॉलेज तक वर्षा के दिनों में तालाब बन जाता है जिसके चलते बच्चों की शिक्षा पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। क्षेत्र में पुल एवं सड़क निर्माण कांग्रेस सरकार के दौरान कराया गया था लेकिन वर्तमान विधायक नए निर्माण को तो छोड़िए पुराने निर्माण की मरम्मत भी कराए जाने को लेकर असफल साबित हुए हैं। ज्वालापुर सुरक्षित विधानसभा सीट में अगर रुझान की बात करें तो इस बार इस सीट पर परिवर्तन तय माना जा रहा है। अंतर्कलह से जूझ रही कांग्रेस अगर चुनाव से पूर्व एकता के धागे में बंध जाती है तो इस सीट पर शायद ही कोई कांग्रेस के विजय रथ को रोक सके। इस सीट पर बढ़ रहे कांग्रेस के प्रभाव का सबसे मुख्य कारण वर्तमान विधायक सुरेश राठौर की क्षेत्र में कराए जाने वाले विकास कार्यों को लेकर लापरवाही ही कही जाएगी।

 

ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र में जो समुचित विकास होना चाहिए था उस ओर विट्टाायक ने ध्यान नहीं दिया। शिक्षा, चिकित्सा, परिवहन, किसानों एवं युवाओं के रोजगार के लिए कुछ नहीं कर पाए। उन्होंने जो वादे किए थे वह सब जुमले बनकर रह गए। विधानसभा क्षेत्र के अधिकतर मार्ग खस्ताहाल हैं। घाड़ क्षेत्र में कोई भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। सहदेवपुर से बुड्डाहेडी तक का मार्ग खस्ताहाल पड़ा हुआ है। ग्रामीणों को वन्य जीवों से खतरा बना रहता है। फसलों को जंगली जानवरों से बचाने को लेकर विधायक एक पॉलिसी तक बनवाने में नाकाम साबित हुए हैं। जबकि जंगली जानवर यहां बहुत बड़ी समस्या है, उसके लिए ये कुछ नहीं कर पाए। भाजपा सरकार हिन्दू-मुस्लिम के बेस पर इलेक्शन जीतना चाहती हैं लेकिन अब लोग इनकी बातों में नहीं आने वाले।
एसपी सिंह, उपाध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस कमेटी

 

भाजपा विधायक सुरेश राठौर ने क्षेत्र में कोई भी काम नहीं किया है। सड़कंे बदहाल हैं। इलाके में जितने भी पुल है वो सब हरीश रावत की देन हैं। भाजपा का ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा था। भाजपा सरकार उसके विपरीत बेटियों का अपमान करने में लगी है। सुरेश राठौर ने किसानों से सिंचाई के लिए घाड़ क्षेत्र में नहर लाने का जो वादा किया था वह उसको पूरा नहीं कर पाए। राठौर ने ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन के लिए भी कोई काम नहीं किया है।
दिनेश कुमार, जिला उपाध्यक्ष हरिद्वार कांग्रेस

 

विधायक सुरेश राठौर ने विधानसभा ज्वालापुर को लावारिस छोड़ दिया है। विधायक जी ने अपने पूरे कार्यकाल में एक भी काम ऐसा नहीं कराया है जिसको वह गिना सके। सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। डिग्री कॉलेज का जो वादा था उसको यह पूरा नहीं कर पाए। विधानसभा की जनता अब समझ चुकी है। जनता इस बार इनको विधायक की कुर्सी से हटाकर रहेगी।
शरीक अली, प्रदेश सोशल मीडिया सचिव, कांग्रेस

 

विधानसभा क्षेत्र में जो भी हमारे वायदे थे वह हमने सौ प्रतिशत पूरे किए हैं। सड़कों के जाल बिछा दिए हैं और डिग्री कॉलेज का प्रस्ताव भेजा हुआ है। जल्द ही वह भी पास हो जाएगा। फायर स्टेशन की स्थापना प्रोसेसिंग में है। क्षेत्र में सभी जगह एम्बुलेंस खड़ी कर दी है, चाहे वह बहादराबाद हो या बुग्गावाला हो।
सुरेश राठौर, ज्वालापुर विधायक

 

 

पूरी विधानसभा में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल स्थिति में हैं। ग्रामीणों को आकस्मिक चिकित्सा सेवा प्राप्त करने के लिए शहरों की ओर रुख करना पड़ता है। यही नहीं घाड़ क्षेत्र में सरकारी परिवहन व्यवस्था न होने के कारण भी ग्रामीण कई-कई किलोमीटर का सफर पैदल तय करने को मजबूर हैं। एक अदद डिग्री कॉलेज तक अस्तित्व में नहीं आ पाया है। क्षेत्र में किसी नए पुल का निर्माण नहीं हुआ है। सड़कंे भी बदहाल स्थिति में हैं, ज्वालापुर विधायक विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य कराने में विफल साबित हुए हैं।
प्रियव्रत, प्रतिनिधि ब्लॉक प्रमुख, बहादराबाद

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