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Uttarakhand

‘कमाई का जरिया बना प्राइवेट स्कूल’

सामाजिक कार्यकर्ता रघु तिवारी प्रदेश की स्कूली शिक्षा को लेकर खासे मुखर रहे हैं। वे राज्य की स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में कई काम कर चुके हैं। वर्तमान में तिवारी उत्तराखण्ड राज्य में राज्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम फोरम के समन्वयक हैं। राज्य की स्कूली शिक्षा और बंद होते सरकारी स्कूलों के मामलों में रघु तिवारी से ‘दि संडे पोस्ट’ ने बातचीत की

राज्य में सरकारी स्कूलों के बंद होने के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। आरटीई कानून होने के बावजूद ऐसा हो रहा है। आप इसमें क्या समझते हैं?

आरटीई में एक सेक्शन सोशल इंक्लयुजन है जिसमें यह परिकल्पना की गई थी कि प्राइवेट स्कूलों में अपर क्लास का बच्चा पढ़ता है जबकि लोअर क्लास के बच्चे इन स्कूलों में नहीं पढ़ पाते। इसके लिए आरटीई कानून लाया गया। इन प्राइवेट
स्कूलों में लोअर क्लास या गरीब वर्ग के बच्चों को पढ़ने का अवसर मिला। बड़े-बड़े बेहतर और विख्यात स्कूल जो कि किसी धार्मिक संस्था या अल्पसंख्यक वर्ग के हैं, उनको इस कानून से बाहर रखा गया। इसके कारण आरटीई कुकुरमुत्तों की तरह उगे हुए छोटे-छोटे प्राइवेट स्कूलां की कमाई का जरिया बना दिए गए। पिछले वर्ष 2021 में सरकार ने 112 करोड़ रुपए इन प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के तहत भुगतान किया है। यह साफ तौर पर बताता है कि किस तरह से सरकार और शिक्षा विभाग एक बड़े षड्यंत्र के तहत सरकारी स्कूलों को जानबूझ कर खत्म कर रहा है और प्राइवेट स्कूलों को आरटीई के माध्यम से मजबूत कर रहा है।

तो क्या आप आरटीई कानून ही सरकारी स्कूलों की बंदी का बड़ा करण मान रहे हैं?

पहले कुछ सालों में सरकारी स्कूलों के बच्चों को जबरदस्ती भर्ती करवाया गया। आरटीई गांवों के सरकारी स्कूलों को बंद होने का सबसे बड़ा कारण रहा है। सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को आरटीई के माध्यम से मजबूत किया और नए-नए प्राइवेट स्कूल खुलने लगे। प्रदेश के पहाड़ी जिलां तक में प्राइवेट स्कूल खुलने लगे। बड़े पैमाने पर इस तरह प्राइवेट स्कूल खुले तो सरकारी स्क्ूलों से बच्चे इन स्कूलों में जाने लगे जिससे सरकारी स्कूल बंद होते चले गए। आरटीई एक तरह से प्राइवेट स्कूलों को मजबूत करने के लिए एक बड़ा टूल बन गया और इसके कारण कमजोर प्राइवेट स्कूल सर्वाइव करने लगे।

सिर्फ आरटीई कानून को ही इसका दोषी ठहराया जा सकता है?
इसके पीछे सरकार ने तीन बड़े काम किए हैं जिससे सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं। इनमें पहला काम तो सरकार ने शिक्षकों के खिलाफ काम किया और एक हव्वा खड़ा किया गया कि शिक्षक पूरा काम नहीं करता है जिससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता कमी हुई है। दूसरा सरकार ने शिक्षकों पर तो ब्लेम किया लेकिन अपने मैनेजमेंट और अधिकारियों का काम नहीं देखा। तीसरा प्राइवेट स्कूलों को आरटीई से फाइनेंसिंग की जिससे प्राइवेट स्कूल मजबूत हुए और सरकारी स्कूलों के बच्चे उनमें एडमिशन लेने के लिए प्रेरित हुए।

जन संघर्ष मोर्चा के रघुनाथ सिंह नेगी ने शिक्षा मंत्री को प्रमाणों के साथ शिकायत भेजी है और विजिलेंस जांच करवाए जाने की मांग की है। आप आरटीई फोरम के समन्वयक है इसमें ऐसा क्यों हो रहा है। फोरम इसमें क्या कर सकता है?

आरटीई कानून के एक प्रावधान में इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी को अधिकृत किया गया है। वही इसे देखते हैं। हो यह रहा है कि शिक्षा अधिकारी आरटीई के तहत शामिल किए गए स्कूलों की जांच सही तरीके से नहीं कर रहे हैं। अपनी रिपोर्ट तक सरकार और विभाग को सही नहीं भेज रहे हैं। इसमें एक बड़ा नियम है कि एक किमी में एक से अधिक स्कूलों को आरटीई में शामिल नहीं किया जा सकता लेकिन इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। एक किमी में एक से अधिक स्कूलों को इसमें शामिल किया जा रहा है। यही सबसे बड़ा कारण है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या घट रही है।

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