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Uttarakhand

प्रेमनाथ का एनजीओ प्रेम

नाबालिग बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में अल्मोड़ा की जेल में बंद दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी ए.वी. प्रेमनाथ अपने शातिर कारनामों की वजह से अक्सर चर्चाओं में रहते हैं। जब से वह सलाखों के पीछे गए तब से एक के बाद एक कई मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला दिल्ली के देवली गांव के एक टिम्बर सप्लायर के मानसिक और आर्थिक शोषण से जुड़ा है। जिससे आजिज आकर वह ए.वी. प्रेमनाथ के खिलाफ दिल्ली के उपराज्यपाल की शरण में गए हैं। जहां ए.वी. प्रेमनाथ के खिलाफ की गई शिकायत में एक ऐसा सच भी सामने आ रहा है, जिसको आज तक यह अधिकारी छुपाता आया है

‘उंनकी बेईमानी करने की अदा ही इतनी जुदा थी कि हम बेवकूफ बनते चले गए।’ यह कहना है दिल्ली निवासी अंकुश सिंघल का। अंकुश सिंघल देवली गांव, नई दिल्ली में राजेश टिम्बर सप्लायर के मालिक हैं। वह भवन निर्माण के लिए शटरिंग का सामान किराए पर देने का कारोबार करते हैं। दो साल पहले इस कारोबार में उनका वास्ता एक ऐसे सीनियर ऑफिसर से पड़ा जो अपने शातिराना अंदाज में बेईमानी करने के लिए चर्चित है। लोगों को वह अपने पद का रौब दिखाकर उनके साथ ठगी करने से भी बाज नहीं आता है। अंकुश सिंघल के साथ भी वरिष्ठ अधिकारी ने ऐसा ही किया।

 

प्रेमनाथ से अंकुश सिंघल की हुई एग्रीमेंट

 

 

उत्तराखण्ड स्थित कोरीछीना (डांडा कांडा) में बन रहे भवन निर्माण के लिए जब सिंघल ने अपनी शटरिंग दी थी तो उसे इसका इल्म नहीं था कि वह अधिकारी इतना शातिर है। लेकिन जब भवन बन गया और शटरिंग का सामान और किराया देने की बात आई तो अधिकारी का असली रूप सिंघल के सामने आया। सिंघल को न उसकी शटरिंग का पूरा सामान वापस किया गया और न ही उसके किराए की धनराशि उसे मिली। मिले तो बस कोरे आश्वासन और अपने पद का रौब। जब सिंघल अपने किराए की धनराशि से शटरिंग को वापस करने पर अड़ गया तो उसे झूठे मामलों में फंसाने का डर दिखाया गया, जिसके लिए यह अधिकारी अक्सर मीडिया की सुर्खियां बनता रहता है।

यह अधिकारी है दिल्ली का संयुक्त सचिव एवी प्रेमनाथ। एवी प्रेमनाथ फिलहाल उत्तराखणड़ की अल्मोड़ा जेल में एक किशोर बालिका के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में सलाखों के पीछे है। डांडा कांडा स्थित प्लीजेंट वैली फाउंडेशन नामक संस्था का अपनी पत्नी के नाम से संचालन करा रहे एवी प्रेमनाथ पर एक के बाद एक कई गंभीर आरोप लग रहे हैं। फिलहाल दिल्ली के अंकुश सिंघल ने उनके ऊपर मानसिक और आर्थिक शोषण आरोप लगाया है। जिसमें वह प्लीजेंट वैली फाउंडेशन के निर्माण के दौरान शटरिंग के किराए आदि की एवज में लाखों रुपए के भुगतान न किए जाने का आरोप लगा रहे हैं। इस बाबत अंकुश सिंघल ने 9 दिसंबर 2021 को दिल्ली के उपराज्यपाल के समक्ष शिकायत की है। जिसमें उन्होंने दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी एवी प्रेमनाथ पर तय शर्तों के अनुसार शटरिंग के किराए की धनराशि नहीं देने का आरोप लगाया है। इसी के साथ सिंघल ने प्रेमनाथ पर यह भी आरोप लगाया है कि उसने पूरा पैसा तो देना दूर उसके शटरिंग का आधा सामान भी वापस नहीं किया है। जबकि किराए की धनराशि मांगने पर वह उसे मानसिक तौर पर परेशान कर रहा है।

बकौल अंकुश सिंघल ‘वह दिल्ली के देवली गांव में पिछले 9 साल से मैसर्स राजेश टिम्बर सप्लायर की फर्म चला रहे हैं। इस कारोबार को वह ईमानदारी पूर्वक कर रहे हैं। शहरी विकास विभाग दिल्ली सरकार के

एग्रीमेंट में दिए गए सामनों का विवरण

संयुक्त सचिव एवी प्रेमनाथ द्वारा सरकारी बाजार का सर्वे कराया गया था। सर्वेक्षण के दौरान ही वह एक-दूसरे के संपर्क में आए। तब एवी प्रेमनाथ की उत्तराखण्ड के कोरीछीना में स्थित प्लीजेंट वैली फाउंडेशन की साईट (निर्माण कार्य) शुरू होने वाला था। क्योंकि शटरिंग का सभी सामान मेरे पास मौजूद था। इसके चलते होने वाले भवन निर्माण में मेरी शटरिंग किराए पर लेने का एग्रीमेंट किया गया।’

अंकुश आगे बताते हैं ‘25 जुलाई 2020 को पूरी पारदर्शिता के साथ मेरे और एवी प्रेमनाथ के बीच एग्रीमेंट किया गया। जिसमें मदन लाल गुप्ता की मुहर लगी। प्लीजेंट वैली फाउंडेशन के भवन निर्माण में प्रयोग होने वाली शटरिंग में 850 आयरन प्लेट्स, 700 जैक, 250 चैनल, 250 लकड़ी के फट्टे का अनुबंध किया गया। इसके अनुसार आयरन प्लेट्स और चैनल एक रुपया प्रतिदिन, जैक डेढ़ रुपया तो लकड़ी के फट्टे 80 पैसे प्रतिदिन के हिसाब से किराया तय किया गया था। एवी प्रेमनाथ ने मुझे सामान की एवज में 10-10 लाख के दो चेक बतौर सिक्योरिटी दिए।

तब मुझे किराए के अग्रिम भुगतान के तौर पर चार लाख रुपया (तीन लाख एडवांस और एक लाख बिल पैड) किए गए। एग्रीमेंट में तय शर्तों के अनुसार अगस्त 2020 में साईट (निर्माण कार्य) खत्म हो जाने के बाद किराए की संपूर्ण धनराशि और शटरिंग का पूरा सामान वापस करना था। लेकिन 13 अगस्त 2020 को केवल आधा सामान ही वापस किया गया। आधे सामान को वापस करने के लिए मैं एवी प्रेमनाथ से बार-बार कहता रहा। लेकिन वह हर बार कोई नया बहाना बना देता है। मेरे बाकी बचे हुए सामान की कीमत 8 लाख रुपए हैं। इसके अलावा मेरे शटरिंग के किराए की धनराशि 4 लाख 79 हजार 992 रुपए है जो 13 अगस्त 2020 तक है। अगर एडवांस मिली धनराशि चार लाख को इसमें से मायनस किया गया तो लगभग 80 हजार रुपए बाकी हैं। इसके अलावा 13 अगस्त 2020 से 31 अक्टूबर 2022 तक का आधी शेटरिंग का 15 महीने का किराया 3 लाख 95 हजार रुपए होते हैं। इस तरह मेरे आधी शटरिंग की कुल कीमत 8 लाख और किराया 4 लाख रुपए अभी भी बाकी हैं जो 12 लाख से अधिक बैठता है। इस तरह मेरे 12 लाख रुपए प्रेमनाथ दबाए बैठा है।

 

यहां यह भी बताना जरूरी है कि अंकुश सिंघल के पास एवी प्रेमनाथ के हस्ताक्षर युक्त 10-10 लाख के दो चेक बतौर शटिरिंग समान की सिक्योरिटी की एवज में दिए गए थे। सिक्योरिटी धनराशि को अपने एकाउंट में जमा करा लिया जाता है और जब सामान वापस आ जाता है तो इस धनराशि को वापस दे दिया जाता है। लेकिन अंकुश सिंघल ने दोनों ही चेक अपने एकाउंट में जमा नहीं कराए। इस बाबत जब सिंघल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उस समय कोरोना काल चल रहा था उसी दौरान दोनों चैकों की एकाउंट में डालने की तय तारीख पूरी हो चुकी थी। जिसके चलते वह उनको अपने खाते में जमा नहीं करा पाए। जब उनसे पूछा गया कि वह दोनों चेकों को नई तारीख के साथ दोबारा ले सकते थे तो उन्होंने इसके जबाब में बताया कि एवी प्रेमनाथ ने उनसे वायदा किया था कि जैसे ही कोरोना काल खत्म हो जाएगा वह चेकों को नई तारीख के साथ दे देगा। साथ ही वह धनराशि नगद देने की भी बात करता था।

 

प्रेमनाथ द्वारा सिक्योरिटी मनी के तौर पर राजेश टिम्बर एजेंसी सप्लायर को एक ही डेट में दस-दस लाख के दो चेक जारी (000083-84)

इस तरह वह कई महीनों तक गोल-मोल बात करके समय बढ़ाता गया। इसके बाद जब उसका काम पूरा हो गया तो फिर उसने उन्हें न पैसे दिए और न ही शेटरिंग का आधा सामान। इस बाबत जब अंकुश सिंधल एवी प्रेमनाथ को फोन करते तो वह फोन नहीं उठाता है। यही नहीं बल्कि मेसेज करने पर उसका जवाब तक देना उचित नहीं समझा था। थक-हारकर सिंघल दिल्ली के उपराज्यपाल की शरण में पहुंचे, जहां उन्होंने इस मामले को उनके दरबार में रखा है। अंकुश सिंघल कहते है कि जेल से बाहर आने के बाद एवी प्रेमनाथ से एक बार फिर फाइनली बात की जाएगी। अगर उन्होंने उनका सामान और पैसा नहीं दिया तो वह उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को मजबूर होंगे।

सरकारी अधिकारी का एनजीओ प्रेम
दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी एवी प्रेमनाथ अपने एनजीओ प्रेम के लिए जाने जाते हैं। प्रेमनाथ ने अपनी पत्नी आशा प्रेमनाथ के नाम पर 2007 में एवीआर फाउंडेशन बनाया। जिसका कार्यालय उन्होंने दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित अपने सरकारी आवास में बनाया। ‘दि संडे पोस्ट’ ने 12 सितंबर 2010 को इस मामले पर ‘सरकारी आवास में है एनजीओ’ नामक शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें खुलासा किया गया था कि दिल्ली सरकार ने एवी प्रेमनाथ को ग्रेटर कैलाश स्थित ऑफिसर्स फ्लैट में आवास आवंटित किया था। जो आवासीय क्षेत्र में आता है। बावजूद इसके प्रेमनाथ ने यहां रहने की बजाय इस आवास में एनजीओ का संचालन करना शुरू कर दिया था। फरवरी 2007 में एवीआर फाउंडेशन नामक एनजीओ का कार्यालय सरकारी आवास में खोला गया था। यही नहीं बल्कि एवी प्रेमनाथ ने अपने सरकारी पते पर जुलाई 2007 में एवीआर
फाउंडेशन का रजिस्ट्रेशन भी कराया था। कई साल तक यह एनजीओ इस सरकारी आवास में चलता रहा। यह नियम विरुद्ध था। क्योंकि किसी भी सरकारी आवास में एनजीओ का दफ्तर नहीं खोला जा सकता है। इसके चलते दिल्ली सरकार ने ‘दि संडे पोस्ट’ की खबर का संज्ञान लिया और यहां बने एवी प्रेमनाथ के एनजीओ कार्यालय को बंद करा दिया था।

कुछ इसी तरह का मामला एक बार फिर प्रकाश में आया है। जिसमें एवी प्रेमनाथ द्वारा अल्मोड़ा के कोरीछीना (डांडा कांडा) में अपनी पत्नी के प्लीजेंट वैली फाउंडेशन के निर्माण के समय ऐसा ही कुछ किया गया जिसमें सरकारी सेवाओं पर रहते हुए एक अधिकारी नहीं कर सकता है। यह भी नियम विरुद्ध बताया जा रहा है। दिल्ली के देवली गांव निवासी अंकुश सिंघल के मेसर्स राजेश टिम्बर सप्लायर से हुए एग्रीमेंट में एवी प्रेमनाथ सेकेंड पार्टी बने हैं। एवी प्रेमनाथ और अंकुश सिंघल के बीच प्लीजेंट वैली फाउंडेशन में निर्माण कार्य को लेकर यह एग्रीमेंट 25 फरवरी 2020 को हुआ था। जिस पर नोटेरी की मुहर भी लगी है। इस एग्रीमेंट पर एवी प्रेमनाथ ने बकायदा अपने हस्ताक्षर किए हैं। 27 फरवरी को नोटेरी की मुहर के साथ बने इस एग्रीमेंट की शुरुआत में ही एवी प्रेमनाथ पुत्र स्वर्गीय वेंकेट रयालू नाम दर्शाया गया है, जिस पर एवी प्रेमनाथ का दिल्ली स्थित पता 64, दिल्ली गवर्नमेंट ऑफिसर्स फ्लैट्स ग्रेटर, कैलाश प्रथम, नई दिल्ली 110048 लिखा है। यही नहीं बल्कि इस एग्रीमेंट में यह भी अंकित है कि एवी प्रेमनाथ ने सिक्योरिटी मनी के रूप में 10-10 लाख के दो चेक भी मेसर्स राजेश टिम्बर सप्लायर के नाम पर दिए हैं। ये दोनों चेक 27 फरवरी 2020 को जारी किए गए है। चेक करूर वैश्य बैंक के एवी प्रेम नाथ के खाते से बेयरिंग नंबर 00083 एवं 00084 से किए गए हैं।

 

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