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Uttarakhand

प्रेमचंद अग्रवाल की बढ़ी मुश्किलें

ऋषिकेश के विधायक और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के खिलाफ क्षेत्र की जनता में जबर्दस्त आक्रोश है। लोग खफा हैं कि जिस व्यक्ति को लगातार तीन बार चुनाव जितवाया वह बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं करा सका। कांग्रेस ने जनाक्रोश का फायदा उठाते हुए विधायक अग्रवाल की मोर्चाबंदी शुरू कर दी है

प्रेमचंद अग्रवाल लगातार तीन बार से ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और आज विधानसभा अध्यक्ष भी हैं। लेकिन क्षेत्र में विकास कार्यों की अनदेखी के चलते अग्रवाल के खिलाफ जनता में भारी नाराजगी देखी जा रही है। जनता की नाराजगी इस कदर है कि वह सड़कों में बने गड््ढ़ों में धान की रोपाई करके अपना रोष व्यक्त कर रही है। आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा रोजगार क्षेत्र की प्रमुख मांग रही है। कांग्रेस पार्टी ने विधायक प्रेमचंद अग्रवाल के खिलाफ मोर्चा खोल कर अनशन, धरना-प्रदर्शन तथा आंदोलन शुरू करके प्रेमचंद की मुसीबतों को बढ़ा दिया है। इसके अलावा सोशल मीडिया में भी अग्रवाल के खिलाफ कई ट्रेंड चलाए जा रहे हैं जिनको बड़ा समर्थन मिल रहा है। जानकारों की मानें तो आने वाले विधानसभा चुनाव में जनता की यह नाराजगी प्रेमचंद अग्रवाल के लिए मुसीबतों का कारण बन सकती है।

वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पटखनी देकर ऋषिकेश से भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर पहली बार विधायक बने प्रेम चंद अग्रवाल लगातार तीन बार से क्षेत्र के विधायक हैं। हैरानी की बात यह है कि हर चुनाव में अग्रवाल पूर्व से ज्यादा मत पाकर विजयी होते रहे हैं। इसी का असर रहा है कि प्रेमचंद अग्रवाल को 2017 में भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष बनाया। अपनी इसी लोकप्रियता के चलते अग्रवाल जनता में अपनी गहरी पैठ बनाए हुए हैं, लेकिन जिस तरह से जनता ने उनका साथ हर चुनाव में दिया उसके अनुरूप अग्रवाल अपने क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने में नाकाम साबित हुए हैं। आज भी ऋषिकेश की जनता स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क तथा रोजगार के लिए तरस रही है। रोजगार के नाम पर लगातार इस क्षेत्र से उद्योग समाप्त होते गए और केवल चारधाम यात्रा ही इस क्षेत्र का एक प्रमुख रोजगार का माध्यम बना हुआ है जो कि कोरोनाकाल में बुरी तरह से चरमरा गया है।

ऋषिकेश विधानसभा सीट राज्य की दूसरी सबसे बड़ी मतदाताओं वाली विधानसभा सीट है। मुख्यतः दो भागों में बंटी इस विधानसभा सीट में नगर निगम क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र है जिनमें दो से ढाई लाख की आवादी है। इनमें सबसे ज्यादा समस्याएं ग्रामीण क्षेत्रों में ही हैं जहां आज भी पेयजल की भारी किल्लत, बिजली की अनियमित आपूर्ति और सड़कों की दुर्दशा बनी हुई है। बाढ़ और भूकटाव भी कई ग्रामसभाओं की बड़ी समस्याएं हैं जिनसे हर बार जनता को दो-चार होना पड़ता है। इसी को लेकर जनता में भारी नाराजगी बनी हुई है। इसके अलावा नेपाली फार्म टोल प्लाजा को लेकर भी क्षेत्र की जनता में भारी नाराजगी बनी हुई है और विगत कई दिनों से जनता इसके विरोध में आंदोलनरत है।

कांग्रेस पार्टी ने विधायक प्रेमचंद अग्रवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीण सड़कों की दुर्दशा और अग्रवाल की ग्रामीण क्षेत्रों में की जा रही अनदेखी को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रही है। पशुलोक विस्थापितों के क्षेत्र में ग्रामीण सड़कों के हालात इस कदर हो चले हैं कि उनमें बड़े-बड़े गड्ढ़े बन चुके हैं जिनमें बरसात का पानी जमा हो रहा है।

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राजपाल खरोला का कहना है कि लगातार तीन बार से विधायक होने के बावजूद प्रेमचंद अग्रवाल ने अपने क्षेत्र की जनता के साथ न्याय नहीं किया। दर्जनों ग्रामसभाओं में सड़कें बुरी तरह से समाप्त हो चुकी हैं। लगातार मांग करने के बावजूद विधायक कोई ध्यान तक नहीं दे रहे हैं।

कांग्रेस ने विधायक प्रेमचंद अग्रवाल की इस अनदेखी और सड़कों की हालत को सामने लाने के लिए सड़कों में बने गड्ढ़ों में धान की रोपाई का कार्यक्रम किया जिसे जनता ने भी भरपूर समर्थन दिया। टिहरी बांध विस्थापितों की सड़कों को तोड़कर सीवर लाईन का काम किया गया, लेकिन क्षतिग्रस्त सड़कों का मरम्मत कार्य नहीं किया गया जिसके चलते इन सड़कों पर आवागमन में भारी परेशानियां हो रही हैं। हैरानी की बात यह हैे कि पिछले वर्ष भी इसी तरह से कई सड़कों पर धान की रोपाई के कार्यक्रम किए गए थे। कांग्रेस के इस ‘सड़क नहीं तो धान की रोपाई ही सही’ आंदोलन को जन समर्थन मिलने के बाद शासन ओैर प्रशासन की कुम्भकर्णी नींद खुली और तब जाकर सड़कों की मरम्मत हो पाई।

इसके अलावा नेपाली फार्म हरद्विार-देहरादून रोड पर नया टोल प्लाजा के निर्माण में भी जनता में विधायक के प्रति नाराजगी इस कदर बनी हुई है कि विगत 28 दिनों से जनता आंदोलन कर रही है, जबकि नियमानुसार नेपाली फार्म तिराहे में टोल प्लाजा का निर्माण ही नहीं हो सकता, क्योंकि 35 किमी दूर डोईवाला में टोल प्लाजा का निर्माण हो चुका है जबकि नेपाली फार्म तिराहा मानकों में ही नहीं आता। बावजूद इसके टोल प्लाजा के निर्माण की सुगबुगाहट जनता में आंदोलन का कारण बन चुकी है। हालांकि इस आंदोलन के बाद विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने घोषणा की कि नेपाली फार्म तिराहे पर टोल प्लाजा नहीं बनाया जाएगा, लेकिन अभी तक इसकी कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी ही नहीं हो पाई है। इसके चलते जनता में विधायक पर अपने क्षेत्र की जनता के साथ धोखा करने का आरोप लग रहे हैं।

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