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Uttarakhand

सत्ता परिवर्तन के संकेत

त्रिवेंद्र सिंह रावत यूं ही नहीं हटाए गए। आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में वे भाजपा के लिए खतरे की घंटी बन गए थे। ‘दि संडे पोस्ट’ और ‘आईएमआईएस’ के एक सर्वेक्षण में राज्य के 66.68 प्रतिशत मतदाताओं ने उन्हें बेकार मुख्यमंत्री बताया है, जबकि महज 8.64 प्रतिशत मतदाता ही उनकी सरकार के चार वर्षीय कामकाज को बढ़िया मानते है। जाहिर है कि त्रिवेंद्र की असम्मानजनक विदाई भाजपा आलाकमान ने डैमेज कंट्रोल के तौर पर की है। लेकिन इसके बावजूद भाजपा की चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। आज तक की स्थिति यह है कि राज्य की 60.10 प्रतिशत जनता सत्ता परिवर्तन की चाह रखती है। फिर राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू भी टूटता जा रहा है। राज्य की 29.7 प्रतिशत जनता उन्हें बेकार प्रधानमंत्री मानती है। ऐसे में यदि राज्य की 66.69 प्रतिशत जनता के मन मुताबिक कांग्रेस ने चुनाव पूर्व चेहरा घोषित किया तो भाजपा की चुनौती और बढ़ जाएगी। इससे साफ है कि राज्य के नए निजाम तीरथ सिंह रावत के सिर ऐन मौके पर कांटों का ताज पहना दिया गया है

उत्तराखण्ड में भाजपा सरकार चार बरस पूरे कर चुकी है। हालांकि अभी विधानसभा चुनाव लगभग एक बरस दूर है लेकिन प्रदेश का राजनीतिक तापमान गर्माने लगा है। कांग्रेस और भाजपा के साथ-साथ आम आदमी पार्टी पूरे दमखम के साथ इस बार अपना भाग्य आजमाने की तैयारियों में जुट गई है। राज्य गठन के बाद से ही हाशिए पर रहे क्षेत्रीय दल-उक्रांद और उपपा में भी अगले चुनावों को लेकर सरगर्मी बढ़ने लगी है। ऐसे माहौल में ‘दि संडे पोस्ट-आईएमआईएस’ द्वारा चार बरस की भाजपा सरकार के कार्यकाल और आने वाले विधानसभा चुनाव-2022 को लेकर जनता की राय जानने का प्रयास किया। इस सर्वेक्षण के तहत 6 फरवरी से 12 मार्च तक ऑनलाइन /ऑफलाइन माध्यमों से जनता के सामने 13 प्रश्न रखे गए ताकि प्रदेश की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के प्रति आवाम की राय और भविष्य के राजनीतिक परिदृश्य को समझा जा सके। सर्वेक्षण राज्य के सभी सत्तर विधानसभा क्षेत्रों में किया गया। इसे मौजूदा राज्य सरकार और भावी राजनीति की दृष्टि से अब तक की सबसे बड़ी रायशुमारी माना जा सकता है।

सर्वेक्षण में कुल तेरह प्रश्न जनता के सामने रखे गए थे। इनमें से चार प्रश्न चार बरस की भाजपा सरकार की बाबत थे। पहला प्रश्न मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कामकाज पर जनता की राय के बाबत था। भाजपा के लिए इसका उत्तर खतरे की बड़ी घंटी समान है।

40.95 प्रतिशत जनता ने सरकार के कार्यकाल को बहुत बेकार बताया। 27.48 ने बेकार तो 15.38 प्रतिशत ने बढ़िया करार दिया। मात्र 8.64 प्रतिशत मतदाताओं ने सरकार के कामकाज को बहुत बढ़िया माना है। गौरतलब है कि राज्य में पहली बार तीन चैथाई बहुमत वाली सरकार काबिज है जो स्वयं को डबल इंजन की सरकार कहती आई है। डबल इंजन से तात्पर्य राज्य और केंद्र में भाजपा सरकारों का होना है। जनता के जवाब से साफ होता कि डबल इंजन की सरकार जनता का विश्वास जीत पाने में पूरी तरह विफल रही है। दूसरा प्रश्न पहले प्रश्न से आगे का मार्ग प्रशस्त करने वाला था। जनता से जब यह पूछा गया कि बतौर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को दस में से कितने अंक देंगे, इसके लिए जनता को विकल्प चुनने को कहा गया कि वे कैसे सीएम हैं। जैसे कि बहुत बढ़िया, बढ़िया, बेकार, बहुत बेकार। एक आॅप्शन (विकल्प) कोई राय नहीं होने का दिया गया। इस प्रश्न का उत्तर भाजपा आलाकमान से लेकर नए सीएम बने तीरथ रावत तक के उन दावों की हवा निकाल देता है जो पिछले चार बरस की सरकार के कसीदे पढ़ने वाले हैं।

23.18 प्रतिशत लोगों ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को बहुत बेकार सीएम, 43.50 प्रतिशत ने बेकार, 12.78 प्रतिशत ने बढ़िया तो मात्र 7.58 प्रतिशत ने ही बहुत बढ़िया सीएम माना। कोई राय न रखने वालों की संख्या मात्र 12.94 रही। यह सर्वेक्षण भाजपा आलाकमान द्वारा त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाए जाने के निर्णय की पुष्टि करता है। निश्चित ही पार्टी के द्वारा समय-समय पर कराए जाने वाले आतंरिक सर्वेक्षणों में भी इसी प्रकार के नतीजों ने त्रिवेंद्र रावत की
असम्मानजनक विदाई की पटकथा लिखी होगी। तीसरा प्रश्न, पहले दो प्रश्नों से निकले निष्कर्ष की पुष्टि करने वाला प्रश्न था। इसमें जनता से पूछा गया कि क्या 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सीएम चेहरा बदलने का लाभ मिलेगा? पहले दो प्रश्नों के उत्तरों पर मोहर लगाते हुए 36.71 प्रतिशत सर्वेक्षण प्रतिभागियों ने ‘हां’ में उत्तर दिया, 32.99 प्रतिशत ने ‘नहीं’ कहा तो 18.88 प्रतिशत ने शायद ऐसा करने से भाजपा को लाभ मिलने की बात कही। 11.40 प्रतिशत की इस बाबत कोई राय नहीं थी।

चैथा प्रश्न तीसरे प्रश्न का ही विस्तार था। इसमें भाजपा के सात दिग्गजों-त्रिवेंद्र सिंह रावत, अजय भट्ट, अनिल बलूनी, डाॅ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, धन सिंह रावत, बंशीधर भगत और सतपाल महाराज में से 2022 में किसे सीएम चेहरा देखे जाने की बात पूछी गई थी। नतीजे स्थापित भाजपा नेताओं के लिए न केवल चैंकाने वाले सामने आए हैं बल्कि उन्हें चिंतित करने वाले भी हैं। इन स्थापित चेहरों को नकारते हुए लोगों ने एक युवा चेहरे को अपनी पसंद बता डाला। 23.39 प्रतिशत ने राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी को भाजपा का सीएम फेस बनाने की बात कही। नबंर दो पर भी जो नाम उभर कर आया है वह चैंकाने वाला है। 13.89 प्रतिशत ने सतपाल महाराज को अपनी पसंद बताया है। स्थापित नेता के बतौर पूर्व में सीएम रह चुके डाॅ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ मात्र 12 ़78 प्रतिशत की पसंद रहे हैं, तो नैनीताल सांसद अजय भट्ट 4.98 प्रतिशत लोगों के अनुसार 2022 में सीएम चेहरा बनने योग्य हैं। चार बरस तक सीएम रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत इस सर्वे में सबसे फिसड्डी बन उभरे हैं। उन्हें मात्र 8.80 प्रतिशत मतदाता ही 2022 में दोबारा सीएम फेस बनाने के पक्ष में हैं। धन सिंह रावत और बंशीधर भगत रेस में ही नहीं रहे हैं। 2.86 प्रतिशत ने इन सभी चेहरों को नकारते हुए किसी अन्य पर दांव लगाने की बात कही है। इस सर्वेक्षण का पांचवा प्रश्न 2022 के लिए जनता के मिजाज को भांपने वाला प्रश्न था।

हमने जानना चाहा कि क्या 2022 में जनता सत्ता में परिवर्तन चाहती है। उत्तर भाजपा के लिए बेहद चिंताजनक निकल कर सामने आया है तो कांग्रेस में उत्साह का कारण बन सकता है। 60.10 प्रतिशत जनता राज्य में सत्ता परिवर्तन की चाह रखती है। 30.55 प्रतिशत जनता ने भाजपा की वापसी की बात कही है तो 9.33 प्रतिशत जनता ने अपने मन की बात सामने नहीं रखी है। यानी 9.33 प्रतिशत वोटर नए सीएम तीरथ सिंह रावत की सरकार के कार्यों को देख अपना मन बना सकते हैं। लेकिन हमारे 6वें प्रश्न का उत्तर मतदाता के मन की उलझन को सामने रख रहा है। जनता सत्ता में परिवर्तन की चाह तो रख रही है, कांग्रेस की सरकार बनने के मामले में उसका रुख स्पष्ट नहीं है। 43.66 प्रतिशत ने कांग्रेस सरकार बनने के पक्ष में राय रखी है, तो 48.40 प्रतिशत का मानना है कि कांग्रेस की सरकार नहीं बनने जा रही है। इस प्रश्न के उत्तर में भी 17.93 प्रतिशत मतदाता अभी भ्रम की स्थिति में हैं।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यंत्री हरीश रावत के लिए यह सर्वेक्षण खुशी लेकर आया है। लंबे अर्से से 2022 चुनावों से पहले ही पार्टी द्वारा किसी एक को सीएम चेहरा घोषित किए जाने की मांग कर रहे रावत से  जनता पूरी तरह सहमत नजर आती है। 66.89 प्रतिशत ने इसे आवश्यक बताया है। मात्र 12.25 प्रतिशत ने ही सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात कही। हरीश रावत के लिए दूसरी बड़ी खुशी 57.66 प्रतिशत जनता द्वारा उन्हें कांग्रेस का सीएम फेस बनाने की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह को मात्र 13.15 प्रतिशत तो इंदिरा हृदयेश को 5.41 प्रतिशत सीएम फेस देखना चाहते हैं। इस सर्वेक्षण में सबसे महत्वपूर्ण 23.76 प्रतिशत वह जनता है जो इन तीनों से इतर नए चेहरे को आगे लाने के पक्ष में है

हमारा सातवां प्रश्न राज्य गठन के बीस बरस की यात्रा के दौरान सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री को लेकर था। इस सवाल पर बेहद दिलचस्प जबाब मिले हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खण्डूड़ी और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत दोनों के कार्यकाल को मतदाताओं ने सर्वश्रेष्ठ माना है। हालांकि हरीश रावत मात्र 0.58 फीसदी मत अधिक लेकर खण्डूड़ी से आगे रहे हैं। जहां बीसी खण्डूड़ी को 29.12 फीसदी मतदाताओं ने सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री कहा है तो वहीं हरीश रावत 29.70 प्रतिशत मत पाकर राज्य के अब तक सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री के तौर पर माने गये हैं। इसी तरह से नारायण दत्त तिवारी प्रदेश की जनता के मन में आज भी अपने कार्यकाल की छाप रखते हैं। 24.8 फीसदी मतदाताओं ने एनडी तिवारी के कार्यकाल को सर्वश्रेष्ठ कार्यकाल बताकर तीसरे सबसे बेहतर मुख्यमंत्री के तौर पर माना है।

भाजपा के दिग्गज और पूर्व मुख्यमंत्री तथा केंद्र में शिक्षा मंत्री डाॅ रमेश पोखरियाल को मतदाताओं ने नकार दिया है। हैरत की बात यह है कि निशंक को त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी कम मत मिले हंै। जहां 5.62 मत पाकर त्रिवेंद्र सिंह रावत राज्य के चैथे बेहतर मुख्यमंत्री के तौर पर माने गए हैं, तो वहीं निशंक को महज 4.88 मत ही मिले हैं और राज्य की जनता ने उनको पांचवे स्थान पर खिसका कर अपनी सोच जता दी है। 3.50 प्रतिशत मत पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को मिले तो पूर्व मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी और भगत सिंह कोश्यारी दोनों का आंकड़ा केवल 3.02 प्रतिशत ही रहा है।

आठवां प्रश्न राज्य के अब तक सबसे नकारा मुख्यमंत्री के बाबत था। इसमें मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सबसे अव्वल आए हैं। 57.77 फीसदी लोगों का मानना है कि राज्य के आज तक के इतिहास में त्रिवेंद्र सिंह रावत सबसे खराब मुख्यमंत्री रहे हैं। 14.85 प्रतिशत मत लेकर विजय बहुगुणा दूसरे सबसे खराब मुख्यमंत्री माने गए हैं। हरीश रावत को 13.31 प्रतिशत मत मिले हैं जिससे वे राज्य के तीसरे सबसे खराब मुख्यमंत्री माने गए हैं। इसी तरह से निश्ंाक को 5.78 फीसदी लोगों ने सबसे खराब मुख्यमंत्री माना है, तो वहीं विजय बहुगुणा नित्यानंद स्वामी और भगत सिंह कोश्यारी तीनों ही मुख्यमंत्रियों को 7.79 प्रतिशत लोगों ने सबसे खराब माना है।

9वां प्रश्न कांग्रेस अलाकामन के लिए बड़ा संदेश है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदेश और पार्टी के केंद्रीय प्रभारी देवेंद्र यादव के सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़े जाने की बात को जनता ने सिरे से नकार डाला है। 66.89 प्रतिशत जनता का मानना है कि 2022 के चुनावों से पहले पार्टी को अपना सीएम चेहरा घोषित करना चाहिए। मात्र 12.25 प्रतिशत जनता ने सामूहिक नेतृत्व की बात पर मोहर लगाई है। हालांकि इसमें सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात यह भी है कि 20.24 फीसदी जनता इस सवाल पर अपना कोई रुख नहीं रख रही है।

हरीश रावत के लिए दसवां प्रश्न बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। इस प्रश्न के उत्तर में 57.66 प्रतिशत ने हरीश रावत को सीएम चेहरा घोषित करने की बात कही है। इस प्रश्न के साथ हमने तीन नाम हरीश रावत, प्रीतम सिंह और इंदिरा हृदेश बतौर सीएम फेस जनता के मन की थाह पाने के लिए रखे थे और अंतिम आप्शन अन्य का था। प्रीतम सिंह को मात्र 13.15 प्रतिशत ने तो 5.41 प्रतिशत ने इंदिरा हृदेश को सीएम फेस बनाए जाने की बात कही है। 23.76 प्रतिशत ने इन तीन नामों के इतर किसी अन्य को कांग्रेस का सीएम चेहरा बनाए जाने का विकल्प चुना है जो इन बड़े नामों के लिए खतरे की घंटी समान है।

11वां प्रश्न हमने राज्य में अपने पैर जमाने को बेकरार आम आदमी पार्टी को लेकर पूछा था कि क्या आम आदमी पार्टी को भाजपा- कांग्रेस के विकल्प के तौर पर स्वीकार करते हैं, तो जबाब प्रदेश की अब तक की प्रचलित राजनीति के ही अनुरूप सामने आये हैं। 59.68 प्रतिशत जनता ने आम आदमी पार्टी को एक तीसरे विकल्प के तौर पर नकार दिया है, तो केवल 29.97 फीसदी जनता ही आम आदमी पार्टी को भाजपा-कांग्रेस का विकल्प मान रही है। 10.34 प्रतिशत लोग इस पर कोई राय नहीं रख पाए हैं।

बीस बरस के राज्य में जनता ने इस सर्वेक्षण में सबसे खराब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को नहीं, बल्कि तेज-तर्रार छवि के डाॅ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को माना है। यह केंद्रीय शिक्षा मंत्री के लिए संकट का कारण बन सकता है। किसी भी राजनेता के लिए सबसे महत्वपूर्ण उसका गृहक्षेत्र होता है। घर में कमजोर होना ‘निशंक’ की राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस नेता हरीश रावत यहां भी बाजी मार गए हैं। उन्हें 29.70 प्रतिशत ने अब तक का बेस्ट सीएम माना है तो 29.12 प्रतिशत ने जनरल खण्डूड़ी के कामकाज को सराहा है

सर्वे में आम आदमी पार्टी को नकारने वाली जनता की सोच ने एक बार फिर से प्रदेश की राजनीति में तीसरे विकल्प की आशाओं को भी झटका दिया है। जिस तरह से आम आदमी पार्टी विगत कुछ माह से प्रदेश की राजनीति में अपनी धमक बना रही थी लेकिन जनता ने उसे नकार दिया है तो यह आप के लिए गंभीर चिंतन का विषय जरूर माना जा सकता है।

इस सर्वेक्षण में अंतिम दो प्रश्न केंद्र सरकार के कामकाज और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े थे। दोनों ही प्रश्नों के उत्तर भाजपा के लिए चेतावनी है। प्रधानमंत्री मोदी की छवि धीरे-धीरे जनता की नजर में कम होने लगी है। हालांकि राज्य की जनता के मन में मोदी अभी भी सबसे बेहतर नेता के तौर पर सामने आ रहे हैं, लेकिन नाराज होने वालों की तादात भी उसी तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है।

सर्वे में 12वां प्रश्न हमने पूछा था कि केंद्र सरकार के कामकाज से कितने खुश हैं, तो 32.41 प्रतिशत ने मोदी सरकार के कामकाज को बहुत बढ़िया और 21.16 प्रतिशत ने बढ़िया बताया है। इस तरह से देखा जाए तो प्रदेश की जनता में मोदी सरकार के कामकाज से 53.57 फीसदी जनता खुश दिखाई दे रही है। परंतु इसी सवाल में 16.18 प्रतिशत बेकार और 16.87 फीसदी जनता बहुत बेकार भी मान रही है। इन दोनों मतों के प्रतिशत को जोड़ दिया जाए तो 33 फीसदी जनता मोदी सरकार के कामकाज से नाराज है। 9 प्रतिशत जनता इस सवाल पर कोई राय नहीं रखना चाहती।

इसी तरह से 13वां सवाल हमने नरेंद्र मोदी को कैसे प्रधानमंत्री सबित हुए हैं, के बाबत पूछा था। इसके जबाब में 41.90 प्रतिशत ने बहुत बढ़िया और 21.16 ने बढ़िया प्रधानमंत्री बताया है। दोनों ही का आंकड़ा 63.06 प्रतिशत तक पहुंच रहा है यानी आज भी नरेंद्र मोदी जनता की नजर में बेहतर प्रधानमंत्री साबित होते दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह से 14.96 प्रतिशत नरेंद्र मोदी को बेकार और 14.74 बहुत बेकार प्रधानमंत्री मान रहे हैं। इन दोनों के आंकड़ों को जोड़ने पर यह आंकड़ा 29.7 प्रतिशत हो रहा है जो कि भाजपा के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा सकता है।

आम आदमी पार्टी को उत्तराखण्ड की जनता ने विकल्प के तौर पर सिरे से   खारिज कर डाला है। 59.68 प्रतिशत ‘आप’ को विकल्प के बतौर नहीं देख रहे हैं। 29.17 ने ‘आप’ पर भरोसा जताया है तो 10.34 प्रतिशत ने हाल-फिलहाल तक इस बाबत कोई राय कायम नहीं की है। यदि यह 10.34 प्रतिशत ‘आप’ की तरफ जाता है तो 2022 में आम आदमी पार्टी दोनों राष्ट्रीय दलों की राह का कांटा अवश्य बन सकती है

प्रदेश की राजनीति में भाजपा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि ही एक बड़ा चुनावी हथियार के तौर पर देखी जाती रही है। हालांकि सर्वे में प्रधानमंत्री के लिए जनता ने बेहतर और अच्छे अंक दिए हैं, लेकिन नाराजगी जताने में भी कोई कमी नहीं की है।

-साथ में आकाश नागर, कृष्ण कुमार, अहसान अंसारी, संजय स्वार, अमित कुमार, संदीप सिंह, जसपाल नेगी, दिनेश पंत, संतोष सिंह, अली खान

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