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Uttarakhand

आरोपी को राजनीतिक संरक्षण

भाजपा नेता प्रमोद नैनवाल ‘दि संडे पोस्ट’ के पत्रकार पर हमला करवाने वाले अपने भाई सतीश नैनवाल को बचाने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं। भाजपा नेताओं के माध्यम से पीड़ित पक्ष पर समझौता करवाने के लिए दबाव बनाए जा रहे हैं

रानीखेत से निर्दलीय चुनाव लड़े प्रमोद नैनवाल ने बेशक अब भाजपा का दामन थाम लिया हो, लेकिन ‘दि संडे पोस्ट’ के पत्रकार पर हमला करवाने वाले अपने भाई सतीश नैनवाल को बचा पाना उनके लिए आसान नहीं होगा। इससे पूर्व ‘दि संडे पोस्ट’ के पत्रकार और उत्तराखण्ड प्रभारी दिव्य रावत के खिलाफ सतीश नैनवाल ने जो मामला दर्ज कराया था वह भी झूठा साबित हो गया है।

15 जनवरी 2019 को दर्ज कराए गये मामले में पुलिस रिपोर्ट सतीश नैनवाल के खिलाफ जा रही है। सतीश नैनवाल इस मामले में झूठे साबित हो रहे हैं। दूसरी तरफ 25 मार्च 2019 को ‘दि संडे पोस्ट’ के पत्रकार मनोज बोरा पर जो हमला हुआ था उसमें भी सतीश नैनवाल के ऊपर गाज गिर रही है। इस मामले में भी हमलावरों ने पुलिस के समक्ष स्पष्ट कह दिया है कि मनोज बोरा पर जो हमला हुआ वह सतीश नैनवाल के कहने पर किया गया। बहरहाल सतीश नैनवाल पुलिस से छुपते फिर रहे हैं। दूसरी तरफ उनके बड़े भाई प्रमोद नैनवाल अब अपने भाई को बचाने हाथ-पैर मार रहे हैं। रानीखेत से निर्दलीय चुनाव लड़े प्रमोद नैनवाल फिलहाल भाजपा नेताओं के जरिये पीड़ित पक्ष पर समझौता करने के लिए दबाव बनाने में जुटे हुए हैं। लेकिन दूसरी तरफ पत्रकार मनोज बोरा और दिव्य रावत इस बात पर अड़े हुए हैं कि जब तक सतीश नैनवाल की गिरफ्तारी नहीं हो जाती तब तक वह कोई बात करने को तैयार नहीं हैं।

गौरतलब है कि 26 मार्च 2019 को प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी के समक्ष देहरादून में पत्रकारों का धरना-प्रदर्शन हुआ था। तब सभी पत्रकार इस बात को लेकर आक्रोशित थे कि ‘दि संडे पोस्ट’ के पत्रकार मनोज बोरा को गोली मार दिए जाने के बावजूद हमलावर गिरफ्तार नहीं हुए। तब महानिदेशक रतूड़ी ने कहा था कि वह जल्द ही हमलावरों को गिरफ्तार करा देंगे। हालांकि उनके वादे की लाज रखते हुए हल्द्वानी पुलिस ने अगले दिन सितारगंज के दो लोगों राहुल श्रीवास्तव और नीरज को गिरफ्तार कर लिया था। तब दोनों ने पुलिस के समक्ष जो बयान दिए उसके अनुसार वे दिव्य रावत पर हमला करने आए थे। जिसके चलते उन्होंने उसकी स्कॉर्पियो गाड़ी को निशाना बनाते हुए उसका पीछा किया था। लेकिन दिव्य रावत की किस्मत अच्छी थी कि तब गाड़ी मनोज बोरा चला रहा था। 25 मार्च को जैसे ही बोरा अपने घर शिव शक्ति विहार बिठौरिया नंबर एक में गाड़ी से उतरा तो हमलावरों ने पहले कमरा किराए पर लेने की बात कही और बाद में उस पर गोली चला दी। इसके बाद हमलावर भाग गए। मनोज भाग्यशाली रहे कि गोली उनके पैर पर लगी। यह हमलावर 2 दिन बाद जब पुलिस के हत्थे लगे तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका टारगेट मनोज बोरा नहीं, बल्कि दिव्य रावत था। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि दिव्य रावत और सतीश नैनवाल में आपसी तनातनी हुई थी। जिसको लेकर नैनवाल की ओर से 15 जनवरी 2019 को हल्द्वानी कोतवाली में मामला भी दर्ज किया गया था। लेकिन तब नैनवाल उल्टा इस मामले में घिर गया था। इस पर उसकी काफी किरकिरी हुई। इससे खफा सतीश नैनवाल ने दिव्य रावत को निशाना बनाते हुए हमलावरों के जरिए उन पर हमला करने की प्लानिंग की। लेकिन इस प्लानिंग में दिव्य रावत के बजाय मनोज रावत को गोली का शिकार बना दिया गया।

इसके बाद पुलिस ने सितारगंज के दोनों हमलावरों को मीडिया के सामने प्रस्तुत किए बिना ही जेल भेज दिया। तब यह कहा गया था कि जेल से ही हमलावरों का मीडिया ट्रायल किया जाएगा। इससे पहले जिस पर हमला हुआ वह हमलावरों की शिनाख्त करेगा। 21 अप्रैल के दिन बोरा ने हमलावरों को पहचान भी लिया है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा हमलावरों को मीडिया के सामने ना लाना सवालों के घेरे में है। इसी के साथ पुलिस इस मामले को लेकर भी फंसी हुई प्रतीत होती है। जिसमें वह 1 माह बाद भी सतीश नैनवाल को गिरफ्तार नहीं कर पाई। सतीश नैनवाल वही शख्स है जिसने दिव्य रावत पर हमला कराने के लिए भाड़े के दो शूटर हल्द्वानी भेजे थे। अब जबकि दोनों हमलावर पुलिस के कब्जे में हैं और पुलिस द्वारा इनके बयान भी लिए जा चुके हैं। यही नहीं, बल्कि हमले का शिकार हुआ व्यक्ति इनकी पहचान कर चुका है। इसके बावजूद पुलिस का इस मामले के मास्टरमाइंड साजिशकर्ता को गिरफ्तार न करना कहीं ना कहीं सरकार की और पुलिस की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

बताया जाता है कि सतीश नैनवाल एक शातिर किस्म का व्यक्ति है। अल्मोड़ा के भतरोजखान थाने में पहले भी उस पर दो मामले दर्ज हो चुके हैं। फिलहाल वह पुलिस के डर से भूमिगत है। उधर दूसरी तरफ सतीश नैनवाल के बड़े भाई प्रमोद नैनवाल ने इस मामले में समझौता करने के लिए पीड़ितों पर दबाव डालना शुरू कर दिया है। नैनवाल ने सत्ता के रसूख के बल पर कई नेताओं को आगे कर मामले को मैनेज करने का काम किया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उत्तराखण्ड के कई नेता उनसे संपर्क कर रहे हैं। वे समझौता कर मामले को रफा-दफा करने की बात कर रहे हैं। पीड़ित पक्ष अपनी जान की सलामती को लेकर भी भयग्रस्त है। दिव्य रावत ने इस बाबत प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक और पुलिस प्रशासन के समक्ष अपनी जान की गुहार लगाते हुए सुरक्षा देने की मांग की है। हालांकि नैनीताल पुलिस इस बाबत सुरक्षा देने की बात कर तो रही है, लेकिन यह कहकर भी मामले को लटकाया जा रहा है कि अभी आचार संहिता लगी है। लेकिन पुलिस की इस बात पर कितना विश्वास किया जा सकता है कि वह आचार संहिता हटते ही पीड़ित पक्ष को सुरक्षा दे देगी? खुद पीड़ित पक्ष पुलिस की लापरवाही को सामने रखते हुए कहते हैं कि जनवरी महीने में जो उन पर फर्जी मामला दर्ज हुआ था उस पर भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। गौरतलब है कि 15 जनवरी को दिव्य रावत और उनके मित्र पर सतीश नैनवाल ने हल्दवानी कोतवाली में एक एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया था कि वह अपनी पत्नी को हॉस्पिटल में दिखाने ले गए थे, लेकिन वहां पर दिव्य रावत ने अपने साथी के साथ उन पर तथा उनकी पत्नी पर हमला बोल दिया। पुलिस ने जब इस मामले की तहकीकात की तो सच सामने आया। जिसमें पता चला कि सतीश नैनवाल ने जो कøष्णा हॉस्पिटल में झगड़े की बात कही थी उसमें 15 जनवरी को 3ः00 बजे का समय कहा गया था। लेकिन पुलिस को जो सीसीटीवी फुटेज मिले हैं उसके अनुसार दिव्य रावत कøष्णा हॉस्पिटल में 12ः33 बजे ही इलाज के लिए एडमिट हो गया था। यही नहीं, बल्कि इस बात की पुष्टि हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक दिनेश चंद्र पंत की वह रिपोर्ट भी करती है जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि दिव्य रावत 15 जनवरी को 12ः33 पर हॉस्पिटल में एडमिट और अगले दिन यानी 16 जनवरी को 11ः00 बजे डिस्चार्ज हुए। डॉक्टर की रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद सतीश नैनवाल द्वारा दर्ज कराया गया मामला अपने आप ही झूठा पड़ गया। पुलिस ने दिव्य रावत पर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए सतीश नैनवाल को आरोपी माना है।

बात अपनी-अपनी

इस मामले की मुझे ज्यादा जानकारी नहीं थी कि मास्टरमाइंड अभी गिरफ्तार नहीं हुआ है। पत्रकार पर हमला करने वाले तो गिरफ्तार हो चुके हैं। हमला करवाने वाले की गिरफ्तारी में क्यों देरी हो रही है इस बारे में बात करता हूं। पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान कराने वाले मामले को भी देखूंगा।
अशोक कुमार, पुलिस महानिदेशक क्राइम

इस मामले में पुलिस कार्यवाही कर रही है। सतीश नैनवाल अभी फरार है। पुलिस उसे तलाश कर रही है। जल्द ही वह गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में मैंने फाइल शासन को भेज दी है। वहां से संस्तुति हो जाने के बाद उन्हें सुरक्षा मुहैया करा दी जाएगी।
सुनील कुमार मीणा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल

सतीश नैनवाल पर 120 बी के तहत कार्यवाही की जा रही है। फिलहाल वह पकड़ में नहीं आ रहा है। जिन लोगों ने पत्रकार पर हमला किया था उनकी गिरफ्तारी हो चुकी है। वह अपराध कबूल कर चुके हैं। सतीश नैनवाल ने दोनों के माध्यम से मनोज बोरा पर हमला कराया था। हम जल्द ही सतीश नैनवाल के खिलाफ नॉन बेलेवल वारंट जारी कर रहे हैं।
नीरज वाल्दिया, जांच अधिकारी उत्तराखण्ड पुलिस

प्रमोद नैनवाल ने हमारे टॉप क्लास के आदमी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। वह कैसे पार्टी में आए यह हम नहीं जानते। यह आदमी फिर से पार्टी के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
मदन सिंह मेहरा, भाजपा नेता

यह प्रमोद नैनवाल के भाई का मामला है। वह अपने भाई को बचाने के लिए कुछ भी करे हमें इससे कोई मतलब नहीं।
गोविंद पिलखवाल, जिलाध्यक्ष भाजपा अल्मोड़ा

मेरे परिवार पर समझौता करने के लिए प्रमोद नैनवाल प्रेशर डलवा रहा है। कभी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष से तो कभी कांग्रेस के किसी नेता से, लेकिन हम प्रेशर में नहीं आने वाले।
मनोज बोरा, पीड़ित पत्रकार

कुछ लोग राजनीति की आड़ में अपने धंधे चला रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए।
धन सिंह रावत, पूर्व ब्लॉक प्रमुख ताड़ीखेत

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