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Uttarakhand

पूनम हत्याकांड में उलझी पुलिस

पूनम पांडे हत्याकांड की जांच में पुलिस के तमाम आला अधिकारी जुट गए। दूसरे राज्यों तक पुलिस टीमें भेज दी गई। 72 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। 70 युवक-युवतियों से पूछताछ हुई। लेकिन दो दिन में हत्याकांड का खुलासा कर देने का दावा करने वाली पुलिस के हाथ दो माह बाद भी कुछ नहीं आया। ‘ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री’ बन चुके इस हत्याकांड को लेकर पुलिस की भूमिका पर कई सवाल उठ रहे हैं। संदेह जताया जा रहा है कि हत्यारों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण पुलिस दबाव में है

 

27 अगस्त 2018 : पूनम हत्याकांड में सभी कोणों से घटना की जांच की जा रही है। हत्यारे गैर पेशेवर लगते हैं। वे घर में दरवाजा खिड़की तोड़कर नहीं घुसे हैं इसलिए हत्याकांड में कोई करीबी भी लिप्त हो सकता है।
पूरन रावत, आईजी कुमाऊं परिक्षेत्र

29 अगस्त 2018 : इस हत्याकांड में कुछ स्थानीय व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। अर्शी के होश में आते ही मामले से पर्दा हट जाएगा। उसके बाद जल्द ही खुलासा करेंगे।
जन्मेजय खण्डूड़ी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नैनीताल

01 अक्टूबर 2018 : अब तक की जांच से साफ हो गया है कि हत्या में घर के लोगों का हाथ नहीं है। बरेली, मुरादाबाद और रामपुर भेजी गई पुलिस टीम से काफी इनपुट मिल चुके हैं। सीसीटीवी और सर्विलांस का सहयोग लिया जा रहा है। अर्शी के बयान के आधार पर पूनम पांडे हत्याकांड की गुत्थी सुलझती नजर आ रही है। पुलिस पहले कई बिंदुओं को केंद्र में रखकर जांच कर रही थी, लेकिन अब लाईन मिल गई है। युवक-युवतियों में बढ़ता नशा और अवैध संबंध पुलिस के लिए चुनौती बन चुके हैं। दो दिन में मामले का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।
दीपम सेठ, आईजी कानून व्यवस्था

13 अक्टूबर 2018 : एसआईटी गठित कर समीक्षा की जा रही है। मामला उलझा हुआ है। पर्दाफाश करने में अभी समय लगेगा। पुलिस अपने स्तर से हर पहलू की जानकारी खंगाल रही है। मामला पारिवारिक प्रतीत हो रहा है।
अशोक कुमार, एडीजे कानून व्यवस्था

उक्त बयान पुलिस के उन आला अफसरों के हैं जो हल्द्वानी के ‘ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री’ बन चुके पूनम हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने का दावा कर रहे हैं। यह हत्याकांड पुलिस के लिए पहेली बन चुका है। 27 अगस्त 2018 को हुए इस हत्याकांड में हमलावरों ने मृतका पूनम पांडे की पुत्री अर्शी को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उनके घरेलू कुत्ते को भी मौत के घाट उतार दिया था। यही नहीं हमलावर मृतका की स्कूटी को भी लेकर भाग गए थे। आज दो माह बाद भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा है। हत्यारों की खोज में जुटी पुलिस की कहानी इस हत्याकांड की एक मात्र चश्मदीद अर्शी पांडे पर ही केंद्रित होकर रह गई है। पहले पुलिस कहती रही कि अर्शी गंभीर रूप से घायल है वह होश में आए तो कुछ बताएगी। अब अर्शी न केवल अस्पताल से भी ठीक होकर आ गई है, बल्कि वह पूर्णतः होश में है। लेकिन पुलिस किसी मुकाम तक नहीं पहुंची है। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि अर्शी के बयान भी बार-बार बदल रहे हैं।

हालांकि पुलिस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए खूब हाथ पैर मार रही है। पुलिस ने अब तक एक लाख 20 हजार मोबाइल फोन की जांच कर ली है। 52 संदिग्ध मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगा रखा है। पुलिस की 18 टीमें जांच में जुटी हैं। करीब 80 पुलिसकर्मी दिन रात जांच में जुटे हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर एसआईटी का भी गठन हो चुका है। जिसका नेतृत्व हरिद्वार की वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रिद्दिम अग्रवाल कर रही हैं। इसमें दो सीओ, एक कोतवाल और करीब आधा दर्जन इंस्पेक्टरों की टीम बनाई जा चुकी है। इसके अलावा दो एसटीएफ टीमें, ऊधमसिंहनगर की एसओजी टीमें अपने -अपने स्तर से हत्याकांड का पर्दाफाश करने को मैदान में डटी हैं। 72 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी हैं। 70 युवक- युवतियों से पूछताछ हो चुकी है। लेकिन पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं। उत्तराखण्ड राज्य स्थापना से अब तक का शायद यह पहला ऐसा मामला होगा जिसमें आईजी, डीआईजी और एडीजे जैसे वरिष्ठ और अनुभवी पुलिसकर्मियों के हल्द्वानी में डेरा डालने के बाद भी ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।

 

अनसुलझे सवाल

बेटी के साथ पूनम
  • पुलिस जांच की दिशा बार-बार क्यों बदल रही है? कभी वह हत्या में परिवार के लोगों, कभी बाहरी लोगों तो कभी किसी गिरोह का हाथ बताती है?
  • पुलिस जब मामले में आस-पास के लोगों की संलिप्तता बता रही है, तो बाहरी प्रदेशों में जांच टीमें क्यों भेजी गई?
  • जब अर्शी पांडे का मोबाइल पुलिस के पास था तो फिर उसके वीडियो कैसे वायरल हो गए?
  • अर्शी पांडे के बार-बार बयान बदलने के पीछे कोई बड़ा रैकेट तो नहीं, जिससे डरकर वह सच नहीं उगल रही है?
  • अर्शी का लाई डिरेक्टट टेस्ट क्यों नहीं किया जा रहा है?
  • नैनीताल के उस होटल की जांच क्यों नहीं हुई जिसमें कुछ दिनों पूर्व पूनम पांडे और अर्शी पांडे ठहरी थीं?
  • एक अक्टूबर को आईजी (कानून-व्यवस्था) दीपम सेठ ने मीडिया के समक्ष दो दिन में हत्याकांड का खुलासा करने की घोषणा की थी। फिर क्यों बाद में खुलासा नहीं किया गया?
  • मृतका पूनम पांडे के मोबइल लॉक को तोड़ने में पुलिस अभी तक कामयाब क्यों नहीं, कहीं छुपाया तो नहीं जा रहा राज?
  • अर्शी पांडे के झगड़े का वीडियो वायरल होने के बाद भी पुलिस अभी तक मारपीट की वजह क्यों नहीं बता पाई?
  • नशे के सौदागरों और सेक्स रैकेट से जुड़े लोगों से अभी तक क्यों नहीं हुई गहन छानबीन?
  • कौन बचा रहा है सफेदपोश, रसूखदार और अय्याश लोगों को?

मूलरूप से जवाहर नगर पंतनगर निवासी लक्ष्मी दत्त पांडे करीब 20 वर्षों से हल्दूचौड़ में बरेली रोड हाईवे से सटे हरिपूर्ण पूर्णांनंद गांव में रहते हैं। उनके दो डंपर गोला नदी में चलते हैं। कई दिनों से उनकी मां की तबियत खराब थी। उनका इलाज हल्द्वानी के नीलकंठ अस्पताल में चल रहा था। 26 अगस्त 2018 को रात्रि 9 बजे पांडे अपनी मां की तीमारदारी के लिए अस्पताल चले गए थे। घर पर उनकी पत्नी पूनम पांडे और पुत्री अर्शी पांडे थी। 27 अगस्त को जब करीब सात बजे पांडे अस्पताल से घर लौटे तो बिस्तर पर पत्नी और बेटी को खून से लथपथ पाया। पत्नी पूनम (42) की मौत हो चुकी थी, जबकि बेटी अर्शी गंभीर रूप से घायल थी। दोनों के सिर पर भारी हथियार से हमला करने के साथ ही गोलियां मारने की आशंका भी जताई जा रही थी। घर का सामान बिखरा पड़ा था। ऐसे में लगा कि हत्यारे घर की सभी अलमारी, बक्से आदि खंगालकर नगदी, जेवर, एक दोनाली बंदूक और स्कूटी भी साथ ले गए। जाते-जाते हमलवार घर के पालतू कुत्ते को भी मार गए। अर्शी को निकट के अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।
शुरुआत में इस मामले को पुलिस ने डकैती डालने वाले छैमार (मारवाड़ी गैंग) गिरोह से जोड़कर देखा। छैमार गिरोह इसी तर्ज पर लोगों की हत्या करता है और डकैती, डालता है। लेकिन जब परिजनों ने नगदी आदि की जांच की तो घर में रखे 14 हजार रुपये सुरक्षित मिले। हालांकि पुलिस ने आनन-फानन में ही कई पुलिस टीमों को दिल्ली-यूपी, हरियाणा, पंजाब और तमिलनाडु आदि प्रदेशों में भेजकर कई दिनों तक खूब खाक छानी। लेकिन उन्हें कोई सुराग हाथ नहीं लगा। दूसरी तरफ पुलिस आस-पास के लोगों पर भी संदेह करती रही। हालांकि गहन जांच के बजाय पुलिस की जांच का दायरा मृतक पूनम पांडे की पुत्री अर्शी के इर्द-गिर्द तक सिमट कर रह गया। पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। अर्शी के होश में आने का इंतजार करती रही। कई दिनों के गहन इलाज के बाद जब अर्शी होश में आई तो उसने पुलिस के सामने यह बात कहकर सबको चौंका दिया कि हमलावरों के लिए दरवाजा उसी ने खोला था। अनजान लोगों के लिए कोई दरवाजा नहीं खोलता है। अगर अर्शी ने दरवाजा खोला तो निश्चित तौर पर वह हमलावरों को जानती भी होगी। इससे आगे वह कुछ बोल पाती पुलिस ने उसके मोबाइल से कई राज जान लिए। हालांकि यह राज आज तक भी पर्दाफाश नहीं हो पाए।

इस दौरान अर्शी से संबंधित तीन वीडियो वायरल हुए। पहले वीडियो में अर्शी अपने पड़ोसियों से लड़ती हुई दिख रही थी। जिसमें पड़ोसी महिला द्वारा तीन हजार रुपए के सौदे का जिक्र किया जा रहा है। इस पर अर्शी भागकर गुस्से में बात करती हुई दिख रही है। दूसरे वीडियो में अर्शी तीन लड़कों के साथ दिख रही थी। इसके अलावा तीसरा वीडियो उस समय वायरल किया गया जब अर्शी अस्पताल में एडमिट थी। वीडियो में वह दो लड़कों का नाम लेती हुई दिख रही है। जिनमें एक अल्पसंख्यक समुदाय का युवक है। अब सवाल जब यह खड़ा होता है कि यह तीनों ही वीडियो और अर्शी का मोबाइल पुलिस के कब्जे में था तो वीडियो वायरल कैसे हुए? अगर अर्शी से संबंधित वीडियो पुलिस की मिलीभगत से वायरल हुए तो पुलिस का मकसद क्या था? हालांकि चर्चाएं ऐसी हैं कि पुलिस ने इस मामले का पर्दाफाश करने के बजाए लोगों को डराने का काम ज्यादा किया। वीडियो वायरल करने के पीछे भी ऐसा ही कुछ मकसद रहा होगा। शहर भर में चर्चा है कि पुलिस ने इस हत्याकांड की जांच के नाम पर सैकड़ों युवक और युवतियों को पकड़ा। जिन्हें छोड़ने के नाम पर भी वसूली की गई। मोबाइल डिटेल के आधार पर 48 युवतियों को पुलिस ने पूछताछ के लिए उठाया। इनमें से कई लड़कियों ने माना कि वह ऐश आराम की जिंदगी जीने की ललक के चलते अन्य राज्यों में भी जाने के लिए तैयार हो जाती हैं। 32 छात्राओं ने माना कि वे नशे की आदी हैं और दो से चार युवकों के साथ अवैध संबंध बना चुकी हैं।

पुलिस द्वारा हाथ पैर मारने के बावजूद जब मामले का कोई सुराग नहीं लगा तो मजबूरन हाईकोर्ट को सख्त होना पड़ा। तीन सितंबर को हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंड पीठ ने पूनम पांडे हत्याकांड के मामले में राज्य सरकार को एसआईटी गठित कर जांच करने और जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा। खंडपीठ ने इस बाबत विभिन्न समाचार पत्रों में छपी खबरों से संज्ञान लेते हुए ‘एक महिला की निर्मम हत्या, उसकी बेटी के साथ निर्मता और घर में डकैती’ का मामला जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया। साथ ही खंडपीठ ने हल्द्वानी में बढ़ती वारदातों को देखते हुए पुलिस फोर्स बढ़ाने के लिए भी कहा। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने इस मामले में एसआईटी का गठन किया। जिसका नेतृत्व हरिद्वार की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रिद्दिम अग्रवाल को सौंपा गया।  एसआईटी में दो सीओ, एक कोतवाल और करीब आधा दर्जन निरीक्षक तैनात किए गए।

उधर इस मामले से संबंधित वायरल हुए तीन वीडियो में से एक के आधार पर पीड़िता के साथ गैंगरेप का मामला दर्ज कराया गया। घटना से करीब तीन माह पूर्व हल्द्वानी में सामूहिक बलात्कार किए जाने की पीड़िता की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद तीन में से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता को जज फार्म निवासी अमित रावत नाम के युवक ने फोन करके घर पर दो अन्य लड़कियों के साथ ग्रुप डिस्कसन करने के लिए बुलाया था। लेकिन जब वह अमित के घर पहुंची तो दो अन्य लड़के मिले। तीनों ने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ गैंगरेप किया। इसका वीडियो बनाया और वायरल करने की धमकी दी गई। इस बीच पीड़िता के घर में हादसा हो गया और उसके बाद रहस्यमय तरीके से यह वीडियो भी वायरल कर दिया गया। उल्लेखनीय यह है कि यह वायरल वीडियो पिछले दिनों हत्याकांड के बाद काफी चर्चा में भी रहा था। इससे पीड़िता के चरित्र पर भी सवाल उठे थे। हालांकि इस बलात्कार कांड का पूनम पांडे हत्याकांड से कोई संबंध है कि नहीं यह पुलिस अभी तक भी स्पष्ट नहीं कर सकी है।

चर्चा है कि पूनम पांडे हत्याकांड का खुलासा न होने के पीछे सफेदपोशों की संलिप्तता है। बताया जा रहा है कि इस हाईफाई मामले में कुछ रसूखदार लोगों का हाथ है जो पुलिस प्रशासन को प्रभावित कर मामले से पर्दा हटने में बाधक बने हुए हैं। सुनने में आ रहा है कि इस मामले के तार नशे के सौदागरों से भी जुड़े हैं। जो युवक-युवतियों को अंधेरे के गर्त में डालने का काम कर रहे हैं। इसी के साथ यह कहानी नशे और सेक्स का कॉकटेल बनती प्रतीत हो रही है। बड़े घरों के बिगडै़ल बच्चे जो ऐशो- आराम और अय्याशी के लिए कुछ भी कर गुजर जाते हैं उनकी जीवनशैली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जिनका जवाब खाकी वर्दी के पास बताया जा रहा है। लेकिन वह इन सवालों से पर्दा उठाने की हिम्मत नहीं कर पा रही है। ऐसे में ब्लाइंड मर्डर की यह उलझी हुई कहानी एकमात्र चश्मदीद गवाह अर्शी पांडे के इर्द-गिर्द सिमटा दी गई है। जब तक अर्शी पांडे नहीं चाहेगी तब तक पुलिस सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनती रहेगी।

बात अपनी-अपनी

इस मामले में कुछ ऐसे लोगों की संलिप्तता है जो सत्ता बल पर पुलिस को स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करने दे रहे हैं। प्रदेश में ऐसे लोगों की वजह से ही अपराध बढ़ते जा रहे हैं।
प्रीतम सिंह, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष

मुझे ऐसा लग रहा है कि इस मामले में कुछ बड़े लोगों का हाथ है जिन पर पुलिस हाथ डालने से कतरा रही है। पुलिस स्थानीय अपराधी को कहीं न कहीं संरक्षण देती हुई दिख रही है। इस मामले को लेकर मैं मुख्यमंत्री से मिलूंगा।
नवीन दुमका, विधायक लालकुआं

जांच में काफी आगे जा चुके हैं। जल्दी ही खुलासा करेंगे।
अमित श्रीवास्तव, एसपी हल्द्वानी

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