उत्तराखण्ड उच्च शिक्षा का हब बनने को तैयार है। मगर कुछ शिक्षा माफिया इसे बदनाम करने की कोई कसर भी नहीं छोड़ रहे। प्रोफेशनल कोर्सेज के कई निजी संस्थान यहां खुले हैं जिनमें कुछ शिक्षण संस्था, विश्वविद्यालय या मान्यता देने वाली संस्था का दिशा-निर्देश का पालन ही नहीं करता। जिससे उनके कोर्स की मान्यता अमान्य है। फिर भी ये संस्थाएं छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। इनमें सूरजमल लक्ष्मी देवी सावर्थिया एजुकेशनल ट्रस्ट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन और स्वामी सत्य प्रकाशानंद शिव मंदिर ट्रस्ट किच्छा द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओं का नाम प्रमुखता से आ रहा है
‘शि क्षा की दुकानों का फर्जीवाड़ा’ शीर्षक के तहत ‘दि संडे पोस्ट’ ने अपने पिछले अंक में खुलासा किया कि ट्रस्टों द्वारा संचालित शिक्षण संस्थान किस तरह छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ कर उन्हेंं लूट रहे हैं। अपनी तहकीकात में हमें ‘सूरजमल लक्ष्मी देवी सावर्थिया एजुकेशनल ट्रस्ट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन’ और ‘स्वामी सत्य प्रकाशानंद शिव मंदिर ट्रस्ट’ किच्छा द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों में भारी खामियां देखने को मिली। तय मानकों को पूरा न करने के बावजूद राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालयों और शिक्षा परिषदों से ये शिक्षण संस्थान मान्यता एवं संबद्धता हासिल कर गए। वेबसाइट पर अपने परिसर में सुविधाओं, प्रवक्ताओं और स्टाफ संबंधी झूठी जानकारियां देकर ट्रस्ट ने अपने शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेने के लिए गुमराह किया।
हम अपनी तहकीकात में और आगे बढ़े। अब हमारे सामने किशनपुर स्थित सूरजमल लक्ष्मी देवी सावर्थिया एजुकेशनल ट्रस्ट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्शन का एक अन्य कॉलेज मिला। जिसका नाम है- सूरजमल अग्रवाल गर्ल्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट। इस कॉलेज की भी कुछ सच्चाइयां हमारे सामने आने लगी। सबसे पहले एक ऐसा नाम सामने आया जो कि कुमाऊं विश्वविद्यालय और उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों की सूची दोनों में मौजूद था। वह नाम है-अरशी खान। हमें उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय से आरटीआई में प्राप्त सूचना के अनुसार अरशी खान का नियुक्ति पत्र जो कि 1 अप्रैल 2013 को निर्गत था, मिला। हमने जांच की तो कुछ कागजात और मिले। जिनमें 4 सितंबर  2016 को अरशी खान उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्ध सूरजमल अग्रवाल गर्ल्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट में कार्यरत थीं। साथ ही कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबद्ध सूरजमल अग्रवाल प्राइवेट कन्या महाविद्यालय में बीबीए विभाग की विभागाध्यक्ष भी थीं और तारीख थी 21 जुलाई 2016। कोई इंसान एक साथ दो जगहों पर कैसे सेवा दे सकता है, इस बारे में हम अपना सर खुजला ही रहे थे कि हमें और भी तथ्य दिखाई दिए। हमने आरटीआई से प्राप्त सूचना प्रपत्रों का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया तो पता चला कि एआईसीटीई द्वारा उपलब्ध जानकारी के अनुसार सूरजमल अग्रवाल गर्ल्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट के प्रमुख/प्रिंसिपल डॉ पीपी त्रिपाठी हैं जो कि 1 अप्रैल 2010 से इस संस्थान के प्रमुख/ प्रिंसिपल के पद पर हैं। इस सूचना पत्र पर अंकित तिथि है 18 मार्च 2017 अर्थात् उस समय 2016-17 का सत्र चल रहा था। अब इसी कॉलेज की उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय से आरटीआई में प्राप्त सूचना का अध्ययन किया तो हमने सर पकड़ लिया क्योंकि जिन डॉ पीपी त्रिपाठी को एआईसीटीई ने 1 अप्रैल 2010 से कॉलेज का निदेशक/प्रिंसिपल दिखाया है, उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय ने उन्हीं का 1 अप्रैल 2013 का नियुक्ति पत्र सूचना में उपलब्ध कराया। हम ये नहीं समझ पा रहे थे कि ये सब क्या चल रहा है। तभी एक और कागजात सामने आया जिसमें सूरजमल अग्रवाल गर्ल्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट के निदेशक डॉ जेके तोमर पाए गए। हमने माथा पकड़ लिया, क्योंकि उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय की सूचनानुसार ही सत्र  2016-17 में जेके तोमर ट्रस्ट के अन्य कॉलेज सूरजमल लक्ष्मीदेवी सावर्थिया एजुकेशनल ट्रस्ट गु्रप ऑफ इंस्टीट्यूशन, सिरौली कलां, किच्छा में भी निदेशक थे। यानी सत्र 2016 में एक व्यक्ति डॉ जेके तोमर दो अलग-अलग कॉलेजों में निदेशक थे, वहीं दूसरी ओर सूरजमल अग्रवाल गर्ल्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट में सत्र 2016-17 में दो निदेशक क्रमशः डॉ पीपी त्रिपाठी एवं डॉ जेके तोमर कार्यरत थे। हम इस गुत्थी में उलझे हुए ही थे कि हमें कुमाऊं विश्वविद्यालय का एक कागज दिखाई दिया जिसमें कुमाऊं विश्वविद्यालय ने सूरजमल अग्रवाल प्राइवेट कन्या महाविद्यालय, किच्छा को विभिन्न कोर्स के संचालन के लिए मान्यता अवधि का विवरण, दिनांक 30 जनवरी 2017 को दे रखा था। आपको विवरण जानकर हैरानी होगी कि इस कॉलेज में चल रहे कार्स बीसीए, बीबीए, बीएससी (आईटी), बीएससी (गृह विज्ञान), बीएससी (फूड टेक्नोलॉजी), बीएससी (जेडबीसी/ पीसीएम), एमएससी (बायो टेक्नोलॉजी) की मान्यता अवधि सत्र 2011-12 तक तथा एमकॉम की मान्यता अवधि 2011-12 तक थी। अब उपरोक्त विवरण से स्पष्ट हो गया कि उपरोक्त कॉलेज की मान्यता अवधि समाप्त हो जाने के पश्चात कॉलेज की मान्यता का नवीनीकरण नहीं कराया गया तो समझ नहीं आता आखिर कैसे इतने वर्षों से महाविद्यालय में परीक्षाएं आयोजित कराई जा रही हैं। ऐसा तो हो नहीं सकता कि कुमाऊं विश्वविद्यालय के सहयोग बिना कॉलेज अकेले ही इतने बड़े गोरखधंधे को अंजाम दे रहा हो। इतना तो स्पष्ट हो गया था ट्रस्ट द्वारा संचालित इन कॉलेजों को अवैध तरीकों से संचालित किया है।
नर्सिंग कॉलेज के लिए अस्पताल होना जरूरी

‘दि संडे पोस्ट’ ने पड़ताल जारी रखी तो ‘सूरजमल अग्रवाल प्राइवेट कन्या महाविद्यालय कॉलेज ऑफ नर्सिंग’ के कुछ सच खुलने लगे। सबसे पहले हमारे हाथ लगी 23 दिसंबर 2017 को बीएससी (नर्सिंग)-जीएनएम की छात्राओं द्वारा कॉलेज के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए हाइवे जाम करने की खबर। हमने तलाश की तो 24 दिसंबर 2017 सभी प्रमुख समाचार पत्रों में हमें यह खबर देखने को मिली। मामला गंभीर था। दरअसल, कॉलेज में बीएससी नर्सिंग जीएनएम कोर्स के लिए 20-20 सीटों की अनुमति प्राप्त थी फिर भी अवैध रूप से कॉलेज ने, बीएससी नर्सिंग में 33 छात्राओं और जीएनएम में 23 छात्राओं को दाखिला दे दिया। हमें ज्यादा आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि अब तक प्राप्त तथ्यों से हमें इस तरह की आशंकाएं थी। खैर पड़ताल करते हुए हमारे हाथ दो ऐसे पत्र लगे जिन्होंने इस कॉलेज के कारनामों की खुलकर गवाही दी। एक पत्र 23 जून 2017 को भारतीय नर्सिंग परिषद द्वारा निर्गत किया गया था। जिसमें परिषद ने 13-14 जून 2017 में कॉलेज को बीएससी नर्सिंग एवं जीएनएम के लिए अनुपयुक्त बताते हुए महाविद्यालय में छात्राओं के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। दूसरा पत्र भारतीय नर्सिंग परिषद ने 11 दिसंबर 2017 को निर्गत किया था। इसमें परिषद् ने 13-14 सितंबर 2017 को दोबारा किए गए निरीक्षण  का हवाला देते हुए कॉलेज को बीएससी (नर्सिंग) एवं जीएनएम दोनों के लिए 20-20 सीटों के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। यानी जो कॉलेज 23 जून 2017 को अनुपयुक्त था उसे अब 11 दिसंबर 2017 वाली स्वीकøति सशर्त दी थी, जबकि उस पत्र में परिषद ने कॉलेज में अनियमितताएं होने की बात भी स्वीकार की थी। हम यह नहीं समझ पा रहे थे कि आखिर भारतीय नर्सिंग परिषद की ऐसी क्या मजबूरी थी जो कि पूरी तरह से संतुष्ट न होने पर भी कॉलेज को स्वीकृति प्रदान की।

अभी इसमें एक और बड़ा सवाल बाकी था जब 23 जून 2017 को कॉलेज में छात्राओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी एवं 11 दिसंबर 2017 को 20-20 सीटों पर प्रवेश की स्वीकृति प्रदान की गई तो फिर उन 33 और 23 छात्राओं को क्या 11 दिसंबर 2017 से 22 दिसंबर 2017 के बीच दाखिला दिया गया था या फिर अवैध रूप से 11 दिसंबर 2017 से पहले, क्योंकि 23 दिसंबर को तो छात्रायें कॉलेज के खिलाफ प्रदर्शन कर रहीं थी। तस्वीर साफ दिखाई दे रही थी। हमें कुछ सूत्रों से ज्ञात हुआ कि अब भी अनुमति से अधिक छात्राओं को प्रवेश देकर उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। हमारी नजर पड़ी भारतीय नर्सिंग परिषद द्वारा बीएससी (नर्सिंग) के लिए जारी किए जाने वाले आवश्यक दिशा-निर्देशों पर। उसमें नियम है कि जो ट्रस्ट नर्सिंग कॉलेज संचालित कर रहा हो उसके पास अपना स्वयं का अस्पताल होना आवश्यक है। अस्पताल अपना तभी माना जाएगा जब नर्सिंग कॉलेज एवं अस्पताल का स्वामी वही ट्रस्ट हो। जब हमने तलाश शुरू की तो सूरजमल लक्ष्मी देवी सावर्थिया का बीएससी (नर्सिंग) के संचालन के लिए आवश्यक अस्पताल हमें नहीं मिला। अभी भी खेल जारी है। अभी तक बीएससी नर्सिंग की छात्राओं का भविष्य सुरक्षित नहीं।
इसके बाद हमें पता चला कि ‘सूरजमल अग्रवाल गर्ल्स कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज’ के अंतर्गत कुछ कोर्स ऐसे संचालित किए जा रहे हैं जिनकी मान्यता/अनुमति कॉलेज द्वारा नहीं ली गई है। उन कोर्स में एक प्रमुख कोर्स है बीपीटी। जब मान्यता नहीं तब भी बीपीटी में प्रवेश देकर छात्राओं के भविष्य से कॉलेज खेल रहा है। इसके बाद हमारे सामने एक ऐसा तथ्य आया जिसने हमें हिला दिया। दरअसल, बिशनपुर क्षेत्र वर्षों से विनियमित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। जिसमें इस प्रकार के किसी भी निर्माण से पहले भवन का मानचित्र, अध्यक्ष/नियत प्राधिकारी-विनियमित क्षेत्र किच्छा से, पास कराना एवं निर्माण की अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है। नियम प्राधिकरी/उपजिलाधिकारी, विनियमित क्षेत्र-किच्छा, कार्यालय द्वारा आरटीआई में उपलब्ध सूचना के अनुसार सूरजमल कन्या महाविद्यालय से संबंधित किसी मानचित्र की स्वीकृति ट्रस्ट द्वारा नहीं ली गई है। अर्थात स्पष्ट था कि इस ट्रस्ट द्वारा बिशनपुर क्षेत्र में संचालित सभी कॉलेजों के भवन अवैध हैं। क्या ये संभव है कि इतना बड़ा छात्रों के भविष्य के साथ यह ट्रस्ट अकेले खेल रहा हो, ऐसा नहीं है। इसमें मान्यता प्रदान करने वाली सभी संस्थाएं भी शामिल हैं। आखिर कैसे इतनी अनियमितताओं के बावजूद ट्रस्ट के विभिन्न कॉलेजों को समय-समय पर अनुमति एवं अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया जाता है?
हमें अपनी छानबीन में पता चला कि ‘स्वामी सत्य प्रकाशानंद सरस्वती’ की अध्यक्षता में एक और ‘ट्रस्ट स्वामी सत्यप्रकाशानंद शिव मंदिर ट्रस्ट’ किच्छा में चलाया जा रहा है। जिसके सचिव श्रीनिवास शर्मा हैं। हमें छानबीन के दौरान एक पत्र प्राप्त हुआ, उसमें जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर ने इस ट्रस्ट को एक अल्ट्रा साउंड मशीन (जन्म से पूर्व नैदानिक परीक्षण के लिए) की स्वीकृति 6 नवंबर 2015 से 5 नवंबर 2020 तक के लिए प्रदान की हुई है। ट्रस्ट का पूरा नाम एवं पता इस अनुमति पत्र में, स्वामी सत्यप्रकाशानंद शिव मंदिर ट्रस्ट, कॉली मंदिर, हल्द्वानी बाईपास रोड, किशनपुर किच्छा (ऊधमसिंह नगर) था। हम यह नहीं समझ पा रहे थे कि आखिर किशनपुर क्षेत्र में किस स्थान पर यह मशीन प्रयोग में है और किस आधार पर इस ट्रस्ट को इसकी अनुमति प्रदान की गई। हमने वापस उस आरटीआई में प्राप्त सूचना को देखा जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ऊधमसिंह नगर) कार्यालय से क्षेत्र में चल रहे सभी निजी अस्पतालों का विवरण मांगा गया था। उस विवरण में इस ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित कोई अस्पताल 2018 में मौजूद नहीं था। आखिर यह अब चल क्या रहा है, यह बड़ी गंभीर परिस्थिति है।
हमने थोड़ी और छानबीन की तो कई महत्वपूर्ण तथ्य मिले। बंधन बैंक में सूरजमल लक्ष्मीदेवी सावर्थिया एजुकेशन ट्रस्ट  का एकल हस्ताक्षारित खाता है। जिसकी खाता संख्या 50150085406162 है। ट्रस्ट के सचिव श्रीनिवास शर्मा के एकल हस्ताक्षर से यह खाता संचालित होता है, जबकि जानकारों के मुताबिक ट्रस्ट का खाता कभी एकल हस्ताक्षरित नहीं खोला जा सकता। कुछ विशेष परिस्थितियों में ही ऐसा संभव है। तहकीकात में हमें एक बड़ी घटना की जानकारी मिली जो 8 जून 2018 की है। इस दिन सूरजमल कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल में घुसकर असामाजिक तत्वों ने छात्राओं से छेड़छाड़ की। इसके खिलाफ छात्राओं ने हाइवे जामकर आक्रोश  व्यक्त किया कि इस प्रकार भी घटनाएं आये दिन होती रहती हैं। पूर्व में चोरी की घटनाएं भी गर्ल्स हॉस्टल में हो चुकी हैं।
यह फर्जीवाड़ा सिर्फ किच्छा ही नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की सीमाओं के भी बाहर तक फैला हुआ है। सूरजमल लक्ष्मीदेवी सावर्थिया ट्रस्ट एवं इसके अंतर्गत संचालित समस्त कॉलेज तथा स्वामी सत्यप्रकाशानंद शिव मंदिर ट्रस्ट, काली मंदिर किच्छा के द्वारा हजारों छात्र-छात्राओं के जीवन से जो खिलवाड़ किया जा रहा है उसमें उत्तराखण्ड राज्य की मान्यता देने वाली विभिन्न संस्थाएं एवं विश्वविद्यालय जैसे कि उत्तराखण्ड प्राविधिक परिषद, उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय, हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय, उत्तराखण्ड स्टेट नर्सिंग काउंसिल, चिकित्सा विभाग उत्तराखण्ड आदि शामिल हैं। राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित संस्थाएं अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, भारतीय नर्सिंग परिषद, भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद एवं अन्य सभी नियामक एवं मान्यता या अनुमति प्रदान करने वाली संस्थाएं शामिल हैं। ताज्जुब होता है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने हाथों से ट्रस्ट के सचिव श्रीनिवास शर्मा को उत्तराखण्ड के बेस्ट गर्ल्स कॉलेज का अवॉर्ड प्रदान कर चुके हैं। साफ है कि बच्चों के जीवन से खिलवाड़ को राजनीतिक सहयोग एवं संरक्षण भी प्राप्त है।
बात अपनी-अपनी
आप कॉलेज आ जाइये। मैं फोन पर बात नहीं कर सकता। आपका मोस्ट वेलकम।
अंकुर सक्सेना, निदेशक सूरजमल लक्ष्मी देवी सावर्थिया एजुकेशन ट्रस्ट
इस बारे में यादव जी या सचिव शर्मा जी बता पाएंगे। कुछ समय पहले छात्रों ने हल्ला किया था। मैं अभी कुछ नहीं बता पाऊंगा।
डॉ. के.के. जोशी, प्रधानाचार्य सूरजमल कन्या महाविद्यालय

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