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Uttarakhand

तीर्थो की परम्पराओं को ध्वस्त करती त्रिवेन्द्र रावत सरकार

उत्तराखण्ड की प्रचंड बहुमत की त्रिवेन्द्र रावत सरकार का शराब से मोह इस कदर हों चला है कि राज्य में शराब के नये नये ठेके खेलने के लिये सरकार भरसक प्रयास कर रही है। शराब से होने वाली कमाई के लिये सरकार इस हद तक आ चुकी है कि तीर्थ स्थानों में भी शराब के ठेके खोल दिये गये है। हाल ही में हिंदुओ की आस्था का प्रतीक चारधाम यात्रा का पैदल मार्ग का अहम पड़ाव गरूड़ चट्टी में भी सरकार के द्वारा अंग्रेजी शराब का ठेका खोलने की अनुमति दे दी है। सरकार के इस फैसले से जनता में भारी नाराजगी बनी हुई है और जनता संत समाज केे साथ मिल कर सरकार के इस फैसले को धर्म विरोधी और तीर्थ स्थलो की परम्परा के साथ खिलवाड़ करने वाला बता कर आंदेालन में उतर गई है।

गरूड़ चट्टी प्राचीन काल से ही बदरीनाथ केदारनाथ की पैदल यात्रा का पहला अहम पड़ाव रहा है। प्रचीन काल में जब चारधामों की पैदल यात्रा होती थी तो पैदल यात्रियों के विश्राम आदी के लिये धार्मिक स्थलो पर पड़ाव बनाये गये थे जिनको चट्टीयां कहा जाता था। इसी कड़ी में बदरीनाथ और केदारनाथ यात्रा का ऋषिकेश के बाद सबसे पहला पड़ाव गरूड़चट्टी को बनाया गया था। इस स्थान पर भगवान बदरीनाथ का वाहन गरूड़ का प्रचीन मंदिर स्थापित है। यह स्थान पैराणिक काल से ही पैदल यात्रा का अहम पड़ाव माना गया है। स्कंद पुराण के केदारखण्ड में इस का विवरण मिलता है। यानी कहा जा सकता है कि हिन्दुओ ंकी अस्था का पवित्र मार्ग स्थन गरूड़ चट्टी रहा है।

अब इसी गरूड़ चट्टी में अग्रंेजी शराब को ठेका खोलने के आदेश जारी करने से याफ हो गया कि न तो पैड़ी जिला प्रशासन और न ही राज्य सरकार को प्रदेश की जनता की धार्मिक भावनाओं की कोई कदर है। हैरानी इस बात की है कि गरूड़चट्टी में खोला गया शराब का ठेका गरूड़चट्टी से 6-7 किमी दूर घट्टुघाड के रेत्ता पानी क्षेत्र के लिये अनुमोदित था। लेकिन इस क्षेत्र के निवासियो के द्वारा शराब के ठेके के खोलने पर भारी नाराजगी जताई गई तो गुपचुप तरीके से गरूड़ चट्टी मेू ंशराब का ठेका स्थानंातरित करवा दिया गया।

सूत्रो की माने तो इस पूरे मामले में सत्ता पक्ष और प्रशासन के साथ मिली भगत कर के गुूपचुप तरीके से कार्यवही की गई है। शराब के करारेवारियों के साथ सत्ता पक्ष के नेताओं सांठगांठ होन के आरोप स्थानीय स्तर पर लग रहे है। इस आरोप को इससे हवा मिल रही हेै कि गरूड़ चट्टी के जिस दुकान में यह शराब का ठैका खोला गया है वह प्रसिद्ध स्र्वागाश्रम ट्रस्ट की संपति है जिसमें दुकाने बनी हुई है और यह दुकान जलपान आदी के लिये किराये पर ली गई है। जबकि धार्मिक ट्रस्ट की संपति होने के चलते इस संपति में किसी प्रकार की मांस मदिरा आदी का कररोबार पूरी तरह से प्रतिबंधित है। बावजूद इस तथ्य को पौड़ी प्रशासन ने भी अनदेखा कर के आसानी से गरूड़ चट्टी में शराब के ठेके  को खेलने की अनुमति दे दी। अब स्वर्गाश्रम ट्रस्ट ने अपनी संपति से किरायेदार को दुकान खाली कराने का नोटिस भी दे दिया है।

इस पूरे मामले में क्षेत्र का संत समाज और आम जनता आंदेालित हो चुकी है। शराब के ठेके खोलने जोने की सूचना पर दर्जनों लेाग और संत समाज के लोग गरूड़चट्टी में पहुंच कर विरोध प्रर्दशन करने लगे तो प्रशासन ने शराब की दुकान पर ताला डाल दिया, लेकिन फिर अचानक ही दोे दिन बाद शराब की दुकान खुल गई। इस से यह तो साफ हो गया है कि प्रशसान पूरी तरह से शराब के करोबारियों के ही पक्ष में खड़ा है। हांलाकी फिर से जनता का विरोध के बाद शराब की दुकान को एक बार फिर से बंद कर दियाग या हैै। लकिन जिस तरह से प्रशासन की कार्यप्रणाली देखने को मिली है उससे नही लगता कि गरूड़ चट्टी से शराब की दुकान हमेशा के लिये हटाई जा सकेगी।

ऐसा नही हेै कि मौजूदा सरकार के समय में तीर्थ स्थलो पर पहली बार शराब के करोबार के लिये सरकार ने अनुमति दी है। तीर्थ नगरी के नाम से विख्यात ऋषिकेश नगर तीन तीन शराब के बार के लाईसेेंस सरकार के द्वारा दिये जा चुके है। इनमें से एक बार तो पौराणिक और प्रचीन तीर्थ वीरभद्र महादेव मंदिर के समीप ही खोला गया है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही कनखल क्षेत्र में माना गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के द्वारा इस मंदिर के समीप ही उत्खनन का कार्य किया गया है जो कि एक बड़ा महत्वपूण स्थान के तौर पर उभरा है। माना जाता हे कि इस क्षेत्र में बड़े बड़ै यज्ञ हुये है जिनका प्रमाण यज्ञ वेदी के तौर पर उत्खनन में निकले है। प्रचीन काल से ही इस क्षेत्र को कनखल क्षेत्र का मना गया है। यहां पर पौराणिक रम्भा नदी और गंगा नदी का संगम है जिसकी पैराणिक काल से ही धर्मिक महत्ता मानी गई है।

कुम्भ मेला क्षेत्र मुनिकी रेती में भी राज्य सरकार के द्वारा अंग्रेजी शराब का ठेका खोला गया है। हैरानी की बा तयह हे कि प्रदेश सरकार के कुम्भ मेला क्षेत्र के नोटिफिकेशन में सम्पूर्ण मुनीकी रेती क्षेत्र कुम्भ मेला क्षेत्र के नाम से दर्ज है और इस नोटिफिकेशन के हिसाब से इस कुम्भ मेला क्षेत्र में मांस मदिरा और अंडे का करोबार पूरी तरह से प्रतिबंध्णित किया हुआ है। बावजूद इसके राज्य सरकार के द्वारा राजस्व लोभ के चलते कुम्भ मेला क्षेत्र मे शराब का ठेका खोला गया है।

अब प्रचीन गरूड़ भगवान के क्षेत्र गरूड़ चट्टी में भी शराब का करोबार करने के लिये सरकासरके द्वारा अनुमति दी गई है जो अपने आप ही कई सवाल खड़े करती है। साथ ही उत्तराखण्ड को देवभूमि की बजाय शराब भूमि के तौर पर कुख्यात करने का काम करती नजर आ रही है।

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