[gtranslate]
Uttarakhand

कैंट की जनता का भाजपा से हो रहा मोहभंग

प्रधानमंत्री मोदी का ‘स्वच्छ भारत अभियान’ कैंट विधानसभा में दम तोड़ता नजर आता है। चौतरफा गंदगी के साम्राज्य वाली इस सीट पर दशकों से भाजपा के हरबंश कपूर काबिज हैं। अबकी बार लेकिन बढ़ती उम्र के चलते कहा जा रहा है कि भाजपा उनके बेटे को मैदान में उतार सकती है। हालांकि परिवारवाद की घोषित तौर पर विरोधी भाजपा के पास यहां उम्मीदवारों की कमी नहीं है। संघ से नाता रखने वाले विश्वास डाबर समेत यहां कई दावेदार हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस में भी इस सीट से लड़ने की चाहत रखने वालों की कमी नहीं है। वरिष्ठ नेता सूर्यकांत ट्टास्माना से लेकर लाल चंद शर्मा, विनोद पोखरियाल आदि यहां से दावेदारी कर रहे हैं। इन दोनों पार्टियों के अलावा आम आदमी पार्टी भी इस सीट पर खासी सक्रिय नजर आ रही है

तकरीबन सवा लाख मतदाताओं वाली कैंट विधानसभा का क्षेत्र समय-समय पर बदलता रहा है। अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय तकरीबन पूरा कैंट विधानसभा का क्षेत्र मसूरी विधानसभा का ही क्षेत्र रहा है। राज्य बनने के बाद देहराखास के नाम से नई विधानसभा बनी। 2012 में नए परिसीमन के चलते एक बार फिर से विधानसभाओं के क्षेत्रांे में बदलाव किया गया और कैंट के नाम से एक नई विधानसभा वजूद में आई।
कैंटोमेंट एरिया, प्रेम नगर, कांवली, पटेल नगर पश्चिम, बसंत विहार, इंजीनियर इंक्लेव, जीएमएस रोड़, पंडितवाड़ी, कौलागढ़, गांधी ग्राम इस विधानसभा में नए जोड़े गए हैं। पूर्व में ये हिस्से मसूरी और लक्ष्मण चौक विधानसभा के हिस्से थे। इसके अलावा राजेंद्र नगर, मोहित नगर, चकराता रोड़ के कुछ हिस्से, गोविंदगढ़ और सीमा द्वार कैंट विधानसभा के भाग हैं। भाजपा के हरबंश कपूर इस क्षेत्र से लगातार आठ बार चुनाव जीत कर एक रिकॉर्ड बनाने में सफल रहे हैं। हालांकि हर बार कपूर का विधानसभा क्षेत्र बदलता रहा लेकिन इससे कपूर की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई।

1985 में कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट के मुकाबले कपूर पहला चुनाव लड़े लेकिन इसमें उनकी हार हुई। 1989 हरबंश कपूर ने हीरा सिंह बिष्ट को चुनाव में हरा कर अपनी पहली जीत हासिल की। इसके बाद कपूर ने कभी हार का सामना नहीं किया। 1991 में कांग्रेस के विनोद चंदोला, 1993 में कांग्रेस के सतीश शर्मा तो 1996 में कांग्रेस के ही दिनेश अग्रवाल को चुनाव में हराया। उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद 2002 मे हुए पहले विधानसभा चुनाव में भी कपूर ने देहराखास सीट से कांग्रेस के संजय शर्मा तो 2007 में कांग्रेस के लालचंद शर्मा को हराया। 2012 के विधानसभा चुनाव में कैंट नाम से नई विधानसभा का गठन हुआ तो इस बार फिर से कपूर ने कांग्रेस के देवेंद्र सेठी को चुनाव में करारी शिकस्त दी। 2017 के चुनाव में कांग्रेस के सूर्यकांत धस्माना को हरा कर लगातार आठवीं बार जीत हासिल कर डाली।

कैंट विधानसभा के विकास की बात करें तो तकरीबन पूरे विधानसभा क्षेत्र में समस्याओं का बोलबाला बना हुआ है। मुख्यतः इस क्षेत्र में पेयजल, मलिन बस्तियों की समस्याएं, सफाई व्यवस्था और सीवर तथा ड्रेनेज की भारी समस्या है। बरसात के दिनों में तो हालत बद से बदतर हो जाते हैं। गोविंद गढ़ में हर वर्ष बरसात से आवासीय कॉलोनियों में जल भराव आम बात हो गई है। केंद्र सरकार और खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘स्वच्छ भारत अभियान’ कैंट विधानसभा में दम तोड़ता दिखाई दे रहा है। मलिन बस्तियों का सीवरेज और गंदा पानी सीधे बिंदाल, नाले में जा रहा है। जिसके चलते बिंदाल, जो कभी देहरादून नगर की एक प्रमुख बारमासी नदी होती थी, बदबू और गंदगी का पर्याय बन चुकी है।

लगातार आठ बार इस क्षेत्र से और दस वर्ष से कैंट से विधायक हरबंश कपूर अपनी लोकप्रियता के दम पर चुनाव जीतते रहे हैं। अपने कार्यकाल में कपूर द्वारा गलियां, संपर्क मार्ग और नालियां आदि तो जमकर बनाए गए हैं लेकिन कोई बड़ी योजना अपने क्षेत्र में नहीं ला पाए हैं। प्रदेश सरकार की नदियों को जिंदा करने की योजना में बिंदाल नदी को भी शामिल किया गया है लेकिन आज तक इसमें कोई प्रगति नहीं हुई है।
स्मार्ट सिटी योजना के माध्यम से सीवर ओैर पेयजल पाइप लाइनों का काम पूरे देहरादून शहर में किए जा रहे हैं जिनमें हीला- हवाली की शिकायतें सामने आ रही है। सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात यह हैे कि तकरीबन 30 सालों से हरबंश कपूर इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और प्रेम नगर जैसा बड़ा कस्बा हमेशा से कपूर के हर क्षेत्र में शामिल रहा है बावजूद इसके प्रेम नगर में एक अदद अस्पताल तक नहीं है, मात्र एक
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यहां है। कई वर्षों से इस स्वास्थ्य केंद्र के उच्चीकरण की मांग की जाती रही है लेकिन इसका उच्ची करण नहीं हो पाया है। यह कपूर कीे लोकप्रियता के बावजूद उनके कार्यकाल में विकास के कामांे पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

कैंट विधानसभा भाजपा का गढ़ रही है। इस क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा ही दो मुख्य राजनीतिक दल हैं। हालांकि कैंट के नाम से दस वर्ष पूर्व बनी यह सीट भाजपा के खाते में ही रही है। पूर्व में आम आदमी पार्टी ने इस सीट पर अपने आप को स्थापित करने का प्रयास तो किया लेकिन वह भाजपा और कांग्रेस का मुकाबला नहीं कर पाई है। वर्तमान में आम आदमी पार्टी दोनों राजनीतिक दलांे के सामने एक विकल्प रखने का प्रयास करती दिखाई दे रही है। इस सीट से भाजपा के हरबंश कपूर, विश्वास डाबर, जोगेंद्र सिंह पुंडीर और अमित कपूर दावेदार हैं। कांग्रेस में भी दावेदारों की कमी नहीं है। इनमें सूर्यकांत धस्माना, विरेंद्र पोखरियाल, लालचंद शर्मा, नवीन जोशी हैं तो वहीं आम आदमी पार्टी के रविंद्र आनंद और डॉ ़ उपमा अग्रवाल आप से दावेदारी कर रहे हैं।

उत्तराखण्ड में सबसे ज्यादा समय तक विधायक का रिकॉर्ड अपने नाम करवाने वाले हरबंश कपूर का टिकट इस बार उनकी अधिक उम्र के चलते कट सकता है। ऐसे में हरबंश कपूर के सुपुत्र और भाजपा के युवा नेता अमित कपूर अपनी दावेदारी के लिए तैयार बताए जा रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी चर्चाएं उठी थी कि कपूर अपनी स्थान पर अमित कपूर को टिकट दिलवाना चाह रहे थे। भाजपा इसके लिए तैयार नहीं हुई तो कपूर को ही 2017 का चुनाव लड़ना पड़ा। तबसे यह साफ हो गया कि हरबंश कपूर अपनी राजनीतिक विरासत अपने पुत्र अमित को दे कर राजनीति से किनारा कर सकते हैं।

विगत पांच वर्षों से अमित कपूर हरबंश कपूर के हर कार्यक्रम और जनसंपर्क का काम देख रहे हैं। एक तरह से हरबंश कपूर अमित को अपने उत्तराधिकारी के तौर पर अपने क्षेत्र की जनता के सामने रख चुके हैं। सूत्रों की माने तो अमित कपूर को हरबंश कपूर के उत्तराधिकारी के तौर पर दावेदारी के मामले में भाजपा के भीतर नाराजगी भी सामने आ चुकी है। दबी जुबान से कई दावेदार इसे परिवारवाद को बढ़ावा देने की बात कह कर पुराने समर्पित भाजपा के नेताओं को कैंट से टिकट दिए जाने की मांग कर रहे हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और वर्तमान सरकार में दर्जा कैबिनेट मंत्री रहे विश्वास डाबर 2022 के चुनाव मे केैंट सीट से बड़े दावेदार हैं। डाबर का परिवार विगत 84 वर्षों से आरएसएस से जुड़ा रहा है। इनके पिता और दादा जनसंघ के संथापक सदस्य थे। स्वयं विश्वास डाबर छात्र जीवन से ही जनता युवा मोर्चा में सक्रिय रहे हैं। 1980 में भारतीय जनता पार्टी के के उदय होने के बाद 1980 से लेकर 1990 तक भाजपा में वार्ड, मंडल और जिला स्तरी में पदों पर काम किया है। भाजपा के मीडिया प्रमुख के पद पर भी काम कर चुके हैं। वर्तमान में धामी सरकार में नगरीय पर्यावरण संरक्षण परिषद में कैबिनेट मंत्री स्तर के पद पर कार्य कर रहे विश्वास डाबर कैंट विधानसभा से भाजपा के बड़े दावेदारांे में मान जाते है। उनके अलावा 1989 में भाजपा की सक्रिय राजनीति से जुड़ने वाले जोगेंद्र सिंह पंुडीर भाजपा में मंडल और किसान समितियों के सदस्य भी रह चुके है। 1998 में तत्कालीन मसूरी विधानसभा के सह संयोजक, 2007 में लक्ष्मण चौक एवं 2017 में राजपुर विधानसभा के संयोजक के तौेर पर काम कर चुके हैं। 2017 में रेलवे एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य रह चुके पुंडीर भाजपा के किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। वर्तमान में वे भाजपा की किसान मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। 2007 में लक्ष्मण चौक विधानसभा तथा 2012 और 2017 में कैंट विधानसभा से भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर अपनी दावेदारी कर चुके पुंडीर 2022 के चुनाव में कैंट सीट पर अपनी दावेदारी कर रहे हैं। कांग्रेस से भी कई नेताओं की इस सीट पर दावेदारी सामने आ रही है।

2003 से वर्तमान तक लगातार किसान सहकारी बाजार के अध्यक्ष के पद पर काबिज विरेंद्र पोखरियाल कांग्रेस के मजबूत दावेदारों में शामिल हैं। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने चुके पोखरियाल डीएवी कॉलेज की छात्र राजनीति से राजनीति की मुख्यधारा से जुड़े हैं। डीएवी छात्र संघ चुनाव में अब तक रिकॉर्ड सबसे अधिक मतांे से चुनाव जीतने वाले छात्र नेता पोखरियाल गढ़वाल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पर भी रह चुके हैं। वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में सहकारी मंत्री धन सिंह रावत की रणनीति के चलते जहां प्रदेश में सहकारी चुनाव में भाजपा ने जीत का परचम लहराया तो वही राजधानी के देहरादून सहकारी चुनावों में भाजपा को पोखरियाल की रणनीति के चलते करारी हार का सामना करना पड़ा। 2022 के चुनाव में कैंट सीट से विरेंद्र पोखरियाल अपनी दावेदारी कर रहे हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व में केैंट सीट पर चुनाव लड़ चके सूर्यकांत धस्माना पार्टी में अनेक पदों पर काम कर चुके है। वर्तमान में कांग्रेस पार्टी मंे वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद धस्माना 2017 में कैंट सीट से चुनाव लड़े थे और 25 हजार वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। इससे पूर्व धस्माना देहरादून नगर निगम में महापौर का भी चुनाव लड़ चुके हैं जिसमें 60 हजार मत पाकर दूसरे स्थान पर आये थे। धस्माना को जनआंदोलन और मलिन बस्तियों की समस्याओं के लिये आगे रहनेे वाले नेता के तौर पर जाना जाता है। पूर्व में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर भी धस्माना पौड़ी से चुनाव लड़ चुके हैं। उत्तराखण्ड राज्य बनने से पूर्व समाजवादी पार्टी के सबसे चर्चित और युवा नेता के तौर पर धस्माना को जाना जाता था। कैंट विधानसभा में विगत दस वर्ष से धस्माना की सक्रियता रही है। इस क्षेत्र में अनेक जन समस्याओं को लेकर धस्माना के द्वारा प्रदर्शन आदि किए गए हैं जिनमें मलिन बस्तियों के नियमितीकरण और सड़क सीवर और जलभराव की समस्या को लेकर किये गये प्रदर्शन प्रमुख है। 2022 में धस्माना कैंट सीट से प्रबल उम्मीदवार बताये जा रहे हैं।

कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष लाल चंद शर्मा कैंट सीट से उम्मीदवारी कर रहे हैं। 2007 में केैट सीट से लालचंद शर्मा कांग्रेस के उम्मीदवार थे जिसमें वे भाजपा के हरबंश कपूर से बुरी तरह से हार गये थे। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के खास होने का लाभ लालचंद को मिलता रहा है। इसी चलते वे महानगर अध्यक्ष बने। कांग्रेस में पर्वतीय मूल के नेता को ही महानगर अध्यक्ष बनाये जाने को लेकर विवाद भी सामने आ चुका है। पूर्व महानगर अध्यक्ष रहे पृथ्वीराज चौहान कांग्रेस को छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए थे। लालचंद शर्मा का अपना कोई खास जनाधार तो नहीं है लेकिन कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष और पूर्व में केैंट सीट पर चुनाव लड़ने के कारण उनकी केैंट सीट पर मजबूत दावेदारी बताई जा रही है। इन नेताओं के अलावा उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव के पद पर तैनात नवीन जोशी भी कैंट सीट से अपनी दावेदारी कर रहे हैं।

रविंद्र्र आनंद वर्तमान भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के खास नेता माने जाते रहे हैं। कांग्रेस सरकार के समय कृषि मंत्री रहे हरक सिंह रावत ने देहरादून मंडी के अध्यक्ष भी बनाया था। जब हरक सिंह रावत कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में गये तो रविंद्र्र आनंद भी भाजपा में शामिल हुए लेकिन कुछ समय के बाद रवींद्र्र आनंद भाजपा को छोड़ कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गये। वर्तमान में वे प्रदेश प्रवक्ता के पद पर कार्यरत है। रविंद्र्र आनंद आम आदमी पार्टी से कैंट विधानसभा के प्रभारी भी रह चुके हैं। केैंट सीट पर आम आदमी पार्टी का जनाधार पहले के मुकाबले बढ़ा है जिसका श्रेय रविंद्र्र आनंद को दिया जा सकता है। 2022 के चुनाव के लिए रविंद्र्र आनंद आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े दावेदारों में माने जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी की संस्थापक सदस्य रही डॉ ़ उपमाअग्रवाल राजनीति विज्ञान में पीएचडी हैं। साथ ही महाविद्यालय में प्रवक्ता भी रह चुकी हैं। आम आदमी पार्टी में छात्र संगठन सीआईआईएस की जिला प्रभारी और प्रदेश प्रवक्ता भी रह चुकी हैं। केैंट विधानसभा की प्रभारी होने के साथ डॉ ़उपमा अग्रवाल आम आदमी पार्टी की मैनिफैस्टो कमेटी की सदस्य भी रह चुकी हैं। 2022 के चुनाव में कैेंट सीट से डॉ ़उपमा अग्रवाल आम आदमी पार्टी से मजबूत दावेदार हैं।

 

विगत 35 वर्षों से कैंट क्षेत्र और विधानसभा में कांग्रेस की लगातार हार से कार्यकर्ताओं में निराशा है। मैं 1994 से ही छात्र राजनीति करते हुए उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की कमान संभालते हुए और 2003 से सहकारिता में लगातार विजय की मुहर लगाते हुए तथा पूर्व छात्र संघ अध्यक्षों का समर्थन प्राप्त करके कैंट विधानसभा से अपनी दावेदारी कर रहा हूं। मुझे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और क्षेत्र की जनता का भरपूर समर्थन है। जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता भी 2022 में कांग्रेस से नये चंहरे को चुनाव में उतारने की मांग कर रहे हैं। अगर पार्टी मुझे उम्मीदवार बनाती है तो मैं निश्चित ही कैंट सीट से चुनाव जीत जीतूंगा और जो 35 सालों से कांग्रेस को जीत नहीं मिली है इस बार वह परेश्प्सन बदल जाएगा।
विरेंद्र पोखरियाल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता

 

मैं केवल 2007 में एक बार ही कैंट सीट से चुनाव लड़ा था। तब यह सीट देहराखास के नाम से थी। इसके बाद पार्टी ने मुझे फिर टिकट नहीं दिया। वर्तमान में मैं कांग्रेस पार्टी में देहरादून महानगर अध्यक्ष हूं और 2022 में कैंट सीट से अपनी दावेदारी कर रहा हूं।
लाल चंद शर्मा, महानगर अध्यक्ष कांग्रेस

 

आज मैं प्रदेश में महिला मोर्चा मजबूत कर रही हूं और कैंट विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हूं। मैं महिला सशक्तीकरण के लिए महिलाओं का राजनीति में आना बहुत आवश्यक मानती हूूं। आज विशेषज्ञ भी मानते हैं कि महिलाए मल्टीटास्क कर सकती हैं। उनका प्रबंधन मजबूत होता है। साथ ही महिलाओं में राजनीतिक चेतना लाने के लिए महिलाओं का राजनीति में आना आवश्यक है। जहां तक कैंट विधानसभा की बात है, कैंट विधानसभा कस्मोपोलिटन कल्चर वाली विधानसभा है। यहां पढ़ा लिखा और हर राज्य का व्यक्ति रहता हैं। आज एक पढ़ा-लिखा समझदार नेतृत्व चाहिए। जनाधार की बात करें तो हम आम आदमी पार्टी का दिल्ली मॉडल जनता के सामने रख रहे हैं। एक एक वादा लिखकर कर रहे हैं। उन्हंे उनके वोट की ताकत बता रहे हैं। जनता परिवर्तन चाहती हैं। वो आम आदमी पार्टी को नेतृत्व देना चाहती है और मुझे उसके लिए सक्षम मान रही है। मैं जनता की समस्या को उठाती रहती हूं, उनके हर सुखदुख में उनके साथ खड़ी हूं।
डॉ. उपमा अग्रवाल, संस्थापक सदस्य आप

 

कैंट विधानसभा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के समय से ही मैं सक्रिय रहा हूं। जनता से मैं निरंतर जुड़ा रहा हूं। 48 वर्ष से ज्यादा समय से मैं पार्टी में सक्रिय भूमिका में हूं। पार्टी के कार्यकर्ताओं और जनता से मैं सीधा जुड़ा रहा हूं। आज तक मेरे गृह क्षेत्र के पोलिंग बूथांे पर पार्टी किसी भी चुनाव में पीछे नहीं रही है। मैं अनेक सामाजिक कार्यों और संगठनों से जुड़ा हूं। मैं कैंट सीट से अपनी दावेदारी पार्टी के समक्ष रख चुका हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि पार्टी मुझे उम्मीदवार बनाएगी।
विश्वास डाबर, वरिष्ठ भाजपा नेता

 

 

वर्ष 2017 में मैं कैंट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुका हूं। जिसमें मुझे 25 हजार वोट मिले थे। इससे पहले में देहरादून मेयर का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुका हूं और मुझे 60 हजार वोट मिले थे। कैंट  विधानसभा का केवल प्रेम नगर का क्षेत्र ही नगर निगम से बाहर है। मैं जनता से विगत दस वर्षों से जुड़ा हूं। जनता की समस्याओं जल भराव, पेयजल, स्वास्थ्य और सड़कांे की दुर्दशा पर जनता के हर आंदोलन का प्रतिनिधित्व करने में मैं सबसे आगे रहा हूं। मलिन बस्तियों के नियमितीकरण के लिए सरकार पर दबाब बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी के साथ हमने बड़ा आंदोलन किया जिसका फायदा जनता को हुआ। मैं 2022 के चुनाव में कैंट सीट से दावेदारी कर रहा हूं और मैं कांग्रेस पार्टी की जीत से पूरी तरह से आश्वस्त हूं।
सूर्यकांत धस्माना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कांग्रेस

 

 

देहरादून के पांच सौ साल पुराने गांव कांवली क्षेत्र से मैं जुड़ा हूं। पांच सौ साल पहले यह गांव आबाद हुआ था जिसे हमारे पूर्वजों ने ही आबाद किया था। देहरादून का जब नाम भी किसी ने नहीं सुना था तब से यह क्षेत्र आबाद है। हमारी अनेक पीढिं़या इस क्षेत्र में जन्म ले चुकी है। इस क्षेत्र में हमेशा से बाहरी लोगांे को ही प्रतिनिधित्व करने के लिये भेजा गया है। मैं भाजपा से वर्षों से जुड़ा हूं और इस कांवली क्षेत्र जिसके मतदाता 70 हजार के करीब है की मांग है कि इस बार स्थानीय व्यक्ति को ही चुनाव में टिकट मिले। मैं पार्टी के हर कार्यकर्ता और जनता से सीधा जुड़ा रहा हूं। मुझे पार्टी ने कभी टिकट नहीं दिया लेकिन मैंने हर बार अपनी दावेदारी की है। इस बार भी में कैंट सीट से दावेदारी कर रहा हूं।
जोगेंद्र सिंह पुंडीर, वरिष्ठ भाजपा नेता

 

मैं कैंट विधानसभा सीट से दावेदारी कर रहा हूं। टिकट किसे मिलेगा यह तो पार्टी ही तय करेगी। अगर मुझे टिकट मिलेगा तो मैं चुनाव लडूंगा।
रविंद्र्र आनंद, प्रदेश प्रवक्ता आप

You may also like

MERA DDDD DDD DD