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Uttarakhand

कलक्टर की संवेदनहीनता पर आक्रोश

26 नवंबर को वत्सल सुदीप मासीवाल फाउंडेशन और हल्द्वानी ऑनलाइन 2011 की ओर से आयोजित निःशुल्क चिकित्सा शिविर में अल्ट्रासाउंड-एक्सरे मशीन हेतु अनुमति के लिए जिलाधिकारी एवं चिकित्साधिकारी के स्तर से आयोजकों को जिस प्रकार उलझाया गया वह आश्चर्यजनक है। अंततः सांसद अजय भट्ट के हस्तक्षेप से अनुमति तो मिली लेकिन वो भी चिकित्सा शिविर खत्म होने से महज एक घंटे पहले। ऐसे में अनुमति के कोई मायने नहीं रहे। इस पूरे प्रकरण में जिले के डीएम सविन बंसल और सीएमओ भारती राणा की भूमिका को लेकर हल्द्वानी समेत पूरे कुमाऊं मंडल में भारी असंतोष की बात सामने आ रही है

 

हल्द्वानी की लचर स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाओं के विरोध में हल्द्वानी आनलाइन 2011 संस्था तथा वत्सल सुदीप मासीवाल फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से बुद्ध पार्क में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। कुमाऊं का मुख्य द्वार कहे जाने वाले हल्द्वानी में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। बरसात में बेकाबू हुए डेंगू के दौरान स्वास्थ्य महकमा इसे थामने में निष्फल साबित हुआ था। उस समय हल्द्वानी ऑनलाइन 2011 संस्था तथा वत्सल सुदीप मासीवाल फाउंडेशन ने डेंगू के प्रति लोगों को जागरूक करने व रक्तदान के प्रति प्रेरित करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस वक्त भी स्वास्थ्य महकमे की मुखिया मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ भारती राणा की भूमिका पर सवाल उठे थे। उस समय उन पर प्रशासन को गुमराह करने व डेंगू मरीजों की वास्तविक संख्या कम बताने के आरोप लगे थे।

26-11-2019 को हल्द्वानी में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर के प्रति प्रशासनिक असहयोग के चलते सांकेतिक धरने आयोजन किया गया। इसमें शामिल प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हल्द्वानी में सरकारी अस्पतालों, सुशीला तिवारी अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं के प्रति प्रशासन की उदासीनता के चलते आम आदमी महंगे इलाज के लिए मजबूर हैं। अगर कोई स्वयं सेवी संस्था निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाकर आम जनता की परेशानी में भागी बनना चाहती है तो उसमें प्रशासन का सहयोग तो मिलता नहीं उल्टा प्रशासन से सहयोग मांगने पर वो प्रक्रियाओं को इतना जटिल बना देता है कि स्वयं सेवी संस्थाओं के निःशुल्क चिकित्सा शिविर के सेवा भाव का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाता है। वत्सल सुदीप मासीवाल फाउंडेशन की सचिव श्वेता मासीवाल का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति उदासीन है लेकिन जो अपने स्तर से आम व्यक्ति को निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध कराना चाहते हैं उन्हें तो अपनी लालफीताशाही की जटिल प्रतिक्रयाओं में न उलझाएं। ऐसे शिविरों के माध्यम से हम कहीं न कहीं सरकार की सहायता ही करते हैं और जब प्रशासन ही अपनी जटिल प्रक्रियाओं में इसे उलझा दे तो कहीं न कहीं आयोजनकर्ता हतोत्साहित होते हैं। उल्लेखनीय है कि 26-11-2019 को वत्सल सुदीप मासीवाल फाउंडेशन व हल्द्वानी ऑनलाइन 2011 के संयुक्त रूप से आयोजित निःशुल्क चिकित्सा शिविर में अल्ट्रासाउंड-एक्सरे हेतु अनुमति के लिए जिलाधिकारी एवं चिकित्साधिकारी के स्तर से जिस प्रकार उलझाया गया था उससे सभी हैरान है। अंततः सांसद अजय भट्ट के हस्तक्षेप से अनुमति तो मिली लेकिन वो भी चिकित्सा शिविर खत्म होने से एक घंटे पहले। ऐसे में अनुमति का उस वक्त कोई मायने नहीं रहे। उक्त निःशुल्क चिकित्सा शिविर में ऋषिकेश एम्स के जाने माने चिकित्सकों का भरपूर सहयोग मिल था लेकिन जिला प्रशासन की नकारात्मक भूमिका के चलते शिविर आयोजनकर्ताओं को एक्सरे और अल्ट्रसाउंड निजी संस्थानों में कराने पड़े थे। इस पूरे प्रकरण में जिले के डीएम सविन बंसल और सीएमओ भारती राणा की भूमिका को लेकर हल्द्वानी समेत पूरे कुमाऊं मंडल में भारी असंतोष की बात सामने आ रही है।

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