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Uttarakhand

सरकार के खिलाफ अपनों का मोर्चा

प्रदेश में भाजपा विधायक इन दिनों मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और सरकार से बेहद खफा दिखाई दे रहे हैं। मानसून सत्र में इन विधायकों ने सरकार के मंत्रियों पर जिस कदर सवालों की बौछार कर उन्हें घेरा उससे तो विपक्ष भी हैरान है। भाजपा विधायकों के तीखे सवालों से ये खबरें से छनकर आ रही हैं कि पार्टी आलाकमान ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन का मन बना लिया है। मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चेबंदी में विधायकों को आलाकमान का आशीर्वाद हो सकता है। उनके तीखे तेवर तो इसी तरफ इशारा कर रहे हैं
भा जपा सरकार और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कार्यशैली पर अपने ही सवाल उठाने लगे हैं। कभी अतिक्रमण के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान और कभी राज्य में अफसरों की कार्यशैली को लेकर मुख्यमंत्री पर परोक्ष हमला किया जाता रहा है। अब विधानसभा के मानूसन सत्र के दौरान कई भाजपा विधायकों ने अपनी ही सरकार और मंत्रियों की कार्यशैली पर सदन में जो कड़े तेवर दिखाये हैं उससे तो यही लगता है कि सरकार और भाजपा संगठन में न तो सामंजस्य है और न ही कोई ठोस समझ समन्वय बन पाई है। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘इन्वेस्टर समिट’ को लेकर भी भाजपा का एक वर्ग अपनी अलग रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे इस कार्यक्रम को अपेक्षित सफलता न मिल पाए। जबकि मुख्यमंत्री का पूरा जोर इस आयोजन को सफल बनाने और राज्य में करोड़ों का निवेश लाने पर है। ऐसे में भाजपा के भीतर अलग ही पकार का माहौल बना हुआ है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सत्ता संभालने के तुरंत बाद से ही उनके भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगी थी। इस तरह की चर्चाओं और अटकलों को मीडिया और सोशल मीडिया में बड़ा स्पेस दिया जाने लगा। मुख्यमंत्री की कार्यशैली को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आती रही जिसमें भाजपा नेताओं की नाराजगी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चाएं हुईं। हर बार मुख्यमंत्री को निशाने पर लिया जाने लगा। इसका सबसे बड़ा प्रमाण मुख्यमंत्री के जनता दरबार के दौरान शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा के मामले में दिखाई दिया। इस प्रकरण में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को एक तरह से खलनायक के तौर पर पेश किया गया। लेकिन भाजपा के बड़े नेताओं द्वारा इस मामले में उतना सहयोग नहीं दिखाई दिया जितना अन्य मामलों में दिखाई देता रहा है। यहां तक कि भाजपा पार्टी फोरम के उलट सार्वजनिक तौर पर बड़े नेताओं की बयानबाजी खूब होती रही। चाहे वह नौकरशाही को लेकर हो या सरकार में एडजेस्ट करने के लिए दायित्वों के बंटवारे में हो रही देरी के मामले रहे हों, हर मामले में अपनी ही सरकार के खिलाफ किसी न किसी तरह से माहौल बनाये जाने का काम होता रहा।
पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री विशन सिंह चुफाल ने दायित्वों में देरी के मामले में जिस तरह खुलकर अपनी ही सरकार और संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाए उसे मुख्यमंत्री पर दबाव बनाए जाने की कवायद के तौर पर ही माना गया। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा के मानसून सत्र में भाजपा विधायकों ने अपनी सरकार और मंत्रियों को घेरने का काम खुलकर किया। मंत्रियों पर गलत जबाब देने तक का आरोप लगाया। यही नहीं सरकार की योजनाओं-नीतियों पर भी सवाल खड़े किए। इससे साफ हो गया कि भाजपा सरकार के खिलाफ माहौल बनाना और खासतौर पर मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चेबंदी कहीं न कहीं पार्टी के बड़े नेताओं के इशारे पर हो रही है।
अगर विधानसभा में भाजपा विधायकों द्वारा उठाए गए सवालों पर सरकार को असहज होना पड़ा तो यह सरकार के होमवर्क की कमी मानी जा सकती है। लेकिन सदन में मंत्री पर गलत बयानी का आरोप लगाना बहुत बड़ी बात है। भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना ने लीसा भंडारण में मंत्री हरक सिंह रावत पर गलत बयानी और सदन को गुमराह करने के आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दी। जबकि इस मामले में विपक्षी पार्टी कांग्रेस सरकार को न तो घेर पाई और न ही सरकार के खिलाफ सदन में कोई बड़ा माहौल बना पाई। हैरानी कीब ात है कि भाजपा विधायकों ने ही विपक्ष का काम किया।
भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल, चंदनराम और सुरेश राठौर ने नगर निकायों के आरक्षण के सवाल पर सरकार को घेरने का काम किया। जिस पर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को सदन में असहज होना पड़ा। यही नहीं भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने प्रदेश में चीड़ के पेड़ों के कटान के मामले में मंत्री पर विरोधाभाषी जबाब देने के आरोप लगाने में देरी नहीं की। रुद्रप्रयाग के भरत सिंह चौधरी ने अपने क्षेत्र में मुआवजे में भारी असमानता को लेकर वन मंत्री हरक सिंह रावत पर सवाल खड़े किए। उन्होंने सरकारी स्कूलों में साफ सफाई को लेकर अपनी सरकार और शिक्षा मंत्री को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यमकेश्वर की विधायक ऋतुभूषण खण्डूड़ी ने एनसीईआरटी की पुस्तकां के मामले में शिक्षा मंत्री को कई बार अहसज करने में देरी नहीं की। सबसे बुरा हाल तो नगर निकायों में परिसीमन के सवाल पर रहा। जिसमें सवाल तो विपक्ष के विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने उठाया था लेकिन इस सवाल पर अपनी ही सरकार पर भाजपा विधायकों ने तीखे प्रहार करने में देरी नहीं की। भाजपा के उमेश शर्मा काउ, सहदेव पुण्डीर और आदेश चौहान ने जिस तरह शहरी विकास मंत्री पर सवाल दागे उससे तो एक बारगी यह लगा कि कहीं ये विधायक विपक्ष के तो नहीं हैं। हालांकि यह सवाल प्रदेश के निकायों के परिसीमन के मामले में बहुत संवेदनशील हैं जिसको देखते हुए स्वयं विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा सरकार को शहरी विकास विभाग और पंचायत राज विभाग को अपसी सामंजस्य बैठने का निर्देश तक देना पड़ा। इससे यह भी साफ हो गया कि निकायों के परिसीमन के मामले में सरकार की कार्यशैली पर जो सवाल खड़े होते रहे हैं वह कहीं न कहीं सही भी दिखाई दे रहे हैं।
सदन में सरकार के तारणहार रहे कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत भी भाजपा विधायकों के निशाने पर रहे। कुवंर प्रणव चैंपियन, पुष्कर सिंह धामी और ऋतु खण्डूड़ी ने सदन में मंत्री प्रकाश पंत पर गलत बयानी करने और गलत आंकड़े रखने का आरोप तक लगाया। कुंवर प्रणव चैंपियन ने अपने क्षेत्र खानपुर में हेपेटाईटिस बीमारी के उपचार को लेकर मंत्री से कई सवाल किये। मंत्री के जबाबों को वे गलत बताते रहे। चैंपियन ने सदन में यहां तक कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को इस मामले में चिट्ठी लिखी लेकिन उसका कोई जबाब नहीं मिला। चैम्पियन ने यह भी कहा कि पांच वर्ष पूर्व जब इसी तरह की स्थिति उनके क्षेत्र में पैदा हुई थी तो तत्कालीन सरकार ने तुरंत स्वास्थ्य टीम भेजी थी। चैम्पियन के बयान से साफ है कि कांग्रेस से भाजपा में आये विधायक आज भी कहीं न कहीं अपनी सरकार के कामकाज से बेहद नाराज हैं और गाहे-बगाहे अपनी सरकार पर सवाल खड़े करने में वे सदन को भी अपना माध्यम बनाने में देरी नहीं करते। पुष्कर सिंह धामी ने सिडकुल में 80 फीसदी स्थानीय युवाओं को रोजगार के मामले में मंत्री प्रकाश पंत द्वारा सदन में रखे गए आंकड़ों को गलत बताया। ऋतु खण्डूड़ी और चैंपियन ने नंदा गौरा योजना की व्यवहारिकता पर सवाल खड़े किए और योजना को हाथी के दांत बताया।
सामान्य तौर पर देखें तो विधायकों का काम अपने क्षेत्र और जनता के विषयों को उठाना और उन पर सरकार का ध्यान खींचना होता है। लेकिन जिस तरह से एक के बाद एक भाजपा विधायक ने सरकार की योजनाओं, मंत्रियों के काम-काज और होमवर्क पर कड़े प्रहार किए उससे सरकार को सदन में असहज होना पड़ा। साथ ही विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का अवसर मिला।
अब राजनीति की बात करें तो ऐसा नहीं है कि भाजपा सरकार पर पहली बार इस तरह के हमले हुए हैं। चाहे वह विधायकों के मामले हों या भाजपा नेताओं के बयान, तकरीबन हर मामले के पीछे मुख्यमंत्री को ही निशाने पर लिया जाता रहा है। हाल ही में हाईकोर्ट के आदेश के बाद अतिक्रमण के खिलाफ चलये जा रहे अभियान में भी स्वयं भाजपा नेता सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। अतिक्रमण हटाये जाने का विरोध स्वयं भाजपा नेता और विधायक कर रहे हैं। हालांकि उनका यह विरोध अतिक्रमण हटाने वाले अधिकारियों के खिलाफ दिख रहा है, लेकिन इसमें भी अपनी सरकार और मुख्यमंत्री को ही निशाना बनाया जा रहा है। इस तरह अतिक्रमण हटाने से चुनाव में भाजपा को बड़ा नुकसान होने की आशंकायें जताई जा रही हैं। सरकार के इस कदम को जनविरोधी तक बताया जा रहा है। ब्यूरोक्रेसी की कार्यशैली पर सवाल खड़े करके भाजपा आलाकमान तक शिकायत की जा रही है। सूत्रों की मानें तो भाजपा नेताओं द्वारा इस तरह की शिकायत करने का कारण यह है कि उन्हें अपना वोट बैंक खिसकने का भय है। यही वजह है कि वे सीधे तौर पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जबकि कहीं न कहीं इस तरह का माहौल बनाये जाने के पीछे भाजपा की अंदरूनी राजनीति और मुख्यमंत्री के खिलाफ असंतोष ही मुख्य कारण बताया जा रहा है।
अब सवाल यह है कि आखिर प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई भाजपा के भीतर अपनी ही सरकार और मुख्यमंत्री को लेकर क्या माहौल बनाया जा रहा है? राजनीतिक जानकारों की मानें तो जिस तरह से मुख्यमंत्री सरकार में पावर सेंटर को अपने हाथ में लेने में सफल रहे हैं उससे सरकार और भाजपा के भीतर खासी बेचैनी बनी हुई है। इसी बेचैनी के चलते मुख्यमंत्री के खिलाफ चर्चाओं को हवा दी जा रही है। ऐसा नहीं है कि यह केवल एक कयास भर है। स्वयं मुख्यमंत्री सार्वजनिक बयान दे चुके हैं कि जब से वे मुख्यमंत्री बने हैं उससे कइयों को परेशानी हो रही है। मुख्यमंत्री के इस बयान के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। सबसे बड़ा अर्थ सरकार में एक ही पावर सेंटर होने का निकाला जा रहा है। यह सेंटर मुख्यमंत्री के आधीन है और भाजपा के उन बड़े नेताओं को जमीनी हकीकत और हैसियत जतलाने का प्रयास कर रहा है जो मुख्यमंत्री के खिलाफ हैं। इसी के चलते मुख्यमंत्री अब अपनों के निशाने पर हैं।

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