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Uttarakhand

ओम गोपाल बिगाड़ सकते हैं उनियाल का खेल

नरेंद्र नगर कभी टिहरी रियासत की राजधानी हुआ करती थी। अब न तो राजशाही बची, न ही राजघराने का पहले सरीखा प्रभाव बचा है। यहां इस बार चुनावी जंग खासी रोचक होने वाली है। भाजपा यदि वर्तमान विधायक सुबोध उनियाल को दोबारा यहां से मैदान में उतारती है तो 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी में शामिल हुए ओम गोपाल रावत बागी हो निर्दलीय मैदान में उतर उनियाल की हार का कारण बन सकते हैं। कांग्रेस ऐसी किसी संभावना को लपकने के लिए तैयार बताई जा रही है। उनियाल के भाजपा में शामिल होने के बाद अब कांग्रेस से विरेंद्र कंडारी, हेमंत बिजल्वाण और राजू राणा अपनी दावेदारी कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी अभी तक इस क्षेत्र में खास सक्रिय नजर नहीं आ रही

पृथक उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद नरेंद्र नगर विधानसभा अस्तित्व में आई। इससे पूर्व यह क्षेत्र देवप्रयाग विधानसभा के अंतर्गत आता था। पूर्व में नरेंद्र नगर टिहरी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा होता था लेकिन नए परिसीमन के चलते इसे पोैड़ी लोकसभा से जोड़ दिया गया है। वर्तमान में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत कर विधायक बने सुबोध उनियाल नरेंद्र नगर से विधायक हैं और भाजपा की पुष्कर सिंह धामी सरकार में कृषि और उद्यान तथा कृषि शिक्षा के कैबिनेट मंत्री भी हैं।

राजनीतिक तौर पर नरेंद्र नगर का अपना एक अलग ही स्थान रहा है। सामंतशाही के दौर में नरेंद्र नगर टिहरी रियासत की राजधानी रही। टिहरी के महाराजा मानवेंद्र शाह टिहरी लोकसभा से 8 बार जीत कर सासद बने। महाराजा मानवेंद्र शाह के निधन के बाद अब नरेंद्र नगर टिहरी राजपरिवार के लिए राजनीतिक तौर पर महत्वहीन हो गया है। वर्तमान टिहरी संासद महारानी माला राजलक्ष्मी अपनी राजनीतिक गतिविधियां राजधानी देहरादून से संचालित करती हैं जिसके चलते नरेंद्र नगर राजपरिवार से दूर हो चला है।

नरेंद्र नगर क्षेत्र में मुनि की रेती और नरेंद्र नगर नगर पालिका क्षेत्र हैं। टिहरी जिले का सबसे पहला इंड्रस्टियल एरिया ढालवाल इसी विधानसभा का हिस्सा है। फकोट विकास खण्ड इस विधान सभा का सबसे बड़ा विकास खण्ड है। इसके अलावा हिंडोलाखाल और चंबा विकास खण्ड का कुछ क्षेत्र भी इस विधान सभा में मिलाया गया है। 2011 की जनगणना के अनुसार नरेंद्र नगर विधानसभा की कुल आबादी सवा दो लाख के करीब है। कुल 82 हजार मतदाता हैं। हालांकि मतदाताओं की संख्या में इन बीस वर्षों से इजाफा तो हुआ है लेकिन पलायन के चलते पहाड़ी क्षेत्रों से मतदाता कम भी हुए हैं।

राज्य बनने के बाद इस क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर सड़कों का निर्माण, चौड़ीकरण और मरम्मत के काम हुए हैं। लेकिन क्षेत्र की सबसे अधिक जनसंख्या वाले इलाकों ढालवाला और मुनि की रेती में आज तक सीवर लाईन का काम नहीं हो पाया है। ढालवाला क्षेत्र को वर्तमान भाजपा सरकार के ही कार्यकाल में मुनि की रेती नगर पालिका क्षेत्र से जोड़ा गया है। पूर्व में यह क्षेत्र ग्राम सभा के अतर्गत आता था। आज यह क्षेत्र अनियोजित विकास के चलते सबसे ज्यादा प्रभावित हो चुका है। टिहरी जिले का एक मात्र औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद लगातार इस क्षेत्र से उद्योग बंद होते जा रहे हैं और औद्योगिक क्षेत्र आवासीय क्षेत्र में बदलता जा रहा है।
शिक्षा के नाम पर ढालवाला में कोई उच्च शिक्षण संस्थान नहीं है। सबसे नजदीक राजकीय डिग्री कॉलेज ऋषिकेश में है। नरेंद्र नगर में एक डिग्री कॉलेज जरूर है लेकिन उसमें मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है।
पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार के समय जाजल में एक डिग्री कॉलेज बनाए जाने की घोषणा हुई थी लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद उसको ठंडे बस्ते मे डाल दिया गया है। नरेंद्र नगर में ही एक पॉलिटेक्निक कॉलेज है जिसमें अब सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स बंद कर दिया गया है।

आलवेदर रोड़ का कार्य इस क्षेत्र में जमकर हो रहा है जिसके दुष्परिणाम जमकर सामने आ रहे हैं। कई स्थानों पर भूस्खलन के नए-नए जोन बन रहे हैं। हिंडोला खास में तो एक भवन के ऊपर सड़क का पुस्ता गिरने के चलते एक की मौत भी हो चुकी है। बासर गांव में एक रिटायर्ड फौजी का भवन आल वेदर रोड के चलते गिरने की कगार पर आ चुका है। हेंवल पंपिंग योजना भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। आगर, भिंगारकी, चिलोगी पेयजल योजना भी आल वेदर रोड़ की भेंट चढ़ चुकी हैं।

रोड निर्माण के चलते बड़े-बड़े पुस्ते लगाए गए है जिसके कारण पशुओं के चारागाह तक जाने के मार्ग बंद कर दिए गए हैं। अब ग्रामीणों को अपने पशुओं को चारागाह तक ले जाने के लिए दो से चार किमी का सफर तय करना पड़ रहा है इससे चारे की भारी समस्या पैदा हो रही है। नरेंद्र नगर का धमांदस्यू और कुजणी पट्टी क्षेत्र अदरक और पहाड़ी अरबी की फसल का हब माना जाता है। पिछले वर्ष इस क्षेत्र के किसानों द्वारा बगैर किसी सरकारी सहायता के दो करोड़ का अदरख बेचकर नया रिकॉर्ड बनाया गया। लेकिन आज तक उद्यान और कृषि विभाग द्वारा इस क्षेत्र में अदरक के बीज का उत्पादन केंद्र नहीं बनाया जा सका है। इस क्षेत्र के किसान स्वयं अपना अदरख का बीज संरक्षित कर खेती करते हैं। दूसरी तरफ किसानों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय उद्यान और कृषि विभाग बीज कंपनियों से बीज खरीद करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाता है।
स्थानीय किसानों के द्वारा इस क्षेत्र में एक सहकारी मंडी की स्थापना की गई है जिससे इस क्षेत्र के किसानों को बेहतर लाभ मिल रहा है। हाल ही में सरकार के द्वारा इस क्षेत्र में 9 करोड़ 30 लाख की लागत से मंडी की शुरुआत जरूरी की गई लेकिन अभी तक इसमें खरीद-फरोख्त का काम आरंभ नहीं हो पाया है। जबकि इस वक्त स्थानीय कास्तकारों की फसल अदरक और अरबी, मिर्च आदि बिक्री के लिए आ रही है लेकिन मंडी में काम शुरू नहीं होने से किसानों का इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

पूर्व ब्लॉक प्रमुख विरेंद्र कंडारी का कहना है कि इस क्षेत्र में धीरे-धीरे कृषि उत्पादन कम हो रहा है। केवल तीन चार महीने के लिए ही नकदी फसलें बाजार में आती है। 7-8 महीनों में इस मंडी में कोई काम ही नहीं होगा। इससे न तो किसानांे का फायदा होगा और न ही दुकानदारों का। इन 8 महीनों में ऋषिकेश की मंडियों से ही सब्जियां आएंगी जो कि दोहरे भाड़े के चलते बेहद महंगी होगी। इससे तो बेहतर यह होता कि सरकार आगराखाल, फकोट, जाजाल खाड़ी और अन्य क्षेत्रों में छोटे-छोटे विक्रय केंद्रों की स्थापना करती जिससे सभी का फायदा होता। स्थानीय कारोबारी रमेश उनियाल का कहना है कि मंडी के साथ-साथ ग्रामीण बाजारों में क्रय-विक्रय केंद्र या कलेक्शल सेंटर बनाए जाते तो बेहतर नतीजे आते। स्थानीय किसान अपनी पांच-दस किलों फसल लेकर इस मंडी तक नहीं आ पाएगा क्योंकि फसल की कीमत किराए में ही खर्च हो जाएगी। अगर कलेक्शन सेंटर भी बनाए गए होते तो किसान उन केंद्रों में अपना कम सामान ला सकता और व्यापारी वहीं से सामान खरीद कर मंडी में बेच सकता।

राजनीतिक दृष्टि से अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से ही यह क्षेत्र भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। भाजपा नेता मातबर सिंह कंडारी इस क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। राज्य बनने के बाद पहले चुनाव में कांग्रेस के सुबोध उनियाल का राजनीतिक जीवन इसी विधानसभा सीट से आरंभ हुआ। 2002 में उनियाल यहां से विधायक बने। 2007 में राज्य आंदोलनकारी ओम गोपाल सिंह रावत ने बतौर उत्तराखण्ड क्रांति दल प्रत्याशी सुबोध उनियाल को केवल 16 मतों से पराजित करके विधायक की सीट पर अपना कब्जा किया। 2012 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर उनियाल यहां से विधायक चुने गए। इस बार भी हार-जीत का अंतर मामूली रहा। मात्र 104 मतों की बढ़त पाकर उनियाल विधायक बन गए। 2016 में राज्य में आज तक का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया था। हरीश रावत सरकार से बगावत करके कांग्रेस के दस विधायकों ने भाजपा का दामन थामा था। इन विधायकों में सुबोध उनियाल भी शामिल थे। 2017 में बतौर भाजपा प्रत्याशी उनियाल ने पांच हजार के अंतर से यह सीट जीत अपनी विधायकी बरकरार रखी।

भाजपा में नरेंद्र नगर सीट को लेकर बेहद हलचल देखी जा रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पौेड़ी लोकसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी तीरथ सिंह रावत की जीत पक्की करने की नीयत से राज्य आंदोलनकारी नेता ओम गोपाल रावत को भाजपा में शामिल करवाया था। सूत्रों के अनुसार ओम गोपाल रावत को भाजपा ने यह आश्वासन दिया था कि 2022 के चुनाव में उनको पार्टी नरेंद्र नगर से उम्मीदवार बनाएगी। यही आश्वासन अब भाजपा के लिए गले की एक फांस बनता दिखाई देने लगा है।

यहां के वर्तमान विधायक उनियाल अपनी तेज-तर्रार छवि के चलते युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं। जनता उन्हें क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाने का श्रेय देती है। यही कारण है कि उनके स्थान पर ओम गोपाल रावत को पार्टी प्रत्याशी बनाना भाजपा के लिए आसान नहीं है। हालांकि कहा जा रहा है कि 2022 के चुनाव में सुबोध उनियाल को भाजपा ऋषिकेश विधानसभा सीट से उतार सकती है। साथ ही यह भी चर्चा है कि भाजपा 2024 के
लोकसभा चुनाव में टिहरी सीट से सुबोध उनियाल को टिकट देकर चुनाव लड़वाने की तैयारी में है।

सूत्रों की मानें तो सुबोध उनियाल 2024 के लोकसभा चुनाव को अपने लिए दूर की कौड़ी मान रहे हैं। उनके समर्थकांे का कहना है कि 2024 में क्या स्थितियां बनती है और टिकट किसे मिलता है यह नहीं कहा जा सकता इसलिए उनियाल ऋषिकेश से तो चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन टिहरी लोकसभा से नहीं। सुबोध उनियाल का इस क्षेत्र में बड़ा जनाधार तो है लेकिन अब मुनि की रेती और ढालवाला में उनके जनाधार को बड़ी सेंध भी लग चुकी है। ओम गोपाल रावत और कांग्रेस ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाने में कामयाबी हासिल की है। उनियाल नरेंद्र नगर को छोड़कर ऋषिकेश की दौड़ लगाएंगे या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा। हाल-फिलहाल नरेंद्र नगर से भाजपा के सबसे सशक्त उम्मीदवारी अभी तक सुबोध उनियाल ही है। उनकी दावेदारी को चुनौती दे रहे उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ओम गोपाल रावत ने अपनी
राजनीतिक पारी की शुरुआत 2002 के विधानसभा चुनाव में की थी। 2007 में हुए चुनाव में ओम गोपाल रावत उक्रांद के टिकट पर चुनाव लड़े और कांग्रेस के सुबोध उनियाल को महज 16 मतों के अंतर से हराकर विधायक बने थे। 2012 में ओम गोपाल महज 104 मतों से चुनाव हार तो गए लेकिन उनका जनाधार तब से लगातार बढ़ता गया है। 2017 में उनकी एक बार फिर से हार जरूर हुई लेकिन लोकप्रियता बरकरार रही।

सूत्रों की मानें तो ओम गोपाल रावत 2022 के विधानसभा चुनाव में फिर से नरेंद्र नगर सीट पर अपनी किस्मत आजमाने के लिए पूरी तरह से कमर कस चुके हैं। उनके समर्थकों का भी मानना है कि ओम गोपाल रावत को भाजपा टिकट देगी तो वे भाजपा से चुनाव लडं़ेगे अन्यथा उनके लिए कई विकल्प खुले हैं। चर्चा यह भी है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की निगाहें ओम गोपाल रावत पर लगी हुई है। कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस में कोई ज्यादा दावेदार नहीं है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख और क्षेत्र के पुराने कांग्रेसी नेता विरेंद्र कंडारी के अलावा पूर्व कांग्रेसी उम्मीदवार हिमांशु बिजल्वांण और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राजू राणा ही इस सीट से प्रमुख दावेदार है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्य रहे विरेंद्र कंडारी का धमांध्स्यूं, कुजणी तथा दोगी पट्टी क्षेत्र में बड़ा जनाधार है। पंचायत और ब्लॉक तथा जिला स्तरीय राजनीति में कंडारी की सक्रियता रही है। इसके अलावा कांग्रेस में प्रदेश सचिव के पद पर भी विरेंद्र कंडारी काम कर चुके हैं। मिलनसार व्यक्तित्व के धनी कंडारी कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे हैं। क्षेत्र की समस्याओं का निदान और विकास कार्यों को करवाने में कंडारी का बड़ा योगदान रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल में कंडारी द्वारा इस क्षेत्र में अनेक योजनाएं स्वीकृत करवाई गई है जिनका फायदा कंडारी को चुनाव में हो सकता है।

हालांकि कांग्रेस से कंडारी को कभी विधायक का टिकट नहीं मिला है। इसका सबसे बड़ा कारण क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण रहे हैं। सुबोध उनियाल कांग्रेस के नेता रहे हैं और स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी और विजय बहुगुणा के सबसे चहेते नेता के तौर पर उनियाल को माना जाता रहा है जिसके चलते सुबोध लगातार दो बार कांग्रेस के उम्मीदवार बने। इस बार क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ता कंडारी को चुनाव में उम्मीदवार बनाने की मांग कर रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले हिमांशु विजल्वांण युवा कांग्रेस के गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र के अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिव भी रह चुके हैं। वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के देवप्रयाग जिला अध्यक्ष हैं। मूलतः क्वीली पालकोट पट्टी क्षेत्र के निवासी हिमांशु को 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने पार्टी प्रत्याशी बनाया था। वे चुनाव तो हार गए लेकिन अपने चुनावी क्षेत्र में सक्रिय रहे। कोरोना महामारी के दौरान राहत कार्यों में उन्होंने बढ़-चढ़कर योगदान दे क्षेत्र में अपनी अलग पहचान कायम की है।

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राजू राणा कांग्रेस के नरेंद्र नगर अध्यक्ष के पद पर रह चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी मे सदस्य भी हैं। राजू राणा धमांदस्यूं पट्टी क्षेत्र तथा मुनि की रेती और ढालवाला क्षेत्र में लोकप्रिय युवा नेता के तौर पर जाने जाते हैं। इन क्षेत्रों में राणा का जनाधार बताया जाता है। कांग्रेस के टिकट के उम्मीदवार के तोैर पर राजू राणा कांग्रेस के तीसरे दावेदार हैं।

 

मैं जब भाजपा में शामिल हुआ था तो मुझे कहा गया था कि 2022 में मुझे पार्टी उम्मीदवार बनाएगी। अब क्या परिस्थितियां बनती है यह तो अभी नहीं कह सकता लेकिन मेरे क्षेत्र की जनता की मांग है कि मैं चुनाव लडूं। मैं पार्टी में नरेंद्र नगर सीट से अपनी दावेदारी जरूर करूंगा। चुनाव तो लड़ना ही है। मुझे पूरा यकीन है कि पार्टी ने जो वादा मेरे साथ किया था उसे निभाएगी।
ओम गोपाल रावत, भाजपा नेता

 

 

 

मैं नरेंद्र नगर क्षेत्र में कांग्रेस का पुराना सिपाही हूं। मैं पंचायत चुनाव, ब्लॉक स्तर और जिला स्तर सभी में जीत हासिल कर चुका हूं। कांग्रेस सरकार के समय हो या किसी भी सरकार के समय में हमेशा अपने क्षेत्र की जनता के साथ रहा हूं। पार्टी मेरे काम और निष्ठा को देखते हुए मुझे चुनाव में उम्मीदवार बनाएगी यह मुझे विश्वास है।
विरेंद्र कंडारी, कांग्रेस नेता

 

 

मैं दावेदार नहीं कैंडिडेट हूं। मैं 2017 का चुनाव भी कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुका हूं। मेरे वोटों की गिनती 4 हजार से शुरू होगी जबकि अन्य को तो जीरो से शुरू करना होगा। मैं ही कांग्रेस का सबसे बड़ा दावेदार हूं और मुझे यकीन हेै कि कांग्रेस फिर से मुझे नरेंद्र नगर सीट से टिकट देगी।
हिमांशु बिजल्वांण, कांग्रेस नेता

 

 

मैं नरेंद्र नगर नगर पालिका का अध्यक्ष रहा हूं। मेरो धमांदस्यू पट्टी क्षेत्र और नरेंद्र नगर, मुनि की रेती, ढालवाला में जनाधार है। जब कांग्रेस को छोड़कर बड़े-बड़े नेता भाजपा में चले गए और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की कमी इस क्षेत्र में हो गई तो हमने कांग्रेस का नहीं छोड़ा। आज कांग्रेस में मैंने कई युवाओं को जोड़ा है। मैं कांग्रेस पार्टी से नरेंद्र नगर सीट से दावेदार हूं। पार्टी टिकट देगी तो चुनाव लडूंगा और जीत हासिल करूंगा। क्षेत्र के मतदाता मेरे साथ है।
राजू राणा, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र नगर पालिका

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