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नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को हरिद्वार में किसान सम्मेलनों के दौरान जबर्दस्त झटका लगा है। शौचालयों के अभाव में किसानों को गंगा तटों पर ही मल त्याग करने को मजबूर होना पड़ा। शासन-प्रशासन को मालूम है कि हर साल हजारों किसान सम्मेलनों में भाग लेने आते हैं। इसके बावजूद वहां शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं है

हरिद्वार। गेहूं की फसल कटने के बाद लगभग सभी किसान संगठन हरिद्वार आने की तैयारी शुरू कर देते हैं। क्योंकि यहां वर्ष में एक बार उनके राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन होते हैं। पहले केवल एक किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नाम से सम्मेलन हुआ करता था। इन दिनों इनकी संख्या करीब दर्जनभर तक जा पहुंची है। सभी किसान संगठन धर्मनगरी में आकर अपने-अपने संगठन का शक्ति प्रदर्शन करते हैं। कई प्रदेशों जैसे पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि से आए किसान इन किसान सम्मेलनों का हिस्सा बनते हैं। इस बार भी किसान संगठनों ने हरिद्वार में आकर अपना सम्मेलन आयोजित किया। जिसमें हजारों किसानों ने हिस्सा लिया। आमतौर पर 3 दिन तक चलने वाले इन सम्मेलनों के दौरान किसानां को तीन दिन हरिद्वार में रहना ही होता है। जिसके लिए सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से इन संगठनों को अनुमति भी जारी की जाती है। दुखद पहलू यह है कि अनुमति के साथ स्थानीय प्रशासन की ओर से इन किसानों को कोई मूलभूत सुविधा नहीं दी जाती। इस बार किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी शौचालय की व्यवस्था ना होने से हुई। जिसका खामियाजा गंगा तटों को भुगतना पड़ा। आलम यह रहा कि हर तरफ गंदगी और बदबू फैल गई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान मिशन पर पलीता लगा।

वैसे तो करीब 7 किसान संगठनों ने इस बार हरिद्वार में अपना राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया पर इनमें से केवल 4 ने ही सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय से अनुमति प्राप्त की। जिनमें 5 जून, 6 जून, 8 जून और 12 जून को अनुमति दी गई। गुप्तचर विभाग की मानें तो आधा दर्जन किसान संगठनों ने अपने-अपने सम्मेलन आयोजित किए। उनकी रिपोर्ट के अनुसार इन सम्मेलनों में करीब सात हजार से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। यह किसान सम्मेलन अलकनंदा घाट और रोडीबेल वाला में हुए यानी गंगा तटों पर सात हजार से अधिक लोगों ने 3 दिन तक प्रवास किया, लेकिन कहानी तब शुरू होती है जब धरातल पर इस 7000 की आबादी के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। ना तो पीने का पानी ठीक से मुहैया कराया गया और ना ही इनके लिए कोई वैकल्पिक शौचालय की व्यवस्था कराई गई। नतीजा यह रहा कि यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के स्वच्छ भारत मिशन को सबसे बड़ा झटका लगा। क्योंकि इन लोगों ने 3 दिनों तक गंगा तट पर खुले में शौच किया। नगर निगम में सफाई व्यवस्था के लिए जिम्मेदार सहायक नगर आयुक्त संजय कुमार से जब इस बारे में बात की गई तो वह कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। वे गोलमोल जवाब देकर बचते नजर आए।

उन्होंने कहा कि अलकनंदा मैदान में पर्याप्त शौचालय हैं जबकि वहां कोई शौचालय ही नहीं बनाया गया। ना ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था ही की गई थी। जिस सार्वजनिक शौचालय का जिक्र कर उन्होंने बचने का प्रयास किया वो इस मैदान से करीब एक किलोमीटर दूर है। आखिर एक किलोमीटर दूर वो एक शौचालय भी हजारों लोगों के लिए कैसे पर्याप्त हो सकता है।

 

बात अपनी-अपनी

मेरे पास ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई है, जिसमें यह पता चल सके कि इन किसान सम्मेलनों में कितने लोगों ने हिस्सा लिया। जहां तक शौचालय की बात है तो सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम को निर्देशित किया गया था। कुछ किसान संगठनों ने खुद भी अस्थाई शौचालय बनाए थे।
मनीष सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट हरिद्वार

हरिद्वार में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में 1000 से ज्यादा किसानों ने हिस्सा लिया। सभी किसान तीन दिन तक अलकनंदा मैदान में रहे। जिला प्रशासन ने हमलोगों के लिए अच्छी पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की थी। पेयजल निगम पीने का पानी मुहैया कराया। परंतु हमारे किसानों के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं की गई। जिस कारण किसान खुले में शौच को विवश हुए। अगली बार मैं चाहूंगा कि हरिद्वार प्रशासन भी इलाहाबाद की तर्ज पर हम लोगों के लिए अस्थाई शौचालय की व्यवस्था कराएं।
आरडी सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन

हमने जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक सब को आग्रह किया कि हमें अधिवेशन के दौरान मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए पर केवल पानी को छोडकर हमें किसी तरह की कोई सुविधा नहीं उपलब्ध कराई गई।

ऋषिपाल अंबावता, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन (अ)

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