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Uttarakhand

मंत्री रेखा आर्य का नया जीरो टॉलरेंस सिद्धांत

देहरादून। प्रदेश की प्रशुपालन राज्य मंत्री श्रीमती रेखा आर्य ने मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति का एक नया सिद्धांत बनाया है। जिस अधिकारी पर भ्रष्टाचार और सरकारी धन की अनियमिताओं के गम्भीर आरोप थे उसी अधिकारी को सुगम और उसी क्षेत्र में स्थानांतरण कर दिया है जिस क्षेत्र में रहते हुए उस पर गम्भीर आरोप लगे थे। हैरानी इस बात की है कि उक्त अधिकारी के खिलाफ विभागीय स्तर पर आरोप लग चुके हैं ओैर उसके खिलाफ कार्यवाही के आदेश तक जारी हो चुके हैं। लेकिन आज तक कार्यवाही अमल में नहीं लाई जा सकी है। बावजूद इसके मंत्री जी के आदेश पर उसका स्थानांतरण कर दिया गया है। गौर करने वाली बात यह भी है कि राज्य सरकार ने कोरोना संकट को देखते हुए राज्य में तबादला सत्र शुन्य किया हुआ है।

बेहद चौंकाने वाले मामले को देखें तो सावन पंवार पशु चिकित्सा अधिकारी देवाल का जिला चमोली स्थानांतरण 4 जून 2020 को पशुपालन राज्य मंत्री श्रीमती रेखा आर्या के आदेश पर हरिद्वार करके सदर पशु चिकित्सालय में करने के आदेश जारी किए गए जबकि राज्य सरकार द्वारा यह वर्ष शून्य तबादला सत्र घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा सावन पंवार पर कई बड़े गम्भीर आरोप स्वयं विभाग द्वारा लगाए जा चुके हैं जिनमें पशु बीमा प्रीमियम में घपला करने, मुर्गी एवं अंडे की बिक्री के ढाई लाख रुपए सरकारी खजाने में जमा नहीं करने, बैंक ऋण की किस्त जमा नहीं करने और पशु चिकित्सालय देवाल से विभाग को बताए बगैर 34 दिनों तक गायब रहने के आरोप लगाए जा चुके हैं।

हैरानी की बात यह है कि सावन पंवार पर आरोप तब लगे थे जब वह हरिद्वार जिले में तैनात था और इन्हीं आरोपां के चलते उसको चमोली जिले के देवाल मे स्थानांतरण किया गया था। लेकिन पशुपालन राज्य मंत्री रेखा आर्य ने सावन पंवार को ही हरिद्वार के सदर पशु चिकित्सालय के लिए सर्वश्रेष्ठ अधिकारी समझ कर उसका स्थानांतण फिर से हरिद्वार में ही करने के आदेश जारी कर दिए। सूत्रों की मानें तो इस स्थानांतरण को बेहद गोपनीय रखा गया और लेकिन मामला एक गम्भीर आरोपां से घिरे अधिकारी का था जिसके चलते स्वयं विभाग के ही कुछ ईमानदार अधिकारियों द्वारा सूचना को लीक कर दिया गया।

सावन पंवार के खिलाफ कई आरोप हैं जिस में वर्ष 2018 में बहादराबाद के पॉल्ट्री फार्म में तैनाती के समय सैकड़ों मुर्गियां और हजारों अंडों की बिक्री के 2 लाख 14 हजार 140 रुपए सरकारी खजाने में जमा ही नहीं किए गए। इस मामले में विभागीय स्तर पर जमकर लिखा-पढ़ी भी हुई लेकिन सावन पंवार से विभाग सरकारी धन वसूल नहीं कर पाया। इसी बीच सावन पंवार का स्थानांतरण देवाल में हो गया तो विभाग द्वारा अंडों और मुर्गियों की बिक्री की धनराशी जमा करने के आदेश जारी किए लेकिन इस पर भी सावन पंवार ने एक भी रुपया सरकारी खजाने में जमा नहीं किए। नौ महीने के विभागीय लिखा-पढ़ी के बाद आखिरकार विभाग द्वारा 2 मई 2019 को सावन पंवार का वेतन रोक दिया गया। इससे कम से कम यह बात तो साफ हो जाती है कि सावन पंवार पर सरकारी खजाने का रुपया जमा नहीं करने का आरोप पूरी तरह से सत्य पाया गया और यह एक तरह से सरकारी धन का गबन करने जेसा ही मामला बनता है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि बेतन रोके जाने की कार्यवाही के बाद सावन पंवार द्वारा आधी धनराशी जमाकर दी है लेकिन शेष धनराशी के लिए अभी भी विभाग हाथ-पांव मार रहा है।

सावन पंवार पर हरिद्वार में पशुपालकों के पशुओं के बीमे के प्रीमियम में घपला करने के आरोप भी लग चुके हैं। 4 जुलाई 2018 को हरिद्वार जिलाधिकारी के जनता मिलन कार्यक्रम में ग्राम मिस्सरपुर दो पशुपालकों द्वार सावन पंवार के खिलाफ पशुओं के बीमा का प्रीमियम दिए जाने के बावजूद बीमा न करवाने का अरोप लगाया गया और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।

इसके अलावा देवाल पशु चिकित्सालय से विभाग को बताए बगैर 34 दिनों तक गायब रहने के भी आरोप लगे हैं जिस पर सचिव पशुपालन मिनाक्षी सुंदरम द्वार सावन पंवार के खिलाफ जांच करने के लिए उपनिदेशक अशोक कुमार जांच अधिकारी नियुक्त किया। लेकिन सावन पंवार का ही रसूख रहा है कि आज तक उसके खिलाफ कोई विभागीय कार्यवाही नहीं हो पाई है। यहां तक कि उस पर लगे आरोपों की भी जांच का कोई निर्णय सामने नहीं आ पाया है।

सावन पंवार के खिलाफ हरिद्वार के ही बहादराबाद के भारतीय स्टेट बैंक से ऋण लिए लेकिन इस ऋण को चुकाया नहीं। यहां तक कि अपना खाता तक दूसरे बैंक में स्थानांतरित कर लिया। बैंक की किश्त न चुका पाने पर बैंक पत्र-पर-पत्र जारी करता रहा लेकिन सावन पंवार ने बैंक की किश्त देने में कोई रूचि नहीं दिखाई तो हार कर बैंक ने पशुपालन विभाग को पत्र लिखा, जिस पर मुख्य पशु चिकितसा अधिकारी द्वारा सावन पंवार को ऋण जमा करने के लिए आदेश तक जारी किए। हैरानी इस बात की है कि एक वन क्लास ग्रेड स्तर के अधिकारी द्वारा बैंक ऋण को समय पर जमा न करने से लोन डिफाल्टर माना जा रहा है लेकिन आज तक बेंक अपना ऋण वसूल नहीं कर पाया।

अब सवाल सरकार की नीति पर उठ रहा है। साथ ही पशुपालन मंत्री की कार्यशैली पर भी उंगलियां उठ रही है। पूर्व में महिला सशक्तिकरण विभाग में आरोपित एक महिला अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही के नाम पर मंत्री रेखा आर्य ने उसका तबादला देहरादून से हरिद्वार कर दिया। लेकिन विभागीय नोकरशाहों ने उक्त अधिकारी को देहरादून में ही दूसरे विभाग में तैनात कर दिया। इस पर राज्य मंत्री रेखा आर्य खासी नाराज हुई ओैर अपने आदेशों का उलंघ्घन करने पर राज्य की नौकरशाही को निरंकुश होने का अरोप जड़ दिया। लेकिन भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोपों से घिरे डॉक्टर सावन पंवार का चमोली जिले से हरिद्वार जिले में स्थानांतरण करना वह भी जब सावन पंवार पर सभी आरोप हरिद्वार जिले में कार्यरत होते हुए लगे हैं। यह साफ बताता है कि सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति के नियम अलग-अलग हैं। अपने चहेते और खास अधिकारियों जिन पर गम्भीर आरोप लगे हों उन पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू नहीं होती। राज्य मंत्री रेखा आर्य भी इसी नीति पर काम करती हुई दिख रही है।

फेसबुक के माध्यम से इस मामले का खुलासा करने वाले वरिष्ठ पत्रकार अविकल थपलियाल कहते हैं ‘‘पहली बात तो यह कि कोरोना के संकट के चलते सरकार ने प्रदेश में शून्य तबादला सत्र घोषित किया हुआ है। लेकिन सरकार की मंत्री तबदला कर रही हैं, वह भी ऐसे अधिकारी का तबादला किया गया है जिस पर भ्रष्टाचार के बड़े गम्भीर आरोप लगे हुए हैं। उसकी जॉच चल रही है।’’

 

पशुपालन सचिव ने जांच के लिए अधिकारी को तैनात किया हुआ है बावजूद इसके अधिकारी को उसी क्षेत्र में पुनः तैनाती देना साफ करता है कि राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के मायने अलग-अलग है। अगर किसी अधिकारी का स्थानांतरण करना बेहद जरूरी था तो कई और अन्य अधिकारी है। एक भ्रष्ट अधिकारी को एक तरह से फायदा पहुंचाने के लिए ही ऐसा काम किया जा रहा है और पशुपालन राज्य मंत्री इसमें पूरी तरह से संलिप्त दिखाई दे रही है।

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