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Uttarakhand

कॉमरेड शमशेर की स्मृति में सभा

  • भारतीय पाण्डेय

उत्तराखण्ड के जन आंदोलनकारियों के अगुवा रहे डॉ शमशेर सिंह बिष्ट की पुण्यतिथि के अवसर पर अल्मोड़ा में 23 सितंबर को एक गोष्ठी एवं वेबिनार का आयोजन किया गया। गौरतलब है कि अविभाजित उत्तर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में आपातकाल के दौरान से ही डॉ बिष्ट का बतौर आंदोलनकारी खासा योगदान रहा। अल्मोड़ा महाविद्यालय में अर्थशास्त्र के अध्यापक पीसी पाण्डेय की राजनीतिक विचारधारा का डॉ बिष्ट पर खासा प्रभाव रहा। आपातकाल के दौरान पीसी पाण्डेय ने निरंकुश सत्ता का विरोध करने के लिए पर्वतीय युवा मोर्चा डॉ बिष्ट की अगुवाई में गठित किया था। कालांतर में इस मोर्चे को विस्तार देने की नीयत से सुंदरलाल बहुगुणा एवं चंडी प्रसाद भट्ट से सलाह-मशविरा कर इसका नाम उत्तराखण्ड संघर्ष वाहिनी रखा गया। डॉ बिष्ट इस संगठन की लंबे समय तक अगुवाई करते रहे। ऐसे जननायक की तीसरी पुण्यतिथि पर अल्मोड़ा में आयोजित स्मृति सभा का संचालन पीसी तिवारी एवं दयाकृष्ण कांडपाल ने संयुक्त रूप से किया। उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी कॉमरेड बिष्ट के बेहद करीबी साथी थे। पीसी तिवारी लंबे समय तक उत्तराखण्ड संघर्ष वाहिनी के अध्यक्ष रहे थे।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए उत्तराखण्ड क्रांति दल के अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने कहा कि उक्रांद उत्तराखण्ड के सवालों पर संघर्ष कर रहा है। जिस प्रकार बंगाल मंे केंद्र की सत्ताधारी पार्टी एक क्षेत्रीय पार्टी के आगे धराशायी हो गई ऐसी ही जनचेतना का उभार उत्तराखण्ड में भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि इन बीस सालों में उत्तराखण्ड में केवल ठगी हो रही है। पर्वतीय राज्यों में केवल उत्तराखण्ड में ही जमीनों की लूट चल रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां निर्णायक भूमिका में नहीं हैं। उक्रांद क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की एकता की पहल का स्वागत करता है। पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि राज्य बने 21 साल हो गए, पर अभी तक परिसंपत्तियों पर उत्तराखण्ड को हक-हकूक नहीं मिले।

उपपा अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि त्रिवेंद्र सरकार के भू कानूनों ने उत्तराखण्ड में जमीन की लूट-खसोट को बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में संघर्ष एवं समाधान के मुद्दों पर क्षेत्रीय दलों की एकता संभव है।
इस अवसर पर डॉ हयात रावत ने कुमाऊंनी लोक संस्कृति एवं कुमाऊंनी भाषा पर क्षेत्रीय दलों से कार्य करने की अपील की। सभा में चंद्र शेखर कापड़ी ने भी विचार व्यक्त किए। इस आयोजन के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर एक वेबिनार आयोजित किया गया जिसका विषय था डॉ शमशेर सिंह बिष्ट का जल, जंगल, जमीन का संघर्ष और वर्तमान परिदृश्य में उसकी महत्ता। मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली से चारू तिवारी ने अपने संबोधन में भू कानून का इतिहास विस्तृत रूप से वेबिनार में रखा।

उन्होंने 1923 बंदोबस्त, 180 साल से लेकर 2020 तक सभी नियमों और कानून की जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान में उत्तराखण्ड के 5400000 हेक्टेयर भूमि क्षेत्र में 34 लाख हेक्टेयर वन भूमि है, 100000 हेक्टेयर बंजर भूमि 750000 आमजन के पास है। वेबिनार में तरुण जोशी ने विस्तार से भूमि कानून के व्यावहारिक जटिलताओं को सरलता से सामने रखा। उन्होंने कहा कि पूरे उत्तराखण्ड में 2 जिलों हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर को मिलाकर 50 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि है जबकि उत्तरकाशी क्षेत्र में 3.5 प्रतिशत और अन्य जिलों को मिलाकर 4 प्रतिशत ही अधिनियम 2006 से लेकर 2020 तक के समस्याओं और निदान पर चर्चा की।

वेबिनार में तीसरे वक्ता के रूप में डॉ रवि चोपड़ा, पूर्व निदेशक लोक विज्ञान संस्थान देहरादून ने अपने संबोधन में डॉ शमशेर सिंह बिष्ट के साथ किए कार्यों को सामने रखते हुए कहा कि कैसे डॉ बिष्ट के साथ मिलकर उन्होंने लघु विद्युत परियोजनाओं का खाका तैयार किया जिससे कि आमजन को रोजगार भी मिल पाता और साथ ही यहां के संसाधनों पर यहां के लोगों का ही हक होता। चारधाम योजना के बारे में बोलते हुए डॉ चोपड़ा ने कहा यह विकास नहीं विनाश का रास्ता नजर आता है।

उच्चतम न्यायालय का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र में रोड की चौड़ाई अधिकतम 7 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। कार्यक्रम में एक जन आंदोलन को तैयार कर पहाड़ को बचाने की भावी रणनीति बनाने पर बल दिया गया। कार्यक्रम का संचालन अजय मित्र सिंह बिष्ट ने किया। वेबिनार में डॉ शेखर पाठक, विनोद बडोनी, स्वप्निल श्रीवास्तव, चंदन घुघतियाल, राजीव लोचन साह, दयाकृष्ण कांडपाल, अजय सिंह मेहता आदि लोगों ने भाग लिया। यही नहीं, इस अवसर पर युवा संवाद की ओर से कुणाल तिवारी, भास्कर भौर्याल, उदय किरौला, राम सिंह, बसंत खनी, पूरन चंद्र तिवारी जगत रौतेला ने सामूहिक रूप से जनगीत गाकर डॉ शमशेर सिंह बिष्ट को अपनी श्रद्धांजलि दी। अंत में अजय मित्र, पूरन चंद्र तिवारी और श्रीमती रेवती बिष्ट ने सभी का आभार और धन्यवाद जताया।

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