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Uttarakhand

ट्रेवल्स पर माफिया की टेढ़ी नजर

ट्रेवल्स पर माफिया की टेढ़ी नजर

पिछले दिनों हरिद्वार में शिवमूर्ति जस्सााम रोड स्थित त्रिमूर्ति ट्रेवल के संचालक राकेश गोयल और मुकेश गोयल पार्किंग में अपने साथियों के साथ बैठे हुए थे। इसी बीच यूपी के कुख्यात बदमाश ऋषिपाल राणा के नाम पर हरिद्वार के हिस्ट्रीशीटर मोनू राणा ने इन ट्रेवल्स कारोबारी से रंगदारी मांगी। वह हर बस में प्रति सीट 20 रुपए हिस्सेदारी की बात करने लगा। वहां पर जितने भी ट्रेवल्स व्यवसायी बैठे थे, सभी से मोनू राणा ने रंगदारी मांगनी शुुरू की। ऐसा न करने पर जान से मारने की धमकी भी दे डाली।

इससे पहले भी चार मार्च को मोनू राणा ने अपने कुछ सार्थियों के साथ मिलकर त्रिमूर्ति ट्रेवल्स के ऑफिस में घुसकर मुकेश गोयल की ऋषिपाल राणा से बात कराकर धमकी दिलवाई थी। 20 रुपए प्रति सीट के हिसाब से देने के साथ ही हरिद्वार से मसूरी जाने वाली बसों में हिस्सेदारी की बात भी कर डाली थी। मोनू राणा ने तमंचा निकाला और मुकेश गोयल की कनपटि पर लगा दिया। उस वक्त मुकेश गोयल इतना डर गया कि उसने न तो पुलिस से शिकायत की और न ही किसी से बात की।

बाद में बात आग की तरह चारों तरफ फैल गई। दोबारा जब आठ मार्च को फिर धमकी दी गई तब जाकर उसने हिम्मत करके पुलिस में तहरीर दी। हरिद्वार में इतना सब कुछ पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे चलता रहा है। आखिर क्या कारण रहा कि इतना सब होने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होती? क्यों ट्रेवल कारोबारी रंगदारी मांगने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करवाने से कतराते हैं? आम चर्चा तो यह है कि टैªवल व्यवसायी भी अपने आप में सही नहीं हैं। कुछ व्यवसायी सिंचाई विभाग की जमीन पर अपना कारोबार बेखौफ करते रहते हैं।

कहीं से भी यह लोग बसें भरवाने का और सवारियों को उठाने का काम करते हैं। आरटीओ और प्रशासन मौन क्यों रहता है, इस बारे में आम लोगों की दो टूक राय है कि 1980 के दशक से ही यहां टेªवल व्यवसाय भी एक नये माफिया के तौर पर चलने लगा था। ट्रेवल्स माफिया राजनीति की छत्रछाया में खूब फला-फूला। माफिया ने इसी दशक में बिरला घाट पर सबसे पहले ट्रेवल्स खोला। सुशील शर्मा नाम का व्यक्ति इसका संचालन करता था। इसी दौर में सबसे पहले रोडी बेल वाला में स्थानीय बदमाशों ने ट्रेवल्स व्यवासायी की गोली मारकर हत्या कर दी। उसी समय गणेश यात्रा की भी माया देवी प्रांगण में शुरुआत हुई। इसी दौर में बाहरी बदमाशों का भी हस्तक्षेप ट्रेवल व्यवसाय में होने लगा।

इनका वर्चस्व इतना बढ़ गया कि उन दिनों दिल्ली राजस्थान की बसें भरने का काम शुरू हुआ। इसी बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यातों की नजर इस व्यवसाय पर पड़ी। साथ ही दिल्ली के एक बड़े ट्रेवल्स व्यवसायी पंडित केवल कृष्ण ने इस काम को अपने हाथों में ले लिया और स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर दिल्ली की बसें भरवाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे इस काम में मोटा मुनाफा देख अंडरवल्र्ड की नजर इस व्यवसाय पर पड़ने लगी। काम को बढ़ता देख पंडित केवल कृष्ण ने अपने प्रतिनिधि के रूप में श्रवण नाथ नगर में रहने वाले प्रकाश पंजवानी को हरिद्वार की बागडोर सौंप दी।

भाटिया भवन के आस-पास कुछ युवकों के साथ मिलकर यह काम जोरों पर चलने लगा। उसी बीच इस व्यवसाय में कुख्यात घनश्याम भगत की गोली माकर हत्या कर दी गई। घनश्याम भगत की हत्या के बाद उसके साथियों ने बदला लेने के लिए लखनऊ के कुख्यात बदमाश बबलू श्रीवास्तव के साथ मिलकर नरेश ठाकुर दरोगा की अपर रोड स्थित विशाल ट्रेवल्स में गोली माकर हत्या कर दी। घनश्याम भगत की हत्या के बाद गिरीश बहुगुणा का इस ट्रेवल्स व्यवसाय में एकतरफा राज हो गया। 90 के दशक में बहुगुणा का वर्चस्व पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में हो गया।

उसी समय हरिद्वार में ट्रेवल्स की बाढ़ सी आ गई। इसी क्रम में एक ट्रेवल्स व्यवायी हरवीर सिंह को उनके घर के बाहर ही गोलियों से भून डाला गया। इसी क्रम में ट्रेवल्स व्यवसाई कृष्ण मुरारी पर भी हत्या के प्रयास से गोलियां मारी गई, परंतु वह इतनी गोलियां खाने के बाद भी बच गए। तब से राकेश गोयल त्रिमूति ट्रेवल्स ने इस व्यवसाय की बागडोर संभाली और आज की तारीख में सबसे मोटे कारोबारी, वही माने जाते हैं।

हरिद्वार का इतिहास रहा है कि ट्रेवल्स व्यवसाय में कई हत्याएं हो चुकी हैं। कई कुख्यात हिस्ट्रीशीटरों का हाथ इसमें रहा है। आज मुकेश गोयल के साथ जो घटना हुुई है, यह रंगदारी का मामला पहली बार नहीं हुआ है। हरिद्वार में पहले भी कई मामले ऐसे हुए हैं। आखिरकार मोनू राणा और उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब यह देखना है कि पुलिस औपचारिकता के लिए पूछताछ करेगी या कोई ठोस कार्यवाही करेगी। प्रशासन भी क्या कार्यवाही करता है या फिर हमेशा की तरह मौन साध लेता है?

बात अपनी-अपनी

ट्रेवल्स की तरफ से यह पहला मुकदमा आया है। दोषी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया है। आगे कार्यवाही होगी। –परवीन सिंह कोश्यारी, कोतवाल, हरिद्वार कोतवाली

इस तरह का मामला मेरे संज्ञान में आया। तभी हमने इस पर सख्त कार्यवाही की है। रंगदारी का मामला आगे भी अगर कोई आएगा तो उस पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी। डी सेंथिल अबुदई, पुलिस कप्तान, हरिद्वार

मैं फोन पर बात नहीं करता ऑफिस में आइए बात करते हैं। ऐसा हरिद्वार में पहली बार तो हुआ नहीं, कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। राकेश गोयल, यात्रा ट्रेवल्स संचालक

-बबीता भाटिया

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